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बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए पैरेंट्स छोड़ें इन 10 बुरी आदतों को (10 Bad Habits That Parents Must Quit For Their Kids)

बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए जरुरी है कि पैरेंट्स होने के नाते हम अपने बच्चों की आदतों को समझें और उनकी गतिविधियों पर नज़र रखें. इसका कारण है कि बच्चे अपने पैरेंट्स की सभी अच्छी-बुरी आदतों को ग्रहण करते हैं. कई बार बच्चे पैरेंट्स की अच्छी आदतों को तो नहीं, बल्कि बुरी आदतों को जरुर फॉलो करते हैं, जिसका असर आगे चलकर उनके जीवन पर पड़ता है. आज हम पैरेंट्स की ऐसी कुछ बुरी आदतों के बारे में बता रहें हैं, जिन्हें बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए छोड़ना आवश्यक हैं-

बच्चों के विकास के लिए आवश्यक है कि उन्हें एक्सपोज़र मिले, ताकि उन्हें अपनी योग्यता और कौशल दिखाने का मौका मिले. बच्चे अपने आसपास की सभी चीज़ों को ग्रहण करते हैं. यहां तक कि पैरेंट्स की आदतों को भी. इसलिए पैरेंट्स को अपनी उन आदतों के बारे में बहुत सावधान रहने की आवश्यकता है. जिन्हें वे अपने दैनिक जीवन में शामिल करते हैं. अत: पैरेंट्स को अपनी कुछ ऐसी आदतें छोड़ देनी चाहिए, जो बच्चों की परवरिश में रुकावट बनें.

  1. टेलीविज़न देखने का समय 
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पैरेंट्स हों या बच्चे- सभी के लिए टीवी टाइम एक निश्चित समय सीमा में होना चाहिए. अगर पैरेंट्स ही कई-कई घंटों तक स्क्रीन के सामने बैठे रहेंगे, तो बच्चे भी ऐसा ही करेंगे. बच्चे को मनोरंजन का एकमात्र जरिया टीवी ही नज़र आता है, जिसके कारण उन्हें इलेक्ट्रॉनिक गैज़ेट और टेक्नोलॉजी की  बुरी लत लग जाती है. अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि बच्चों में टेक्नोलॉजी की लत बड़ी तेज़ी से बढ़ रही है. इसका बुरा असर बच्चों के बौद्धिक विकास पर पड़ सकता है और उनमें पढ़ाई और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं. इसलिए बच्चे के लिए स्क्रीन टाइम तय करने से पहले पैरेंट्स अपने लिए भी टीवी की लिमिट निर्धारित करें.

2. ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाना

साइकोलोजिस्ट के अनुसार, ज़्यादातर पैरेंट्स में यह बुरी आदत होती है कि हमेशा बच्चों पर चिल्लाते रहते हैं. दरअसल, बच्चों पर छोटी-छोटी बात पर चिल्लाना बिलकुल सही नहीं है. पैरेंट्स भूल जाते हैं कि उनके चिल्लाने की बुरी आदत का असर बच्चों पर भी पड़ता है और धीरे-धीरे उनमें भी यही आदत पनपने लगती है. कुछ बच्चे तो एंग्जायटी और डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं. इतना ही नहीं पैरेंट्स की इस आदत से पैरेंट्स-बच्चों के रिश्तों कड़वाहट आने लगती है. बेहतर होगा कि पैरेंट्स अपने पर नियंत्रण रखें. छोटी गलतियों पर बच्चे पर चिल्लाने की बजाय उसे प्यार से समझाएं.

3. तुलना करना

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चाइल्डहुड डेवलपमेंट स्पेशलिस्ट का मानना है कि दूसरे बच्चों के साथ अपने बच्चे की तुलना करना- पैरेंट्स की सबसे बुरी आदत है. सबसे पहले तो पैरेंट्स अपनी इस गंदी आदत को छोड़ें और कभी भी दूसरे बच्चों के साथ अपने बच्चे की तुलना करने की कोशिश न करें. इसका बुरा असर बच्चों के विकास और वृद्धि पर पड़ता है. पैरेंट्स के ऐसे व्यवहार से बच्चे का आत्मविश्वास डगमगाने लगता है और वो खुद को दूसरों से कम आंकने लगता है. अच्छा तो यही होगा कि पैरेंट्स बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें. उनकी खूबियों पर ध्यान केंद्रित करें और उन्हें सराहें.

4. मारपीट

अनेक चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, हिंसा का कोई भी रूप यहां तक ​​कि सबसे छोटा थप्पड़, खतरनाक तरीकों से दर्दनाक हो सकता है, विशेष रूप से बच्चों में. भारतीय समाज में पैरेंट्स अक्सर इस तरह की गलती करते है. छोटी-छोटी बातों पर पैरेंट्स बच्चों पर हाथ उठाते हैं, उनके साथ मारपीट करते हैं. पैरेंट्स का बच्चों को समझाने का यह तरीक़ा बिलकुल सही नहीं है. बार-बार उन पर हाथ उठाने से बच्चे विद्रोही बन जाते हैं.

5. कम सलाह और ज़्यादा मोटिवेशन

अधिकतर पैरेंट्स की आदत होती है कि वे बच्चों को हमेशा यही बताते और सिखाते रहते हैं कि उसे क्या करना है और क्या नहीं करना है? बाल मनोवैज्ञानिकों  के अनुसार बच्चों को सलाह जरूर दें, लेकिन एक सीमा तक. आपकी इच्छाओं को उन पर थोपें नहीं. उन्हें काम करने के लिए प्रोत्साहित. बच्चे प्रोत्साहित तभी होंगे, जब पैरेंट्स ख़ुद पहला क़दम उठाएंगे.

6. गॉसिप करना

कुछ पैरेंट्स को गॉसिप करने की बुरी आदत होती है. उनकी यही आदत आगे चलकर बच्चों में पनपने है और बच्चे भी अपने दोस्तों के साथ गॉसिप करना शुरू कर देते हैं जो कि उनकी उम्र के हिसाब से गलत है.

7. बॉडी शेमिंग

बच्चों में डिप्रेशन, एंग्जायटी और आत्मविश्वास की कमी होने का एक कारण बॉडी शेमिंग भी है. बॉडी शेमिंग यानी बच्चे का बहुत अधिक दुबला-पतला होना या फिर बहुत अधिक मोटा होना. यदि आपका बच्चा भी बहुत अधिक दुबला या मोटा है, तो उसे इसके लिए शर्मिंदा न करें. पैरेंट्स बच्चे की खामियों को इंगित करने की बजाय उनके सकारात्मक गुणों पर जोर दें.

   8. अपमानित करना

बच्चों के विकास के लिए जैसे प्रोत्साहित करना जरुरी है, वैसे ही उनको अपशब्द बोलना, उनका अपमान करना बच्चों के विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, बच्चों को डिग्रडिंग यानी अपमानित करना शारीरिक शोषण के तहत नहीं आता, लेकिन इसे मानसिक और भावनात्मक शोषण के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और यह बच्चे के मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक दोनों तरीक़े से बच्चे के जीवन पर बुरा असर डालता है. इसलिए जरुरी है कि बच्चे को सामाजिक रूप से दूसरे लोगों से जुड़ने के लिए प्रेरित करें, जिससे उनमें आत्मविश्वास पनपे.

9. धूम्रपान

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Photo Credit: pexels.com

 कुछ पैरेंट्स की आदत होती कि वे बच्चों के सामने धूम्रपान करने करने से ज़रा भी परहेज़ नहीं करते. सेकंड हैंड स्मोकिंग से बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है. छोटे बच्चों के फेफड़े अभी पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं और धूम्रपान के कारण अविकसित फेफड़े कमजोर और बीमारियों का कारण बनते हैं. इसके अलावा जैसे-जैसे बच्चे होने लगते हैं, तो चोरी छिपे वे भी पैरेंट्स की इस आदत को फॉलो करने लगते हैं.

10.शराब

 पैरेंट्स बच्चों के लिए रोल मॉडल होते हैं. इसलिए जरूरी है कि पैरेंट्स उनके सामने शराब पीने से बचें. कुछ पैरेंट्स तो अल्कोहल का सेवन करने के बाद बच्चों के अश्लील और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं. घर में झगड़ा करते हैं, जिसका बुरा असर बच्चे में मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है.

पैरेंट्स बच्चों के रोल मॉडल होते है. है. हर बच्चा बड़ा होकर अपने माता-पिता के जैसा ही बनना चाहता है. यही वजह है कि बच्चे पैरेंट्स की हर अच्छी-बुरी आदत की नकल करते हैं. बेहतर होगा कि बच्चों की परवरिश करते समय पेरेंट्स अपनी बुरी आदतों को सुधारें. अगर जरुरत पड़ें, तो मनोवैज्ञानिक से सलाह-मशविरा भी करें.

– देवांश शर्मा

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