फाइनेंशियल प्लानिंग में बचें इन 4 ग़लतफ़हमियों से (Avoid These 4 Misconceptions in Financial Planning)


फाइनेंशियल प्लानिंग के बारे में अक्सर लोगों को बहुत ग़लतफ़हमी रहती है. कुछ लोगों को लगता है कि म्युुचुअल फंड में पैसा लगाना बहुत जोखिम का काम है. कुछ को लगता है कि रिटायरमेंट में अभी बहुत समय है, धीरे-धीरे प्लानिंग कर लेंगे. जबकि कुछ लोगों को लगता है कि कंपनी द्वारा मिली मेडिकल पॉलिसी ही उनके लिए पर्याप्त है. ये कुछ ऐसी ग़लतफ़हमियां हैं, जिनका ख़ामियाजा उन्हें भविष्य में भुगतना पड़ता है. कहीं आप भी ऐसी ही ग़लतफ़हमियों का शिकार तो नहीं?


ग़लतफ़हमी नं. 1: निवेश के लिए अभी देर नहीं हुई है.
वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि आप जैसे ही कमाना शुरू करें, उसी समय से सुरक्षित भविष्य के लिए निवेश करना शुरू कर दें, ताकि रिटायरमेंट के समय आपको किसी तरह की आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े. समय के साथ बच्चों की पढ़ाई, करियर और शादी, गंभीर बीमारी, घर-गाड़ी ख़रीदने जैसी पारिवारिक ज़िम्मेदारियां बढ़ती जाती हैं, जिसके कारण उतना निवेश कर पाना संभव नहीं होता, जितना आप चाहते हैं. हालांकि फाइनेंशियल प्लानिंग करने का कोई सही या ग़लत समय नहीं होता है. आप इसे अपने समय, उद्देश्यों व बजट के अनुसार कभी भी शुरू कर सकते हैं.


ग़लतफ़हमी नं. 2: मुझे म्युचुअल फंड में निवेश करने की ज़रूरत नहीं है.
ज़्यादातर लोग म्युचुअल फंड में निवेश करने से घबराते हैं. उन्हें इस बात की चिंता सताती है कि म्युचुअल फंड में लगाई हुई रक़म कहीं डूब न जाए, जबकि ऐसा हमेशा नहीं होता. म्युचुअल फंड मार्केट वैल्यू पर निर्भर करता है. मार्केट के
अनुसार प्रॉफिट-लॉस तय होता है, लेकिन म्युचुअल फंड में कुछ शेयर ऐसे होते हैं, जिनमें बाज़ार में गिरावट होने के बाद भी सेफ्टी की गारंटी होती है. आप चाहें तो उनमें भी निवेश कर सकते हैं. इन सेफ फंड्स में निवेश करने से पहले मार्केट एक्सपर्ट्स से पूरी जानकारी प्राप्त कर लें.

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ग़लतफ़हमी नं. 3: मुझे लगता है कि स़िर्फ बैंक एफडी ही सुरक्षित निवेश है.
यह केवल आपका भ्रम है कि निवेश करने के लिए स़िर्फ बैंक एफडी ही सुरक्षित विकल्प है. बैंक एफडी के अलावा बहुत-से ऐसे विकल्प हैं, जिनमें बैंक एफडी से ज़्यादा रिटर्न मिलता है, इसलिए बैंक एफडी की बजाय उन विकल्पों में निवेश कर सकते हैं. ये विकल्प हैं- सरकारी कंपनियों द्वारा जारी किए टैक्स फ्री बॉन्ड, नेशनल पेंशन स्कीम, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट्स आदि. इनके अलावा म्युचुअल फंड्स में भी अनेक विकल्प मौजूद हैं, जो बैंक एफडी की तरह सुरक्षित होते हैं. आप उनमें भी निवेश कर सकते हैं.


ग़लतफ़हमी नं. 4: मेरे लिए कंपनी की ओर से मिला हेल्थ कवर ही काफ़ी है.
प्राइवेट सेक्टर में अधिकतर कर्मचारियों को कंपनी की ओर से मेडिकल इंश्योरेंस कवर मिलता है. इस तरह की पॉलिसी काम की होती है, लेकिन इसमें बहुत-सी चीज़ें कवर नहीं होतीं. जो लोग स़िर्फ कंपनी द्वारा मिले हेल्थ कवर के
भरोसे रहते हैं, वे भविष्य के लिए अलग से हेल्थ पॉलिसी नहीं लेते. इसके अलावा कंपनी द्वारा मिले मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी का फ़ायदा कर्मचारी को तभी तक मिलता है, जब तक कि कर्मचारी कंपनी से जुड़ा रहता है. उदाहरण के लिए- अगर किसी कर्मचारी ने पहलेवाली नौकरी छोड़ दी और दूसरी नौकरी मिलने में अभी समय है, तो आकस्मिक दुर्घटना होने पर उसे पहलेवाली कंपनी से कोई कवर नहीं मिलेगा. दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनियां केवल कर्मचारी का इंश्योरेंस कवर करती हैं, उसके पूरे परिवार का नहीं. इसलिए ज़रूरी है कि कंपनी द्वारा मिले हेल्थ कवर के अलावा आप अपनी व्यक्तिगत पॉसिली भी लें, जिसमें आपके साथ-साथ आपके परिवार का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहे.और भी पढ़ें: बिज़नेस वुमन्स के लिए 2 विशेष सरकारी योजनाएं

– पूनम नागेंद्र शर्मा

 

Poonam Sharma :
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