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बेटा नहीं, बेटी कहो

क्या मेरा शृंगार मेरी कमज़ोरी है? हाथों की चूड़ियां ज़ंजीर हैं जैसे कोई, पैरों की पायल बेड़ियां हो ...

Child labor

बाल मज़दूरी… कब तक और क्यों? (Child labor … how long and why?)

  अक्सर देखा है उन मासूम आंखों में सपनों को मरते हुए… रोज़ाना, हर दिन, हर पल… एक ख़्वाब को ...

एसिड अटैक्स: कब और कैसे रुकेंगी वारदातें?

…वो ख़ामोशी ओढ़कर एक कोने में दुबक गई है… उसके रिसते दर्द को न जाने कितने कानों ने अनसुना ...

रोड सेफ्टी रूल्स

चाहे पैदल यात्री हों या वाहन चालक, सड़क संबंधी नियमों का पालन सभी के लिए बेहद ज़रूरी है, ताकि ...

अंगदान से दें दूसरों को जीवनदान

ख़ुद में ही सिमटे, ख़ुद में ही उलझे, ख़ुद से ही जूझते, ख़ुद को ही कोसते… यूं ही ज़िंदगी बिता देते हैं ...

महंगी दवाओं का बेहतर विकल्प- जेनेरिक मेडिसिन्स

जिस देश में किसी की जान और स्वास्थ्य की क़ीमत उसकी आर्थिक स्थिति पर निर्भर करती हो, उसके विकास ...

संकोची होते मर्द, बिंदास होतीं महिलाएं

कुछ रस्में अब न निभाएं तो अच्छा है, थोड़े-से अपने रूल्स बनाएं तो अच्छा है… कभी बचपने में खो जाएं ...

केमिकल से पके फल-सब्ज़ियों से हो सकती हैं गंभीर बीमारियां

  पोषण और स्वास्थ्य की बात आते ही हमारा ध्यान जाता है ताज़ा, रंग-बिरंगे, स्वादिष्ट फलों और ...

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