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बच्चों में बढ़ रहा है कोरोना का रिस्क, क्या करें जब बच्चे में दिखाई दें कोरोना के ये लक्षण (Coronavirus: Now Kids Are At High Risk, What To Do If Your Child Tests Positive)

भारत समेत कई देशों में कोरोना फिर से रफ्तार पकड़ने लगा है और हालात खराब ही होते जा रहे हैं. पिछली बार जहां इस महामारी ने बच्चों को ज़्यादा चपेट में नहीं लिया था, वहीं इसकी दूसरी वेव बच्चों के लिए अधिक खतरनाक साबित हो सकती है. हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले एक महीने में पांच राज्यों में 79,688 बच्चे कोरोना संक्रमित हुए हैं. संक्रमित होनेवाले अधिकतर बच्चों की उम्र 2-16 साल है. इसलिए ज़रूरी है कि बच्चों के लिए भी तमाम एहतियात बरते जाएं. किसी भी तरह की लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है.


क्यों बच्चों में बढ़ रहा है संक्रमण?

Coronavirus

हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि – बच्चों में कमजोर इम्यूनिटी, बढ़ती लापरवाही संक्रमण बढ़ने की वजह हो सकती है.
– इसके अलावा प्ले एरिया में खेलना, ग्रुप्स में रहना, ट्रैवलिंग में बढ़ा एक्सपोजर भी कारण है. – हाइजीन व मास्क को लेकर लापरवाही भी इसकी बड़ी वजह है.

बच्चे में कोरोना के लक्षण

Coronavirus on Children


ज्यादातर बच्चों में बड़ों के मुकाबले कोरोना के हल्के लक्षण देखे गए हैं. इसके अलावा बच्चों में बड़ों से अलग लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं. अगर आपको भी बच्चों में नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण नजर आए, तो सतर्क हो जाएं और तुरंत मेडिकल हेल्प लें.


– सर्दी खांसी

– बुखार या ठंड लगना

– स्किन पर रैशेज होना

– आंखें लाल होना

– शरीर या जोड़ों में दर्द

– उल्टी जैसा महसूस होना, पेट में ऐंठन

– फंटे होठ, चेहरे और होठों पर का नीला पड़ना

– चिड़चिड़ापन

– थकान, सुस्ती और अधिक नींद आना

– सांस फूलना या सांस लेने में दिक्कत

– गले में खराश

– स्वाद या गंध न आना



क्या करें जब बच्चा हो जाए कोरोना पॉजिटिव?

Coronavirus on Children


बड़ों की तुलना में बच्चे जल्दी रिकवर हो रहे हैं और उन्हें सीरियस प्रॉब्लम होने के रिस्क भी कम हैं. इसलिए पॉजिटिव होने पर उन्हें हॉस्पिटल लेकर भागने की ज़रूरत नहीं है. घर पर ही उनकी अच्छी देखभाल की जा सकती है.
– बच्चों को आइसोलेशन में रखें.
– उनकी देखभाल करनेवाले पैरेंट्स भी सभी जरूरी एहतियात बरतें.
– मास्क पहनें. बार बार साबुन और पानी से अच्छी तरह हाथ धोएं.
– बच्चा जिस कमरे में है, उसे सैनेटाइज़ करते रहें.
– अगर बच्चा इतना बड़ा है कि मास्क पहन सकता है, तो उसे भी मास्क पहनाकर रखें.
– डॉक्टर के संपर्क में बने रहें.
– बुखार पांच दिन से ज़्यादा रहे या उसे सांस लेने में दिक्कत हो तो तुरन्त डॉक्टर के पास ले जाएं.
– ज़्यादातर बच्चे 2-3 दिन के बुखार के बाद ठीक हो रहे हैं, इसलिए ज़्यादा पैनिक होने की ज़रूरत नहीं है.
– ध्यान रखें कि कोविड का संक्रमण बच्चों के ज़रिए भी फैल सकता है, इसलिए किसी तरह की लापरवाही न बरतें.

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