भारतीय युवाओं में तेज़ी से पैर पसार रहा है डिप्रेशन, समझें इसकी गंभीरता, क्योंकि यह जानलेवा भी हो सकता है! (Health Alert: Shocking! India leads The World In Teenage Depression)

क्या है डिप्रेशन- समझें इसकी गंभीरता को, क्योंकि यह जानलेवा भी हो सकता है! डिप्रेशन भले ही बेहद सामान्य सा शब्द लगता हो, क्योंकि इसे हम लगभग रोज़ाना ही सुनते कहते आए हैं और शायद यहीवजह है कि हम इसे बहुत हल्के में लेते हैं. लेकिन सावधान, डिप्रेशन एक गंभीर मानसिक समस्या है जो जानलेवा भी साबित हो सकती है.  ना जाने कितने सेलिब्रिटीज़ इसको लेकर बात भी कर चुके हैं और कुछ ने तो इसी के चलते अपना जीवन तक समाप्त करलिया. डिप्रेशन की गंभीरता को समझने के लिए यह सबसे पहले डिप्रेशन को समझना होगा. डिप्रेशन क्या है? यह एक मानसिक समस्या है, जिसमें व्यक्ति धीरे-धीरे निराशा की तरफ़ बढ़ने लगता है. रोज़मर्रा के क्रिया कलापों मेंउसकी दिलचस्पी कम होने लगती है. वो खुद में ही सिमटता जाता है, किसी से मिलने जुलने और यहां तक कि बात तककरने में उसे कोई रुचि नहीं रहती. खाने पीने व सोने की आदतों में बदलाव आने लगता है. अपने बारे में नकारात्मक ख़्यालआने लगते हैं. ऊर्जा कम हो जाती है. यदि समय रहते डिप्रेशन का इलाज नहीं किया गया तो यह व्यक्ति को आत्महत्याजैसा क़दम तक उठाने को मजबूर कर देता है. कारण विशेषज्ञ कहते हैं कि डिप्रेशन कई वजहों से हो सकता है, जिनमें शारीरिक, मानसिक और समाजिक कारण मुख्य हैं.  शारीरिक: गंभीर या लंबी बीमारी, हार्मोंस, आनुवंशिकता, दवाओं का सेवन, साइडइफेक्ट,   नशे की लत या दुर्घटना आदि. मानसिक: रिश्तों में तनाव, धोखा, भावनात्मक कारण, किसी अपने से अलगाव या मृत्यु आदि. समाजिक: नौकरी, आर्थिक तंगी, आस पास का वातावरण व लोग, मौसम में बदलाव, अप्रिय स्थितियाँ, तनाव आदि. इन कारणों से मस्तिष्क के काम करने के तरीक़े में बदलाव व सोचने समझने को क्षमता पर असर होता है. जिससे मस्तिष्कके कुछ न्यूरल सर्किट्स की कार्य प्रणाली में बदलाव आता है.  मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर्स की कमी के कारण डिप्रेशन होता है. न्यूरोट्रांसमीटर्स मस्तिष्क में पाए जानेवाले रसायन होते हैं, जो मस्तिष्क और शरीर के विभिन्न हिस्सों में सामंजस्य या तारतम्यता स्थापित करते हैं. इनकी कमी से व्यक्ति में डिप्रेशनके लक्षण नज़र आने लगते हैं. यह आनुवांशिक होता है इसलिए कुछ लोगों में अन्य लोगों के मुक़ाबले डिप्रेशन में जाने कीआशंका अधिक होती है. बेहद ख़तरनाक हो सकता है डिप्रेशन! आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत सहित विश्वभर में डिप्रेशन की समस्या तेज़ी से फैलती जा रही है. भारतदुनिया का सबसे डिप्रेस्ड यानी अवसादग्रस्त देश है, दूसरे नंबर पर चीन व तीसरे पर अमेरिका आता है. इस दिशा में WHO (डब्ल्यूएचओ) यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार,  भारत में 56,675,969 लोग डिप्रेशनके शिकार हैं, जो कि भारत की जनसंख्या का 4.5% है. इतना ही नहीं, डब्ल्यूएचओ के आंकड़े बताते हैं कि 36% भारतीयअपने जीवन के किसी न किसी हिस्से में डिप्रेशन का शिकार होते हैं. भारतीय युवाओं में भी डिप्रेशन तेज़ी से पैर पसार रहा है. बात रिसर्च की करें तो हर 4 में से 1 किशोर डिप्रेशन का शिकार हो रहा है.  महिलाएं पुरुषों के मुकाबले डिप्रेशन की शिकार अधिक होती हैं. दस पुरुषों में एक जबकि दस महिलाओं में हर पाँच कोडिप्रेशन की आशंका रहती है. डिप्रेशन के 90 प्रतिशत रोगियों में नींद की समस्या होती है. डिप्रेशन की वजह से व्यक्ति लगभग 65% समय चिंता में ही गुज़ार देता है. विशेषज्ञों की मानें, तो किसी भी अप्रिय घटना का असर एक मनुष्य पर ज़्यादा से ज़्यादा 100 दिनों तक रहता है, लेकिनकुछ लोग पुरानी घटनाओं को बार-बार कुरेदते हैं. जिससे उनके घाव भर नहीं पाते और उनका मन निराशा और पीड़ा से भरजाता है. जब तनाव जब हद से ज़्यादा बढ़ जाता है, तो फिर धीरे-धीरे हताशा व निराशा की तरफ़ ले जाता है, जहां किसीभी काम में यहां तक की जीवन की किसी भी क्रिया में मन नहीं लगता और लोग डिप्रेशनग्रस्त हो जाते हैं.…

क्या है डिप्रेशन- समझें इसकी गंभीरता को, क्योंकि यह जानलेवा भी हो सकता है!

डिप्रेशन भले ही बेहद सामान्य सा शब्द लगता हो, क्योंकि इसे हम लगभग रोज़ाना ही सुनते कहते आए हैं और शायद यहीवजह है कि हम इसे बहुत हल्के में लेते हैं. लेकिन सावधान, डिप्रेशन एक गंभीर मानसिक समस्या है जो जानलेवा भी साबित हो सकती है. 

ना जाने कितने सेलिब्रिटीज़ इसको लेकर बात भी कर चुके हैं और कुछ ने तो इसी के चलते अपना जीवन तक समाप्त करलिया.

डिप्रेशन की गंभीरता को समझने के लिए यह सबसे पहले डिप्रेशन को समझना होगा.

डिप्रेशन क्या है?

यह एक मानसिक समस्या है, जिसमें व्यक्ति धीरे-धीरे निराशा की तरफ़ बढ़ने लगता है. रोज़मर्रा के क्रिया कलापों मेंउसकी दिलचस्पी कम होने लगती है. वो खुद में ही सिमटता जाता है, किसी से मिलने जुलने और यहां तक कि बात तककरने में उसे कोई रुचि नहीं रहती. खाने पीने व सोने की आदतों में बदलाव आने लगता है. अपने बारे में नकारात्मक ख़्यालआने लगते हैं. ऊर्जा कम हो जाती है. यदि समय रहते डिप्रेशन का इलाज नहीं किया गया तो यह व्यक्ति को आत्महत्याजैसा क़दम तक उठाने को मजबूर कर देता है.

कारण

विशेषज्ञ कहते हैं कि डिप्रेशन कई वजहों से हो सकता है, जिनमें शारीरिक, मानसिक और समाजिक कारण मुख्य हैं. 

शारीरिक: गंभीर या लंबी बीमारी, हार्मोंस, आनुवंशिकता, दवाओं का सेवन, साइडइफेक्ट,   नशे की लत या दुर्घटना आदि.

मानसिक: रिश्तों में तनाव, धोखा, भावनात्मक कारण, किसी अपने से अलगाव या मृत्यु आदि.

समाजिक: नौकरी, आर्थिक तंगी, आस पास का वातावरण व लोग, मौसम में बदलाव, अप्रिय स्थितियाँ, तनाव आदि.

इन कारणों से मस्तिष्क के काम करने के तरीक़े में बदलाव व सोचने समझने को क्षमता पर असर होता है. जिससे मस्तिष्कके कुछ न्यूरल सर्किट्स की कार्य प्रणाली में बदलाव आता है. 

मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर्स की कमी के कारण डिप्रेशन होता है. न्यूरोट्रांसमीटर्स मस्तिष्क में पाए जानेवाले रसायन होते हैं, जो मस्तिष्क और शरीर के विभिन्न हिस्सों में सामंजस्य या तारतम्यता स्थापित करते हैं. इनकी कमी से व्यक्ति में डिप्रेशनके लक्षण नज़र आने लगते हैं. यह आनुवांशिक होता है इसलिए कुछ लोगों में अन्य लोगों के मुक़ाबले डिप्रेशन में जाने कीआशंका अधिक होती है.

बेहद ख़तरनाक हो सकता है डिप्रेशन!

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत सहित विश्वभर में डिप्रेशन की समस्या तेज़ी से फैलती जा रही है. भारतदुनिया का सबसे डिप्रेस्ड यानी अवसादग्रस्त देश है, दूसरे नंबर पर चीन व तीसरे पर अमेरिका आता है. इस दिशा में WHO (डब्ल्यूएचओ) यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार,  भारत में 56,675,969 लोग डिप्रेशनके शिकार हैं, जो कि भारत की जनसंख्या का 4.5% है. इतना ही नहीं, डब्ल्यूएचओ के आंकड़े बताते हैं कि 36% भारतीयअपने जीवन के किसी न किसी हिस्से में डिप्रेशन का शिकार होते हैं.

भारतीय युवाओं में भी डिप्रेशन तेज़ी से पैर पसार रहा है. बात रिसर्च की करें तो हर 4 में से 1 किशोर डिप्रेशन का शिकार हो रहा है. 

महिलाएं पुरुषों के मुकाबले डिप्रेशन की शिकार अधिक होती हैं. दस पुरुषों में एक जबकि दस महिलाओं में हर पाँच कोडिप्रेशन की आशंका रहती है.

डिप्रेशन के 90 प्रतिशत रोगियों में नींद की समस्या होती है.

डिप्रेशन की वजह से व्यक्ति लगभग 65% समय चिंता में ही गुज़ार देता है.

विशेषज्ञों की मानें, तो किसी भी अप्रिय घटना का असर एक मनुष्य पर ज़्यादा से ज़्यादा 100 दिनों तक रहता है, लेकिनकुछ लोग पुरानी घटनाओं को बार-बार कुरेदते हैं. जिससे उनके घाव भर नहीं पाते और उनका मन निराशा और पीड़ा से भरजाता है. जब तनाव जब हद से ज़्यादा बढ़ जाता है, तो फिर धीरे-धीरे हताशा व निराशा की तरफ़ ले जाता है, जहां किसीभी काम में यहां तक की जीवन की किसी भी क्रिया में मन नहीं लगता और लोग डिप्रेशनग्रस्त हो जाते हैं.

डिप्रेशन जब गंभीर हो जाता है तो व्यक्ति आत्महत्या जैसा क़दम उठा लेता है. WHO (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार आठलाख से भी अधिक लोग हर साल आत्महत्या की वजह से अपनी जान गंवा बैठते हैं. 15-29 साल की उम्र के नौजवानों मेंआत्महत्या मौत की दूसरी सबसे बड़ी वजह है. 

ऐसे में बेहतर यही होगा कि डिप्रेशन को और उसकी गंभीरता को समझें व समय रहते इसे अपने जीवन से दूर करें. ख़ासतौर से भारत में जहां डिप्रेशन काफ़ी हद तक लोगों को जकड़ चुका है और आजकल की लाइफस्टाइल के चलते आने वाले दिनों में ये और ज़्यादा पैर पसारेगा.

डिप्रेशन को कैसे कम किया जाए?

डिप्रेशन को समय रहते कंट्रोल करना बहुत ज़रूरी है. सेल्फ हेल्प के ज़रिए आप कुछ कदम उठा सकते हो यानी आपकोखुद अपनी मदद करनी होगी.

  • सबसे पहले डिप्रेशन की वजह को समझें और उस वजह को दूर करने की कोशिश करें.
  • निराशा से कुछ हाथ नहीं लगेगा.
  • एक्सपर्ट का कहना है कि जब आप डिप्रेशन में होते हो तो सब कुछ छोड़कर निराश होकर हथियार डाल देते हो, इसलिए यह बेहद ज़रूरी है कि डिप्रेशन से जूझ रहा व्यक्ति अपना डेली रूटीन सेट करे और उसको फ़ॉलो भी करे.
  • अपना डेली गोल सेट करें और वो गोल ऐसा हो जिसे आप अचीव कर सकें, जैसे- आप यह ठान लें कि रोज़ सुबहउठकर सबके लिए चाय मुझे बनानी है या फिर रोज़ के बर्तन, बेडशीट आदि आपको ही धोने व ठीक करने हैं. यहभले ही सुनने में अजीब लग रहा हो लेकिन दुनिया के जाने माने सायकियाट्रिस्ट इसे बेहद कारगर मानते हैं.
  • दरअसल इसके पीछे की सोच है खुद को व्यस्त रखना और अचीवकरने के एहसास से नई ऊर्जा व आत्मविश्वास कोजगाना.
  • नींद पूरी लें, इससे आप बेहतर महसूस करेंगे. अगर सोने में परेशानी है तो अपने रूम में बदलाव करें, एरोमा कासहारा लें, संगीत सुनें, मोबाइल व टीवी से उस वक़्त दूर रहें. बेहतर नींद डिप्रेशन को कम करती है और आपकोऊर्जावान बनाती है.
  • अपनी तकलीफ़ के बारे में बात करें. किसी करीबी या दोस्त से शेयर करें.
  • खुद को घर में क़ैद ना करें, बाहर निकलें, लोगों से मिलें.
  • बेहतर होगा कुछ देर धूप में टहलें इससे डिप्रेशन को मैनेज करना आसन होगा, क्योंकि ठंड में डिप्रेशन बढ़ता है औरधूप इसको दूर करने में कारगर मानी गई है.
  • म्युज़िक सुनें क्योंकि यह सीधे दिल, दिमाग़ और भावनाओं को प्रभावित करता है. मन को शांत और खुश करता है.
  • कुछ नया करें, बाहर खाने जाएँ या स्विमिंग, डांस क्लास जॉइन करें, इससे ना सिर्फ़ आप बिज़ी रहेंगे बल्कि बेहतरमहसूस करेंगे,
  • हेल्दी डायट लें. अक्सर देखा गया है कि डिप्रेशन में व्यक्ति जंक फ़ूड या अनहेल्दी चीज़ें अधिक खाता है, जिससेडिप्रेशन और बढ़ता है. इनसे बचें.
  • खाने में हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, मौसमी फल और ड्राई फ्रूट्स अपने डायट में शामिल करें. रिसर्च से पता चला है किओमेगा 3 फैटी एसिड्स और फॉलिक एसिड डिप्रेशन को कम करते हैं. सालमन, टुना फ़िश और एवोकैडो व पालकज़रूर खाएँ.
  • शराब का सेवन ना करें या फिर कम करें.
  • रिसर्च से पता चला है कि कुकिंग थेरेपी भी काफ़ी कारगर है भावनाओं को संतुलित व खुद को खुश रखने में, सबसेअच्छा होगा कि कुकिंग में मन लगायें. यह आपको क्रीएटिव बनाती है और फील गुड फैक्टर को बढ़ाती है.
  • रोज़ कुछ लिखें. अगर आप डायरी लिखते हैं तो उसके पन्नों पर अपने मन की बात उतारें या फिर एक काग़ज़ लें औरमन में जो भी चल रहा है उसे लिख डालें और बाद में काग़ज़ को फाड़कर फेंक दें. इससे ना सिर्फ़ आपका डिप्रेशनकम होगा बल्कि नींद भी अच्छी आएगी.
  • नकारात्मक लोगों से दूर रहें और ख़ुशमिज़ाज लोगों के संपर्क में रहें. कुछ लोग होते हैं जो आपको हमेशानकारात्मक चीज़ें ही गिनवाते हैं और ख़ुद भी वैसी ही सोच में डूबे रहते हैं, हमेशा शिकायतें करते रहते हैं, ऐसे लोगआपकी तकलीफ़ को और बढ़ा चढ़ाकर बताएँगे. इनसे दूरी बनाएँ.
  • अपनी कमियों के बारे में बात ना करके अपनी खूबियों से बारे में सोचें. 
  • एक्सपर्ट का कहना है कि नकारात्मक विचारों को आप खुद चुनौती दें और अपने सोचने का व चीज़ों को देखने कानज़रिया बदलें. 
  • अपने लिए समय निकालें. बीच बीच में काम से छुट्टी लें और अपनी पसंद की चीज़ें करें.
  • ज़िम्मेदारी लें, जैसे- बच्चों के होमवर्क की ज़िम्मेदारी या उन्हें स्कूल छोड़ने की या घर की सब्ज़ियाँ लाने की, बिल्सभरने की, क्योंकि एक्सपर्ट का मानना है कि इस तरह से आप डेली रूटीन में शामिल रहते हैं जिससे  डिप्रेशन काएहसास कम होता है.
  • सुबह सैर पर जाएँ, क्योंकि सुबह की ताज़ी हवा आपके मन को सुकून का आभास देगी.
  • योग और व्यायाम ज़रूर करें क्योंकि यह आपको सकारात्मक रखते हैं. इनसे ना सिर्फ़ आप शारीरिक रूप से स्वस्थरहते हैं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है क्योंकि ये आपके हार्मोन्स को संतुलित करते हैं. एक्सरसाइज़ सेफील गुड केमिकल एंड्रॉर्फ़िन बूस्ट होते हैं और नियमित रूप से एक्सरसाइज़ आपके ब्रेन को सकारात्मक दिशा मेंसोचने में सक्षम बनाती है.
  • सुबह देर तक ना सोयें क्योंकि यह आपके डिप्रेशन को बढ़ा सकता है.
  • मंत्र का सहारा लें क्योंकि डिप्रेशन से ग्रसित व्यक्ति को एकाग्र होने में मुश्किल होती है ऐसे में मंत्रों का उच्चारण मनशांत करता है और एकाग्रता बढ़ाता है.
  • मंत्रों के अलावा जो और बेहद कारगर तकनीक है वो है ध्यान. ध्यान यानी मेडिटेशन जो चक्रों को संतुलित करकेसकारात्मक ऊर्जा भरता है.

-बिट्टू शर्मा

यह भी पढ़ें: वज़न कम करने से लेकर थायरॉइड में राहत तक, ॐ के उच्चारण से होनेवाले इन हेल्थ बेनीफिट्स के बारे में नहीं जानते होंगे आप! (Surprising Health Benefits Of Chanting Om)

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Published by
Geeta Sharma

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