एग्ज़ाम टाइम में बच्चे को यूं रखें तनावमुक्त (Keep Your Child From Over Stressing Exams)

ख़ुद को सबसे आगे देखने की चाह और पैरेन्ट्स की उम्मीदों पर खरे उतरने की ज़द्दोज़हद में अक्सर बहुत से बच्चे परीक्षा के दौरान ज़रूरत से ज़्यादा स्ट्रेस लेते हैं. नतीज़तन कभी-कभी आते हुए सवालों का ज़वाब भी नहीं दे पाते. परीक्षा के दिनों में बच्चे को कैसे तनावमुक्त रखा जा सकता है? आइए, जानते हैं.

पैरेंट्स के लिए गाइडलाइन
गलाकाट कॉम्पटीशन के इस माहौल में बच्चों के लिए परीक्षा किसी युद्ध से कम नहीं है. इसके लिए एक हद तक अभिभावक ही
ज़िम्मेदार होते हैं. हम बच्चे के सामने करो या मरो जैसी स्थिति पैदा कर देते हैं. जिसका बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. परीक्षा के दिनों में पैरेन्ट्स का अप्रोच व घर का माहौल कैसा होना चाहिए, यह जानने के लिए हमने बात कीकरियर काउंसलर श्री जसपाल सिंह से. श्री जसपाल ने हमें पैरेंट्स के लिए ये आसान गाइडलाइंस बताई.

टेंशन का माहौल न बनाएं
बच्चे को बार-बार डांटते रहने से वे तनाव में आ जाते हैं और इसका उनके परफ़ॉमेन्स पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. अत: घर में शांतिपूर्ण माहौल बनाये रखें. जहां तक हो सके, बच्चे को प्यार से समझाने की कोशिश करें. बच्चे को हर व़क़्त पढ़ने के लिए न कहें.

बच्चे की तुलना न करें
अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों व दोस्तों से न करें. इससे बच्चे का आत्मविश्‍वास कम होता है. बार-बार दूसरे बच्चों से तुलना करने पर बच्चा आप से चिढ़ जाएगा और आगे से आपको अपनी समस्याएं या अपने मन की बात नहीं बताएगा. इससे बच्चे और आपके बीच दूरी आ जाएगी.

ख़ुद पर कंट्रोल करें
बच्चे के बाहर आने-जाने और दूसरी चीज़ों पर रोक लगाने से पहले ख़ुद पर नियंत्रण रखने की कोशिश करें, ताकि बच्चे आपसे सबक लें. इसके लिए पार्टियों में आना-जाना कम कर दें. साथ ही बच्चों को मोबाइल पर घंटों बात करने से रोकने से पहले ख़ुद टेलीफ़ोन पर लंबी-लंबी बातें करना कम कर दें. टीवी का वॉल्यूम कम करके देखें. कुछ दिनों तक सभी मन-पसंद सीरियल देखना बंद कर दें.

म्यूज़िक फोन न लगाने दें
कुछ बच्चे म्यूज़िक फोन लगा कर पढ़ते हैं. उन्हें समझाएं कि ऐसा करने से ध्यान भंग हो सकता है.

पॉजिटिव अप्रोच रखें
बच्चा पेपर लिखने जाने से पहले नर्वस है तो उसे डांटें नहीं, बल्कि प्यार से समझाएं. उसे पॉजिटिव अप्रोच रखने के लिए कहें. स्वयं भी पॉजिटिव रहें. इस परीक्षा को अंतिम मानकर न चलें. यह बात पैरेन्ट्स और स्टूडेंट्स दोनों को ही दिमाग़ में रखनी चाहिए.

शोर-शराबे से दूर रखें
बच्चे की पढ़ाई का स्थान शोर-शराबे से दूर रखें. उसे बिस्तर पर बैठकर पढ़ने की बजाय स्टडी टेबल पर पढ़ने के लिए कहें.

स्टडी टेबल साफ़ रखें
स्टडी टेबल पर भी किताबों का लंबा ढेर न लगायें. बच्चा जो पुस्तक पढ़ रहा हो वही सामने रखने को कहें. पुस्तकों का ढेर बच्चे को नर्वस कर सकता है.

ईश्‍वर पर विश्‍वास रखें
किसी दैवी शक्ति पर अवश्य विश्‍वास रखें. इससे आपके ऊपर नेगेटिव विचार हावी नहीं होते हैं.

खान-पान पर ध्यान दें
इन दिनों में बच्चों को खाने-पीने की सुध नहीं रहती है. वे कभी-कभी बिना खाए ऐसे ही रह जाते हैं. अत: इस बात का विशेष ख़्याल रखें. उन्हें हेल्दी खाना ही बनाकर खिलाएं.

जंक फूड खाने से रोकें
जंक़ फूड से एसिडिटी बढ़ती है. खाने में फ्रूट्स व वेजीटेबल की मात्रा बढ़ा दें. खाना हल्का रखें, ताकि वह जल्दी पच सके. अधिक तैलीय व चटपटा खाने के बाद नींद आती है. अत: इससे बचें.

खेलने के लिए भी प्रोत्साहित करें
सारा दिन लगातार बैठकर पढ़ते रहने से बच्चे ऊब जाते हैं और वे ध्यान नहीं लगा पाते. अत: उन्हें खेलने का समय भी दें. एक बार खेलकर आने के बाद वे फ्रेश माइन्ड से ज़्यादा ध्यान लगाकर पढ़ाई कर पाएंगे.

एक्सरसाइज़ पर ध्यान दें

परीक्षा के दिनों में फ़िट रहने के लिए थोड़ी-बहुत शारीरिक गतिविधि भी ज़रूरी है. इसके लिए ट्यूशन सेंटर ़ज़्यादा दूर न हो तो पैदल जाने के लिए कहें. किसी विषय को याद करते-करते हाथों, गर्दन व पैरों का हल्का व्यायाम करना भी अच्छा होता है. यदि थोड़ा व़क़्त निकाल सकें, तो कोई दूसरा व्यायाम या योगासन करने के लिए प्रोत्साहित करें. ध्यान केंद्रित करने के लिए मेडिटेशन भी कर सकते हैं.

भरपूर नींद लेने को कहें
परीक्षा में अच्छा करने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ नींद भी ज़रूरी है. अत: पढ़ाई के बीच-बीच में झपकी लेने को कहें. कुछ बच्चे परीक्षा के दिनों में रात-रात भर जागकर पढ़ते हैं और सुबह सोते हैं. परीक्षा शुरू होने के कुछ दिन पहले से उनके इस रूटीन को बदलें. अन्यथा परीक्षा के समय नींद आएगी. परीक्षा वाले दिन से पहले रात में नींद अवश्य लें. नहीं तो रात भर जाग कर पढ़ाई करने से परीक्षा हॉल में बार-बार नींद ही आती रहेगी.

बीमारियों से बचाएं
परीक्षा के दिनों में बच्चे की सेहत का विशेष ख़्याल रखें. खांसी-जुकाम या बुख़ार से बच्चे को बचाएं.सर्दी-जुकाम होने पर हल्के में न लें, तुरंत इलाज़ कराएं. हाइजीन का भी ख़ास ख़्याल रखें. हाथों की साफ़-सफ़ाई का पर्याप्त ध्यान दें, ताकि संक्रमण से बचाव हो.

गाइड फ़ॉर चाइल्ड
    परीक्षा की तैयारी
* अंतिम समय में पूरे साल भर की पढ़ाई करने न बैठें. इस सच्चाई को स्वीकार कर लें कि अब शत-प्रतिशत हासिल करने का समय नहीं है. उसके लिए तो पहले दिन से पढ़ना ज़रूरी था. अब जिस लेवल पर हैं उसके अगले लेवल तक पहुंचने का लक्ष्य रखें. लक्ष्य तय करते हुए यह सोचें कि मैं जितना कर सकता हूं उसको अच्छी तरह करूंगा.
* बाद के लिए कुछ भी न छोड़ें. यह अध्याय अभी नहीं, बाद में करूंगा, इस अप्रोच से दूर रहें.
* नियमित पढ़ाई करें. बार-बार रिविज़न करें.
* ज़्यादा-से-ज़्यादा सेम्पल पेपर हल करें. इससे आपकी प्रैक्टिस भी होगी और सवाल हल करने में कितना व़क़्त लगता है इसका भी अंदाजा लग जाएगा.
* व्यवहारिक लक्ष्य रखें. एक दिन में सारे चैप्टर कभी पूरी तरह रिवाइज़ नहीं होते.
* टेक्स्ट बुक के सभी अध्यायों को कम से कम दो बार अवश्य पढ़ें. हर विषयों पर समान समय दें. गाइड बुक के सहारे न रहें.

परीक्षा देते व़क़्त01
* प्रत्येक प्रश्‍न को अच्छी तरह समझने के बाद ही सही व सटीक ज़वाब लिखें. प्रश्‍न के उत्तर की शब्द-सीमा अवश्य ध्यान में रखें.
* सही स्पेलिंग, व्याकरण के अनुसार वाक्य रचना और साफ़ लिखाई और प्वाइंट वाइज़ प्रश्‍नों के उत्तर यानी प्रेजेंटेशन और टाइमिंग व नीटनेस का विशेष ख़्याल रखें.
* दो प्रश्‍नों के उत्तर के बीच में स्थान अवश्य छोड़ें. प्रश्‍न संख्या अवश्य लिखें.

– केबी

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Usha Gupta :
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