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‘खुल्लम खुल्ला: ऋषि कपूर अनसेंसर्ड’ बायोग्राफी में सनसनीखेज़ खुलासे… (‘Khullam Khulla: Rishi Kapoor Uncensored’ Sensational Revelation In Biography…)

ऋषि कपूर अपने रोमानी अंदाज़ व बेबाक़ बयानबाज़ी के लिए जाने जाते हैं. यही बोल्डनेस उनकी बायोग्राफी ‘खुल्लम खुल्ला: ऋषि कपूर अनसेंसर्ड’ में भी पढ़ने…

ऋषि कपूर अपने रोमानी अंदाज़ व बेबाक़ बयानबाज़ी के लिए जाने जाते हैं. यही बोल्डनेस उनकी बायोग्राफी ‘खुल्लम खुल्ला: ऋषि कपूर अनसेंसर्ड’ में भी पढ़ने को मिलती है. इसे मीना अय्यर ने लिखा है. इसमें चिंटूजी ने ख़ुद से जुड़े कई दिलचस्प क़िस्से को पूरी ईमानदारी से विस्फोटक तरी़के से बयां किया है. बता दें कि ऋषि कपूर को प्यार से ‘चिंटू’ कहते हैं, इसी नाम से सोशल मीडिया पर उनके अकाउंट भी है. साथ ही इसी नाम से उन पर फिल्म भी बनी थी.

पारसी लड़की से प्यार…

ऋषि के दिलफेंक अंदाज़ के बारे में सभी जानते थे. लेकिन उनका कहना था कि वे एक पारसी लड़की यास्मीन मेहता से सच्चा प्यार करते थे. लेकिन ‘बॉबी’ फिल्म की कामयाबी, उनके और डिंपल कापडिया के बारे में ढेर सारे गॉसिप, लव-अफेयर की बातों ने यास्मीन को उनके प्रति शक से भर दिया. चिंटूजी कहते हैं कि यास्मीन ने मुझे ठुकरा दिया, क्योंकि उसे लगता था कि मैं डिंपल को चाहता हूं, जबकि ऐसा कभी भी नहीं था. हम केवल अच्छे को-स्टार थे. फिर ज़िंदगी में नीतू सिंह का आना हुआ और मेरी पूरी दुनिया ही बदल गई.

पैसे से अवॉर्ड ख़रीदे…

अस्सी-नब्बे के दशक के सफल व बेहतरीन स्टार में से एक थे ऋषि कपूर. उन्होंने खेल खेल में, कर्ज़, हम किसी से कम नहीं, अमर अकबर एंथोनी जैसी एक से एक हिट फिल्में दीं. लेकिन चिंटूजी को अवॉर्ड जीतने की इस कदर बेताबी थी कि बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड उन्होंने तीस हज़ार रुपए देकर ख़रीदा था. तब उन्हें बॉबी के लिए यह मिला था. लेकिन उस दरमियान अमिताभ बच्चन की ज़ंजीर भी सुपर-डुपर हिट हुई थी और वे सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए नामांकित भी हुए थे. लेकिन दोनों के बीच पैसा आ गया. चिंटूजी ने इस बात का भी ख़ुलासा किया कि चूंकि जंज़ीर लाजवाब फिल्म थी और अमिताभ ने उसमें लाजवाब अभिनय किया था. लेकिन उन्हें अवॉर्ड न मिला पाना हमारे रिश्तों में दूरियां भी ले आया. मैं चाहकर भी बहुत कुछ न कह पाया और वे ख़ामोश रहकर अपनी नाराज़गी जता गए.

जब संजय दत्त मारने के लिए घर पहुंचे…

यह वाकया भी कुछ कम मज़ेदार न था कि संजय दत्त को शक हो गया था कि ऋषि कपूर का टीना मुनीम से रोमांस चल रहा है. इसी खुन्नस में वे ऋषि को मारने के लिए उनके घर पहुंच गए. दरअसल, उन दिनों संजय दत्त का टीना मुनीम के साथ ज़बर्दस्त अफेयर चल रहा था. लेकिन बाद में नीतू सिंह ने संजय को समझा-बुझाकर शांत किया और कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है. तब संजय उनके घर से वापस लौटे.

राजेश खन्ना-डिंपल की लव-स्टोरी में विलेन…

अपनी बायोग्राफी में राजेश खन्ना और डिंपल कापडिया के बारे में मज़ेदार बातें उन्होंने कही. जब ऋषि का अपनी गर्लफ्रेंड यास्मीन से रिश्ता टूट गया था. तब उसके द्वारा उपहार में दी गई अंगूठी को डिंपल ने लेकर पहन लिया था. ऐसे में जब राजेश खन्ना ने डिंपल को प्रपोज़ किया, तब उनसे इस अंगूठी को संशय होने लगा. उन्होंने उसे सागर में फेंक देने के लिए कहा. डिंपल ने भी बड़ी मासूमियत से उस अंगूठी को समंदर में फेंक दिया. तब राजेश खन्ना को सुकून मिला और उन्होंने अपनी अंगूठी पहनाई.

पिता भी रोमांटिक और बेटा भी कुछ कम नहीं…

चिंटूजी ने किताब में अपने पिता राज कूपर की प्रेम कहानियों का भी ज़िक्र किया है. बकौल उनके सभी जानते थे कि राज साहब उस दौर की टॉप एक्ट्रेस नरगिस को बेइंतहा पसंद करते थे. वैसे देखा जाए, तो तीनों पीढ़ी अपने रंगीन मिज़ाज के लिए जाने जाते थे. फिर चाहे राज कपूर हो, ऋषि या फिर उनके लाडले रणबीर कपूर. जिस तरह पिता के प्यार-मोहब्बत के क़िस्से मशहूर थे, उसी तरह रणबीर कपूर भी पीछे नहीं है. उनके भी दीपिका पादुकोण से लेकर नरगिस फाकरी, कैटरीना कैफ, अब लेटेस्ट आलिया भट्ट से प्यार के ख़ूब पींगे लड़ा रहे हैं.

ईगो फैक्टर…

फिल्म ‘कभी-कभी’ ऋषि कपूर इसलिए नहीं करना चाहते थे कि उसमें लीड रोल में अमिताभ बच्चन थे. उन्हें अमितजी को चुनौती देना मुश्किलोंभरा लग रहा था. साथ ही इसमें नीतू सिंह का रोल उनसे अधिक दमदार था. इन बातों को लेकर उनके मन में काफ़ी उथल-पुथल मच रही थी. पहले उन्होंने फिल्म के लिए ना कह दी थी, लेकिन बाद में उन्होंने यह फिल्म कर ही ली.

 

इस तरह के न जाने कितने ही ख़ुलासे चिंटूजी ने अपनी बायोग्राफी में की है. किताब का टाइटल भी उनकी फिल्म खेल खेल में के गीत खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे हम दोेनों, इस दुनिया से नहीं डरेंगे हम दोनों… से ली गई है.

सालभर से अमेरिका में कैंसर का इलाज करा रहे ऋषि कपूर जल्द से जल्द घर मुंबई आना चाहते हैं. वे नीतू सिंह, अपने परिवार, को-स्टार और प्रशंसकों के शुक्रगुज़ार हैं कि उन्होंने इस कठिन घड़ी में उनका भरपूर साथ दिया. सभी उनसे समय-समय पर न्यूयॉर्क मिलने आते रहे, जिससे उन्हें अकेलापन नहीं लगा. हाल ही में नीतू सिंह ने इस बात का भी ज़िक्र किया था कि जब पहली बार रणबीर कपूर को पिता को कैंसर होने की बात पता चली, तो उनकी आंखें भर आईं. वे तुरंत दिल्ली पहुंचे और पिता को लेकर इलाज के लिए न्यूयॉर्क चले गए. बीमारी के दरमियान ही पिता-पुत्र की बॉन्डिंग भी काफ़ी मज़बूत हुई, क्योंकि सच्चाई यह भी थी कि रणबीर अपनी मां नीतू के अधिक क़रीब थे और पिता से थोड़ी दूरी थी. लेकिन कहते हैं ना अंत भला तो सब भला.

अब ऋषि कपूर इलाज कराके पूरी तरह से स्वस्थ हो गए हैं. कल यानी 4 सितंबर को उनका जन्मदिन है, मेरी सहेली की तरफ़ से उन्हें एडवांस में जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई! वे हेल्दी रहें और जिस तरह हर मुद्दे पर सोशल मीडिया के ज़रिए अपनी बिंदास व बेबाक़ राय रखते हैं और अपनी बात कहते हैं, यूं ही करते रहें! यही हमारी शुभकामनाएं!

– ऊषा गुप्ता

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