रवि दुबे और सरगुन मेहता की प्रेम कहानी (Love Story Of Ravi Dubey And Sargun Mehta)

मनचाहा जीवनसाथी, मनचाहा प्रोफेशन, मनचाही ख़ुशियां… यदि ये सब हासिल हो जाएं तो ज़िंदगी से और क्या चाहिए? टेलीवुड के मेड फॉर ईच अदर कहलाए जाने वाले कपल रवि और सरगुन को भी ज़िंदगी से कोई शिकायत नहीं. वो पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ़ में स्टेप बाई स्टेप क़ामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते जा रहे हैं और ज़िंदगी का खुलकर लुत्फ़ उठा रहे हैं. एनर्जी से भरपूर इस सुपर स्टाइलिश कपल की प्रेम कहानी कैसे शुरू हुई? आइए, हम आपको बताते हैं.

एक-दूसरे के सपोर्ट सिस्टम बनकर एक-दूसरे की क़ामयाबी के हिस्सेदार कैसे बना जा सकता है, ये कोई रवि और सरगुन से सीखे. दोनों बहुत बिज़ी रहते हैं, फिर भी बहुत ख़ुश और एक-दूसरे से कनेक्टेड रहते हैं. दोनों ही बहुत आशावादी हैं और अपनी मंज़िल तक पहुंचना अच्छी तरह जानते हैं. आइए, रवि और सरगुन की ज़िंदगी को और क़रीब से जानें.

कैसी थी आप दोनों की पहली मुलाक़ात?
रवि दुबे: सरगुन से मैं पहली बार करोल बाग़ के सेट पर मिला. बहुत जल्दी हमारी दोस्ती हो गई और उतनी ही जल्दी मुझे ये एहसास हो गया मुझे सरगुन से प्यार हो गया है. फिर क्या था, मैंने सरगुन को प्रपोज़ किया और जल्दी ही हमने शादी कर ली.
सरगुन मेहता: पहली नज़र में तो हम इंसान का रूप-रंग ही देखते हैं. मैंने जब रवि को पहली बार देखा तो वो अपनी वैन से उतर रहे थे, वो करोल बाग़ की शूटिंग के लिए दिल्ली आए थे. ब्लैक कलर के जैकेट और ब्लू डेनिम में रवि को देखकर मैं सोचने लगी, ङ्गओह माय गॉड, ये हैंडसम लड़का कौन है!फ मेज़े की बात ये है कि जब मैंने रवि का लुक टेस्ट देखा था तो मेरा रिएक्शन था, ङ्गये चश्मिस लड़का कौन है?फ लुक टेस्ट में रवि एकदम ऑर्डिनरी लग रहे थे, क्योंकि वो फोटोग्राफ्स उनके कैरेक्टर की थी, लेकिन असल में उन्हें देखकर मैं देखती ही रह गई. फिर जल्दी ही हमारी दोस्ती हो गई. करोल बाग़ के बाद जब हम दिल्ली से मुंबई आए तो मैंने देखा कि रवि हमेशा मेरे आसपास रहते हैं, घर ढूंढ़ने से लेकर सेटल होने तक हर चीज़ में मेरी मदद कर रहे हैं, उनकी ये तमाम बातें मुझे अच्छी लगने लगीं. तब मेरे मन में भी मोहब्बत का एहसास जागने लगा था.

शादी के बाद कितनी बदली ज़िंदगी?
रवि दुबे: कुछ भी नहीं बदला है शादी के बाद, सिवाय इसके कि हम एक घर में रहने लगे हैं. हम दोनों शादी के पहले भी अपने पैरेंट्स से दूर अकेले रह रहे थे. घर और करियर दोनों संभाल रहे थे इसलिए शादी के बाद ज़िम्मेदारियां बढ़ी नहीं हैं, बल्कि बंटी हैं. अब हम साथ मिलकर अपनी तमाम ज़िम्मेदारियां पूरी कर रहे हैं. हां, इतना ज़रूर है कि शादी के बाद इंसान अपनी लाइफ को लेकर और ज़्यादा क्लियर हो जाता है, उसे पता होता है कि उसे अपनी फैमिली के लिए क्या करना है.
सरगुन मेहता: शादी के बाद ज़िंदगी में कोई बदलाव नहीं आया. शादी से पहले मैं मुंबई में अकेली रह रही थी इसलिए काम के साथ-साथ घर ढूंढ़ने से लेकर, फोन, लाइट के बिल भरना, खाने-पीने बंदोबस्त… सबकुछ मैं अकेले ही मैनेज कर रही थी. शादी के बाद भी मैं वही सारे काम कर रही हूं. अब रवि साथ है तो बल्कि ज़्यादा आसानी हो गई है.

आप दोनों के बीच नोकझोंक कितनी होती है?
रवि दुबे: नोकझोंक तो हर कपल के बीच होता है, लेकिन हमारे साथ ख़ास बात ये है कि हमें दूसरी चीज़ों पर भले ही ग़ुस्सा आ जाए, लेकिन एक-दूसरे पर कभी ग़ुस्सा नहीं आता.
सरगुन मेहता: डे टु डे लाइफ की नोंकझोक तो हर रिश्ते में होती है, उससे आप बच नहीं सकते. सोफे के कलर, एक्स्ट्रा टीवी या फिर किसी काम को लेकर नोंकझोंक हो ही जाती है, लेकिन वो उतनी ही जल्दी खत्म भी हो जाती है.

डेली सोप में काम करते हुए पर्सनल लाइफ के लिए कितना टाइम मिल पाता है?
रवि दुबे: हर इंसान के पास दिन में चौबीस घंटे ही होते हैं, ये आप पर है कि आप अपने काम को कितना और कैसे इस्तेमाल करते हैं. मेरी पत्नी मेरी प्राथमिकता है और मैं ये अच्छी तरह जातना हूं कि मैं उसके साथ क्वालिटी टाइम कैसे बिता सकता हूं. दरअसल, जो लोग ढीले होते हैं वो बहुत टाइम पास करते हैं और काम न कर पाने हज़ार एक्सक्यूज़ देते हैं, लेकिन जो लोग एक साथ कई काम करते हैं, वो अपने हर काम के लिए टाइम निकाल ही लेते हैं और टाइम मैनेज करना भी अच्छी तरह जानते हैं.
सरगुन मेहता: आप कितने घंटे काम करते हैं इससे ज़्यादा ज़रूरी है कि आप अपने काम से कितना प्यार करते हैं, उसे कितना एंजॉय करते हैं. हम लकी हैं कि हम वही काम कर रहे हैं जो हमें पसंद है. साथ ही मैं उस इंसान के साथ रह रही हूं जिसे मैं प्यार करती हूं इसलिए मैं ख़ुद को बहुत लकी मानती हूं. फिलहाल मेरे पास टाइम ज़्यादा है, क्योंकि मुझे मेरी फिल्म की डेट्स के हिसाब से काम करना पड़ता है, लेकिन रवि डेली सोप कर रहे हैं इसलिए उनके पास बिल्कुल भी टाइम नहीं है, हम दोनों एक छत के नीचे रह रहे हैं, हमारे लिए इतना ही काफ़ी है.

प्रोफेशनल लाइफ में एक-दूसरे को कितना सपोर्ट करते हैं?
रवि दुबे: हम दोनों एक ही प्रोफेशन में हैं इसलिए अपने काम और शेड्यल को अच्छी तरह समझते हैं. अब कुछ ही दिनों में सरगुन अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए बीस दिनों के लिए चली जाएगी और मैं इसके लिए मेंटली तैयार हूं, क्योंकि यही हमारे काम का पैटर्न है. मेरे शहर से बाहर जाने पर सरगुन भी सबकुछ संभाल लेती है.
सरगुन मेहता: रवि और मेरी बॉन्डिग इतनी मज़बूत है कि हम एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह जानते हैं. आप हमें एक-दूसरे का बैक बोन कह सकते हैं. हम एक-दूसरे को उसकी ख़ासियत और कमी दोनों बताते रहते हैं, ताकि हम साथ मिलकर आगे बढ़ सकें. रवि जानते हैं कि मैं क्या कर सकती हूं और मैं जानती हूं कि रवि में कितना पोटेंशियल है.

प्यार क्या है आपकी नज़र में?
रवि दुबे: मेरी नज़र में प्यार कंपैनियनशिप है. व़क्त के साथ आपके रिलेशनशिप के सारे पिलर्स टूटते जाते हैं, फिर चाहे वो लुक्स हो, फिज़िकैलिटी, लव-अफेयर का यूफोरिया… सबकुछ ध्वस्त हो जाता है. उसके बाद स़िर्फ एक-दूसरे की कंपनी बच जाती है. यदि आप दोनों को वाकई एक-दूसरे का साथ अच्छा लगता है, दुनिया में ऐसा कोई टॉपिक नहीं जो आप एक-दूसरे के साथ शेयर नहीं करते, तो आपका रिश्ता मज़बूत है और आप अपने रिश्ते में हमेशा ख़ुश रहते हैं. यदि आप के बीच कंपैनियनशिप नहीं है, तो जब आपके रिश्ते के सारे पिलर्स ढलते चले जाएंगे, तो आपको अपने रिश्ते को जस्टिफाई करने की वजहें ढूंढ़नी पड़ेंगी.
सरगुन मेहता: मेरी नज़र में प्यार वो है जो अपने आप होता चला जाए, जहां आपको सोच-समझकर या एफर्ट लगाकर कुछ करना न पड़े. आप अपने पार्टनर से दुनिया की हर बात शेयर कर सकें.

भाग्य या ईश्‍वर में विश्‍वास करते हैं?
रवि दुबे: आपकी लाइफ वैसे डिज़ाइन होती है जैसे आप सोचते हैं. यदि आपको लगता है कि ये इंडस्ट्री आपकी दोस्त नहीं दुश्मन है, तो आपको वैसे ही लोग मिलेंगे, लेकिन आप यदि पॉज़िटिव रहेंगे तो आपके साथ सबकुछ पॉज़िटिव होता चला जाएगा. मैं और सरगुन बहुत आशावादी हैं, हम हर चीज़ में पॉज़िटिविटी ही ढूंढ़ते हैं.
सरगुन मेहता: ईश्‍वर कह लीजिए या यूनिवर्स मेरा उसमें अटूट विश्‍वास है. ओपरा ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि मैं मेहनत करती जा रही थी और मेरे लिए लक सही समय पर सही जगह रखा हुआ था. मैं भी यही मानती हूं, आपको मेहनत करते हुए ख़ुद को अपने लक के लिए तैयार रखना चाहिए, वो ज़रूर आपके पास आएगा. यदि आप सच्चे दिल से पूरी ताक़त लगाकर कोई काम करते हैं, तो यूनिवर्स आपको आपकी चीज़ उतनी ही शिद्दत से सौंप देता है.

यह भी पढ़ें: ‘साथ निभाना साथिया’ की इस पंंजाबी कुड़ी ने की साउथ इंडियन बॉयफ्रेंड से सगाई !

आपका स्टाइल स्टेटमेंट क्या है?
रवि दुबे: मेरा स्टाइल बहुत सिंपल है. मैं बहुत एक्सपेरिमेंट नहीं करता. कैजुअल वेयर में मुझे बसिक डेनिम और टी-शर्ट पहनना पसंद है. फॉर्मल वेयर में क्लासिक थ्री पीस सूट पहनना पसंद है. कपड़ों के मामले में मैं फिर भी समझौता कर लूंगा, लेकिन एक्सेसरीज़ मैं बेस्ट क्वालिटी की ही ख़रीदता हूं. मेरे पास वॉचेस और ग्लेयर्स का अच्छा-खासा कलेक्शन है.
सरगुन मेहता: रवि बहुत कॉन्शियस रहते हैं कि उन्होंने क्या पहना है, लेकिन मुझे सबकुछ चलता है. मैं शूटिंग के बीच में ही कोई ड्रेस ख़रीद लूंगी और उसे अगले अवॉर्ड फंक्शन के लिए रख दूंगी. मैं स्टाइल के लिए इतना एफर्ट नहीं लगाती कि डिज़ाइनर या स्टाइलिश के पास जाऊं.

पार्टनर की किस बात से चिढ़ जाते हैं?
रवि दुबे: सरगुन बहुत ही ऑर्गनाइज़्ड लड़की है और मैं बहुत ही कैजुअल हूं. अक्सर वो मेरे सामने सौ-दो सौ पेपर लाकर रख देती है और डेडलाइन दे देती है कि सुबह तक इन सब पर साइन हो जाना चाहिए. सच कह रहा हूं, उस व़क्त मुझे बहुत खीझ होती है. (हंसते हुए) सरगुन जानती है कि वो यदि मुझे डेडलाइन नहीं देगी तो वो काम 10-15 दिनों तक टल जाएगा. मुझे पेपर वर्क बिल्कुल भी पसंद नहीं. सरगुन ना हो तो मैं ये सब कर ही नहीं पाऊंगा.
सरगुन मेहता: रवि फोन एडिक्ट हैं, हर पल फोन से चिपके रहते हैं, उनकी इस आदत से मुझे बहुत चिढ़ होती है.

आपकी अपनी वीकनेस क्या है?
रवि दुबे: कई बार मैं बहुत ढीला हो जाता हूं. वैसे तो मैं बहुत एक्टिव हूं, मेरा दिन सुबह छह बजे शुरू हो जाता है और रात एक-डेढ़ बजे ही ख़त्म होता है और उस दौरान लगातार कुछ न कुछ चलता ही रहता है, कई बार तो बैठने की भी फुर्सत नहीं होती, लेकिन कई बार मैं बहुत आलसी हो जाता हूं, फिर मुझे ख़ुद को उस मूड से बाहर धकेलना पड़ता है.
सरगुन मेहता: मेरी भी यही वीकनेस है, कई बार मैं बहुत आलसी हो जाती हूं.

आपके पार्टनर की वो कौन-सी ख़ासियत है जिस पर आप गर्व महसूस करते हैं?
रवि दुबे: सरगुन मेरी स्ट्रेंथ है. मैं बहुत आशावादी हूं, लेकिन जब मैं लो फील करता हूं तो सरगुन ही मुझे समझा पाती है, क्योंकि वो भी मुझसे ज़्यादा आशावादी है.
सरगुनः रवि को आप गूगल मैन कह सकती हैं, वो बहुत अपडेटेड रहते हैं, उनके साथ आपको कुछ भी सर्च करने की ज़रूरत नहीं पड़ती.

घूमने के कितने शौकीन हैं और कहां घूमना पसंद करते हैं?
रवि दुबे: हम दोनों ही घूमने के बहुत शौकीन हैं और टाइम मिलने पर घूमने निकल जाते हैं. हमारे हनीमून का टूर बहुत यादगार था, हम हनीमून के लिए यूरोप गए थे जहां हमने एक साथ कई यादगार पर बिताए, बहुत सारे नए दोस्त बनाए, यूरोप को पूरी तरह से एक्सप्लोर किया. मैं सरगुन के साथ फिर से यूरोप टूर पर जाना चाहूंगा.
सरगुन मेहता: हमें नई-नई जगहों पर घूमने जाना बहुत पसंद है. हालांकि हमें बहुत ज़्यादा टाइम नहीं मिल पाता, फिर भी हम टाइम निकालकर शॉर्ट ट्रिप तो प्लान कर ही लेते हैं. हां, हमारा हनीमून ट्रिप बहुत ख़ास था.

यह भी पढ़ें: दिव्यांका त्रिपाठी को उनकी मां ने दिया ये खास सरप्राइज़ !

कितने फिटनेस कॉनिशयस हैं?
रवि दुबे: एक्टिंग के फील्ड में फिटनेस बहुत मायने रखती है. हमें फिटनेस के लिए अलग से टाइम निकालना ही पड़ता है. मैं सुबह लगभग दो घंटे रोज़ वर्कआउट करता हूं. मैं खाने का बहुत शौकीन हूं इसलिए खाने की क़ीमत वर्कआउट करके चुकाता हूं, क्योंकि मुझे इसके लिए ज़्यादा वर्कआउट करना पड़ता है. मुझे मीठा बहुत पसंद है, ख़ासकर चॉकलेट्स.
सरगुन मेहता: हम दोनों फूडी हैं इसलिए हमें रोज़ जिम में बहुत टाइम बिताना पड़ता है. बटर चिकन-बटर नान हम दोनों बहुत चाव से खाते हैं.

जब मैंने ख़ुद को पहली बार स्क्रीन पर देखा: रवि दुबे
पहली बार मैंने ख़ुद को एक ऐड फिल्म में स्क्रीन पर देखा था और वो ख़ुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती. मुझसे पहले हमारे परिवार में कोई भी इस इंडस्ट्री में नहीं था इसलिए ऐसा लग रहा था कि मैंने कुछ स्पेशल अचीव किया है. इससे पहले ख़ुद को दूसरों की शादी के वीडियोज़ में देखा था.
जब से मैंने होश संभाला, तभी से मैं इस इंडस्ट्री में आना चाहता था, लेकिन कैसे आना है ये तब तय नहीं था. दिल्ली से ग्रैज्युएशन करने के बाद में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने मुंबई आया. पढ़ाई के दौरान एक ऐड फिल्म में काम करने का मौक़ा मिला और उसके बाद एक के बाद एक मौ़के मिलते गए और मैं आगे बढ़ता गया.

…और मैंने एक्टिंग को चुन लिया: सरगुन मेहता
मेरे पैरेंट्स बहुत मॉडर्न ख़यालात के हैं. उन्होंने हम पर कभी अपने ़फैसले नहीं थोपे. हां, ये ज़रूर बताया कि क्या सही है और क्या ग़लत. जब मुझे इस इंडस्ट्री में पहला ब्रेक मिला, तो मैं पोस्ट ग्रैज्युएशन की पढ़ाई के लिए विदेश जा रही थी. जब मैंने अपने पैरेंट्स से इस ब्रेक के बारे में बात की, तो उन्होंने कहा कि तुम करना चाहती हो तो ज़रूर करो. अगर इस इंडस्ट्री में तुम नहीं चली तो पोस्ट ग्रैज्युएशन एक साल बाद कर लेना, लेकिन ऐसा करने की ज़रूरत नहीं पड़ी. मेरा एक्टिंग करियर चल पड़ा.
– कमला बडोनी

Kamla Badoni :
© Merisaheli