महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर पीएम मोदी ने दी देशवासियों को शुभकामनाएं (Mahashivratri special: PM MOdi Wishes country)

महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर देशभर में भगवान शिव के मंदिरों में भीड़ लगी है. लोग भगवान शिव की पूजा-अर्चना करके मन की मुराद मांग रहे हैं. गांव-शहर हर जगह शिवरात्रि की धूम दिख रही है. आइए, जानते हैं कि आख़िर क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि.

क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि?
ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह इसी दिन हुआ था. इस कारण इसे पूरे देश में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है. शिवरात्रि के दिन जो भी भगवान शिव की पवित्र मन से आराधना करता है, उसकी सारी मनोकामना पूर्ण होती है.

कैसे करें पूजा?
भगवान शंकर की पूजा के समय शुद्ध आसन पर बैठकर पहले आचमन करेे. यज्ञोपवित धारण कर शरीर शुद्ध करें. उसके बाद आसन की शुद्धि करें. पूजन-सामग्री को यथास्थान रखकर रक्षादीप प्रज्ज्वलित कर लें. अब जलाभिषेक करने के बाद पाठ करें. भगवान शिव का अभिषेक करते समय दूध, दही, शहद, पानी आदि का उपयोग कर सकते हैं. शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाकर, अभिषेक करके हाथ जोड़कर पाठ करें. पूजा ख़त्म होने के बाद क्षमा याचना करना न भलें. ये इसलिए कि अगर आपेस पूजा करने में कोई भूल-चूक हो गई हो, तो भोलेनाथ उसे क्षमा कर दें.

क्यों चढ़ाते हैं सिंदूर?
सिंदूर चढ़ाने की परंपरा शिव उपासना के लिए उत्तम माना जाता है. बैद्यनाथधाम प्रकृति और पुरुष का मिलन स्थल है, इसलिए यहां शिव और शक्ति दोनों की पूजा होती है, ख़ासकर महिलाओं के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है. उनकी माने तो माता पार्वती ने कठोर तप कर भगवान शंकर को प्राप्त किया था और इसीलिए महिलाएं सौभाग्य और समृद्धि की कामना के लिए बाबा के दरबार पहुंचती हैं. ऐसे में सिंदूर चढ़ाने से भगवान भोलेनाथ की तरह ही सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है.

क्या है भोलेनाथ को पसंद?
भोलेनाथ को भांग, धतूरा, बेलपत्र अति प्रिय है. मंदिर में जाते समय आप इसे साथ ले जाएं और भगवान को अर्पित करें.

भोलेनाथ को पसंद हैं ये फूल
भगवान शिव को कुछ अलग तरह के फूल ही पसंद हैं. मंदिर जाते समय इन्हीं फूलों को ले जाएं.
– धतूरे के फूल
– अलसी के फूल
– बेला के फूल
– कनेर के फूल

पीएम मोदी ने दी देशवासियों को शुभकामनाएं
इस अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्विटर के ज़रिए सभी को शुभकामनाएं दी हैं.

 

श्वेता सिंह 

Shweta Singh :
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