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मूवी रिव्यूः बाटला हाउस (Movie Review Of Batla House)

फिल्मः बाटला हाउस स्टारकास्टः जॉन अब्राहम, मृणाल ठाकुर, नोरा फतेही, रवि किशन डायरेक्टरः निखिल आडवाणी स्टारः 3 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस पर रिलीज होने वाली यह फिल्म 2008 में घटित बटला हाउस इनकाउंटर से प्रेरित है. इस फिल्म के माध्यम से मेकर्स ने दर्शकों को यह बताने की कोशिश की है कि एक इनकाउंटर स्पेशलिस्ट पुलिस ऑफिसर की जिंदगी कैसी होती है. अगर वह अपराधी को मार गिराता है तो लोगों को लगता है कि उसे बिना वजह लोगों को शूट करने में मजा आता है और अगर वह ऐसा नहीं करता तो भी उसपर उंगलियां उठती हैं. फिल्म की अच्छी बात यह है कि जॉन अब्राहम ने इनकाउंटर स्पेशलिस्ट के उताहपोह पर बेहद बखूबी पेश किया है. ऐसा लग रहा है कि स्पेशल सेल एसीपी संजीव कुमार का रोल उनके लिए ही बनाया गया है. बाटला हाउस की ओपनिंग में दिखाया गया है कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल एक रहवासी इलाके में छुपे आतंकवादियों को मार गिराती है. वहां चीज़ें हाथ से निकल जाती हैं और दोनों ओर कैजुएलिटीज़ होती है. पुलिस पर बिना वजह इनकाउंटर करने का आरोप लगता है और सारी उंगलियां संजीव कुमार पर उठती हैं और जुडिशियल इंक्वायरी बैठती है. विभिन्न राजनीतिक पार्टियों और मानवाधिकार संगठनों द्वारा संजीव कुमार  की टीम पर बेकसूर स्टूडेंट्स को आतंकी बताकर फेक एनकाउंटर करने के गंभीर आरोप लगते हैं. सिलसिले में संजीव कुमार  को बाहरी राजनीति ही नहीं बल्कि डिपार्टमेंट की अंदरूनी चालों का भी सामना करना पड़ता है.वह  पोस्ट ट्रॉमैटिक डिसॉर्डर जैसी मानसिक बीमारी से जूझता है.जांच को…

फिल्मः बाटला हाउस
स्टारकास्टः जॉन अब्राहम, मृणाल ठाकुर, नोरा फतेही, रवि किशन
डायरेक्टरः निखिल आडवाणी
स्टारः 3

15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस पर रिलीज होने वाली यह फिल्म 2008 में घटित बटला हाउस इनकाउंटर से प्रेरित है. इस फिल्म के माध्यम से मेकर्स ने दर्शकों को यह बताने की कोशिश की है कि एक इनकाउंटर स्पेशलिस्ट पुलिस ऑफिसर की जिंदगी कैसी होती है. अगर वह अपराधी को मार गिराता है तो लोगों को लगता है कि उसे बिना वजह लोगों को शूट करने में मजा आता है और अगर वह ऐसा नहीं करता तो भी उसपर उंगलियां उठती हैं. फिल्म की अच्छी बात यह है कि जॉन अब्राहम ने इनकाउंटर स्पेशलिस्ट के उताहपोह पर बेहद बखूबी पेश किया है. ऐसा लग रहा है कि स्पेशल सेल एसीपी संजीव कुमार का रोल उनके लिए ही बनाया गया है.

बाटला हाउस की ओपनिंग में दिखाया गया है कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल एक रहवासी इलाके में छुपे आतंकवादियों को मार गिराती है. वहां चीज़ें हाथ से निकल जाती हैं और दोनों ओर कैजुएलिटीज़ होती है. पुलिस पर बिना वजह इनकाउंटर करने का आरोप लगता है और सारी उंगलियां संजीव कुमार पर उठती हैं और जुडिशियल इंक्वायरी बैठती है. विभिन्न राजनीतिक पार्टियों और मानवाधिकार संगठनों द्वारा संजीव कुमार  की टीम पर बेकसूर स्टूडेंट्स को आतंकी बताकर फेक एनकाउंटर करने के गंभीर आरोप लगते हैं. सिलसिले में संजीव कुमार  को बाहरी राजनीति ही नहीं बल्कि डिपार्टमेंट की अंदरूनी चालों का भी सामना करना पड़ता है.वह  पोस्ट ट्रॉमैटिक डिसॉर्डर जैसी मानसिक बीमारी से जूझता है.जांच को आगे बढ़ाने और खुद को निर्दोष साबित करने के सिलसिले में उसके हाथ बांध दिए जाते हैं. उसकी पत्नी नंदिता कुमार (मृणाल ठाकुर) उसका साथ देती है.

फिल्म में डॉक्यूमेंटरी फील भी आता है, जब बीच-बीच में राजनीतिज्ञ अमर सिंह, अरविंद केसरीवाल और लाल कृष्ण आडवाणी के क्लिप्स दिखाए जाते हैं, जहां वे इस ऑपरेशन के बारे में कमेंट करते हुए दिखते हैं. इस फिल्म की खासियत एक्शन सीक्वेंस हैं, जो बेहद बारीक़ी से फिल्माए गए हैं और ये फिल्म में उत्सुकता को बनाए रखते हैं. अगर मेकर्स फिल्म में थोड़े कम डॉयलॉकबाज़ी करवाते तो फिल्म और अच्छी बन सकती थी, लेकिन आम पब्लिक को एक्ट्रेक्ट करने के लिए यह भी कुछ हद तक ज़रूरी था. जॉन अब्राहम का काम कमाल का है. मृणाल ठाकुर ने जॉन अब्राहम की पत्नी का किरदार निभाया है. रवि किशन और नोरा फतेही का रोल छोटा, मगर इंपॉर्टेंट है. राजेश शर्मा ने डिफेंस लॉयर का किरदार निभाया है.  निर्देशक निखिल आडवाणी और लेखक रितेश शाह ने सभी घटनाओं को पिरो अच्छी कहानी पेश की है, जो दर्शकों को बांधे रखने में सफल रही है. सिनेमाटोग्राफर शॉमिक मुखर्जी के ऐक्शन सीक्वेंस पूरी फिल्म की जान हैं. नोरा फतेहा का साकी-साकी और जॉन अब्राहम के पंचेज…इस फिल्म में सभी के लिए कुछ न कुछ है.

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Published by
Shilpi Sharma

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