छोटी-छोटी बातें चुभेंगी, तो भला बात कैसे बनेगी? (Overreaction Is Harmful In Relationship)

ज़ुबान का वार ही काफ़ी होता है किसी भावुक व्यक्ति के मन को आहत करने के लिए. उनका अति संवेदनशील (Overreaction In Relationship) होना और छोटी-छोटी बातों को दिल पर ले लेना, अक्सर उनके तन-मन दोनों पर तकलीफ़ पहुंचाता है. लेकिन यदि क़दम-क़दम पर इसी तरह छोटी-छोटी बातें चुभती रहेंगी, तो जीना मुश्किल हो जाएगा. 


जिस तरह हमें छोटी-छोटी बातों से भी ढेर सारी ख़ुशियां मिलती हैं और दिल को सुकून मिलता है, ठीक उसी तरह हमारे जीवन से जुड़ी ऐसी कई छोटी-छोटी बातें भी होती होती हैं, जो हमें दुखी और तनावग्रस्त कर देती हैं. जबकि खुले दिमाग़ और सकारात्मक सोच के साथ देखें, तो उन बातों का उतना महत्व भी नहीं रहता. जिस तरह ज़िंदगी को ख़ुशनुमा बनाने के लिए बड़ी नहीं, बल्कि छोटी-छोटी ख़ुशियां मायने रखती हैं, उसी तरह कई छोटी-छोटी बातें ऐसी भी होती हैं, जिनसे जाने-अनजाने में हम आहत हो, ख़ुद के लिए ही फ़िज़ूल की परेशानी खड़ी कर देते हैं.
साइकोलॉजिस्ट रोहिणी कुंदर के अनुसार, ओवर सेंसिटिव होना ग़लत नहीं है, पर स्थिति-परिस्थितियों में आपकी क्रिया-प्रतिक्रियाएं काफ़ी मायने रखती हैं. क्योंकि किसी भी बात या फिर माहौल पर की गई आपकी प्रतिक्रिया और व्यवहार आपके जीवन की बेहतरी और ख़ुशियों को अधिक प्रभावित करती हैं.
हां, यह भी मानी हुई बात है कि हम सभी कहीं न कहीं भावुक होते ही हैं. हम सभी पर अच्छी-बुरी बातों का प्रभाव पड़ता है. बस, अंतर इतना है कि कुछ लोग ओवर सेेंसिटिव होते हैं, तो उन पर बातेें बुरी तरह से हावी रहती हैं और अधिक प्रभाव डालती हैं और दूसरी तरफ़ ऐसे लोगों की भी कमी नहीं जो छोटी-छोटी बातों के प्रति लापरवाह होते हैं और उन्हें अनदेखा कर देते हैं.
अतः इस बात का ख़्याल रखें कि ओवर सेंसिटिव होना कभी-कभी आपकी व्यक्तिगत और प्रोफेशनल लाइफ दोनों को ही प्रभावित करती हैं.

बातों को दिल पर लेना और परेशान रहना
हाल ही के एक रिसर्च के अनुसार, यदि ओवर सेंसिटिव लोगों के काम के परफॉर्मेंस में उनकी सेल्फ एस्टीम को जोड़ा जाता है, तो वे परेशान से हो जाते हैं.
मनोचिकित्सक अमरीश श्रीवास्तव का मानना है कि जो व्यक्ति ओवर सेंसिटिव होते हैं, उनमें नकारात्मक बातों या सलाह को लेकर इतना अधिक संवेदनशीलता होती है कि ये उनके दिमाग़ के उसी हिस्से में रिकॉर्ड हो जाती हैं, जहां शारीरिक दर्द के लिए जगह होती है. इसलिए वे दिनभर में कई बार छोटी-छोटी बातों को लेकर अपसेट होते रहते हैं. दरअसल, इस रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि प्रैक्टिकल अप्रोच के नाम पर मेट्रोज़ में लोगों के बिहेवियर में इतनी बेरूखी है कि सेंसिटिव व्यक्ति ख़ुद को बदले बगैर सुकून से जी नहीं सकते. वैसे भी देखा गया है कि जो लोग अति संवेदनशील होते हैं, वे स्वयं को ही अधिक तनाव और दर्द देते रहते हैं. उन्हें मूड डिसऑर्डर से भी अधिक तकलीफ़ पहुंचती है.

क्रिएटिविटी की ओर ध्यान दें
ओवर सेंसिटिव(Overreaction In Relationship) व्यक्तियों को चाहिए कि वे अपनी संवेदनशीलता को क्रिएटिव कामों के लिए सहेजकर रखें. इससे न केवल आपका दिलो-दिमाग़ व्यस्त रहता है, बल्कि छोटी-छोटी बातों पर भी अधिक ध्यान नहीं जाता.
इस संदर्भ में साइकोलॉजिस्ट डॉ. राजीव आनंद का कहना हैं कि यदि आप अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना सीख लें, तो आपकी कई मुसीबतें आसान हो सकती हैं. बेहतर होगा कि आप बेवजह किसी के व्यंग्य-कटाक्ष आदि को गंभीरता से लेने की बजाय अनदेखा कर दें. आमतौर पर ओवर सेंसटिव लोग तब अधिक आहत होते हैं, जब उन्हें लगता है कि उन्हें ग़लत तरी़के से कोई बात कहीं गई है या उन पर कमेंट किया गया है. अपने पीठ पीछे की गई बातों को सुनकर भी वे घंटों परेशान हो रहते हैं.
ऐसी स्थिति में आप इस तरह से सोच सकते हैं कि जिसकी बातों से आप आहत महसूस कर रहे हैं, हो सकता है कि वह ख़राब मूड में रहा हो या उसने सोच-समझकर कोई बात न कही हो.

आत्मविश्‍वास हैै बेहद ज़रूरी
सेंसिटिव(Overreaction In Relationship) होने से बचने के लिए आपको अपने कॉन्फिडेंस लेवल पर काम करने की ज़रूरत है. मनोवैज्ञानिक डॉ. जीतलाल साहू के अनुसार, “यह रातोंरात नहीं हो सकता, लेकिन प्रैक्टिस से आप ऐसा कर सकते हैं. अगली बार जब किसी का कमेंट ख़राब लगे, तो दुखी या उदास होने की बजाय उसे सिंपली जवाब दे दें. और उसी उधेड़बुन में न उलझे रहें. किसी भी बात को पर्सनली न लें. ऑफिस हो या घर, जिसकी जो चीज़ बुरी लगे, उसे वहीं पर स्पष्ट कर दें. कई बार लोग आपके बारे में ऐसी बातें भी कह देते हैं, जो आपने कहीं नहीं होती है. जिसने कहा है कि उसे उसी समय बुलाकर तुरंत बातों को सुलझा लें. इससे एक तो वह आगे आपके बारे में कुछ भी बोलने से पहले सोचेगा, दूसरा चीज़ें स्पष्ट हो जाने से आपको वे बात लंबे समय तक परेशान नहीं करेगी.

ख़ुद से बात करें
यदि आप हमेशा ख़ुश रहना चाहते हैं, तो ख़ुद से बात करने की आदत डालें. अपना आंकलन ख़ुद करें और इसका अधिकार किसी को न दें. यदि आप अपने विचारों में बदलाव लाएंगे, तो ख़ुद-ब-ख़ुद फीडबैक मिलने शुरू हो जाएंगे. इससे आपको अपने काम में परफेक्शन लाने में भी आसानी रहेगी.
साइकोलॉजिस्ट अर्चना जम्बूरिया इस बात पर रोशनी डालते हुए कहती हैं कि हर काम में परफेक्शन की तलाश भी सही नहीं है. इसके चक्कर में ढेर सारी मेहनत के बाद भी ज़िंदगी में जब कुछ मनचाहा नहीं होता, तब आप तनाव और अवसाद से घिर जाते हैं. और हां, अपने सेंसिटिव होने के टैग पर ख़राब महसूस करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि यह ख़ूबी यह भी
जताती है कि आप दूसरों की भावनाओं की भी क्रद करते हैं.

संवेदनशीलता में महिलाएं सबसे आगे
एक सर्वे के मुताबिक़, महिलाएं पुरुष के मुक़ाबले ज़्यादा संवेदनशील होती हैं. इसलिए छोटी-छोटी बातों पर वह तुरंत अपनी प्रतिक्रियाएं देती हैं. अमूमन वो किसी से भी भावनात्मक रूप से अधिक जुड़ जाती हैं. ऐसे में जब उन्हें कोई चीज़ ग़लत लगती है, तो वे तुरंत प्रतिक्रिया देती हैं. भले ही समस्या दूसरे की ही क्यों न हो, पर वे स्वयं भी परेशान हो जाती हैं. यदि आपके साथ भी ऐसा ही कुछ है, तो अपनी इस आदत में बदलाव लाएं. सेंसिटिव होना बुरा नहीं, लेकिन उसी के लिए सेंसिटिव हो, जो इसके लायक हो. नहीं तो, आपके इस स्वभाव का फ़ायदा घर-परिवार के लोगों के अलावा आपके बॉस से लेकर कलीग तक उठा सकते हैं.

स्मार्ट भी होते हैं सेंसिटिव लोग
यदि आप अपने संवेदनशील स्वभाव को लेकर परेशान हैं, तो इसके फ़ायदे जानकर आप ज़रा ख़ुश भी हो जाएं. शोधों के अनुसार, ऐसे लोग शॉपिंग करने में बहुत स्मार्ट होते हैं और उनकी पसंद की सभी तारीफ़ करते हैं. वहीं, इन्हें म्यूज़िक की भी अच्छी जानकारी और समझ होती है. वहीं ये आर्ट और लिट्रेचर को भी पसंद करनेवाले होते हैं और अपनी संवेदनशीलता की वजह से दूसरों की बातों को बेहतरीन तरी़के से समझ पाते हैं. इसलिए इनके क़रीबी भी अक्सर अपनी समस्याओं को इनसे शेयर करते हैं.

– ऊषा गुप्ता

Meri Saheli Team :
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