रिश्तेदारों से कभी न पूछें ये 9 बातें (9 Personal Questions You Shouldn’t Ask To Your Relatives)

कहते हैं ‘शब्दों के दांत नहीं होते हैं, लेकिन शब्द जब काटते हैं, तो दर्द बहुत होता है.’ कुछ ऐसी ही कैफ़ियत होती है उनके साथ, जिनके रिश्तेदार कभी अनजाने में, तो कभी जानबूझकर ऐसी बातें या सवाल पूछ बैठते हैं, जो अक्सर उन्हें चुभ जाती हैं या असहज बना देती हैं. इसलिए ज़रूरी है कि रिश्तेदारों से बात करते व़क्त हम कुछ बातों का ख़ास ख़्याल रखें, ताकि बातें बुरी नहीं, बल्कि अच्छी लगें और रिश्ते भी मधुर रहें.

Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives

रिश्ते बहुत नाज़ुक होते हैं इसलिए उन्हें बहुत ही प्यार व सावधानी के साथ संभालकर रखते हैं, क्योंकि रिश्तों में पड़ी छोटी-सी दरार भी आपके रिश्ते को प्रभावित कर सकती है. अक्सर रिश्तेदारों के बारे में सबकुछ जानने की उत्सुकता में लोग ऐसी बातें पूछ बैठते हैं, जो आमतौर पर नहीं पूछनी चाहिए. हर रिश्ते की अपनी मर्यादा होती है, जिसे हर किसी को याद रखनी चाहिए और ऐसी बातें अवॉइड करनी चाहिए, ताकि आपके रिश्ते न प्रभावित हों और न ही दूसरों को दुख पहुंचे.

1. बेटी की शादी की बात

अगर किसी के घर में शादी के लायक बेटी हो, तो मां-बाप को बेटी की शादी कब कर रहे हैं? कब तक घर में बिठाकर रखेंगें, जैसी बातें अक्सर सुनने को मिल जाती हैं. भले ही आप यह सवाल अपने होने के अधिकार से पूछते हैं, पर कहीं न कहीं यह बात उन्हें अच्छी नहीं लगती, क्योंकि जितनी फ़िक़्र आपको है, उससे कहीं ज़्यादा वो इस बात के फ़िक़्रमंद होंगे, क्योंकि वो उनकी बेटी है. आजकल लड़कियों का अपने पैरों पर खड़े होना बहुत ज़रूरी हो गया है, जिसे सभी मां-बाप समझते हैं और यही वजह है कि उन्हें जल्दी शादी के लिए बाध्य भी नहीं करते. इसलिए इस विषय को न छेड़ना ही ज़्यादा अच्छा होगा.

2. गुड न्यूज़ की बात 

शादी को सालभर हुए नहीं कि रिश्तेदार ख़ुश ख़बरी की बात करने लगते हैं. गुड न्यूज़ कब सुना रहे हैं? यह सवाल आपको अक्सर सुनने को मिल जाएगा. जहां एक ओर प्रेग्नेंसी किसी भी व्यक्ति का बहुत ही निजी मामला होता है, जिसकी प्लानिंग का अधिकार पति-पत्नी को है, वहीं दूसरी ओर बदलते समय और लाइफस्टाइल के कारण इंफर्टिलिटी के मामले तेज़ी से बढ़े हैं. हो सकता है, शादी के बाद भी कंसीव न कर पाने के कारण कपल पहले से ही परेशान हो और ऐसे में रिश्तेदारों का बार-बार इस विषय में पूछना उन्हें और परेशान करता हो. एक शुभचिंतक होने के नाते अपने रिश्तेदारों से इस विषय पर ज़्यादा सवाल कभी न करें.

3. फैमिली इन्कम की बातें

घर में कौन कितना कमाता है? यह रिश्तेदारों के लिए हमेशा ही कौतुहल का विषय होता है. दरअसल, सैलरी की जानकारी से वो फैमिली इन्कम का अंदाज़ा लगाते हैं, ताकि दूसरे रिश्तेदारों से तुलना कर सकें. बेटों-बेटी की इन्कम में लोगों को ज़्यादा दिलचस्पी रहती है, ताकि अपने बच्चों से तुलना करके जान सकें कि किसके बच्चे ज़्यादा सफल हैं, ताकि सबके सामने शो ऑफ का एक और मौक़ा मिल सके. हर किसी के फाइनेंशियल हालात दूसरों से अलग होते हैं, ऐसे में ज़्यादातर लोग फैमिली इन्कम के बारे में डिस्कस करना उचित नहीं समझते. इसलिए समझदारी ऐसे विषयों को न छेड़ने में ही है.

4. बेटे की नौकरी की बात

आपके बेटे की नौकरी कहीं लगी कि अभी भी घर पर ही है? ये सवाल उन रिश्तेदारों से अक्सर पूछे जाते हैं, जिनके बच्चे स्ट्रगल कर रहे होते हैं. हर मां-बाप की ख़्वाहिश होती है कि उनके बच्चे जो भी करें, उसमें उन्हें कामयाबी मिले. अपने बच्चों के लिए ऐसी बातें सुनना किसी को भी पसंद नहीं होता, इसलिए ऐसी चुभनेवाली बातें हमेशा अवॉइड करें. अगर आप सचमुच में फ़िक़्रमंद हैं, तो अपनी बात को सही तरी़के से पूछें.

5. रोमांटिक या पर्सनल लाइफ की बातें

पति-पत्नी के बीच की निजी बातों को कुरेद-कुरेदकर पूछना कुछ लोगों की आदत में शुमार होता है. ख़ुद को उनका ज़्यादा क़रीबी जताने के चक्कर में रिश्तेदार अक्सर ऐसे सवाल
पूछ बैठते हैं, जिन्हें प्राइवेसी में दख़लंदाज़ी माना जाता है. रोमांस पति-पत्नी के बीच का बहुत ही निजी मामला है. ऐसे सवाल पूछकर आप अपनी इमेज ख़ुद ख़राब करते हैं, क्योंकि ऐसे सवालों के जवाब देना कोई पसंद नहीं करता. नतीजतन लोग आपसे कतराने लगते हैं. अगर आप नहीं चाहते कि लोग आपके साथ भी ऐसा व्यवहार हो, तो अपने रिश्ते की अहमियत बनाए रखें और ऐसी बातों से हमेशा बचें.

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Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives
6. बहू के मायकेवालों की बातें

हमारा समाज भले ही कितना भी मॉडर्न क्यों न हो जाए, पर बहुओं के लिए लोगों की सोच अभी भी पुरानी ही है. उसके मायकेवालों के बारे में जानना ज़्यादातर रिश्तेदारों का प्रिय शगल होता है. उन्हें हमेशा इस बात की फ़िक़्र लगी रहती है कि बहू  की बहन की शादी हुई या नहीं, उसका भाई काम पर लगा या नहीं और उससे भी ज़्यादा त्योहार या शादी-ब्याह के मौक़ों पर बहू के मायके से कितना सामान आया. तोहफ़ों का लेन-देन हो या फिर अपनों के बारे में तीखी बातें सुनना, किसी भी बहू को पसंद नहीं आता. हर लड़की चाहती है कि ससुराल के लोग उसके परिवार का सम्मान करें और उन्हें भी वही इज़्ज़त मिले, जो दूसरों को मिलती है. एक लड़की के लिए उसका परिवार उसका सम्मान होता है, ऐसे में उन पर तीखे सवाल उसके सम्मान को चोट पहुंचाते हैं, जो आजकल की आत्मनिर्भर व आत्मविश्‍वासी बहुएं बर्दाश्त नहीं करती और यही वजह है कि रिश्तों में मनमुटाव बढ़ने लगता है. ऐसे में रिश्तों को बचाना आपके अपने हाथ में है.

7. प्रॉपर्टी के बंटवारे की बातें

जितनी दिलचस्पी रिश्तेदारों की फैमिली इन्कम में होती है, उतनी ही प्रॉपर्टी के बंटवारे में भी होती है. प्रॉपर्टी में क्या-क्या है?, किसको क्या देने की सोच रहे हैं?, वसीयत बनाई या नहीं? जैसी बातें लोग केवल परिवार या बेहद क़रीबी लोगों से ही शेयर करते हैं. प्रॉपर्टी से जुड़ी बातें बहुत ही महत्वपूर्ण व प्राइवेट होती हैं, जिन्हें अक्सर लोग गोपनीय रखना पसंद करते हैं. इसलिए उनकी गोपनियता में कभी सेंध न लगाएं. अगर वो आपको इस लायक समझेंगे, तो ख़ुद ही सारी बातें शेयर करेंगे. पर अगर वो ऐसा नहीं करते, तो आप ख़ुद से ऐसे निजी मामलों को न कुरेदें. सभी रिश्तेदारों को अपने रिश्तों की सीमा पता होनी चाहिए और यह भी कि किससे क्या पूछना है और क्या नहीं.

8. पुराने हादसों की बातें

रिश्तेदारों से बातचीत करते व़क्त ज़्यादातर लोग औपचारिकता का ध्यान ही नहीं रखते और अक्सर कुछ ऐसी बातें कह जाते हैं, जिन्हें अक्सर लोग भूलने में ही भलाई समझते हैं. जाने-अनजाने किसी पुराने हादसे या ज़ख़्मों को कुरेदना अच्छी बात नहीं. ऐसी बातों से सभी को बचना चाहिए.

9. दूसरी शादी हो, तो पहली शादी की बातें

हर कोई चाहता है कि उसका वैवाहिक जीवन ख़ुशहाल हो, पर हर किसी की क़िस्मत इतनी अच्छी नहीं होती. अक्सर हादसे ज़िंदगी की दिशा बदल देते हैं और इंसान को अपनी ज़िंदगी को एक नया मोड़ देना पड़ता है. ऐसे में दोबारा नई गृहस्थी की शुरुआत करनेवालों से कभी भी उनकी पिछली शादी के बारे में नहीं पूछना चाहिए. तुम्हारी पहली शादी क्यों टूटी? जैसे सवाल करके किसी की दुखती रग पर हाथ न रखें.

रिश्तों में लाइन ड्रॉ करना बहुत ज़रूरी है

साइकोलॉजिस्ट डॉ. चित्रा मुंशी के अनुसार, “दूसरों के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानने की उत्सुकता हर इंसान में होती है. हमारे समाज में बड़े-बुज़ुर्ग छोटों से निजी से निजी सवाल पूछना अपना हक़ समझते हैं और साथ ही यह भी जताने की कोशिश करते हैं कि हमें तुम्हारी कितनी परवाह है. दरअसल, वो ऐसा इसलिए करते हैं, क्योंकि उन्होंने अपने आस-पास वही देखा है और बचपन से वही सीख पाई है, जबकि आज ज़माना बदल रहा है. नई पीढ़ी कुछ मामलों में दख़लंदाज़ी पसंद नहीं करती है और वो कहीं न कहीं सही भी है, क्योंकि कुछ मामले इतने निजी होते हैं कि उनके बारे में दूसरों द्वारा बार-बार टोका जाना किसी को भी पसंद नहीं होता. इसलिए बदलते ज़माने के साथ आज हमें अपनों की
प्राइवेसी का भी सम्मान करना चाहिए और रिश्तों की मर्यादा को बनाए रखने के लिए एक लाइन ड्रॉ करना बहुत ज़रूरी हो गया है. हालांकि अभी भी 1-2% लोग ही हैं, जो सेंसिटिव होते हैं और जिन्हें ऐसी बातें बुरी लगती है, वरना 98% तो मानकर ही चलते हैं कि उनसे ऐसे सवाल किए जाएंगे और वो इसके लिए तैयार रहते हैं. पर इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं कि उन्हें ऐसी बातें बुरी नहीं लगती, पर वो उनसे निपटना सीख जाते हैं.”

जहां ज़्यादातर लोग कौतुहलवश ऐसे सवाल करते हैं, वहीं कुछ प्रतिशत लोग ऐसे भी हैं, जो केवल अपनी महत्ता दिखाने के लिए, दूसरों पर दबाव बनाए रखने व कंट्रोल करने की भावना से ऐसा करते हैं. इसलिए बातों से बढ़कर ये बातें कभी-कभी तानों और कटाक्ष में तब्दील हो जाती हैं. ऐसे लोगों के साथ आपको डील करना सीखना होगा. उनकी बातों पर कभी भी न ग़ुस्सा करें, न अपना मूड ख़राब करें और न ही दुखी हों, क्योंकि यह उनकाव्यक्तित्व है, जिसे आप बदल नहीं सकते. ऐसे सवाल ज़्यादातर महिलाओं से ही पूछे जाते हैं, क्योंकि उन्हें सॉफ्ट टारगेट माना जाता है और जो बातें महिलाओं को सबसे ज़्यादा प्रभावित करती हैं, वो बच्चों व तलाक़ से जुड़ी होती हैं. इसलिए महिलाएं अपने आप को मना लें कि ऐसा तो होना ही है. ख़ुद को मानसिक तौर पर हमेशा तैयार रखें, ताकि ये बातें न आपको प्रभावित करें, न ही आपके रिश्ते को.

– सुनीता सिंह

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