रियो ओलिंपिक्स… संघर्ष, पर आशाएं भी कम नहीं.

दीपा करमाकर- जय हो!!!

उत्तर-पूर्व राज्य त्रिपुरा की दीपा ने जिम्नास्टिक्स खेल में भारत को एक नई ऊंचाई दी. उन्होंने जिम्नास्टिक्स वॉल्ट इवेंट के फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया.
+ 22 साल की दीपा ऐसा करनेवाली देश की पहली जिम्नास्ट हैं.
+ उन्होंने महिलाओं के लिए सबसे जोख़िभरा माना जानेवाला प्रोडुनोवा वॉल्ट-डबल फ्रंट
समरसाल्ट करके हर किसी को आश्‍चर्यचकित कर दिया.
+ दीपा दुनिया की उन पांच महिला जिम्नास्टिक्स में से एक हैं, जो सफलतापूर्वक प्रोडुनोवा वॉल्ट कर पाती हैं.

दीपा की उपलब्धियां

दीपा ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करनेवाली पहली भारतीय महिला जिम्नास्ट हैं.
वे चर्चा में पहली बार तब आईं, जब उन्होंने साल 2014 में ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था.
2015 में एशियन चैंपियनशिप (हिरोशिमा) में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता.
इसके अलावा वर्ल्ड चैंपियशिप के फाइनल राउंड में पांचवें स्थान पर रहीं.
दीपा अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं.

संघर्ष भरा सफ़र

दीपा के फ्लैटफुट के कारण कभी उनमें अरुचि दिखानेवाले उनके कोच बिस्वेस्वर नंदी आज दीपा पर गर्व महसूस कर रहे हैं. वे दीपा की मेहनत-लगन और निरंतर प्रैक्टिस करते रहने की प्रतिबद्धता से बेहद प्रभावित हैं. प्रेरणास्त्रोत बन गई दीपा ने आज भारतीय जिम्नास्ट में कुछ कर गुज़रने का जज़्बा भर दिया है.
देशवासियों की अपार उम्मीदों के कारण दबाव से बचने के लिए दीपा के कोच ने उन्हें उनके कमरे और प्रैक्टिस करने तक ही सीमित रखा है. वे दीपा को उनके पैरेंट्स के अलावा किसी से भी मिलने नहीं दे रहे और दीपा को भी इसमें कोई परेशानी महसूस नहीं हो रही, क्योंकि वो सतत फाइनल की प्रैक्टिस में लगी हुई हैं.

जीत से दो क़दम दूर…

14 अगस्त को फाइनल में दीपा के साथ विभिन्न देश के 8 प्रतियोगी होंगे, जिसमें अमेरिका, कोरिया, रूस, कनाडा, उज़्बेकिस्तान,
स्विट्ज़रलैंड और चीन शामिल है.
सिमोन बाइल्स, मारिया पसेका, जोंग उन होंग जैसी बेहतरीन जिम्नास्ट्स के साथ उनका कड़ा मुक़ाबला रहेगा.
बकौल दीपा के मुझ पर फाइनल का कोई दबाव नहीं है, मैं अपना बेस्ट देने की कोशिश करूंगी.

इतिहास पर एक नज़र

ओलिंपिक्स में अब तक भारत के केवल 11 पुरुष जिम्नास्ट ने ही हिस्सा लिया है.
इनमें साल 1952 में 2, 1956 में 3, 1964 में 4 जिम्नास्ट थे.
साल 1964 के बाद दीपा पहली भारतीय हैं, जिन्होंने जिम्नास्टिक्स के फाइनल में जगह बनाई है.
साथ ही यह पहला मौक़ा होगा जब भारतीय जिम्नास्ट मेडल के रेस में है.

हम सभी की तरफ़ से उन्हें फाइनल के लिए ऑल द बेस्ट!!

सचिन तेंदुलकर- आप अपने उपलब्धियों के चलते युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं.

Meri Saheli Team :
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