लो ब्लडप्रेशर के रिस्क फैक्टर्स(Risk factors of low blood pressure )

ज़्यादातर लोग लो ब्लड प्रेशर को उतनी गंभीरता से नहीं लेते, जितना हाई ब्लड प्रेशर को. उन्हें अंदाज़ा ही नहीं कि लो बीपी भी ख़तरनाक हो सकता है. इसलिए ज़रूरी है कि समय रहते इसका सही ट्रीटमेंट करवाया जाए.

क्या है लो ब्लड प्रेशर?

लो ब्लड प्रेशर को हाइपोटेंशन भी कहा जाता है. सामान्य तौर पर किसी भी व्यक्ति का नॉर्मल ब्लड प्रेशर 120/80 होता है. इससे थोड़ा-बहुत ऊपर-नीचे चलता है, पर अगर आपका बीपी 90/60 या उससे भी कम है, तो आपको लो ब्लड प्रेशर की समस्या है. इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए हमने बात की डॉ. जगदीश केनी से.

कारण

प्रेग्नेंसी: प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी महिला का सर्कुलेटरी सिस्टम बहुत तेज़ी से बढ़ जाता है, जिसके कारण ब्लड प्रेशर लो हो जाता है. पर प्रेग्नेंसी के दौरान यह नॉर्मल होता है. बच्चे के जन्म के साथ ही बीपी सामान्य लेवल पर आ जाता है. अगर किसी महिला का बीपी बहुत ज़्यादा लो है, तो उसे रेग्युलर चेकअप की ज़रूरत पड़ती है.
हार्ट प्रॉब्लम्स: हार्ट वाल्व प्रॉब्लम्स, हार्ट अटैक व हार्ट फेलियर के कारण भी बीपी लो हो जाता है.
इंडोक्राइन प्रॉब्लम्स: थायरॉइड, एडिसन्स डिसीज़, लो ब्लड शुगर और कभी-कभी डायबिटीज़ के कुछ मामलों में भी बीपी लो हो जाता है.
डीहाइड्रेशन: शरीर में पानी की कमी के कारण बीपी लो हो जाता है. बुख़ार, उल्टी, डायरिया आदि के कारण डीहाइड्रेशन होता है. ऐसे में लिक्विड डायट पर ख़ास ध्यान दें.
ब्लड लॉस: किसी बड़ी इंजरी या अंदरूनी रक्तस्राव के कारण शरीर में अचानक ख़ून की कमी हो जाती है, जिससे रक्तचाप निम्न हो जाता है.
पोषण की कमी: शरीर में विटामिन बी12 और आयरन की कमी के कारण एनीमिया हो जाता है, जिससे आपका शरीर पर्याप्त मात्रा में रेड ब्लड सेल्स नहीं बना पाता और ब्लड प्रेशर लो हो जाता है.
दवाइयां: हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट प्रॉब्लम्स, पार्किंसन्स डिसीज़, डिप्रेशन की गोलियां या पेनकिलर दवाइयां ज़्यादा लेने से बीपी लो हो सकता है. यौन शक्ति बढ़ानेवाली दवाइयां, जैसे- वियाग्रा लेनेवाले लोग अगर नाइट्रेट बेस्ड सॉरबिट्रेट जैसी दवाएं भी साथ लेते हैं, तो उससे ख़तरनाक तरी़के से बीपी लो हो सकता है.

इसके अलावा चक्कर आने से, डेंगू, मलेरिया, बहुत ज़्यादा इंफेक्शन होने से, अचानक सदमा लगने से, कोई डरावना दृश्य देखने या ख़बर सुनने से भी बीपी लो हो सकता है.

लक्षण:

थकान, कमज़ोरी, चक्कर आना, धुंधला दिखाई देना, त्वचा में पीलापन, शरीर ठंडा पड़ जाना, डिप्रेशन, जी मचलाना, प्यास लगना, तेज़ रफ़्तार से आधी-अधूरी सांसें आना आदि.

क्यों ख़तरनाक है लो बीपी?

अगर आपका बीपी लो है और आप समय पर इसका सही इलाज नहीं करवा रहे, तो आप नीचे दिए गए किसी भी ख़तरे का शिकार हो सकते हैं.

– एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ अगर आपको लो बीपी है और आपमें कुछ दिनों से चक्कर, थकान, उबकाई जैसे लक्षण नज़र आ रहे हैं, तो यह काफ़ी गंभीर हो सकता है. इसके कारण आप हार्ट प्रॉब्लम्स और किडनी फेलियर के शिकार भी हो
सकते हैं.

– इसके अलावा यह आपके नर्वस सिस्टम व ब्रेन को भी डैमेज कर सकता है.

– प्रेग्नेंसी में अगर लो बीपी का ध्यान न रखा गया, तो स्टिल बर्थ (कोख में बच्चे की मृत्यु) जैसे कॉम्प्लीकेशन्स हो सकते हैं.

– स्ट्रोक, डेमेन्शिया (मनोभ्रम), ब्रेन डिसऑर्डर, किडनी डिसीज़ आदि से पीड़ित हो सकते हैं.

– चक्कर आने से कई बार लोग गिर सकते हैं और उन्हें गंभीर चोट भी आ सकती है.

– इसके कारण शॉक (सदमा पहुंचना) भी लग सकता है, जिससे शरीर के कई ऑर्गन्स बुरी तरह डैमेज हो सकते हैं और यह प्राणघातक भी हो सकता है.

– अंदरूनी रक्तस्राव के कारण ब्लड इंफेक्शन की आशंका बढ़ जाती है.

क्या करें?

– डॉक्टर हमेशा खाने में नमक की मात्रा कम करने की सलाह देते हैं, पर लो बीपी से पीड़ित लोगों को सोडियम की मात्रा थोड़ी ज़्यादा ही रखने की सलाह दी जाती है. अगर आपको ज़्यादा नमक पसंद नहीं, तो आप सोया सॉस आदि ले सकते हैं, पर नमक की मात्रा बढ़ाने से पहले अपने डॉक्टर से कंसल्ट ज़रूर कर लें.

– भरपूर पानी पीएं. हालांकि यह सलाह तो सभी के लिए है, क्योंकि पर्याप्त पानी हर किसी के लिए उतना ही ज़रूरी है, पर अगर आपको लो बीपी है, तो यह बहुत ज़्यादा फ़ायदेमंद हो सकता है.

– पैरों में ब्लड प्रेशर बढ़ाने के लिए कंप्रेशन स्टॉकिंग्स का इस्तेमाल करें.

– जब बीपी अचानक लो हो जाए, तो पेशेंट को तुरंत फर्स्ट एड दें. पेशेंट को तुरंत पीठ के बल लिटाकर पैरों के नीचे 2 तकिए रखें, इससे ब्रेन की तरफ़ ब्लड सप्लाई बढ़ जाती है और उसे राहत मिलती है.

– अल्कोहल से दूर रहें.

– बहुत ज़्यादा देर तक खड़े न रहें.

– बहुत ज़्यादा देर तक बैठे या लेटे रहने के बाद अचानक खड़े न हो जाएं. धीरे-धीरे उठें, इससे बीपी अचानक से बढ़ता-
घटता नहीं.

– चलते व़क्त ध्यान रखें, ताकि चक्कर खाकर गिरने से बच सकें.

– एक्सरसाइज़, योगा, स्विमिंग, वॉकिंग और साइकलिंग से रोज़ाना ब्लड प्रेशर को रेग्युलेट कर सकते हैं.

– अपने खाने में कार्बोहाइड्रेट युक्त पदार्थों, जैसे- आलू, चावल, बे्रड, पास्ता आदि की मात्रा कम कर दें.
श्र लो बीपी वालों के लिए हंसना बहुत फ़ायदेमंद होता है. सुबह-सुबह ज़ोर-ज़ोर से हंसने से आपके ब्लड प्रेशर को नॉर्मल होने में मदद मिलती है.

बचाव

– ज़्यादा से ज़्यादा तरल पदार्थों का सेवन करें. इससे आप डीहाइड्रेशन के शिकार नहीं होंगे.

– बहुत ज़्यादा गर्म पानी से नहाने से बचें. इसके कारण शरीर का तापमान बढ़ सकता है.

– 6-8 घंटे की पर्याप्त नींद लें, क्योंकि थकान भी लो बीपी का कारण बनता है.

– नियमित अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा खाना खाएं.

– अगर आपने अभी-अभी एंटी डिप्रेशन की टैबलेट्स शुरू की हैं और खड़े होने पर सिर चकराता है या बहुत हल्का महसूस करते हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर को बताएं.

– हेल्दी डायट अपनाएं. अपने खाने में साबूत अनाज, फ्रूट्स, वेजीटेबल्स और फिश शामिल करें.

– जो लोग आउटडोर एक्टीविटीज़ ज़्यादा करते हैं या जिन्हें बहुत ज़्यादा पसीना आता है, उन्हें नींबू पानी पीना चाहिए.

– स्ट्रेस से दूर रहें और पॉज़ीटिव सोचें.

होम रेमेडीज़

– 10-15 किशमिश को सिरामिक बाउल में रातभर के लिए भिगोकर रख दें. सुबह सबसे पहले एक-एक कर किशमिश चबा-चबाकर खाएं और पानी पी जाएं.

– 7 बादाम को रातभर भिगोकर रखें. छीलकर, पीस लें और गुनगुने दूध में मिलाकर लें.

– 10-15 तुलसी के पत्तों को पीसकर छान लें. 1 टीस्पून शहद मिलाकर सुबह खाली पेट लें.

– दिन में दो बार बीटरूट और कैरेट का जूस पीएं.

– रोज़ाना एक कप ब्लैक टी लें. कैफीन ब्लड प्रेशर बढ़ाने में मदद करता है.

– लो ब्लड प्रेशर में अनार बहुत फ़ायदेमंद होता है. चाहे फ्रूट खाएं या जूस पीएं, दोनों ही लाभदायक हैं.

– पनीर हर फॉर्म में फ़ायदेमंद है, पर अगर कच्चा ही खाएं, तो और भी अच्छा है.

– प्याज़, मटर, ब्रोकोली, गाजर आदि को डायट में शामिल करें.

– हींग को तवे पर हल्का-सा भूनकर पानी के साथ लें.

– नमक-शक्कर का घोल लो बीपी वालों के लिए फायदेमंद होता है.

– रात को 2-3 अंजीर भिगोकर सुबह खाएं. डायबिटीज़ के मरीज़ स़िर्फ एक ही अंजीर खाएं.

– सुनीता सिंह

Meri Saheli Team :
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