कहानी- गृहस्थी (Short Story- Grihasthi)

उन्हें सोमेश बाबू को यूं स्त्रियों की भांति गृहस्थी चलाते देख काफ़ी आश्‍चर्य होता था. अक्सर मज़ाक में पूछ बैठते, “यार सोम, तुम ऐसे औरतोंवाले काम इतनी आसानी से कैसे कर लेते हो? तुम्हें बोरियत नहीं होती क्या?” सोमेश बाबू हंसकर कहते, “सच पूछो तो मुझे बड़ा मज़ा आता है. अपनी इच्छानुकूल भोजन बनाकर खाने … Continue reading कहानी- गृहस्थी (Short Story- Grihasthi)