बच्चों में एकाग्रता बढ़ाने के लिए स्मार्ट एक्टिविटीज़ (Smart Activities To Improve Child Concentration)

 

बच्चों की मासूमियत और चंचलता हम सभी को लुभाती है, लेकिन ऐसा भी न हो कि बच्चों की चंचलता इतनी भी न बढ़ जाए कि पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान ही न दे पाएं. सभी पैरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ाई में सबसे आगे रहे, जिसके लिए बहुत ज़रूरी है कि बच्चा पूरी तरह एकाग्र होकर पढ़ाई करे, क्योंकि एकाग्र हुए बिना अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता. सफलता के लिए एकाग्रता आवश्यक है.

 

आजकल के टेक्नोसेवी युग में टीवी, मोबाइल, वीडियो गेम्स जैसे डिवाइस आ गए हैं, जो बच्चे को विचलित करने के लिए काफ़ी हैं. इससे उनका ध्यान एक जगह नहीं टिक पाता. कई बार बच्चे के तंग करने पर हम ही उन्हें ये चीज़ें पकड़ा देते हैं और फिर शिकायत करते हैं कि बच्चे में ना तो धैर्य है और ना ही एकाग्र होने की क्षमता.
जब बच्चा 1 से 3 साल का होता है, तो उसके कौशल सीमित होते हैं. उसे दिखनेवाली हर चीज़ नई प्रतीत होती है. इससे उसका ध्यान एक साथ अनेक चीज़ों पर होता है. वह इन चीज़ों और आसपास के वातावरण को समझने की कोशिश करता रहता है. इसलिए उसका ध्यान अलग-अलग चीज़ों में बंटने लगता है.
3 से 7 साल के बच्चे में एकाग्रता बढ़ने लगती है. वह अपनी पसंद की चीज़ों पर ध्यान लगाना और नापसंद चीज़ों को इग्नोर करना सीख जाता है. यही वह समय है, जब नीचे बताई गई कुछ एक्टिविटीज़ करके खेल-खेल में ही बच्चे की समझने की क्षमता बढ़ाकर उसकी एकाग्रता बढ़ाई जा सकती है.

1. मेमरी गेम
* इस गेम को खेलने के लिए बच्चों को चीज़ों, फलों, सब्ज़ियों आदि के नाम पता होने चाहिए, तभी वे यह गेम खेल सकते हैं. इस गेम के लिए टेबल पर कुछ चीज़ें- पेन, पेंसिल, कॉपी, बुक या अन्य कोई भी चीज़ रखें. बच्चे को 30 सेकंड तक ध्यान से देखने के लिए कहें. बाद में वे चीज़ें हटा दें या उन्हें कपड़े से ढंक दें. अब बच्चे से उन चीज़ों के नाम पूछें.
* यदि ज़्यादा बच्चे खेल रहे हों, तो जो बच्चा पूरे नाम या ज़्यादा से ज़्यादा नाम बताए, उसे इनाम दें.
* इसमें बदल-बदलकर कभी फल, सब्ज़ियां, खिलौनेवाले पक्षी, जानवर या घर की चीज़ें रखी जा सकती हैं, ताकि खेल में नवीनता रहे.
फ़ायदा- इस गेम को खेलने से बच्चे में याद रखने और फोकस करने की क्षमता बढ़ती है.

2. मिसिंग लेटर/वर्ड
* बच्चे के सामने चित्रवाली या स्पेलिंगवाली क़िताब रखें. क़िताब में उसे कोई 1 चित्र या स्पेलिंग या कोई लेटर अथवा वर्ड ढूंढ़ने के लिए कहें. 30 सेकंड या चाहें, तो उससे कम समय दें.
* इसे दूसरी तरह से भी खेला जा सकता है. कुछ चीज़ों की स्पेलिंग लिखें और जान-बूझकर एक शब्द ना लिखें. बच्चे से वही मिसिंग वर्ड लिखने के लिए कहें. हां, समय अवश्य निर्धारित कर दें.
* आजकल मार्केट में ऐसे गेम्स की क़िताबें उपलब्ध हैं. इस एक्टिविटी को घर बैठे ही आसानी से करवाया जा सकता है.
फ़ायदा- मिसिंग चीज़ें/लेटर ढूंढ़ने के लिए, कम समय देने से बच्चे ज़्यादा ध्यान से ढूंढ़ते हैं. इससे उनका कान्संट्रेशन बढ़ता है.

3. अंताक्षरी
* गानों की अंताक्षरी तो सभी खेलते हैं, बच्चों के लिए अलग तरह की खेलें. अंताक्षरी किसी जानवर के नाम से शुरू करें. नाम के अंतिम अक्षर को बोलें. दूसरा बच्चा उस अक्षर से नाम कहे, फिर उसके अंतिम अक्षर को चुनकर तीसरा बच्चा कोई नाम कहे, जैसे-डॉग, गोरिल्ला, लोमड़ी आदि.
* बच्चों को अंताक्षरी का अभ्यास होने के बाद, अंताक्षरी का टाइप चुनें. कभी जानवरों की, कभी पक्षियों की, कभी फल-सब्ज़ियों, कभी लोगों के नामों की अंताक्षरी खेलें. बच्चे बहुत एंजॉय करेंगे.
फ़ायदा- इस गेम में बच्चों को बहुत मज़ा आता है. चूंकि यह बहुत तेज़ी से फटाफट खेला जाता है, अतः यह बच्चे के मस्तिष्क को उत्तेजित और प्रोत्साहित करने का कार्य करता है.

4. मिसिंग नंबर्स
* इस गेम में नंबर्स (संख्याएं) बोले जाते हैं, जिसमें जान-बूझकर एक-दो नंबर छोड़ दिए जाते हैं. इसे ही बच्चे को पहचानना है, जैसे- 3, 4, 5, 7, 9. इसमें 6 और 8 मिसिंग है. यदि बच्चा नहीं पहचान पाता, तो फिर से शुरू करें.
* अभ्यास होने पर 2 संख्याओं 12 से 19 तक मिसिंग नंबर्स खेलें. इसके बाद पहाड़ों (टेबल्स) 2, 4, 6, 8 से अभ्यास करवाएं.
फ़ायदा- इससे सोचने, याद रखने और फोकस करने की शक्ति बढ़ती है. बच्चों को तेज़ी से पहाड़े सिखाने का यह बहुत अच्छा तरीक़ा है.

5. मिसिंग थिंग्स
* बच्चे को कमरे की चीज़ें दिखाकर याद रखने के लिए कहें और उसे बाहर भेज दें. अब 1-2 चीज़ें हटा दें और उसे पहचानने के लिए कहें.
फ़ायदा- इस गेम को खेलने से, घर में या बच्चे के स्कूल बैग में एक भी चीज़ मिसिंग हो जाए, तो बच्चे को पता चल जाता है. इससे याद रखने की क्षमता बढ़ती है.

6. टंग ट्विस्टर
* पहले सरल टंग ट्विस्टर, ‘कच्चा पापड़, पक्का पापड़’ बोलने को कहें. जब बच्चे की ज़ुबान पलटने लगे, तो कठिन, ‘चंदू के चाचा ने चंदू की चाची को चांदनी रात में चांदी की चम्मच से चटनी चटाई.’ इसी तरह अंग्रेज़ी टंग ट्विस्टर की प्रैक्टिस करवाएं ‘she sells sea shells on the sea shore’. इस तरह के बहुत से टंग ट्विस्टर आपको मिल जाएंगे.
फ़ायदा- यह बहुत तेज़ी से कहना होता है. ग़लतियां होंगी, तो भी आपका बच्चा आनंद उठाएगा और सही कहने की पूरी कोशिश से ध्यान लगाएगा. इससे एकाग्रता के
साथ-साथ उसका शब्द भंडार भी बढ़ेगा.

7. अपोज़िट्स (विरुद्धार्थी)
* इस गेम में बच्चे को अपोज़िट्स कहना होता है, जैसे- मोटा-पतला, हैपी-सैड आदि. इसे खेलने के लिए आपके बच्चे को अपोज़िट्स पहले से पता होने चाहिए.
फ़ायदा- इससे एकाग्रता बढ़ने के साथ-साथ शब्दों की समझ भी बढ़ती है.

8. माइंड-बॉडी समन्वय
* बच्चों द्वारा खेला जानेवाला गेम ‘स्टेच्यू और ओवर’ बेहद फ़ायदेमंद है, जिसमें ‘स्टेच्यू’ में 1 ही स्थिति में लंबे समय तक बिना
हिले-डुले खड़ा होना होता है.
फ़ायदा- इस गेम में बॉडी और माइंड यानी शरीर और मस्तिष्क दोनों को एक साथ काम करना होता है. इससे ‘सेल्फ कंट्रोल’ बढ़ता है.
यह एक्टिविटी बॉडी और ब्रेन के बीच के नर्व (नाड़ी) संबंधों को मज़बूत करती है. इससे फोकस बढ़ता है.

9. कॉइन गेम
* इस गेम में अलग-अलग सिक्कों का ढेर बनाएं- 1, 2 या 5 के सिक्के, जिसमें से 5 सिक्के अलग निकालकर एक निश्‍चित क्रम में (1,2,5) एक के ऊपर एक रखें. बच्चे से इसी क्रम में सिक्के रखने को कहें. आप देखेंगे कि अभ्यास के बाद बहुत कम समय में वह गेम पूरा कर लेगा.
फ़ायदा- इससे बच्चे की सोचने की शक्ति, याद रखने की क्षमता और ध्यान (अटेंशन) बढ़ता है. बच्चा जितना ज़्यादा खेलेगा, उसकी स्मरणशक्ति और फोकस उतना ही बढ़ेगा.

10. उल्टा-पुल्टा
* इस खेल में बच्चे को हफ़्ते के दिन, साल के महीने, नंबर्स, इंद्रधनुष के रंग उल्टे-पुल्टे बताएं. अब उन्हें सही क्रम में बताने को कहें.
फ़ायदा- इससे याद रखने की क्षमता व एकाग्रता बढ़ती है.

11. पहेलियां (पज़ल्स)
* शुरुआत सरल पहेली से करें. बच्चे को पहेली में कोई संकेत दें और पहचानने के लिए कहें, जैसे- मैं स़फेद हूं, तुम मुझे पी सकते हो (दूध). इसी तरह सरल से कठिन पहेलियां बूझने दें.
फ़ायदा- इससे बच्चे की क्रिएटिविटी व एकाग्रता बढ़ेगी.

12. आवाज़ पहचानना
* यह छोटे बच्चों के लिए बेहतर है. बच्चे को आंख बंद करने के लिए कहें. अब पक्षियों या जानवरों की आवाज़ निकालें. इस तरह के कैसेट भी मार्केट में मिलते हैं. अब बच्चे को आवाज़ पहचानने के लिए कहें.
फ़ायदा- चूंकि इस गेम में आंखें बंद होती हैं और ध्यान पूरी तरह से आवाज़ पर होता है, तो इससे एकाग्रता बढ़ती है.

ध्यान दें…

* बच्चों से एक्टिविटीज़ करवाते समय आसपास शोर ना हो, न तो म्यूज़िक बज रहा हो, ना ही टेलीविज़न चल रहा हो.
* हमेशा शुरुआत छोटे व सरल गेम से करें, धीरे-धीरे उसे लंबा और कठिन बनाते जाएं.
* अकेले बच्चे से एक्टिविटीज़ करवाने की बजाय 1-2 बच्चे और बुला लें. आपस में स्पर्धा से बच्चे और अच्छा करने की कोशिश करेंगे और दोस्तों के होने से एंजॉय भी करेंगे.

– डॉ. सुषमा श्रीराव
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Usha Gupta :
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