कहानी- विरोध प्रदर्शन 1 (Short Story- Virodh Pradarshan 1)

कहानी, Hindi Short Story, Virodh Pradarshan

जाम में काफ़ी देर से यह टैक्सी फंसी हुई है. माहौल भांपता टैक्सी चालक अपनी सीट पर बैठा है. उसके बगल की सीट पर सोमनाथ है. पीछे की सीट पर सोमनाथ का पीलिया रोग से पीड़ित दस वर्ष का पुत्र गुड्डू अपनी मां की गोद में सिर रखकर लेटा हुआ है. सोमनाथ कभी जाम को देखते हैं, कभी शिथिल गुड्डू को.
गुड्डू ने पूछा, “पापा, हम रीवा हॉस्पिटल कब पहुंचेंगे?”
सोमनाथ ने फिर यही उत्तर दिया, “बस बेटा, पहुंचनेवाले हैं.”

कहा नहीं जा सकता कि चौराहे पर लगा जाम कब तक खुलेगा. चौराहे से सीधे जानेवाली सड़क पड़ोसी जिला रीवा और बाईं ओर जानेवाली सड़क निकटवर्ती तहसील मैहर को जोड़ती है. चौराहे पर लगे जाम के कारण रीवा और मैहर का मार्ग अवरुद्ध हो गया है.

भारी यातायात को ध्यान में रखते हुए विरोध प्रदर्शन इसी चौराहे पर किया जाता है कि यातायात सुचारु करने की गरज से सरकारी विभाग जल्दी ध्यान देगा.
यहां काफ़ी दिनों से सड़क चौड़ीकरण का काम हो रहा है. मार्क के एक ओर खाईं और खुदाई कर दी गई है. दूसरी ओर ढोके, सोलिंग, गिट्टी के ढेर लगे हैं. कभी चौमास का बहाना, कभी मटेरियल का टोटा, कभी नौ दिन चले अढ़ाई कोस जैसी शासकीय सुस्ती के चलते कयास नहीं बन रहा है कि चौड़ीकरण पूर्णता को कब प्राप्त होगा.
अधूरे निर्माण के कारण मार्ग पहले से अधिक असुविधाजनक हो गया है. सड़क दुर्घटना के मामले बढ़ते जा रहे हैं. दुर्घटनाग्रस्त हो अब तक कितने लोग चोटिल हुए, कहना कठिन है. जबकि चार लोग प्राण गंवा चुके हैं, जिनमें दो तो नवविवाहित थे. बाइक पर सवार नवविवाहित जोड़ों को ओवर लोडेड ट्रक ने यूं चपेट में लिया कि उनके अस्थि-पंजर अलग हो गए.
उनके क्षत-विक्षत शवों को चौराहे पर रखकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन.
देखते-देखते ऐसा विकट हो गया कि चारों ओर वाहन ही वाहन नज़र आ रहे हैं. सड़क चौड़ीकरण का काम तत्काल प्रभाव से पूरा हो और फरार ट्रक चालक पकड़ा जाए- जैसी मांग को लेकर नवविवाहित जोड़े के परिजन,
प्रदर्शनकारी, विपक्षी राजनीतिक दल, शवों को चौराहे पर रखकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं.
ठीक चौराहे पर रखे स़फेद चादरों से ढंके शवों को हर कोई एक नज़र देख लेना चाहता है. घटना जानने-सुनने के उपक्रम में पैदल, साइकिल सवार, बाइक, कारवाले रुककर भीड़ का हिस्सा बनते गए.

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चार पहिया वाहन चारों दिशाओं से आते गए और स्थिति जो बन गई, उसे चक्का जाम कहा जा सकता है.
ध्वनि विस्तारक यंत्र से कुछ कहा जा रहा है, जिस पर लोग ध्यान नहीं दे रहे हैं. जाम में काफ़ी देर से यह टैक्सी फंसी हुई है.

माहौल भांपता टैक्सी चालक अपनी सीट पर बैठा है. उसके बगल की सीट पर सोमनाथ है. पीछे की सीट पर सोमनाथ का पीलिया रोग से पीड़ित दस वर्ष का पुत्र गुड्डू अपनी मां की गोद में सिर रखकर लेटा हुआ है. सोमनाथ कभी जाम को देखते हैं, कभी शिथिल गुड्डू को.
गुड्डू ने पूछा, “पापा, हम रीवा हॉस्पिटल कब पहुंचेंगे?”
सोमनाथ ने फिर यही उत्तर दिया, “बस बेटा, पहुंचनेवाले हैं.”

 

 

 

 

सुषमा मुनीन्द्र

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