कहानी- अंतिम भविष्यवाणी 1 (Story Series- Antim Bhavishyavani 1)

 

‘‘कपूर साहब, बहुत गम्भीर बात है, आपका देहांत अट्ठाइस मई को पांच बज कर दस मिनट पर एक दुर्घटना से हो जाएगा. कोई वसीयत वगैरह करवानी हो तो करवा ले फिर ना…’’
‘‘ओ हितैषी के बच्चे, तू है कौन! छुपके वार करता है. मरद है तो सामने आ.’’ कपूर चीख पड़ा.

‘‘हेलो! कपूर साहब.’’
‘‘हेलो, हां मैं कपूर बोल रहा हू, साहब सुहब दा अता-पता नहीं.’’ (साहब सुहब का तो पता नहीं)
‘‘हेलो जी! मैं आपका हितैषी बोल रहा हूं.’’
‘‘कमाल हो गया भई, इस कलजुग में भी हितैषी बचे हैं. मैं तो यह भूल ही गया था. बादशाहो कहो की (क्या) हुकम है.’’
‘जी, हु़क्म तो कुछ नहीं बस…’
‘‘कपूर साहब, मुझे थोड़ी सीरियस बात करनी है.’’
‘‘पर तुसी हितैषी हो तो सीरियस गलां क्यों करना चांदे ओ?’’ (लेकिन आप तो हितैषी हैं, फिर गंभीर बातें क्यों)
‘‘कपूर साहब, बहुत गम्भीर बात है, आपका देहांत अट्ठाइस मई को पांच बज कर दस मिनट पर एक दुर्घटना से हो जाएगा. कोई वसीयत वगैरह करवानी हो तो करवा ले फिर ना…’’
‘‘ओ हितैषी के बच्चे, तू है कौन! छुपके वार करता है. मरद है तो सामने आ.’’ कपूर चीख पड़ा.
कपूर की पत्नी जो पास ही सोफे पर बैठी थी, घबराकर पूछने लगी, ‘‘क्या बात है, कौन था?’’
कपूर गुस्से में थे. कहने लगे, ‘‘कोई बदतमीज़ है साला! कहता है कि कपूर, या ने मैं अट्ठाइस मई को पांच बजकर दस मिनट पर दुर्घटना में मर जाऊंगा. अरे! माना मुझे दिल की बीमारी का वहम हो गया था, मगर अब तो सारे टेस्ट करवा लिए हैं. कोई बीमारी नहीं है.’’
बात आई-गई हो गई. फिर कोई फ़ोन नहीं आया. मगर अट्ठाईस तारीख़ को कपूर की बीवी ने एहतियातन कपूर साहब को घर से बाहर न जाने के लिए राज़ी कर लिया. पहले तो कपूर साहब अकड़े, मगर फिर बीवी की बात मान गए.
बीवी शंकित थीं कि कहीं कुछ अनहोनी ना हो जाए? बृहस्पतिवार के व्रत माता का जगराता और पीर की चादर सब मन्नतें मान चुकी थी. उसने अपने छोटे भाई रमेश को भी बुला लिया था.
वह रसोई में कपूर साहब के मनपसंद पकवान बना रही थी. कपूर साहब व उनका साला रमेश अपनी-अपनी बीयर खोले बैठे थे. हालांकि श्रीमती कपूर ने बीयर पीने से मना किया था, मगर कपूर साहब नहीं माने थे. श्रीमती कपूर बीच-बीच में खाने की चीज़ें नमकीन वगैरा रखने के बहाने कपूर साहब को देख आती थीं. साढ़े तीन बजे सब लोग खाना खाने बैठे. कपूर व रमेश तो चहक रहे थे, मगर श्रीमती कपूर परेशान थीं. रह-रहकर दीवार घड़ी देख लेती थीं. उन्हें घड़ी की सुइयां सरकती नज़र नहीं आ रही थीं.
खाना खाने के बाद सभी लॉबी में आ गए. रमेश ने टीवी खोल दिया था कि अचानक बिजली गुल हो गई. अंधेरा होने पर कपूर ने पूछा कि ‘‘इनवर्टर को क्या हुआ?’’ कपूर साहब इन्वर्टर देखने के लिए उठे तो श्रीमती कपूर ने उन्हें यह कहकर रोक दिया, ‘‘आज आपको बिजली के पास नहीं जाना है.’’ कपूर साहब झुंझलाए. मगर मन मारकर बैठ गए. फिर गर्मी से घबराकर बालकनी में चले गए. श्रीमती कपूर उनके पीछे चली आई थीं.
कपूर साहब को उनकी यह हरकत नागवार लगी थी, मगर वे चुप थे. बालकनी की रेलिंग पर हाथ रखकर झुके ही थे कि चीख मारकर गिर पड़े. श्रीमती कपूर ने देखा कि एक सांप रेलिंग पर दाएं से बाएं सरपट सरक रहा था. इसके साथ ही श्रीमती कपूर की चीख निकल गई. हड़बडाहट में वे जल्दी-जल्दी सीढ़ियां उतरने लगे और पैर फिसल जाने से गिर पड़े. सिर सामने वाली दीवार पर जा लगा .खून का फव्वारा फूट चला. श्रीमती कपूर ने अपनी हाथ घड़ी को देखा. पांच बजकर दस मिनट हुए थे. श्रीमती कपूर के भाई रमेश नौकर को उनके पास खड़ा करके एम्बुलेंस को फ़ोन करने ऊपर आए, तो फ़ोन की घंटी बज रही थी. रमेश ने फ़ोन उठाया और बोले, ‘‘हैलो!’’
‘‘उधर से आवाज आई,’’ ‘‘कपूर साहब सकुशल तो हैं?’’
‘‘नहीं, वे सीढ़ियों से गिर पड़े हैं. आप फ़ोन रखें तो मैं डॉक्टर तथा
एम्बुलेंस को बुलाऊं.’’
‘‘अब कुछ नहीं हो सकता. वे मर चुके हैं. मैंने उन्हें पहले ही बता दिया था कि वे आज पांच बजकर दस मिनट पर दुर्घटना में मर जाएंगे.’’ यह कहकर उसने फ़ोन काट दिया.
रमेश हैरान-परेशान चोगा उठाए खड़ा था. फिर उसे याद आया कि उसे टेलीफ़ोन करना है. डॉक्टर को टेलीफ़ोन करके वह सीढ़ियों के पास आया. श्रीमती कपूर होश में आ गईं, मगर कपूर साहब निश्‍चेष्ट पड़े थे. कपूर साहिब को पड़े देखकर दहाड़ मार कर रोती हुई, उनसे लिपट कर सुबकने लगीं. डॉक्टर कपूर साहब का मुआयना करने लगे. पांच-छ: मिनट मुआयना करने के बाद वे बोले, “आई एम सॉरी, ही इज़ नो मोर.
सुनकर मिसेज कपूर फिर दहाड़ मारकर रोने लगीं. लोग-बाग इकट्ठे हो गए थे. श्रीमती कपूर ने रो-रोकर सबको हितैषी वाला किस्सा सुना दिया. किसी ने बात पत्रकारों तक पहुंचा दी. फिर क्या था, आनन-फानन में ख़बर ने छपकर सारे शहर में तहलका मचा दिया. पुलिस के पास अनेक फ़ोन आए कि उन्हें भी हितैषी ने फ़ोन किया है. शहर में खलबली मच गई. आख़िर यह हितैषी कौन है जो फ़ोन पर मृत्यु की भविष्यवाणी करता है तथा भविष्यवाणियां सच भी हो रही हैं. कुल मिलाकर शहर में लगभग पचास फ़ोन आ चुके थे. कपूर साहब की मौत के बाद दो और व्यक्तियों की मौत का पता लगा.

– डॉ. श्याम

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