कहानी- अंतिम भविष्यवाणी 4 (Story Series- Antim Bhavishyavani 4)

“मैं शहर से भागना चाहता था, मगर बाहर पुलिस तैनात थी. मैंने तुम्हें फ़ोन किया तो तुम घर पर नहीं थे. लोगों ने घर का घिराव करके आग लगा दी है और मैं चाबी भी खो बैठा हूं, नहीं तो बाहर निकल जाता, तब मैं घर में नहीं जलता. मगर यह अन्तिम भविष्यवाणी भी सच हो रही है…”

वे एक के बाद एक करके कई सिगार पी चुके थे, जैसी उनकी आदत थी. अचानक वे उठे और उन्होंने शहर के सुपरिटेंडेंट से फ़ोन मिलाया तथा उन्हें बतलाया कि केस के सिलसिले में उनका एस.पी. से इसी व़़क्त मिलना ज़रूरी है और वह उनके द़फ़्तर में पहुंच रहे हैं. एस.पी.के दफ्तर जाकर उन्होंने डॉक्टर के सेलफ़ोन से आख़िरी फ़ोन कहां हुआ? यह जानकारी प्राप्त की.
पता लगा कि यह नम्बर श्री परेरा का था, जो जिम के मालिक थे. चंद्रचूड़ पुलिस को साथ लेकर परेरा के घर पहुंचे तो पाया कि परेरा की कार सामान से लदी खड़ी थी तथा परेरा घर को ताला लगा रहा था. चंद्रचूड़ ने उसे धर-दबोचा और कहा, ‘‘परेरा, तुम्हारा खेल ख़त्म हो चुका है. भागने का प्रयत्न मत करो.’’ परेरा ने हाथ झटकते हुए कहा, ‘‘तुम्हारा दिमाग़ ख़राब तो नहीं हो गया? मैं भाग नहीं रहा हूं, मैं तो दस दिन हिल स्टेशन पर रहकर अपने घर लौटा हूं और ताला खोल रहा था.’’ यह कहकर उसने फ़्लैट का ताला खोल दिया और सबको अन्दर बुला लिया. चंद्रचूड़ व एस.पी. अंदर चले गए. शेष पुलिस कर्मी बाहर मुस्तैदी से खड़े थे. अन्दर जाकर चंद्रचूड़ ने फ़्लैट को सरसरी निगाह से देखा तो लगा कि सचमुच परेरा का फ्लैट बंद था. वैसे भी परेरा अविवाहित था तथा पूरा सनकी माना जाता था. इतना अमीर होने के बाद भी वह दो कमरों के फ़्लैट में रहता था तथा कोई नौकर भी नहीं रखता था. अपना काम ख़ुद ही करता था. चंद्रचूड़ ने उसे डॉक्टर जोज़फ़ वाली घटना सुनाई, सुनकर परेरा सचमुच दुखी हो गया. अब चंद्रचूड़ और परेशान था. उसने परेरा से कहा कि अगर आप घर पर नहीं थे तो मरने से पहले डॉक्टर जोज़फ़ ने लगभग चार मिनट आपके फ़ोन पर किससे बात की परेरा अचानक फ़ोन की तरफ़ लपका. फ़ोन पर आन्सरिंग मशीन (जवाब देने व संदेश रिकार्ड करने वाला यंत्र) लगी थी. उसने मशीन को चालू कर दिया. डॉक्टर जोज़फ़ की आवाज़ आई.
‘‘हैलो! परेरा.’’
‘‘घर पर कोई नहीं है, आप अपना संदेश टेप करवा सकते हैं.’’ यह मशीन की आवाज़ थी.
‘‘ओह! माई गॉड.’’ डॉ. जोज़फ़ की चीख जैसी आवाज़ सुनाई पड़ी. वह आगे कह रहा था, अब कुछ नहीं हो सकता. फिर कुछ रुककर कहने लगा कि चलो कम से कम मैं अपनी बात रिकॉर्ड कर सकता हूं. मैंने डरकर इसे अंदर से बंद कर लिया था, मैं अब बाहर निकलना चाहता हूं, मगर चाबी खो गई है. भूल गया हूं कि कहां रख दी है? ओह! आग की तपिश यहां तक पहुंच रही है. परेरा! ये भविष्यवाणियां मैं ही करता था, मगर इसमें मेरा कसूर नहीं. असल में मेरी इको कार्डियोग्रफ़ी की मशीन ख़राब हो गई तो तुम जानते ही हो कि इलेक्टॉनिक्स में मेरी रुचि है सो, मैंने उसे ख़ुद ही ठीक कर लिया. मगर जाने कौन-सा चिप गलत लग गया कि जब भी मैं किसी व्यक्ति की इको कार्डियोग्रफ़ी करता तो रिपोर्ट के साथ-साथ यह भविष्यवाणी भी टाइप हुई मिलने लगी कि वह व्यक्ति जिसका टेस्ट हुआ है, फलां दिन तथा इस कारण से मरेगा.’’
शुरु में तो मैंने इसे मात्र एक संयोग ही समझा और किसी व्यक्ति को कुछ नहीं बताया. मगर मैं उन व्यक्तियों पर नज़र रखने लगा, तो पाया कि ये भविष्यवाणियां तो शत-प्रतिशत सही उतर रही थीं. अब मैं उन लोगों को फ़ोन पर भी बताने लगा, जिनकी मृत्यु निकट भविष्य में होनेवाली थी, इनमें मेरे मरीज़ों के अलावा तुम्हारे क्लब के सदस्य भी थे, जिनकी जांच मैं करता था. मैं ऐसा मात्र इसलिए कर रहा था कि उन लोगों के उत्तराधिकारी किसी परेशानी में ना फंसें. इसके अलावा मेरा कोई स्वार्थ नहीं था. जब सीबीआई के जासूस ने मुझसे पूछताछ की तो मैं घबरा गया. मैंने क्लीनिक आकर अपनी जांच मशीन पर की तो पाया कि मेरी मृत्यु पूछताछ वाले दिन आज ही अपने ही घर जलकर मरने से होगी. मैं शहर से भागना चाहता था, मगर बाहर पुलिस तैनात थी. मैंने तुम्हें फ़ोन किया तो तुम घर पर नहीं थे. लोगों ने घर का घिराव करके आग लगा दी है और मैं चाबी भी खो बैठा हूं, नहीं तो बाहर निकल जाता, तब मैं घर में नहीं जलता. मगर यह अन्तिम भविष्यवाणी भी सच हो रही है.
मैं मशीन की जांच वैज्ञानिकों से करवाना चाहता था. मगर क्या फ़ायदा? यह मशीन भी मेरे साथ ही जल जाएगी. अच्छा अलविदा, क्योंकि आग मेरे कमरे की भीतर आ पहुंची है. अलविदा…!

– डॉ. श्याम

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