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Benefits Of Cooking

कुकिंग थेरेपी: हेल्दी रहने का बेस्ट फॉर्मूला (Cooking Therapy: Benefits Of Cooking)

खाना बनाना और उसे दूसरों को खिलाना कई लोगों के शौक में शुमार होता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि खाना बनाने का यह शौक आपको हेल्दी भी रखता है, इसीलिए इसे कुकिंग थेरेपी का नाम दिया गया है. साइंटिस्ट्स अब यह दावे के साथ कहते हैं कि कुकिंग दरअसल एक थेरेपी है, जो आपको हेल्दी रखती है और आपके रिश्तों को भी बेहतर बनाती है.

साइंस के अनुसार कुकिंग दरअसल मेडिटेशन सेशन की तरह है: क्या कभी आपने इस ओर ध्यान दिया है कि स्ट्रेस से भरा दिन और आपकी थकान घर पर आने के बाद कुछ अच्छा पकाने की सोच मात्र से ही कम हो जाती है. बहुत बार ऐसा होता है कि आप कुछ स्वादिष्ट या अपना मनपसंद खाना बनाने की तैयारी करने की सोचते हैं और उसे बनाने के बाद जो संतुष्टि आपको मिलती है, उससे आपके दिनभर की थकान व तनाव दूर होता है. आप भले ही नियमित रूप से खाना न भी बनाते हों, लेकिन यदि आप ऐसा करते हैं, तो पाएंगे कि कुकिंग सेशन एक तरह से आपके लिए मेडिटेशन का काम करता है.

थेरेपिस्ट कुकिंग को मानसिक समस्याओं के इलाज के लिए प्रयोग में लाते हैं: डिप्रेशन, घबराहट, तनाव आदि के इलाज में अब बहुत-से सायकोलॉजिस्ट व थेरेपिस्ट कुकिंग कोर्सेस को थेरेपी की तरह यूज़ करने लगे हैं, क्योंकि जो व़क्त आप कुकिंग में लगाते हो, उससे आपका ध्यान नकारात्मक स्थितियों व बातों से हट जाता है और आप रिलैक्स महसूस करते हैं.

क्रिएटिव बनाती है आपको कुकिंग: एक्सपर्ट्स ने अपने शोधों में यह भी पाया है कि कुकिंग आपको क्रिएटिव बनाती है, क्योंकि आप अपने अनुसार रेसिपी को बनाने के नए-नए तरी़के सोचते हो, नया स्वाद क्रिएट करने की कोशिश करते हो, जिससे आपकी भी क्रिएटिविटी बढ़ती है. दूसरे, कुकिंग आपको पूरे माहौल में कंट्रोल का अनुभव महसूस कराती है. आपको लगता है कि अब आप अपने अनुसार स्वाद में बदलाव ला सकते हो और जब आपको तारी़फें मिलती हैं, तो आप पॉज़िटिव महसूस करते हो.

कुकिंग और मेंटल हेल्थ का सबसे बड़ा कनेक्शन है न्यूट्रिशन: जब आप कुकिंग करते हो, तो आप अपने पोषण, डायट व हेल्थ के प्रति अपने आप ही सचेत हो जाते हो. आपके हाथ में होता है कि कितना ऑयल डालना है, कितना नमक, कितने मसाले और आपका ब्रेन यही सोचने लगता है कि किस तरह से अपनी डिश को आप और हेल्दी बना सकते हो. इससे आपको संतुष्टि महसूस होती है कि आपका खाना हेल्दी है, क्योंकि आप अपने खाने की क्वालिटी को कंट्रोल करते हो.

कुकिंग जो ख़ुशी देती है, वो घर के अन्य काम नहीं देते: एक्सपर्ट्स कहते हैं कि भले ही आप कुकिंग का शौक न रखते हों, लेकिन आप जब कुकिंग करते हैं, तो यह फ़र्क़ ज़रूर महसूस करते हैं कि खाना बनाने से जो ख़ुशी व संतुष्टि का अनुभव होता है, वह बिस्तर ठीक करने, कपड़े धोने या अन्य कामों से नहीं होता. इसके पीछे की वजह यह है कि कुकिंग अपने आप में रिवॉर्डिंग एक्सपीरियंस होता है, क्योंकि कहीं-न-कहीं सबकॉन्शियस माइंड में भी यह बात रहती है कि खाना बनाने के बाद आपको इसका स्वाद भी मिलेगा. खाना बनाने के दौरान जो ख़ुशबू आती है, उसे बनता देखने का जो अनुभव होता है और यहां तक कि फल व सब्ज़ियों को काटने-छीलने के दौरान उनके रंग व आकार हमें आकर्षित करते हैं, वो मस्तिष्क में पॉज़िटिव वाइब्रेशन्स पैदा करते हैं.

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पार्टनर के साथ कुकिंग आपके रिश्ते को भी बेहतर बनाती है: जब आप साथ में खाना बनाते हो या फिर घर के कोई भी सदस्य मिल-जुलकर खाना बनाने में हाथ बंटाते हैं, तो अपने आप उनके मतभेद कम होने लगते हैं. वो नकारात्मक बातों को एक तरफ़ रखकर खाना बेहतर बनाने व उसे परोसने की तरफ़ ध्यान देने लगते हैं. ऐसे में यदि आप अपने पार्टनर के साथ किचन में काम करेंगे, तो आपके रिश्ते भी बेहतर बनेंगे. आप एक-दूसरे के साथ अधिक समय बिता पाओगे, जिससे कम्यूनिकेशन बेहतर होगा. यदि खाने में आप दोनों की पसंद-नापसंद एक नहीं है, तब भी आपके विवाद को कम करने में कुकिंग एक थेरेपी की तरह काम करेगी, क्योंकि वहां आप एक-दूसरे के बारे में सोचोगे कि चलो आज तुम्हारी पसंद का खाना बनाते हैं या फिर आज तुम्हारी फेवरेट डिश तैयार करते हैं, पर कल तुम मेरी फेवरेट डिश बनाने में मेरी मदद करोगे… आदि.

कुकिंग से बढ़ते व बेहतर होते हैं आपके कनेक्शन्स: आपके जन्मदिन पर आपके पड़ोस में रहनेवाली दोस्त आपके लिए गिफ्ट लाती है और दूसरी ओर आपकी सास आपके लिए अपने हाथों से आपका मनपसंद खाना बनाती है, तो ज़ाहिर है आपके मन को सास का खाना बनाना ज़्यादा छुएगा, क्योंकि उन्होंने आपके बारे में सोचा और ख़ुद मेहनत करके आपके लिए खाना तैयार किया. इसी तरह आप देखेंगी कि अपनी बेस्ट फ्रेंड को यदि आप अपने हाथों से कुछ बनाकर देती हैं, तो उसकी ख़ुशी दोगुनी हो जाती है. इस तरह से कुकिंग आपके कनेक्शन्स को बेहतर बनाती है. इसलिए कुक करें और कनेक्टेड रहें.

मस्तिष्क को शांत करती है कुकिंग: साइंटिस्ट्स कहते हैं कि कुकिंग के समय आपको कभी भी अकेलापन महसूस नहीं होगा. उस व़क्त आपकी चिंताएं दूर हो जाती हैं और आपका मस्तिष्क शांति का अनुभव करता है, क्योंकि आपका पूरा ध्यान अपने टास्क पर लग जाता है, जिससे कई तरह की चिंताएं व दबाव की तरफ़ ध्यान नहीं जाता और आप बेहतर महसूस करते हैं. यही नहीं कुकिंग की प्रैक्टिस आपके शरीर को भी रिलैक्स करती है. कुकिंग के समय आप फ्लो में आ जाते हो, जिससे व्यर्थ के डर, चिंताओं व तनाव से उपजा दर्द, शरीर की ऐंठन व थकान भी दूर हो जाती है.

दूसरों के लिए कुछ करने का अनुभव बेहतर महसूस कराता है: ज़ाहिर-सी बात है कि आप खाना अपने लिए नहीं बनाते, बल्कि पूरे परिवार के लिए बनाते हैं. ऐसे में उनकी पसंद-नापसंद को ध्यान में रखकर उनके लिए कुछ अच्छा करने का अनुभव आपको कुकिंग से मिलता है. कुकिंग के ज़रिए आप अपनी भावनाएं व केयर भी सामनेवाले को ज़ाहिर कर सकते हैं. यह एक तरह से मूक प्रदर्शन है प्यार व देखभाल का.

भावनाओं का प्रभाव भी होता है कुकिंग में: आप जिस भाव से खाना बनाते हैं, उसका असर आपके खाने में नज़र आता है. लेकिन खाना बनाते समय हर कोई यही चाहता है कि उसके खाने को तारीफ़ ज़रूर मिले, इसलिए जब आप बच्चों के लिए कुछ ख़ास बनाते हो, तो उनके स्वाद व पोषण का ध्यान रखते हो, लेकिन जब आप बुज़ुर्गों के लिए कुछ बनाते हो, तो स्वाद के अलावा उनकी उम्र व सेहत का भी ख़्याल रखते हो. उन्हें क्या नहीं खाना चाहिए, इस तरफ़ भी आपका पूरा ध्यान रहता है.

कुकिंग से आप पैसे भी बचाते हो: होटल या बाहर से कुछ अनहेल्दी मंगाकर खाना आपको वो संतुष्टि नहीं देगा, जो अपने हाथों से कुछ हेल्दी बनाकर खाना देता है और इसके साथ ही आप अपने पैसे भी बचाते हो. हेल्थ और वेल्थ साथ-साथ सेव होने का एहसास आपके रिश्तों को भी बेहतर बनाता है और आपकी सेहत को भी.

– गीता शर्मा

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Monsoon Health Care
मॉनसून में कैसे रखें सेहत का ख़्याल? (Monsoon Health Care)

गर्मी की तपिश से राहत दिलानेवाली बारिश की फुहारें अपने साथ कई हेल्थ प्रॉब्लम्स भी लेकर आती हैं. सर्दी-ज़ुकाम जैसी आम समस्याओं के अलावा टायफॉइड, हैजा, मलेरिया जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियां भी इसी मौसम की देन हैं, लेकिन सही खानपान और कुछ हेल्दी आदतें अपनाकर आप बरसात में होनेवाली बीमारियों से बच सकते हैं.

मॉनसून हेल्थ प्रॉब्लम्स

बारिश का मौसम अपने साथ कई आम व गंभीर बीमारियां भी लेकर आता है, इसलिए ज़रूरी है कि हम पहले से ही उसके लिए सावधान रहें. एटलांटा हॉस्पिटल के जनरल फिजिशियन डॉ. फतेह सिंह ने बरसाती बीमारियों से बचाव के बारे में हमें जानकारी दी.

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया 

जहां डेंगू में तेज़ बुख़ार, बहुत ज़्यादा सिरदर्द और जोड़ों में दर्द होता है, वहीं बुख़ार, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द और कमज़ोरी आना मलेरिया के लक्षण हैं. चिकनगुनिया के भी लक्षण लगभग यही हैं.

बचाव

–    इससे बचाव का सबसे आसान तरीक़ा यही है कि घर के आसपास कहीं भी पानी का जमाव न होने दें, ताकि मच्छरों को पनपने के लिए जगह न मिले.

–    घर में कबाड़ जमा करके न रखें. जितना हो सके, घर साफ़ रखें.

–    बारिश से पहले घर में पेस्ट कंट्रोल ज़रूर करवाएं.

हैजा

बारिश के मौसम में फैलनेवाली यह एक गंभीर व जानलेवा बीमारी है, जो दूषित भोजन या पानी के कारण होती है. गंदगी और हाइजीन की कमी इस बीमारी को बढ़ावा देती है. उल्टी और पतली दस्त इस बीमारी के शुरुआती लक्षण हैं.

बचाव

–    सबसे ज़रूरी है कि आप हैजे का टीका लगवाएं, इससे 6 महीनों तक आप सुरक्षित रहेंगे.

–   हाथ धोने के लिए लिक्विड हैंड सोप का ही इस्तेमाल करें.

–   साफ़ और शुद्ध पानी के लिए प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें अथवा पानी उबालकर पीना सबसे बेहतरीन उपाय है.

–    दूध व दूध से बनी चीज़ें, जैसे- आइस्क्रीम, मलाई वगैरह ज़्यादा न खाएं.

–    स्ट्रीट फूड से दूर रहें.

टायफॉइड

बारिश के दौरान होनेवाली यह एक आम बीमारी है. यह भी दूषित पानी व खाने के कारण ही होती है. इसमें सबसे ख़तरनाक बात यह है कि ठीक होने के बावजूद इसका इंफेक्शन मरीज़ के गॉल ब्लैडर में रह जाता है. बुख़ार, पेटदर्द और सिरदर्द इसके लक्षण हैं.

Monsoon Health Tips

बचाव

यह एक संक्रामक बीमारी है, जो बहुत तेज़ी से फैलती है, इसलिए मरीज़ को अलग कमरे में दूसरों से थोड़ा दूर रखें.

–    उबला व साफ़ पानी ही पीएं.

–    डिहाइड्रेशन से बचने के लिए मरीज़ को लगातार लिक्विड डायट लेते रहना चाहिए.

–    खाना खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह ज़रूर धोएं.

–    होमियोपैथिक ट्रीटमेंट ज़्यादा मददगार होती है.

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डायरिया/ पेट के इंफेक्शन्स

इस मौसम में पेट की बीमारियां, जैसे- डायरिया और गैस्ट्रो सबसे ज़्यादा लोगों को परेशान करती हैं, जो वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण हो सकती हैं. पेट के ज़्यादातर इंफेक्शन्स में उल्टी और दस्त होते हैं, जिसके लिए तुरंत डॉक्टर से मिलना बहुत ज़रूरी है.

बचाव

–    खानपान के साथ-साथ पर्सनल हाइजीन का  भी ख़ास ख़्याल रखें. टॉयलेट के बाद और डायपर बदलने पर हैंडवॉश से हाथ ज़रूर धोएं.

–    बर्तनों और कटिंग बोर्ड को अच्छी तरह साफ़ रखें.

–    ऐसे फल और सब्ज़ियां खाएं, जिनके छिलके निकाल सकते हैं.

–   अगर ट्रैवेल करनेवाले हैं, तो हेपेटाइटिस ए का टीका ज़रूर लगवाएं.

पीलिया

मॉनसून के दौरान लिवर में वायरल इंफेक्शन काफ़ी आम बात है. हेपेटाइटिस के वायरस पानी के ज़रिए तेज़ी से फैलते हैं. यह इंफेक्शन गंभीर हो सकता है, क्योंकि हेपेटाइटिस का कारण पीलिया होता है, जिससे आंखें और यूरिन आदि पीले पड़ जाते हैं.

बचाव

–    हेपेटाइटिस ए और बी का वैक्सीन लें.

–    दूषित खाने और पानी से बचें.

–    हाइजीन का ख़ास ख़्याल रखें.

हेल्थ अलर्ट्स

–    अगर तीन दिन से बुख़ार आ रहा है, तो ख़ुद से दवा खाने की बजाय डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि यह कोई गंभीर बुख़ार भी हो सकता है.

–   शरीर पर किसी भी तरह के रैशेज़ या फोड़े-फुंसी नज़र आएं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, यह कोई इंफेक्शन भी हो सकता है.

–    अगर आपको अस्थमा या कोई और ब्रीदिंग प्रॉब्लम है, तो ध्यान रखें कि सीलनवाली दीवार से चिपककर न बैठें. घर की दीवारें गीली न रखें, वरना फंगस के कारण आपको तकलीफ़ हो सकती है.

–    अस्थमा और डायबिटीज़ के मरीज़ ज़्यादा तीखा और मसालेदार खाना न खाएं, वरना उन्हें हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं.

–   डायबिटीज़ के मरीज़ नंगे पांव गीली ज़मीन पर न चलें, वरना जर्म्स और बैक्टीरिया से आपको इंफेक्शन हो सकता है.

मॉनसून डायट

मॉनसून में हमारी पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाती है और शारीरिक क्षमता पर भी इसका असर पड़ता है. इस मौसम में खाना ठीक तरी़के से पचता नहीं, जिससे एसिडिटी और गैस जैसी समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में आपको खानपान का ख़ास ध्यान रखना चाहिए.

–    बारिश में उबालकर छाना हुआ पानी ही पीएं, वरना दूषित पानी के कारण बीमार पड़ सकते हैं.

–    मॉनसून में हरी पत्तेदार सब्ज़ियां खाने से बचें, क्योंकि बारिश में उनमें कीड़े लगने लगते हैं, जो आपके खाने के साथ पेट में जा सकते हैं.

–    मसालेदार और तले हुए खाने से अपच, उबकाई आना, वॉटर रिटेंशन आदि की समस्या हो सकती है.

–    रोज़ाना गर्म दाल या सूप ज़रूर पीएं. उसमें हल्दी, लौंग, कालीमिर्च और सौंफ ज़रूर डालें. यह इंफेक्शन से लड़ने में आपकी मदद करेगा.

–    खाने के बाद सौंफ का पानी पीने से गैस और एसिडिटी की समस्या नहीं होती. घर के सभी सदस्यों को खाने के बाद ये पानी दें.

–    उबला व अच्छी तरह पका हुआ खाना मॉनसून में आपकी सेहत की देखभाल करेगा.

–   एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर हर्बल टी और ग्रीन टी इस मौसम में काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होती हैं. इसे डेली डायट का हिस्सा बनाएं.

–    गाय का दूध पीएं. यह हल्का व सुपाच्य होता है, जिससे आपको इंस्टेंट एनर्जी मिलती है.

–    खाने में गेहूं के आटे और मैदा की जगह जौ और चने के आटे का इस्तेमाल करें.

–    रोज़ाना अरहर की दाल की बजाय मूंगदाल का इस्तेमाल करें.

–    फ्रेश फ्रूट्स में आप सेब, अनार, मोसंबी और केला खाएं. ड्रायफ्रूट्स को अपने डेली डायट का हिस्सा बनाएं.

–    इस मौसम में जितना हो सके, प्रोसेस्ड फूड अवॉइड करें.

–   नॉन वेज के शौक़ीन बरसात में इसका सेवन कम कर दें.

–    अगर आप दही खाना पसंद करते हैं, तो ज़रूर खाएं, पर उसमें नमक या शक्कर मिला लें.

–    इस मौसम में गाय का घी खाना काफ़ी फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि वो न स़िर्फ आपकी पाचन क्रिया  को दुरुस्त रखता है, बल्कि रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर आपकी याद्दाश्त को बेहतर बनाता है.

–   कच्ची सब्ज़ियां और सलाद खाने से बचें. अगर घर पर खा रहे हैं, तो सब्ज़ियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें.

हेल्दी लाइफस्टाइल

–   बहुत ज़्यादा भीड़भाड़वाली जगह पर जाना अवॉइड करें, क्योंकि वहां वायरल इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा रहती है.

–    फुल स्लीव शर्ट और फुल पैंट पहनें, ताकि मच्छर काट न सकें.

–    जिन्हें एलर्जी और इंफेक्शन्स की समस्या है, वो नीम की पत्तियों को उबालकर उसे नहाने के पानी में मिलाकर नहाएं.

–    एक्सरसाइज़ इस मौसम में भी उतनी ही ज़रूरी है, जितनी हर मौसम में.

–    हो सके तो शाम को घर पहुंचने पर नहाएं.

अपनाएं ये होम रेमेडीज़

–    सर्दी-खांसी से राहत के लिए एक कप पानी में सोंठ पाउडर उबालकर पीएं, राहत मिलेगी.

–    गले में ख़राश या दर्द है, तो गुनगुने पानी में नमक और हल्दी मिलाकर गरारे करें.

–    सर्दी से नाक बंद हो गई हो, तो गर्म पानी में नीलगिरी तेल कीकुछ बूंदें डालकर भाप लें या फिर रुमाल में उसकी कुछ बूंदें छिड़ककर सूंघें.

–    अगर वायरल फीवर है, तो एक कप पानी में तुलसी और अदरक मिलाकर उबाल लें. आंच से उतारकर शहद मिलाएं और चाय की तरह पीएं.

–    अपच व बदहज़मी से बचने के लिए हर बार खाने से पहले अदरक के एक छोटे से टुकड़े पर सेंधा नमक लगाकर खाएं.

–    रोज़ाना हल्दीवाला दूध न स़िर्फ आपको दूषित पानी के कारण होनेवाली बीमारियों से बचाएगा, बल्कि आपकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाएगा.

– सुनीता सिंह

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Healthy Tiffin Ideas

हेल्दी टिफिन आइडियाज़ (Healthy Tiffin Ideas)

बच्चों को खाना खिलाना किसी चैलेंज से कम नहीं, क्योंकि बच्चों को रोज़ एक जैसा खाना पसंद नहीं आता. बच्चों को टिफिन में क्या दें, जो हेल्दी भी हो और टेस्टी भी, इस बात को लेकर लगभग सभी माएं परेशान रहती हैं. आपकी इस मुश्किल को सुलझाने के लिए हमने जुटाए हैं हेल्दी टिफिन आइडियाज़.

–    बच्चे के टिफिन के लिए यदि परांठे बना रही हैं, तो आटे को पानी की बजाय पकी हुई पीली दाल में गूंधें. चाहें तो इसमें कटा हुआ प्याज़, हरा धनिया, अदरक-लहसुन का पेस्ट, नींबू का रस भी मिला सकती हैं, फिर इसके परांठे बना लें.

–    ज्वार, बाजरा, रागी, नाचनी आदि का आटा मिक्स करके उसमें सब्ज़ियां स्टफ़ करके बच्चों के लिए हेल्दी परांठे बनाएं.

–    बच्चों के फेवरेट नूडल्स में ढेर सारी सब्ज़ियां डालकर उसे हेल्दी बनाएं.

–    पास्ता बनाते समय उसमें भी ख़ूब सारी सब्ज़ियां डाल दें.

–    यदि ढोकला बना रही हैं, तो दो ढोकले के बीच में एक पनीर या चीज़ की लेयर रख दें.

–    टिफिन के लिए यदि सूजी का उपमा बना रही हैं, तो उसमें बारीक़ कटी हरी सब्ज़ियां डाल दें.

–    सूजी की बजाय आप दलिया का उपमा भी बना सकती हैं और इसमें भी कटी हुई सब्ज़ियां डाल सकती हैं.

–   इसी तरह पोहा बनाते समय उसमें कटी हुई सब्ज़ियां, कॉर्न, पनीर आदि मिला सकती हैं.

–    आलू टिक्की बना रही हैं, तो उसमें उबला व पीसा हुआ राजमा मिला दें.

बच्चों के टिफिन के लिए बनाएं 5 टेस्टी आलू रेसिपी, देखें वीडियो:

 

–    इडली बनाते समय भी उसमें कटी हुई सब्ज़ियां या सब्ज़ियों को पीसकर डाल दें.

–    पाव भाजी बना रही हैं, तो सब्ज़ी बनाते समय उसमें कॉर्न, पनीर आदि भी मिक्स करें.

–    सैंडविच में मिक्स वेजीटेबल्स भी स्टफ़ कर सकती हैं.

–    ऑमलेट बना रही हैं. तो उसमें शिमला मिर्च, प्याज़, टमाटर आदि काटकर डाल दें. इससे टिफिन और हेल्दी बन जाएगा.

–    बच्चों के टिफिन के लिए डोसा बनाते समय उसे मैक्सिकन स्टाइल में बनाएं. इसके लिए उसमें आलू स्टफ करने की बजाय लंबाई में पतली-पतली कटी सब्ज़ियां स्टफ कर लें.

–   हरी मूंगदाल के चीले भी बेस्ट ऑप्शन हैं. इसके लिए हरी मूंगदाल को रातभर पानी में भिगोकर रखें. सुबह पीसकर उसमें नमक, हरी मिर्च, अदरक-लहसुन का पेस्ट, कटा हुआ प्याज़, नींबू का रस आदि मिलाकर चटपटे और हेल्दी चीले बनाएं.

–    आटे में बारीक़ कटी या पीसी हुई सब्ज़ियां मिलाकर भी चीले बनाए जा सकते हैं.

–    यदि बच्चा चाट या भेल की फ़रमाइश करे, तो उसमें उबले कॉर्न, राजमा, चना, सोया आदि डाल दें.

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कुकिंग एक आर्ट है इसलिए अच्छे कुक को हमेशा कुकिंग के नए तरीके सीखते रहना चाहिए. इससे आप नई चीज़ें भी सीख जाते हैं और ढेर सारी तारी़फें भी पाते हैं. आप भी सीखें कुकिंग के नए तरीके.

New Tips, Tricks Of Smart And Easy Cooking

* भिंडी की मसाले वाली सब्ज़ी बनानी हो तो गरम मसाले को 10 मिनट के लिए इमली के पानी में डालकर रख दें, फिर इस मसाले से भिंडी बनाएं. भिंडी का रंग और स्वाद लाजवाब होगा.

* नर्म और फूले हुए गुलाब जामुन बनाने के लिए गुलाबजामुन की सामग्री को 10 मिनट तक प्रेशर कुकर में पका दें और फिर बनाएं. गुलाबजामुन सॉ़फ़्ट और स्पंजी बनेंगे.

* घर में बाज़ार जैसी क्रीम बनाने के लिए मलाई को मिक्सी में 4-5 सेकेंड तक ब्लेंड करके फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें.

* थोड़ी-सी फ्रेश क्रीम में पीसी हुई शक्कर मिला कर अच्छी तरह फेंटें. इसे फ्रूट सलाद में डालें और अच्छी तरह मिलाएं. शाही फ्रूट सलाद तैयार है.

* नींबू को हल्के गरम पानी में रखकर दो मिनट बाद रस निकालें. ऐसा करने से रस निकालने में आसानी होती है और ़ज़्यादा रस भी निकलता है.

* खस्ता आलू पूरी बनाते समय आटे में सूजी (रवा) मिलाने से पूरियां खस्ता बनती हैं.

* पकौड़े बनाते समय बेसन के घोल में थोड़ा-सा रिफ़ाइंड ऑयल, हींग और अजवाइन डालकर अच्छी तरह फेंटें. ऐसा करने से पकौड़े तो करारे बनेंगे ही, पेट में गैस की शिकायत भी नहीं होगी.

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* इडली को नए अंदाज़ में बनाने के लिए उसमें कटी हुई सब्ज़ियां या सब्ज़ियों को पीसकर उसका पेस्ट मिलाकर वेजीटेबल इडली बनाएं. आपका ये क्रिएशन मेहमानों को ख़ूब पसंद आएगा.

* पाव भाजी बना रही हैं तो सब्ज़ी बनाते समय उसमें कॉर्न, पनीर आदि मिलाकर हेल्दी और क्रिएटिव पावभाजी तैयार करें.

* प्लेन ऑमलेट बनाने के बजाय उसमें शिमला मिर्च, प्याज़, टमाटर आदि डाल दें. इससे ऑमलेट का स्वाद भी बढ़ेगा और एक नई डिश भी तैयार हो जाएगी.

* अचार में फफूंद न लगे इसके लिए ज़रूरी है कि बनाते समय उसमें नमक की मात्रा आवश्यकता से थोड़ी अधिक रखी जाए और अचार पूरी तरह तेल में डूबा रहे. इससे अचार ़ज़्यादा दिनों तक ख़राब नहीं होता.

* पालक पनीर बनाने के लिए पालक को उबालते समय उसमें एक टीस्पून शक्कर डालें. जब पालक पका रही हों तो उसमें उसमें 1 टीस्पून नींबू का रस डालें. इससे पालक का रंग हरा ही बना रहेगा.

* बची हुई पीली दाल को आटे के साथ गूधें. स्वाद बढ़ाने के लिए कटा हुआ प्याज़, हरा धनिया, अदरक-लहसुन का पेस्ट, नींबू का रस आदि भी मिला सकती हैं. प्लेन रोटी के बजाय ये परांठे मेहमान ज़्यादा चाव से खाएंगे.

* पोहा बनाते समय उसमें भी कटी हुई सब्ज़ियां मिलाकर उसे और हेल्दी बनाना जा सकता है.

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प्यूरी बनना, बैटर तैयार करना, ग्रीस करना… ये सब रेसिपी के कुछ ऐसे शब्द हैं, जिनका प्रयोग विधि-सामग्री में कई बार किया जाता है, लेकिन कई महिलाएं इनका अर्थ नहीं समझ पातीं. आपकी सुविधा के लिए हम बता रहे हैं कुकिंग के दौरान अक्सर प्रयोग किए जाने वाले शब्द और उनका अर्थ. चॉपिंग करना- सब्ज़ी, सलाद को काटना ही चॉपिंग कहलाता है.

 

स्लाइस करना- किसी सब्ज़ी या फ्रूट्स को पतला/लंबा एक समान काटना स्लाइस करना कहलाता है. उदाहरण के लिए- पोटैटो चिप्स बनाने के लिए आलू के गोलाकर स्लाइस करना.

बॉइल करना- उबालने की प्रक्रिया को बॉइल करना कहते हैं, जैसे- पानी, चाय, दूध उबालना.

बैटर बनाना- चीला, इडली, डोसा आदि बनाने के लिए तैयार किए जाने वाला घोल को बैटर कहते हैं, जैसे- बेसन के बैटर में लपेटकर पकौड़े तलना.

गोल्डन ब्राउन- प्याज़, पकौड़े आदि को सुनहरा भूरा होने तक भूनने या तलने को गोल्डन ब्राउन होने तक भूनना/तलना कहते हैं.

बेक करना- अवन में किसी चीज़ को दोनों तरफ़ सेंकने का मतलब होता है उसे बेक करना, जैसे- केक या पिज़्ज़ा बेस को अवन में बेक करना.

ब्लांच करना- उबलते हुए पानी में सब्ज़ी डालकर उसे अधपका करना ब्लांच करना कहलाता है, जैसे- पालक पनीर बनाने के लिए पालक को पानी में ब्लांच किया जाता है.

फोल्ड करना- भरावन रखने के लिए रोटी, ब्रेड आदि को मोड़ने की प्रक्रिया को फोल्ड करना कहते हैं, जैसे- मैदे की रोटी को दो भागों में काटकर फोल्ड करके समोसे तैयार करना.

ग्राइंड करना- किसी भी चीज़ को पीसने की प्रक्रिया को ग्राइंड करना कहते हैं, जैसे- ग्रेवी तैयार करने के लिए प्याज़ या गीला मसाला पीसना या चटनी पीसना.

बीट करना- दही, अंडा, बटर आदि को फेंटने का मतलब उसे बीट करना होता है.

चर्न करना- लस्सी बनाने के लिए दही, लोनी निकालने के लिए मलाई को मथना उसे चर्न करना कहलाता है.

मेरिनेट करना- पनीर, आलू आदि को मसाले, दही या किसी ख़ास घोल में कुछ देर के लिए लपेटना उसे मेरिनेट करना कहलाता है, जैसे- पनीर पकौड़ा बनाने से पहले पनीर को कुछ देर मसाले के घोल में मेरिनेट किया जाता है.

पील करना- छीलने को पील करना कहते हैं, जैसे- आलू या सब्ज़ी को काटने से पहले उसे पील करना.

स्टीम करना- किसी भी चीज़ को भाप में पकाने का मतलब है स्टीम करना, जैसे- ढोकला, इडली आदि को स्टीम करना.

प्यूरी बनाना- किसी भी चीज़ का गाढ़ा घोल तैयार करना प्यूरी बनाना कहलाता है, जैसे- टमाटर या कश्मीरी मिर्च को पीसकर उसकी प्यूरी बनाना.

स्टफ करना- भरावन की प्रक्रिया को ही स्टफ करना कहते हैं, जैसे- भरवां करेला बनाते समय उसमें मसाला स्टफ करना या स्टफ्ड चीज़ टोमैटो बनाते समय टमाटर में चीज़ स्टफ करना.

मैश करना- मसलने को मैश करना कहते हैं, जैसे- आलू परांठा बनाते समय आलू को मैश करना.

फ्राई करना- किसी चीज़ को तलना ही फ्राई करना कहलाता है, जैसे- तेल में पकौड़े, पूरियां फ्राई करना.

cooking bhasha

ड्रीप फ्राई करना- ज़्यादा देर तक तलने की प्रक्रिया को ड्रीप फ्राई करना कहते हैं.

क्रश करना- चूरा करने को क्रश करना कहते हैं, जैसे- ब्रेड को क्रश करना.

ग्रेट करना- कद्दूकस करने को ग्रेट करना कहते हैं, जैसे- कटलेट बनाने के लिए किसी सब्ज़ी को ग्रेट करना या नारियल ग्रेट करना.

मिक्स करना- दो या दो से अधिक सामग्री को आपस में मिलाने को मिक्स करना कहते हैं, जैसे- पकौड़े बनाने के लिए बेसन में प्याज़, हरी मिर्च, नमक आदि मिलाना.

ब्लेंड करना- दो या दो से अधिक पतले घोल को आपस में मिलाना ब्लेंड करना कहलाता है, जैसे- फेंटा हुआ दही और पीसे हुए मसाले ब्लेंड करना.

फिल्टर करना- छानने को फिल्टर करना कहते हैं, जैसे- किसी सामग्री में से पानी निथारने के लिए उसे फिल्टर करना.

बारबेक्यू- किसी चीज़ को सींक में गोदकर सीधे आंच पर सेंकने को बारबेक्यू करना कहते हैं, जैसे- सींक में पनीर, आलू या मटन के टुकड़े गोदकर सेंकना.

नीड करना- गूंधने को नीड करना कहते हैं, जैसे- रोटी या परांठे के लिए आटा गूंधना.

रोस्ट करना- भूनने को रोस्ट करना कहते हैं, जैसे- मूंगफली, सूखे मसाले भूनना.

कैरामल- शक्कर को सुनहरा लाल होने तक भूनने या पकाने को कैरामल कहते हैं. कैरामल शब्द का इस्तेमाल ख़ासकर मिठाई की विधि में किया जाता है.

पिंच- पिंच का अर्थ है चुटकीभर, जैसे- चुटकीभर चाट मसाला या केसर डालना.

ब्रश करना- बेक करने से पहले ब्रेड, टोस्ट, पिज़्ज़ा आदि पर हल्का-सा तेल, दूध, आटा या बटर लगाने को ब्रश करना कहा जाता है.

स्प्रेड करना- फैलाने को स्प्रेड करना कहते हैं, जैसे- पिज़्ज़ा बेस पर चीज़ फैलाना, ब्रेड पर बटर लगाना आदि.

स्कूप करना- आलू, टमाटर जैसी सब्ज़ियों के मध्य भाग में चाकू घूमाकर उसे खोलला करने को स्कूप करना कहते हैं, जैसे- भरवां बैंगन, भरवां आलू बनाते समय उन्हें स्कूप किया जाता है.

स्किम करना- मलाई, झाग, फेन आदि निकालने को स्किम करना कहते हैं, जैसे- उबले हुए दूध से मलाई निकालना.

ग्रीस करना- तेल या बटर से किसी खास सांचे या बर्तन में चिकनाई लगाने को ग्रीस करना कहा जाता है, जैसे- मोदक बनाने के लिए उसके सांचे को ग्रीस किया जाता है.

क्रिस्पी बनाना- किसी चीज़ को तलकर कुरकुरा बनाने को क्रीस्पी बनाना कहते हैं, जैसे- पकौड़े को तेज़ आंच पर क्रिस्पी होने तक तलना.

गार्निश करना- किसी भी डिश को सजाना उसे गार्निश करना कहलाता है. उदाहरण के लिए- सब्ज़ी परोसने से पहले उसे कटे हुए हरे धनिया या पावभाजी को प्याज़ व हरे धनिया से गार्निश करना.

सर्व करना- परोसने को सर्व करना कहते हैं.