Tag Archives: hindu marriage

जब हो सात फेरों में हेरा-फेरी (Matrimonial Frauds In Hindu Marriages In India)

सात फेरों का बंधन सबसे पवित्र माना जाता है, लेकिन अगर शादी के बाद आपको पता चले कि इस पवित्र बंधन की नींव ही धोखे पर रखी गई है, तो आपका ही नहीं, बहुतों का इस रिश्ते से विश्‍वास ही उठ सकता है. बदलते समय और स्मार्ट होती टेक्नोलॉजी ने फ्रॉड करने के कई नए तरी़के इजाद कर दिए हैं. सात फेरों से जुड़े ऐसे ही फ्रॉड के बारे में हमने यहां जानने की कोशिश की है.

Hindu Marriages In India

फ्रॉड के बारे में क्या कहता है क़ानून?

शादी से जुड़े फ्रॉड का मतलब है, पति या पत्नी में से किसी एक का अपने बारे में ऐसी ज़रूरी बातों को छिपाना या उनके बारे में ग़लत जानकारी देना, जिनके बारे में अगर शादी से पहले पति या पत्नी को पता होता, तो वो हरगिज़ यह शादी न करती/करता.

हिंदू मैरिज एक्ट और फ्रॉड

हिंदू मैरिज एक्ट में शादी से जुड़े फ्रॉड यानी धोखाधड़ी को शादी अमान्य कराने के क़ानून के तहत रखा गया है यानी ऐसा क़ानून जो धोखाधड़ी होने पर आपकी शादी को निरस्त कर देता है और ऐसा माना जाता है कि आपकी शादी कभी हुई ही नहीं थी. धोखाधड़ी के मामले में धोखे के बारे में पता चलते ही आप एक्शन ले सकते हैं और उसकी वजह यह है कि धोखाधड़ी के ज़्यादातर मामले शादी की पहली रात या फिर कुछ ही दिनों में पर्दाफ़ाश हो जाते हैं, इसलिए क़ानून शादी को रद्द या अमान्य कराने का प्रावधान देता है.

शादी की अमान्यता और तलाक़ में फ़र्क़

–  शादी की अमान्यता यानी शादी को रद्द कराना, जिसके बाद आपका स्टेटस वही होगा, जो शादी के पहले था यानी अगर आप कुंवारी थीं, तो कुंवारी ही मानी जाएंगी, जबकि तलाक़ के बाद आपका स्टेटस तलाक़शुदा का हो जाता है.

–   शादी की अमान्यता के लिए कोई समयावधि नहीं है, आप जितनी जल्दी चाहें, अप्लाई कर सकते हैं, जबकि तलाक़ के लिए आपको पूरे एक साल तक इंतज़ार करना पड़ता है.

–  दोनों के लिए ही अप्लाई करने की विस्तृत वजहें क़ानून में दी गई हैं.

धोखाधड़ी के लिए सज़ा

अगर कोई अपनी पहली शादी के बारे में छिपाकर दूसरी शादी करता है, तो उसे 10 साल की जेल और जुर्माना हो सकता है. इसके लिए आपको दो चीज़ें साबित करनी पड़ेंगी-

  1. ग़लत इरादे से शादी करना और
  2. पहली शादी के बारे में दूसरी पार्टी को जानकारी न होना.
किन मामलों में अमान्य हो सकती है शादी?

–  अगर शादी के समय पति या पत्नी में से कोई पहले से ही शादीशुदा है.

–   पति या पत्नी में से कोई किसी गंभीर मानसिक बीमारी से ग्रस्त है.

–   शादी के समय पति नपुंसक हो.

–   अगर लड़का या लड़की उस रिश्ते में आते हैं, जिनके बीच शादी करना मना है. लड़की अपनी मां के परिवार की तीन पीढ़ी और पिता के परिवार की पांच पीढ़ी के किसी भी सदस्य से शादी नहीं कर सकती. ऐसी शादी अमान्य मानी जाएगी.

–   अगर लड़की 18 साल से छोटी या लड़का 21 साल से कम उम्र का है.

–   शादी को पूरा करने के लिए पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंध बनना बेहद ज़रूरी है. अगर पति या पत्नी में से कोई दूसरे को इस अधिकार से वंचित रखे.

–   अगर शादी के समय लड़की, लड़के के अलावा किसी तीसरे व्यक्ति से गर्भवती है, तो शादी अमान्य की जा सकती है.

–   शादी की सहमति धोखे से ली गई हो.

–   शादी के बाद पता चले कि पति या पत्नी ने अपने बारे में तथ्य छिपाए या फिर ग़लत तथ्य प्रस्तुत किए, जैसे- उम्र के बारे में, अपनी पहली शादी के बारे में, कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड आदि.

यह भी पढ़ें: महिलाएं जानें अपने अधिकार (Every Woman Should Know These Rights)

Matrimonial Frauds

किन-किन तरीक़ों से होते हैं फ्रॉड?
  1. साल 2016 में मीडिया ने तन्मय गोस्वामी के मैट्रीमोनियल फ्रॉड को काफ़ी हाइलाईट किया था, ताकि लोग मैट्रीमोनियल साइट्स के ज़रिए हो रहे धोखे से बच सकें. अलग-अलग मैट्रीमोनियल साइट्स पर फेक प्रोफाइल बनाकर तन्मय गोस्वामी ने क़रीब 30 लड़कियों को शादी के झांसे में फांसकर करोड़ों रुपए लूट लिए थे. इनमें से कई लड़कियों से उसने मंदिरों में शादी भी की थी. तन्मय के ख़िलाफ़ आईटी एक्ट और आईपीसी के तहत धोखाधड़ी के मामले चल रहे हैं. मैट्रीमोनियल साइट्स पर फेक प्रोफाइल बनाकर फ्रॉड करनेवालों के ख़िलाफ़ लड़कियों और उनके परिवारवालों दोनों को सावधान रहना चाहिए.
  2. संगीता और अतुल की शादी के दो सालों बाद भी जब संगीता मां नहीं बन पाई, तब अतुल उसे डॉक्टर के पास ले गया, जहां उसे पता चला कि संगीता का यूटेरस ही नहीं है. इतनी बड़ी बात उससे छिपाई गई, इसलिए उसने कोर्ट में अपनी पत्नी और उसके परिवारवालों के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी का केस फाइल किया, साथ ही शादी को अमान्य करने की मांग भी की.
  3. एक लड़का और लड़की मैट्रीमोनियल साइट के ज़रिए मिलते हैं. लड़की के घरवाले लड़के को बताते हैं कि उसका तलाक़ हो चुका है, पर लड़के को कोई ऐतराज़ नहीं होता, क्योंकि वो ख़ुद तलाक़शुदा होता है. शादी के तुरंत बाद लड़की के घरवाले लड़के को बताते हैं कि दरअसल लड़की की शादी दो बार टूट चुकी है. लड़के के लिए चौंकानेवाली बात थी, क्योंकि वो एक ही शादी टूटने की बात को जानता था. उसे लगता है उसके साथ धोखा हुआ है. अपनी पत्नी से वह बात करने की कोशिश करता है, पर वो वहां से चली जाती है. किसी भी तरह से लड़की और उसके घरवालों से संपर्क न हो पाने के कारण लड़का तथ्यों को छिपाने और शारीरिक संबंध न बनने के कारण शादी पूरी न हो पाने के आधार पर शादी को अमान्य कराने में सफल हो जाता है.
  4. कनाडा से एनआरआई इंडिया आता है, शादी करके एक हफ़्ते हनीमून मनाकर वापस अपने देश लौट जाता है और पत्नी उसकी वापसी का इंतज़ार करती रह जाती है. पिछले कुछ सालों में इस तरह के हज़ारों मामले सामने आए, जिनके बाद उनके लिए ‘हनीमून हसबैंड्स’ शब्द का इस्तेमाल होने लगा. हालांकि इस फ्रॉड से मासूम लड़कियों को बचाने के लिए इंडियन पासपोर्ट ऑफिसर्स ने कई कड़े नियम लागू किए हैं, फिर भी इन मामलों पर अभी तक पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई है. आज भी विदेशों से एनआरआई लड़के हिंदुस्तानी लड़कियों से शादी करने देश आते हैं और यह बदस्तूर जारी है.
  5. आजकल बहुत-से ऐसे भी धोखाधड़ी के मामले देखने को मिलते हैं, जहां लड़के की नौकरी, बिज़नेस, काम, प्रॉपर्टी, इन्वेस्टमेंट्स, सेविंग्स, डिग्रीज़ आदि को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है, पर शादी के बाद सारा झूठ सामने आ जाता है.
  6. राजू ने परिवार की सहमति से अपनी पसंदीदा लड़की पूजा से अरेंज मैरिज की. शादी के बाद पूजा ने कभी किसी मन्नत, तो कभी देवी के व्रत के बहाने राजू से दूरी बनाए रखी. शादी के महीने भर बाद जब उसे उल्टियां होने लगीं और डॉक्टर के पास ले गए, तो पता चला, वो प्रेग्नेंट है. इतनी बड़ी धोखाधड़ी से आहत राजू ने तुरंत एक्शन लिया और शादी को अमान्य कराने के लिए कोर्ट में याचिका दाख़िल की, जहां ़फैसला उसके हक़ में हुआ.
शादी से पहले यूं रहें अलर्ट

–   मैट्रीमोनियल साइट्स पर वर/वधू पसंद आने पर उसके बारे में पूरी तरह छानबीन कर लें. पूरी तरह तसल्ली होने के बाद ही रिश्ते में आगे बढ़ें.

–   धोखाधड़ी से बचने के लिए ज़्यादातर लोग रिश्तेदारों के ज़रिए से वर/वधू की तलाश करते हैं, पर यहां भी धोखे की गुंजाइश रहती है, इसलिए शादी से पहले वर/वधू दोनों का किसी प्रतिष्ठित अस्पताल से कंप्लीट मेडिकल चेकअप करवाएं, ताकि नपुंसकता, मानसिक रोग, प्रेग्नेंसी या यूटेरस का न होना जैसी धोखाधड़ी पकड़ी जा सके.

–   शादी से पहले घरवाले भी एक-दो बार लड़के/लड़की से मिलें. अक्सर जो बातें यंगस्टर पकड़ नहीं पाते, वो अनुभवी आंखें पता कर लेती हैं.

–  शादी से पहले वर/वधू में से कोई एक-दूसरे से पैसे, महंगे गिफ्ट्स, कार आदि की मांग करता हैं, तो सतर्क हो जाएं.

–  बहुत बार फ्रॉड करनेवाले सगाई तक का इंतज़ार करते हैं और उसके बाद कभी नौकरी में प्रॉब्लम, तो कभी कोई घरेलू समस्या सुनाकर पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं. ज़्यादातर मामलों में देखा गया है कि बात मोबाइल रिचार्ज से शुरू होती है, जो धीरे-धीरे बढ़ने लगती है. अगर आपके साथ ऐसा कुछ हो रहा हो, तो सतर्क हो जाएं.

–  क़ानून भी आपकी मदद तभी कर सकता है, जब आप अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगे और बदमानी के डर को भूलकर धोखेबाज़ के ख़िलाफ़ तुरंत एक्शन लेंगे.

– अनीता सिंह  

यह भी पढ़ें: हर वर्किंग वुमन को पता होना चाहिए ये क़ानूनी अधिकार (Every Working Woman Must Know These Right)

यह भी पढ़ें: संपत्ति में हक़ मांगनेवाली लड़कियों को नहीं मिलता आज भी सम्मान… (Property For Her… Give Her Property Not Dowry)  

जानें हिंदू मैरिज एक्ट… समय के साथ क्या-क्या बदला? (Hindu Marriage Act: Recent Changes You Must Know)

Hindu Marriage Act Changes

साल 1955 में हमारे देश के जो हालात थे, आज स्थिति उससे बिल्कुल अलग है. आज लड़कियां भी उच्च शिक्षा प्राप्त करके सफलता के नित नए आयाम छू रही हैं, ऐसे में हमारा क़ानून भला बदलाव से अछूता कैसे रह सकता है. जब-जब महिलाओं ने अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाई, तब-तब क़ानून में महत्वपूर्ण बदलाव हुए. पिछले 63 सालों में कितना बदला हमारा हिंदू विवाह क़ानून? आइए जानते हैं.

Hindu Marriage Act Changes

कितना जानते हैं आप हिंदू मैरिज एक्ट के बारे में?

हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 में बनाया गया था. इस क़ानून के तहत सभी हिंदुओं, सिख, जैन और बौद्धों के शादी, तलाक़ और मेंटेनेंस के मामले सुलझाए जाते हैं.

–     सबसे पहले तो शादी के समय लड़की की उम्र 18 और लड़के की 21 साल होनी चाहिए. कुछ समय पहले जनहित याचिका के तहत एक वकील ने लड़के की उम्र भी 18 साल करने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने सिरे से ख़ारिज कर दिया.

–     हिंदू मैरिज एक्ट के तहत कोई शादीशुदा व्यक्ति पहली पत्नी के जीवित रहते, उससे तलाक़ लिए बिना दूसरी शादी नहीं कर सकता. अगर ऐसा होता है, तो उसे सात साल की जेल और जुर्माना दोनों हो सकता है. कुछ लोगों ने इसका तोड़ निकालने के लिए धर्म बदलकर शादी करनी शुरू की, जिसके ख़िलाफ़ 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने ़फैसला सुनाया कि यह क़ानूनन जुर्म है, जिसके लिए उस व्यक्ति को सज़ा हो सकती है.

–     गोवा के फैमिली लॉ के कोड ऑफ यूसेजेस एंड कस्टम्स में गैर-ईसाई हिंदू व्यक्ति को एक से ज़्यादा शादियां करने की छूट है, बशर्ते 25 साल की उम्र तक उसकी पत्नी मां न बनी हो और 30 साल की उम्र तक उन्हें कोई बेटा न हो.

–     इसके तहत शादी के लिए किसी ख़ास रस्म का ज़िक्र नहीं किया गया है. लड़के या लड़की किसी के भी रीति-रिवाज़ों के आधार पर शादी की जा सकती है.

–     शादी के बाद पति-पत्नी दोनों को ही वैवाहिक अधिकार (सेक्सुअल रिलेशन के अधिकार) मिलते हैं. क़ानूनन शादी तभी संपन्न मानी जाती है, जब उनके बीच शारीरिक संबंध बनते हैं. अगर कोई पार्टनर दूसरे को इस अधिकार से महरूम रखता है, तो दूसरा पार्टनर कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकता है. कोर्ट ऐसी शादी को अमान्य या निरस्त कर सकता है.

–     इसके तहत शादी का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है, ताकि शादी के बाद होनेवाली लीगल डॉक्यूमेंटेशन में कोई अड़चन न आए, लेकिन आज भी बहुत से लोग मैरिज सर्टिफिकेट नहीं बनवाते, जिसके कारण कुछ लोग उसका ग़लत फ़ायदा भी उठाते हैं.

–     हिंदू मैरिज एक्ट में शादी को पवित्र बंधन माना गया है, लेकिन अगर दोनों की शादी में समस्या आ रही है, तो वो तलाक़ ले सकते हैं. तलाक़ के आधार- व्यभिचार, धर्मांतरण, मानसिक विकार, कुष्ठ रोग, नपुंसकता, सांसारिक कर्त्तव्यों को त्याग देना, सात सालों से लापता, जुडीशियल सेपरेशन (कोर्ट द्वारा अलग रहने की इजाज़त), किसी भी तरह के शारीरिक संबंध नहीं बनाना और निष्ठुरता या क्रूरता हैं. पिछले कुछ सालों में मानसिक क्रूरता (मेंटल क्रुएल्टी) के आधार पर तलाक़ के मामलों में बढ़ोतरी हुई है.

–   क़ानून ने महिलाओं को परमानेंट एलीमनी और मेंटेनेंस का अधिकार दिया है, लेकिन वो ऐसी महिलाएं हैं, जो ख़ुद अपना भरण-पोषण नहीं कर सकतीं. कामकाजी महिलाओं को मेंटेनेंस का अधिकार नहीं था, लेकिन 2011 में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम् ़फैसला दिया कि पति से अलग रहनेवाली कामकाजी महिलाएं भी मेंटेनेंस की हक़दार होंगी.

–     बच्चों की कस्टडी को लेकर भी नियम बनाए गए हैं. तलाक़ के बाद अगर बच्चा छोटा है, तो मां को ही उसकी कस्टडी मिलती है. बड़े बच्चों के लिए कोर्ट मामले को दोनों की आर्थिक स्थिति व परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ़फैसला करता है.

किन स्थितियों में शादी हो सकती है अमान्य?

हिंदू मैरिज एक्ट में ऐसा भी प्रावधान है कि कुछ स्थितियों में आप अपनी शादी को कोर्ट से अमान्य घोषित करा सकते हैं. ऐसे में आप तलाक़शुदा नहीं कहे जाएंगे, बल्कि ऐसा माना जाएगा कि आपकी शादी हुई ही नहीं थी.

–   अगर शादी के व़क्त लड़की किसी और पुरुष से प्रेग्नेंट हो, तो ऐसी सूरत में शादी अमान्य हो सकती है. कुछ साल पहले ऐसा एक मामला सुर्ख़ियों में आया था. उस केस में लड़की शादी के व़क्त प्रेग्नेंट थी. शादी के बाद जब उसके पति को इसका शक हुआ, तो उन्होंने सोनोग्राफी करवाई, तो पता चला कि लड़की प्रेग्नेंट है. उसके पति ने तुरंत फैमिली कोर्ट में शादी को अमान्य करने की याचिका दाख़िल की. इस मामले में आपको यह ध्यान रखना होगा कि शादी के एक साल के भीतर मामला दाख़िल करना होगा.

–     अगर नपुंसकता के कारण पति-पत्नी का रिश्ता नहीं बन पाया, तो शादी क़ानूनन पूरी नहीं मानी जाएगी और ऐसे में व्यक्ति को हक़ है कि वो शादी को अमान्य करा सके. ऐसे में आपको तलाक़ लेने की ज़रूरत नहीं, बल्कि शादी को अमान्य करा सकते हैं.

–    अगर शादी के बाद आपको पता चले कि शादी के व़क्त ही आपके पार्टनर की मानसिक स्थिति सही नहीं थी और यह बात आपसे छुपाई गई, तो आप ऐसी स्थिति में अपनी शादी को अमान्य करा सकते हैं.

यह भी पढ़ें: 10 क़ानूनी मिथ्याएं और उनकी हक़ीक़त (10 Common Myths About Indian Laws Busted!)

Hindu Marriage Act Changes
विवाह विधेयक क़ानून, 2010

हिंदू मैरिज एक्ट और स्पेशल मैरिज एक्ट में कुछ बदलाव करने के उद्देश्य से साल 2010 में यह विधेयक लाया गया था. इस विधेयक में महिलाओं के ह़क़ में कई बदलाव किए गए हैं. 2013 में यह विधेयक राज्यसभा में पारित हुआ, पर लोकसभा में पारित न हो सका. इसमें प्रस्तावित कुछ बदलावों के बारे में आइए आपको बताते हैं.

–    इसमें पत्नी को यह अधिकार दिया गया है कि वो इस आधार पर अपने पति से तलाक़ ले सकती है कि अब उनकी शादी इस मुक़ाम पर पहुंच गई है कि उसे बरक़रार रखना नामुमकिन है, इसलिए वो तलाक़ चाहती है.

–     अगर पति ‘शादी पूरी तरह से टूट गई है और बरक़रार नहीं रह सकती,’ इस आधार पर तलाक़ लेना चाहता है, तो पत्नी इसका विरोध कर सकती है, पर पति के पास यह अधिकार नहीं है.

–     पत्नी को पति की चल-अचल संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा. साथ ही उसे पति की रिहायशी संपत्ति यानी घर आदि में हिस्सा मिलेगा.

–     पति-पत्नी द्वारा गोद लिए बच्चों को सगे बच्चों के समान प्रॉपर्टी में अधिकार मिलेगा.

–     आपसी सहमति से तलाक़ के लिए याचिका दायर करने के बाद कोई पक्ष क़ानूनी कार्यवाही से पीछे नहीं हट सकता.

छह महीने का इंतज़ार ख़त्म

इस बीच सितंबर, 2017 में हिंदू मैरिज एक्ट में एक और अहम् बदलाव आया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपसी सहमति से तलाक़ लेने के लिए लोगों को 6 महीने का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा. कोर्ट के मुताबिक़ अगर दोनों के बीच समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बची है और बच्चों की कस्टडी का ़फैसला भी हो गया है, तो उन्हें छह महीने के कूलिंग ऑफ पीरियड को पूरा करने की मजबूरी नहीं है. इससे दोबारा वो जल्दी अपना घर बसा सकते हैं.

यह भी पढ़ें: हर महिला को पता होना चाहिए रिप्रोडक्टिव राइट्स (मातृत्व अधिकार)(Every Woman Must Know These Reproductive Rights)

Hindu Marriage Act Changes  
 स्पेशल मैरिज एक्ट से जुड़ी 10 ज़रूरी बातें

यह क़ानून ख़ासतौर से अंतर्जातीय विवाह कर रहे लोगों की रक्षा के लिए बनाया गया है. इसके तहत अपनी शादी रजिस्टर कराने के लिए आपको कोई धार्मिक रीति-रिवाज़ निभाने नहीं पड़ते.

  1. इस एक्ट के तहत अंतर्जातीय और अलग-अलग धर्म के लोग विवाह कर सकते हैं.
  2. इसके तहत हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन या बौद्ध धर्म के लोग विवाह कर सकते हैं.
  3. शादी के लिए आपको 30 दिन पहले नोटिस देना पड़ता है. दूल्हा या दुल्हन दोनों में से कोई एक अपने इलाके के रजिस्ट्रार ऑफिस में नोटिस जमा कर सकता है.
  4. इसके तहत स़िर्फ भारतीय ही नहीं, बल्कि विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीय भी विवाह रजिस्टर करा सकते हैं.
  5. हिंदू मैरिज एक्ट की तरह इसमें भी कुछ नियम व शर्तें हैं, जैसे-

–     लड़के की उम्र कम से कम 21 साल और लड़की 18 साल होनी चाहिए.

–     दोनों कुंआरे हों या फिर शादीशुदा न हों यानी कोई पति-पत्नी न हों.

–     शादी के व़क्त मानसिक स्थिति अच्छी होनी चाहिए.

–     दोनों ही पक्ष प्रोहिबिटेड रिलेशनशिप की कैटेगरी में न आते हों. प्रोहिबिटेड रिलेशनशिप यानी भाई-बहन न हों, न ही सौतेले भाई-बहन हों. आपको बता दें कि सपिंडवाले भी इसके तहत शादी नहीं कर सकते. सपिंड यानी मां की तरफ़ से तीन पीढ़ी और पिता की तरफ़ से पांच पीढ़ी तक में शादी निषिद्ध मानी जाती है.

  1. 30 दिनों के लिए शादी का नोटिस रजिस्ट्रार ऑफिस के नोटिस बोर्ड पर लगाया जाता है. अगर किसी को इस शादी से आपत्ति हो, तो वो अपनी आपत्ति ज़ाहिर कर सकता है.
  2. अगर कोई आपत्ति आती है, तो रजिस्ट्रार को उसे 30 दिनों के भीतर सुलझाना होता है, लेकिन अगर कोई आपत्ति नहीं आती, तो नियत तारीख़ को तीन गवाहों की उपस्थिति में शादी संपन्न कराई जाती है.
  3. हर किसी के लिए यह जानना ज़रूरी है कि इसके तहत शादी करनेवालों के प्रॉपर्टी सक्सेशन के मामले इंडियन सक्सेशन एक्ट के तहत सुलझाए जाते हैं.
  1. यहां यह जानना भी बेहद ज़रूरी है कि आप शादी के एक साल के भीतर तलाक़ के लिए अप्लाई नहीं कर सकते. लेकिन अगर आप साबित कर सकें कि शादी बहुत बुरे हालात से गुज़र रही है, तो कोर्ट आवेदन पर अमल कर सकता है.
  2. इस एक्ट में दोबारा शादी का प्रावधान भी शामिल किया गया है, लेकिन शर्त यही है कि पहली शादी टूट चुकी हो और मामले में दोबारा अपील की गुंजाइश न बची हो.

– अनीता सिंह

यह भी पढ़ेंहर वर्किंग वुमन को पता होना चाहिए ये क़ानूनी अधिकार (Every Working Woman Must Know These Right)

न्यूली मैरिड के लिए मॉडर्न ज़माने के सात वचन (7 Modern Wedding Vows For Newly Married)

बदलते समय के साथ शादी का ट्रेंड (Wedding Trend) काफ़ी बदला है, तो भला दूल्हा-दुल्हन के सात वचन वही क्यों रहें? पहले लड़कियां कामकाजी नहीं थीं, तो घर के सदस्यों की देखभाल और अपने भरण-पोषण का वचन दूल्हे से लेती थीं, लेकिन अब तो वो भी कमाने लगी हैं, कामकाजी हैं, तो घर पर भी उन्हें हेल्पिंग हैंड की ज़रूरत पड़ती है. ऐसे में वचनों में थोड़ा बदलाव होना चाहिए. शादी के बाद सभी न्यूली मैरिड कपल्स को मॉडर्न ज़माने के ये सात वचन निभाने का वादा करना चाहिए.

Modern Wedding Vows

क्या हैं शादी के पारंपरिक सात वचन?

शादी के व़क्त अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए कन्या वर से ये सात वचन लेती है, जिसकी पूर्ति का आश्‍वासन देने पर ही वह अर्द्धांगिनी बनने के लिए राज़ी होती है.

1. पहले वचन में कन्या वर से कहती है कि आप कभी तीर्थयात्रा पर जाओ, तो मुझे भी अपने संग ले जाना. किसी भी व्रत
उपवास और धार्मिक कार्यों में मुझे भी
वामांगी बनाना.

2. जिस प्रकार आप अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं, उसी प्रकार मेरे माता-पिता का भी सम्मान करना.

3. तीसरे वचन में भी कन्या वर से वचन लेती है कि अगर आप जीवन की तीनों अवस्थाओं में मेरा पालन करने के लिए तैयार हैं, तभी मैं आपकी वामांगी बनूंगी.

4. अब तक आप घर-परिवार की ज़िम्मेदारियों से मुक्त थे, लेकिन अब शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं, तो परिवार की सभी ज़रूरतों को पूरा करने की ज़िम्मेदारी आपके कंधों पर होगी.

5. अपने घर के कार्यों में, लेन-देन या किसी भी चीज़ के लिए ख़र्च करते समय मुझसे विचार-विमर्श करेंगे.

6. अगर मैं अपनी सहेलियों के साथ बैठी हूं, तो वहां आकर आप मेरा अपमान नहीं करेंगे.

7. पराई स्त्रियों को मां के समान मानेंगे और पति-पत्नी के प्रेम के बीच किसी को नहीं आने देंगे.

मॉडर्न ज़माने के सात वचन

अब ये तो हो गए पारंपरिक सात वचन, जो कन्या वर से मांगती है, लेकिन आज ज़माना बराबरी और समानता का है. लड़कियां अब कमज़ोर नहीं, बल्कि लड़कों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं, ऐसे में घर-गृहस्थी की ज़िम्मेदारी भी दोनों मिलकर उठाते हैं.

1. घर का काम बांटकर करेंगे

आज ज़्यादातर शादीशुदा कपल्स वर्किंग हैं और अकेले रहते हैं. ऐसे में दोनों को ही घर के सभी काम ख़ुद करने पड़ते हैं. खाना
बनाने से लेकर घर की साफ़-सफ़ाई और देखभाल की ज़िम्मेदारी एक की न होकर दोनों की है, इसलिए दोनों को एक-दूसरे को यह वचन देना चाहिए कि वो घर के सारे काम मिल-बांटकर करेंगे.

2. एक-दूसरे की भावनाओं का  ख़्याल रखेंगे

शादी के शुरुआती दिनों में कपल्स की दुनिया काफ़ी अलग होती है. लविंग, केयरिंग और शेयरिंग में उनका पूरा समय बीतता है, लेकिन जब वो वापस काम पर लौटते हैं, तब असली परीक्षा शुरू होती है. घर-बाहर की ज़िम्मेदारी अक्सर कपल्स को चिड़चिड़ा बना देती है. शादी से पहले जहां पैरेंट्स सब कुछ संभाल लेते थे, वहीं अपनी गृहस्थी में सब कुछ
ख़ुद करना आसान नहीं होता. ऐसे में दोनों को एक-दूसरे की भावनाओं को समझना होगा.

3. एक-दूसरे के दोस्तों की रिस्पेक्ट करेंगे

माना कि शादी के बाद सब कुछ बदल जाता है, पर दोस्तों के साथ हमारी दोस्ती तो वही रहती है. शादी के बाद जब दोस्त मिलने आते हैं और कहीं बाहर मिलने भी बुलाते हैं, तो उन बातों को लेकर अक्सर कपल्स में नोंक-झोंक होने लगती है. हर किसी को हक़ है कि अपने दोस्तों के साथ समय बिताएं. ऐसे में आपको अपने पार्टनर को इतनी आज़ादी देनी होगी और उनके दोस्तों की भी रिस्पेक्ट करनी होगी. दोनों को ही यह याद रखना चाहिए कि दोस्तों की एक स्पेशल जगह होती है, जिससे किसी को भी महरूम नहीं करना चाहिए. तो आप दोनों भी वचन दें कि एक-दूसरे के दोस्तों की रिस्पेक्ट करेंगे.

यह भी पढ़ें:  शादी के बाद क्यों बढ़ता है वज़न? जानें टॉप 10 कारण (Top 10 Reasons For Weight Gain After Marriage)

यह भी पढ़ें:  मायके की तरह ससुराल में भी अपनाएं लव डोज़ फॉर्मूला (Love Dose Formula For Happy Married Life)

Wedding Vows

4. अपनी-अपनी हाइजीन का ख़्याल रखेंगे

कहते हैं कि मैरिड लाइफ की नींव हेल्दी सेक्स लाइफ पर टिकी होती है, इसलिए दोनों को ही अपने सेक्सुअल हेल्थ का ख़ास ख़्याल रखना चाहिए. रात को सोने से पहले ब्रश करना और प्राइवेट पार्ट्स को अच्छी तरह क्लीन करना दोनों की ही ज़िम्मेदारी है. पार्टनर को किसी तरह का सेक्सुअल इंफेक्शन न हो, इस बात को आप हाइजीन का ख़्याल रखकर ही सिक्योर कर सकते हैं.

5. एक-दूसरे के ऊपर अपनी मर्ज़ी नहीं थोपेंगे

प्यार में अक्सर कपल्स एक-दूसरे को ख़ुश करने के लिए पार्टनर की हर इच्छा को पूरी करते हैं, पर इस ख़ुशी को मजबूरी कभी न बनने दें. कैसे कपड़े पहनने हैं, कैसा व्यवहार करना है, किस तरह बातचीत करनी है… जैसी हज़ार चीज़ें हैं, जो न्यूली मैरिड कपल्स
एक-दूसरे पर थोपते हैं. पार्टनर की मर्ज़ी, हो न हो, अपनी मर्ज़ी चलाना अच्छी बात नहीं. आप दोनों इंडिपेंडेंट हो, वर्किंग हो, तो ज़ाहिर है,
बहुत-सी चीज़ें जानते हैं. ऐसे में यह ध्यान रखें कि कुछ भी करने से पहले पार्टनर की सलाह लें, चाहे बात सेक्सुअल रिलेशन की ही क्यों न हो. आपकी मर्ज़ी है, स़िर्फ इसलिए कुछ भी न करें.

6. हेल्दी लाइफस्टाइल मेंटेन करने में एक-दूसरे की मदद करेंगे

आज की हमारी लाइफस्टाइल में हेल्थ और फिटनेस बहुत ज़रूरी हो गया है, ऐसे में डायट से लेकर एक्सरसाइज़ तक दोनों को
एक-दूसरे को फिट रखने में मदद करनी होगी. यहां प्रॉब्लम तब आएगी, जब एक पार्टनर फूडी और दूसरा बहुत ही ज़्यादा फिटनेस कॉन्शियस होगा. यहां आप दोनों को बैलेंस करना होगा. और बात तब भी बिगड़ सकती है, अगर आप दोनों ही फूडी और आलसी हैं. ऐसे में दोनों को ही एक-दूसरे को मोटिवेट करना होगा. सुबह या शाम की रोज़ाना वॉक आप दोनों के साथ-साथ आपकी मैरिड लाइफ को भी हेल्दी बनाए रखेगी. तो आज ही एक-दूसरे से वचन लें कि दोनों मिलकर हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएंगे.

7. सभी ख़र्चों की ज़िम्मेदारी दोनों की बराबर होगी

हैप्पी मैरिड लाइफ में फाइनेंस की भी अहम् भूमिका होती है. घर ख़र्च से लेकर इन्वेस्टमेंट और सेविंग्स दोनों की ही ज़िम्मेदारी है, क्योंकि यह आप दोनों की गृहस्थी है. सेविंग्स की ज़िम्मेदारी स़िर्फ पति की नहीं, बल्कि पत्नी की भी है. पति-पत्नी चाहें, तो ज़िम्मेदारियां बांट लें, जैसे पत्नी घर ख़र्च देखेगी, पति इन्वेस्टमेंट और सेविंग्स. और जो भी
इमर्जेंसी ख़र्च होगा, उसके लिए एक अलग से अकाउंट बनाकर कुछ पैसे दोनों रखते जाएंगे. ऐसे में किसी एक पर फाइनेंशियल प्रेशर नहीं होगा और आप दोनों की ही ज़िंदगी स्ट्रेस फ्री और ख़ुशहाल होगी.

सात फेरे के ये सात क़दम भी ज़रूर लें

1. अगर पत्नी का मायका और ससुराल एक ही शहर में है, तो महीने में कम से कम एक बार पत्नी को न स़िर्फ मायके जाने देंगे, बल्कि उसके साथ ख़ुद भी सास-ससुर का
हालचाल लेने जाएंगे.

2. जॉइंट फैमिली में नहीं रहते हैं, तो हर हफ़्ते अपने पैरेंट्स से मिलें. नई बहू के लिए सास-ससुर और ससुराल के बाकी सदस्यों से मेल-मिलाप बहुत ज़रूरी है.

3. हर दूसरे या तीसरे महीने कोई नई जगह देखने जाएं, क्योंकि एक बार बच्चे हो गए, तो कुछ समय के लिए घूमना-फिरना कम हो जाएगा, इसलिए अभी एक-दूसरे के साथ नई-नई जगहें देखें और क्वालिटी समय बिताएं.

4. वैसे तो हर हफ़्ते एक नई फिल्म रिलीज़ होती है, लेकिन महीने में कोई न कोई ख़ास फिल्म होती है, जिसे देखने ज़रूर जाएं.

5. 15-20 दिन या महीने में एक बार कैंडल लाइट डिनर पर जाने से मैरिड लाइफ में रोमांस बना रहता है और डेली रूटीन से भी ब्रेक मिल जाता है.

6. किसी दोस्त या रिश्तेदार से अपने पार्टनर को मिलाने ले जाएं. नए-नए लोगों से मिलने से मैरिड लाइफ में रोमांच बना रहता है.

7. ख़ुद को और पार्टनर को स्ट्रेस फ्री और पैंपर करने के लिए किसी स्पा ज़रूर ले जाएं.

– संतारा सिंह

यह भी पढ़ें: किस राशिवाले किससे करें विवाह? (Perfect Life Partner According To Your Zodiac Sign)