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छोटे-छोटे निवेश से करें बड़ी बचत (Small Investments, Big Returns)

छोटे-छोटे निवेश, बड़ी बचत, Small Investments, Big Returns

छोटे-छोटे निवेश, बड़ी बचत, Small Investments, Big Returns

बच्चों की ट्यूशन फीस, उनके लिए कंप्यूटर व लैपटॉप की ख़रीददारी, घर की मरम्मत करवानी हो या फिर घर के लिए ज़रूरी कोई सामान ख़रीदना हो… कई ऐसे ख़र्चे हैं, जो गाहे-बगाहे सामने आ ही जाते हैं. इस तरह के आकस्मिक ख़र्चों को पूरा करने के लिए एक ‘स्पेशल बचत/फंड’ की ज़रूरत होती है, जिनसे इन आकस्मिक ख़र्चों की पूर्ति की जा सके. आइए जानें, निवेश करने के ऐसे ही कुछ ख़ास तरीक़ों के बारे में.

मुंबई के एक पोस्ट ऑफिस में पोस्ट मास्टर के पद पर कार्यरत प्रमोदिनी कदम के अनुसार, “पोस्ट ऑफिस में समय-समय पर अनेक शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट स्कीम्स निकलती रहती हैं, जिनकी अवधि एक साल, 2 साल, 3 साल या 5 साल की होती है. इस तरह की स्कीम्स में छोटे-छोटे निवेश करके आप बड़ी बचत कर सकते हैं और अपने सपनों को पूरा भी कर सकते हैं.”

पोस्ट ऑफिस
छोटे-छोटे निवेश करने के लिए पोस्ट ऑफिस सबसे अच्छा विकल्प है. अन्य वित्तीय संस्थानों और बैंकों की तरह पोस्ट ऑफिस भी अपने कस्टमर्स को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के लिए समय-समय पर अनेक स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स निकालते रहते हैं. जैसे- पोेस्ट ऑफिस टाइम डिपॉज़िट स्कीम्स: इस स्कीम के अंतर्गत जमाकर्ता को एक निश्‍चित जमाराशि एक नियत समय के लिए जमा करनी होती है. अवधि पूरी होने पर जमाकर्ता को ब्याज सहित पूरी जमाराशि मिल जाती है. इस स्कीम के तहत जमाकर्ता कम से कम 200 और अधिकतम अपनी इच्छानुसार जमा करा सकता है. इस योजना के अंतर्गत 1 साल में 8.2%, 2 साल में 8.2%, 3 साल में 8.4% और 5 साल में 8.5% ब्याज मिलता है. 6 महीने के बाद कभी भी इस योजना को एनकैशमेंट करा सकते हैं. कम अवधि के लिए निवेश करनेवाले जमाकर्ताओं के लिए यह बहुत लाभकारी योजना है. इस योजना में आयकर छूट भी उपलब्ध है.

पोस्ट ऑफिस मंथली इन्कम स्कीम: इस योजना के तहत जमाकर्ता को शुरुआत में 6,000 का निवेश करना पड़ता है. 5 साल की अवधि वाली इस योजना में 8.4% की दर से प्रति माह ब्याज़ मिलता है. इस योजना के तहत जमाकर्ता 1 साल के बाद कभी भी अपनी जमाराशि निकाल सकते हैं. 1 से 3 साल के बीच जमाराशि निकालने पर कुल राशि का 2% पैनल्टी काटकर बाकी की जमाराशि वापस मिल जाती है. 3 से 5 साल से पहले जमाराशि निकालने पर 1% की पैनल्टी लगती है.

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नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट्स: छोटे-छोटे निवेश के तौर पर जमाकर्ताओं के लिए नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट्स भी एक अच्छा विकल्प है. ये सर्टिफिकेट्स 2 तरह के होते हैं. पहला- वे सर्टिफिकेट्स- जिनकी अवधि 10 साल की होती है. दूसरा- जिनकी अवधि 5 साल की होती है. 5 साल की अवधि वाले इन सर्टिफिकेट्स पर जमाकर्ता 100 से लेकर इच्छानुसार अधिकतम निवेश कर सकते हैं. जमाकर्ता को इन सर्टिफिकेट्स पर 8.5% का ब्याज मिलता है. इन पर आयकर छूट भी उपलब्ध है. इन सर्टिफिकेट्स का प्रीमेच्योर एनकैशमेंट केवल कुछ विशेेष परिस्थितियों (जैसे डेथ) में ही हो सकता है.

पोस्ट ऑफिस रिकरिंग डिपॉज़िट स्कीम: पोस्ट ऑफिस द्वारा जारी की गई इस शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट प्लानिंग से जमाकर्ता अपने सपनों को आसानी से पूरा कर सकते हैं. इस योजना में जोख़िम की कोई संभावना नहीं होती. इस योजना के तहत जमाकर्ता को एक निश्‍चित राशि जमा करानी होती है. न्यूनतम राशि 10 से लेकर अधिकतम अपनी इच्छानुसार कर सकते हैं. 5 साल की अवधि वाली इस योजना में ब्याज की दर 8.4% है.

पिग्गी बैंक: निवेश करने के लिए ज़रूरी नहीं है कि आप बैंक या पोस्ट ऑफिस द्वारा निकाली गई किसी स्कीम में इंवेस्ट करें. घर बैठे-बैठे, बिना कोई अतिरिक्त ख़र्च किए भी आप थोड़ा-थोड़ा निवेश कर सकते हैं पिग्गी बैंक के ज़रिए. पिग्गी बैंक आकस्मिक ख़र्चों को पूरा करने के लिए एक अच्छा फाइनेंशियल रिसोर्स (आर्थिक साधन) है. इसमें जमा करना अन्य विकल्पों की अपेक्षा बहुत ही आसान है. बस, आपको यह तय करना है कि आपको पिग्गी बैंक में हर महीने कितनी राशि डालनी है. यदि आरंभ से ही निर्धारित जमाराशि नियत समय पर डालते रहेंगे, तो एक बड़ी जमाराशि जोड़ लेगें.

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किट्टी बैंक: निवेश करने का एक और अच्छा तरीक़ा है किट्टी बैंक. पिग्गी बैंक की तरह किट्टी बैंक में भी निवेश करना बहुत आसान है. किट्टी बैंक डालने के लिए कम से कम 12 सदस्यों की ज़रूरत होती है (सदस्यों की संख्या कम या ज़्यादा भी हो कर सकते हैं). आपसी सहमति से प्रति सदस्य फंड की राशि और किट्टी बैंक की तारीख़ तय कर सकते हैं. किट्टी बैंक के लिए एक कॉर्डिनेटर की ज़रूरत भी होती है, जो सब सदस्यों से निर्धारित तारीख़ पर फंड जमा करें. इसके बाद सारे सदस्यों के नाम की परची डालकर उसमें से किसी एक के नाम की परची निकाल लें. जिसके नाम की परची निकलेगी, किट्टी उसी को ही मिलेगी. किट्टी बैंक के 2 लाभ है, पहला- इस तरी़के से निवेश करना बहुत आसान है और दूसरा- दोस्तों आदि के साथ एंजॉय करने का मौक़ा मिल जाता है.

शॉर्ट टर्म्स इन्वेस्टमेंट्स बॉन्ड्स: यह भी ‘छोटे निवेश’ फंड का एक अहम् भाग है. जिसमें बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां निवेशकों को लुभाने के लिए अपनी कंपनी के नाम ‘शॉर्ट टर्म्स इन्वेस्टमेंट बॉन्ड्स’ इश्यू करती हैं. इन बॉन्ड्स की अवधि 1 से लेकर 4 साल तक की होती है. इन बॉन्ड्स में जोख़िम की संभावना कम होती है. इस तरह के बॉन्ड्स में निवेश करने के पीछे जमाकर्ता का उद्देश्य अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के साथ-साथ अतिरिक्त बोनस/प्रीमियम प्राप्त करना होता है.

अधिक फाइनेंस आर्टिकल के लिए यहां क्लिक करें: FINANCE ARTICLES 

– पूनम नागेंद्र शर्मा

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कैसे करें मैनेज जब हो सिंगल इंकम? (How to Manage With Single Income?)

अगर पैसों का मैनेजमेंट सही है, तो कम से कम पैसों में भी सभी ज़रूरतों को पूरा किया जा सकता है. साथ ही भविष्य के लिए पैसा बचाया भी जा सकता है. फिर भले ही आप घर में अकेले कमानेवाले हों यानी सिंगल इनकम वाले हों. आइए, इसी से संबंधित कई उपयोगी बातों के बारे में जानते हैं.  

कैसी हो ख़रीददारी?

  • यह विषय काफ़ी हद तक स्त्रियों से संबंधित है. घर में अगर स्त्री वर्किंग नहीं है, तो ख़रीददारी को लेकर काफ़ी एहतियात बरतने की ज़रूरत है.
  •  कोई भी ख़रीददारी हमेशा पूर्व नियोजित होनी चाहिए. किसी भी ख़रीददारी पर जाने से पहले क्या ख़रीदना है, कितने दाम का ख़रीदना है? यह पहले से तय कर लें. ऐसे में फ़िज़ूलख़र्ची नहीं होगी.
  • शॉपिंग पर जाने से पहले शॉपिंग काग़ज़ पर हो जानी चाहिए यानी क्या-क्या लेना है और उसके लिए आपका बजट क्या है, सब लिस्ट में लिख लेें. इससे आपको एक सही बजट मिल जाता है और शॉपिंग करते व़क्त फ़िजूलख़र्ची नहीं होती.

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प्री-प्लानिंग करें

  • प्री-प्लानिंग बहुत ज़रूरी है. यह आदत आपको स़िर्फ पैसों के मामले में ही नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक तौर पर भी स्वस्थ रखेगी.
  • पैसे का मैनेजमेंट बहुत ज़रूरी है और यह तब और अनिवार्य हो जाता है, जब घर की आर्थिक ज़िम्मेदारी किसी एक व्यक्ति पर हो.
  •  प्री-प्लानिंग का मतलब है कि जैसे आपको पता है कि दो महीने बाद आपको किसी शादी या समारोह में शरीक होने कहीं शहर से बाहर जाना है, तो आप अपनी तैयारी अभी से शुरू कर दें. फिर चाहे वह शादी की ख़रीददारी हो, तोह़फे हों या फिर आने-जाने की टिकट. धीरे-धीरे अपनी तैयारी शुरू कर दें. 
  • यह तो स़िर्फ एक उदाहरण था, पर ऐसे ही कई चीज़ों की प्री-प्लानिंग की जा सकती है, जैसे कोई बड़ी वस्तु आप ख़रीदना चाह रहे हों या फिर कहीं दूर घूमने का इरादा हो.  

निवेश

  • आपने हमेशा सुना होगा पैसों के निवेश के बारे में, पर वास्तव में पैसों का निवेश काफ़ी पेचीदा विषय है. तो अगर आप पैसे कमाने के लिए कहीं बाहर नहीं जाते हैं, तो अपने पैसों का निवेश आप अच्छी तरह से कर सकते हैं.
  •  इसके लिए बिना किसी जानकारी के निवेश करना ख़तरनाक हो सकता है. चूंकि आपके पास समय है, तो आप किसी आर्थिक विशेषज्ञ से सलाह-मशवरे के बाद निवेश करके अपनी आर्थिक स्थिति को मज़बूत कर सकते हैं.

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पार्ट टाइम जॉब है ऑप्शन 

  • यह बात सच है कि घर के साथ बाहर जाकर नौकरी करना वाक़ई मुश्किल काम है, पर बच्चों के स्कूल जाने के बाद आप कोई पार्ट टाइम जॉब कर सकती हैं, जैसे- किसी मॉन्टेसरी स्कूल में टीचर बन सकती हैं या आप घर पर ट्यूशन ले सकती हैं या आजकल बहुत सारे ऐसे काम होते हैं, जो घर बैठे किए जा सकते हैं, इन्हे फ्रीलांसिंग कहते हैं.
  •  इससे होनेवाली कमाई चाहे कम हो, पर यक़ीन मानिए, इससे काफ़ी मदद मिलेगी. 
  • आपका समय भी कटेगा और अतिरिक्त पैसे भी मिल जाएंगे.

बैंक अकाउंट खुलवाएं

  • सामान्य तौर पर यह देखा गया है कि अगर घर का वह सदस्य, जो पैसे नहीं कमाता, वह अपना बैंक अकाउंट नहीं खुलवाता है.
  •  यह ग़लत है, जब घर में एक ही कमानेवाला हो, तो आपका अकाउंट होना बहुतज़रूरी है.
  • उसमें हर महीने आप ख़र्चों और निवेश के बाद बचे अतिरिक्त पैसे डाल सकते हैं, जिससे बचत होगी.
  • उसे आप एक आपातकालीन व्यवस्था की तरह उपयोग में ला सकते हैं.

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आपसी विचार-विमर्श करें

  • चूंकि घर में कमानेवाला एक ही है, इसलिए जब कभी पैसा ख़र्च करने की बात हो या निवेश की बात आए, तो ज़रूरी है कि दोनों साथ में निर्णय लें. इसके अलावा महीने का बजट बनाने में भी दोनों का एकमत होना ज़रूरी है.

ईगो की लड़ाई से बचें

  • यह शायद पैसे से परोक्ष रूप से संबंधित ना हो, पर अपरोक्ष रूप से यह होता है, जब घर किसी एक की कमाई पर चलता है, तब कमानेवाले को ईगो की समस्या नहीं होनी चाहिए. इससे आपसी संबंध ख़राब होंगे और आपकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी.
  • हमेशा याद रखें कि अगर आप पैसे कमा रहे हैं, तो उनका मैनेजमेंट आपका साथी कर रहा है, जो कहीं ना कहीं आपको आर्थिक रूप से सहयोग देता है.

                                                                              – विजया कठाले निबंधे

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15 इन्वेस्टमेंट ऑप्शन्स महिलाओं के लिए (15 Investment options for women)

Investment options

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रिटर्न्स तो हर इन्वेस्टमेंट से मिलते हैं, लेकिन हमारे लिए क्या सही है, ये जानने के लिए ज़रूरी है इन्वेस्टमेंट ऑप्शन्स को जानना. मीनाक्षी ओस्तवाल बता रही हैं महिलाओं के लिए इन्वेस्टमेंट के 15 ऑप्शन्स, ताकि आप चुन सकें अपने लिए निवेश का सही विकल्प. निवेश करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ होती है निवेशक की रिस्क कैपेसिटी यानी निवेशक कितना रिस्क ले सकता है, क्योंकि इसी पर काफ़ी हद तक रिटर्न्स निर्भर होते हैं. तो आइए, इन्वेस्टमेंट के विकल्पों को लो रिस्क और हाई रिस्क के अनुसार वर्गीकृत करके जानते हैं. (Investment Options)

लो रिस्क लो रिटर्न इन्वेस्टमेंट्स
लो रिस्क वाले इन्वेस्टमेंट ज़्यादातर गवर्नमेंट बॉन्ड या पोस्ट ऑफ़िस इन्वेस्टमेंट होते हैं. इनमें रिस्क काफ़ी कम होता है और साथ ही रिटर्न्स भी. यदि आप सेफ़र साइड रहकर रिटर्न से ज़्यादा फ़्यूचर के लिए जमा करने में यक़ीन रखती हैं, तो ये इन्वेस्टमेंट ऑप्शन्स आपके लिए बेहतर साबित होंगे.

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ़)
पीपीएफ़ 15 वर्ष के एन्युटी टर्म (मैच्योरिटी पीरियड) के साथ होता है. इसमें आप प्रति वर्ष न्यूनतम 500 रु. तथा अधिकतम 70,000 रु. तक इन्वेस्ट कर सकती हैं. 70,000 रु. से अधिक निवेश करने पर एक्स्ट्रा राशि बिना किसी ब्याज के लौटा दी जाती है. पीपीएफ़ में निवेश करने पर डबल टैक्स बेनिफ़िट मिलता है. इस पर मिलने वाला 8% वार्षिक ब्याज तो टैक्स फ्री है ही, इसके अलावा इसमें जमा की गई राशि पर आप सेक्शन 80 ङ्गसीफ के तहत डिडक्शन (छूट) भी क्लेम कर सकती हैं. इसके अलावा आप पीपीएफ़ में जमा की गई राशि पर लोन भी ले सकती हैं. सातवें वर्ष की शुरुआत से 50% तक राशि विदड्रॉ भी करवा सकती हैं. मगर ये विदड्रॉवल आप साल में केवल एक बार ही कर सकती हैं.

भविष्य निर्माण बॉन्ड्स
भविष्य निर्माण बॉन्ड्स 10 साल के ज़ीरो कूपन बॉन्ड्स होते हैं. ज़ीरो कूपन बॉन्ड्स यानी इन बॉन्ड्स पर आपको कोई इन्ट्रेस्ट नहीं मिलता. ज़ीरो कूपन बॉन्ड्स कम क़ीमत पर इश्यु करके ज़्यादा क़ीमत पर रिडीम किए जाते हैं. उदाहरण के तौर पर, यदि कोई बॉन्ड 9000 रु. में इश्यु करके 20,000 रु. में रिडीम होता है तो निवेशक को 11000 रु. का फ़ायदा होता है यानी 8.31% का रिटर्न. भविष्य निर्माण बॉन्ड की इश्यु प्राइज़ (जारी करने की क़ीमत) नाबार्ड (नेशनल बैंक फ़ॉर एग्रीकल्चरल एंड रूरल डेवलपमेंट) द्वारा पब्लिश की जाती है. चूंकि ज़ीरो कूपन बॉन्ड्स पर कोई इंट्रेस्ट नहीं मिलता, अतः इस पर टैक्स भी नहीं लगता, किंतु इसके रिडम्शन प्राइज़ पर होने वाले प्रॉफ़िट पर कैपिटल गेन टैक्स पे करना पड़ता है. यह टैक्स अमाउंट इंडेक्शन बेनिफ़िट्स के बाद हुए कैपिटल गेन का 20% होता है.

नेशनल सेविंग सर्टिफ़िकेट (एनएससी)
एनएससी ही एक मात्र ऐसा इन्वेस्टमेंट है, जिसमें आप को निवेश के साथ-साथ ब्याज पर भी 5 साल तक डिडक्शन मिलता है. एनएससी की कालावधि 6 वर्ष की होती है. इसमें 8% प्रति वर्ष की दर से ब्याज मिलता है. एनएससी को गिरवी रख कर आप इस पर लोन भी ले सकती हैं. एनएससी अब डीमेट फ़ॉर्मेट में भी उपलब्ध है.

सीनियर सिटिज़न सेविंग स्कीम 
यदि आप की उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक है तो आप सीनियर सिटिज़न सेविंग स्कीम में इन्वेस्ट कर सकती हैं. इसका इन्ट्रेस्ट रेट (ब्याज दर) 9% प्रति वर्ष होता है. आप इसमें कम-से-कम 1000 रु. या 1000 रु. के मल्टीपल्स (गुणांक) में इन्वेस्ट कर सकती हैं. इसमें कोई टैक्स बेनिफ़िट नहीं मिलता. यदि इस पर मिलने वाले ब्याज की रकम सालाना 10,000 रु. या अधिक होती ़़है तो इस पर 10.30% की दर से टीडीएस भी कटता है. वीआरएस सिस्टम के तहत रिटायर हुए लोगों के लिए इस स्कीम में इन्वेस्ट करने के लिए न्यूनतम उम्र 60 वर्ष नहीं, बल्कि 55 वर्ष है. जबकि रिटायर्ड ड़िफेंस सर्विस ऑफ़िसर्स के लिए कोई एज लिमिट नहीं है.

किसान विकास पत्र (केवीपी)
मैच्योरिटी पर किसान विकास पत्र की रकम दोगुनी हो जाती है. पहले केवीपी का मैच्योरिटी पीरियड 7 वर्ष 8 महीने था, पर मार्च 2003 में इसे बढ़ाकर 8 वर्ष 7 महीने कर दिया गया यानी मार्च 2003 से ख़रीदे गए केवीपी को मैच्योरिटी के लिए 8 वर्ष 7 महीने तक होल्ड करना होगा.

आरबीआई टैक्सेबल सेविंग बॉन्ड्स
आरबीआई टैक्सेबल सेविंग बॉन्ड्स नॉन-सीनियर सिट़िज़न्स के बीच बहुत पॉप्युलर है. इसका इन्ट्रेस्ट रेट 8% है. ये बॉन्ड्स 4 साल के लिए होते हैं. इसमें आप कम-से-कम 1000 रु. या 1000 रु. के मल्टीपल्स में अनलिमिटेड इन्वेस्ट कर सकती हैं. ये बॉन्ड्स स्टॉक सर्टिफ़िकेट के रूप में इश्यु किए जाते हैं. यदि आप चाहें तो इनका क्रेडिट बॉन्ड लेज़र अकाउंट यानी बीएलए में भी ले सकती हैं. बीएलए में स्टॉक सर्टिफ़िकेट के बजाय अकाउंट स्टेटमेंट इश्यु किए जाते हैं. यदि इस पर मिलने वाले ब्याज की रकम सालाना 10,000 रु. या इससे अधिक होती है तो इस पर 10.30% की दर से टीडीएस भी कटता है. ये बॉन्ड्स डीमेट अकाउंट में भी रख सकती हैं. इन्हें ट्रान्सफ़र या गिरवी नहीं रखा जा सकता और न ही किसी को ग़िफ़्ट में दिया जा सकता है.

बैंक डिपॉज़िट्स
बैंक डिपॉज़िट इन्वेस्टमेंट का एक अच्छा और सेफ़ ऑप्शन है. आप बैंक एफ़डी या आरडी में इन्वेस्ट कर सकती हैं. अपने इन्वेस्टमेंट की कालावधि अपनी सहूलियत के अनुसार तय कर सकती हैं. एफ़डी और आरडी का इन्ट्रेस्ट रेट सालाना 8 से 10.5 % तक होता हैं. अलग-अलग बैंकों का इन्ट्रेस्ट रेट अलग-अलग होता है.
हालांकि यदि इस पर मिलने वाले ब्याज की रकम सालाना 10,000 रु. या इससे अधिक होती है तो इस पर 10.30% की दर से टीडीएस भी कटता है और साथ ही बैंक डिपॉज़िट्स में टैक्स बेनिफ़िट्स नहीं मिलते, पर पांच वर्ष से अधिक कालावधि की एफ़डी में निवेश करने से आप इन्वेस्टमेंट अमाउंट पर डिडक्शन क्लेम कर सकती हैं.

पोस्ट ऑफ़िस मंथली इनकम स्कीम (एमआईएस)
पोस्ट ऑफ़िस मंथली इनकम स्कीम में आप अपनी सुविधा के अनुसार हर महीने एक फ़िक्स अमाउंट जमा कर सकती हैं. इस पर 8% प्रति वर्ष की दर से ब्याज मिलता है. आप इसमें न्यूनतम 1000 रु. से लेकर अधिकतम 3 लाख तक इन्वेस्ट कर सकती हैं. ज्वॉइंट अकाउंट की दशा में लिमिट 6 लाख तक होती है. एमआईएस अकाउंट ओपन करने के एक साल बाद आप इसे मैच्योरिटी पीरियड से पहले ही विदड्रा करवा सकती हैं.

हाई रिस्क हाई रिटर्न इन्वेस्टमेंट्स
यदि आप अपने निवेश पर ज़्यादा रिटर्न चाहती हैं तो थोड़ा रिस्क भी लेना चाहिए. आइए, नज़र हालते हैं हाई रिस्क हाई रिटर्न वाले इनवेस्टमेंट ऑप्शन्स पर.

शेयर्स
शेयर यानी स्टॉक मार्केट में निवेश करने से जितने अच्छे रिटर्न मिलते हैं यह उतना ही रिस्की भी है. किंतु यदि आप हाई रिस्क लेने में यक़ीन रखती हैं तो स्टॉक मार्केट फटाफट पैसा कमाने का अच्छा ऑप्शन साबित हो सकता है. इसके लिए किसी भी कंपनी के शेयर्स ख़रीदते समय केवल ब्रोकर पर भरोसा न करके अपनी तरफ़ से कंपनी का पास्ट परफ़ॉर्मेंस ज़रूर चेक कर लें. साथ ही शेयर को लॉन्ग टर्म तक होल्ड करने की आदत डालें, क्योंकि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन यानी एक साल से ज़्यादा समय तक होल्ड करने पर होने वाला प्रॉफ़िट टैक्स फ्री है, जबकि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 10% टैक्स लगता है.

म्यूचुअल फंड
यदि स्टॉक मार्केट पर नज़र बनाए रखना आपके लिए संभव न हो, तो म्यूचुअल ़फंड्स आपके लिए बेस्ट ऑप्शन है. म्यूचुअल फंड में आपका पैसा मार्केट एक्सपर्ट की निगरानी में स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट किया जाता है. इस निवेश पर होनेवाले प्रॉफ़िट में से म्यूचुअल फंड प्रदाता कंपनी अपने चार्जेज़ काट कर बाक़ी रकम आपके अकाउंट में जमा कर देती है. म्यूचुअल फंड्स की कई अलग-अलग स्कीम्स मार्केट में उपलब्ध हैं, जैसे- डेब्ट फंड्स, इक्विटी फंड्स, बैलेंड्स फंड्स आदि. म्यूचुअल फंड में होने वाला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स फ्री होता है, जबकि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 10% टैक्स पे करना होता है.

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम
इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम म्यूचुअल फंड्स का ही एक प्रकार है. यह 3 वर्ष के लॉक इन पीरियड के साथ होता है. इसमें अच्छे रिटर्न मिलते हैं, क्योंकि इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम में 80% तक इक्विटी मार्केट में इन्वेस्ट किया जाता है. यह इन्वेस्टमेंट ऑप्शन टैक्स प्लानिंग के लिए बेस्ट माना जाता है, क्योंकि इस इन्वेस्टमेंट में सेक्शन 80 C के तहत डिडक्शन मिलता है. 3 वर्ष के लॉक इन पीरियड के कारण लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन होता है, जो कि टैक्स फ्री होता है.

गोल्ड
यदि गोल्ड में इन्वेस्ट करना चाहती हैं, तो गहनों के बजाय गोल्ड कॉइन्स, बार्स और गोल्ड बुलियन्स ख़रीदें. गोल्ड कॉइन्स या बार ख़रीदते समय यह ज़रूर ध्यान रखिए कि इन पर हॉलमार्क लगा हो. गोल्ड रेप्युटेड ज्वेलर्स या बैंक से ही ख़रीदें. गोल्ड में इन्वेस्ट करने के लिए गोल्ड ख़रीदने के बजाय आप गोल्ड ट्रेडेड फंड या गोल्ड म्यूचुअल फंड्स में भी निवेश कर सकती हैं. गोल्ड में हुए कैपिटल गेन पर शॉर्ट टर्म यानी 3 साल से कम पर 10 प्रतिशत और लॉन्ग टर्म यानी 3 साल से ज़्यादा पर 20 प्रतिशत टैक्स लगता है.

प्रॉपर्टी
ज़मीन की क़ीमतों में हो रही लगातार बढ़ोतरी के मद्देनज़र प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट आजकल काफ़ी पॉप्युलर हो रहा है. इसमें आपको टैक्स बेनिफ़िट्स भी मिलता है. उदाहरण के लिए यदि आप कोई घर ख़रीदती हैं तो उस घर पर अदा की गई स्टैम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्जेज़ को डिडक्शन के रूप में क्लेम कर सकती हैं. प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट पर होने वाले कैपिटल गेन पर लॉन्ग टर्म में 20% और शॉर्ट टर्म में 10% टैक्स पे करना पड़ता है. प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट करते समय प्रॉपर्टी के लोकेशन का अच्छे से मुआयना कर लें.

यूलिप
यूलिप में हाई रिटर्न्स के साथ-साथ लाइफ़ कवर भी मिलता है. यूलिप का मैच्योरिटी टर्म 10 से 15 वर्ष का होता है. इसमें आप प्रति वर्ष न्यूनतम 15000 रु. और अधिकतम 5 लाख रु. तक इन्वेस्ट कर सकती हैं. साथ ही इन्वेस्टमेंट अमाउंट पर डिडक्शन भी क्लेम कर सकती हैं. यूलिप में आप अपनी सहूलियत के मुताबिक़ इंस्टॉलमेंट में भी इन्वेस्ट कर सकती हैं, पर पैसे विदड्रॉ करवाने के लिए कम-से-कम 7 साल का इंतज़ार करना होता है. यूलिप में निवेश की गई राशि का 60% हिस्सा गवर्नमेंट डिपॉज़िट्स और 40% हिस्सा स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट होता है. यानी शेयर्स और इक्विटी ओरियंटेड म्यूचुअल ़फंड्स के मुक़ाबले ये कम रिस्की होते हैं.

डेरिवेटिव्स
निवेश करने के लिए डेरिवेटिव्स यानी कोमोडिटी मार्केट एक अच्छा विकल्प है. शेयर्स की तरह इन्हें भी आप ओपन मार्केट में ख़रीद-बेच सकती हैं. इनका डिलिवरी पीरियड एक महीना होता है. यानी ख़रीदने के एक महीने के अंदर आपको इन्हें क़ीमतें बढ़ने पर बेचना होता है. चूंकि ये कोमोडिटीज़ कई किलो और टन में होती हैं, अतः इनकी फ़िज़िकल डिलिवरी लेना संभव नहीं होता है. अतः इनके ट्रांजेक्शन को डीमेट अकाउंट में रखा जाता है.

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प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट के ईज़ी टिप्स

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दिन-ब-दिन ब़ढ़ती महंगाई, बच्चों की हायर स्टडीज़ और लाइफस्टाइल संबंधी बीमारियों के चलते आम आदमी के लिए प्रॉपर्टी में निवेश करना थोड़ा मुश्किल होता है. वैसे भी प्रॉपर्टी में निवेश करना बहुत जोख़िम का काम होता है, लेकिन अपने और अपने परिवार के सुरक्षित भविष्य के लिए यह जोख़िम उठाया जा सकता है. प्रॉपर्टी में निवेश करके आप भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों को आसानी से पूरा कर सकते हैं.

योजना बनाएं:
अगर आप प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले योजना बनाएं कि प्रॉपर्टी ख़रीदने में आपको कितनी अनुमानित राशि ख़र्च करनी है? प्रॉपर्टी कहां लेनी है? किस बैंक से लोन लेना है? आदि. इन बातों को ध्यान में रखकर योजना बनाएंगे, तो प्रॉपर्टी में निवेश करना आसान होगा. योजना के अनुसार प्रॉपर्टी ख़रीदने पर ख़र्चे बजट के अंदर होंगे और आप अतिरिक्त ख़र्चों के बोझ से भी बचेंगे.

अपना बजट तय करें:
प्रॉपर्टी ख़रीदने की योजना बनाने के बाद दूसरा चरण आता है बजट का. बजट बनाते समय प्रॉपर्टी की अनुमानित क़ीमत, स्टैंप ड्यूटी, ब्रोकर की फीस, मॉर्गेज़ इंश्योरेंस (अगर आवश्यक हो तो), मेंटेनेंस चार्जेस आदि ख़र्चों का ध्यान रखें. इसके अलावा कुछ अन्य ख़र्चे, जैसे- बैंक से कितना लोन मिल सकता है, फिक्स्ड डिपॉज़िट्स आदि से कितना मैनेज हो सकता है. यदि रेनोवेशन, इंटीरियर और होम डेकोर आदि कराना है, तो कितना ख़र्च आएगा? इन सब बातों को ध्यान में रखकर अपना बजट बनाएं.

लोकेशन (प्रॉमिसिंग एरिया) का चुनाव करें:
यह भी एक बहुत महत्वपूर्ण निर्णय है कि आपको किस एरिया में प्रॉपर्टी ख़रीदनी है? वहां पर किस-किस तरह की सुविधाएं (बच्चों के लिए पार्क, स्कूल, अस्पताल, मॉल आदि) उपलब्ध हैं? वहां पर भविष्य में विकास की कौन-कौन-सी संभावनाएं हैं? भविष्य में अगर किराए पर देना हो या प्रॉपर्टी बेचनी पड़े, तो मुना़फे की कितनी संभावना है. यदि इन सब बातों को ध्यान में रखकर प्रॉमिसिंग एरिया का चुनाव करेंगे, तो प्रॉपर्टी में निवेश करना आसान होगा.

अनुभवी व योग्य प्रॉपर्टी मैनेजर/रियलटर्स का चुनाव:
प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए स्थानीय एजेंट की बजाय विश्‍वसनीय, कुशल व योग्य प्रॉपर्टी मैनेजर या रियलटर्स (रियल इस्टेट एजेंट, जिनका संबंध नेशनल एसोसिएशन ऑफ रियलटर्स से होता है और प्रॉपर्टी की ख़रीद-फ़रोख़्त करते समय वे एसोसिएशन से जुड़े नियमों को फॉलो करते हैं) का चुनाव करें. ये प्रॉपर्टी मैनेजर आपको प्रॉपर्टी संबंधी सही अधिकार और ज़िम्मेदारियों के बारे में बताएंगे, ताकि डील करते समय आपके साथ किसी तरह की कोई धोखाधड़ी न हो. ये मैनेजर्स आपके बजट और रिक्वायरमेंट के अनुसार प्रॉपर्टी ख़रीदने में आपकी मदद करेेंगे.

मार्केट के उतार-चढ़ाव को जानें:
लोकेशन का चुनाव करने के बाद मार्केट के उतार-चढ़ावों का समझदारी के साथ अध्ययन करें. उस एरिया के प्रॉपर्टी मैनेजर और लोकल एजेंट से मिलकर सारी जानकारियां हासिल करें. लेकिन 1-2 व्यक्तियों से ही नहीं, बल्कि रियल इस्टेट/प्रॉपर्टी के बिज़नेस से जुड़े अन्य लोगों से मिलकर उस प्रॉपर्टी के बारे में कुछ जानकारियां हासिल करें. इंटरनेट पर भी आप उस एरिया/लोकेशन की प्रॉपर्टी की क़ीमत, औसत किराया और अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. इसके अतिरिक्त नेट पर उनके फ्री कॉन्टैक्ट नंबर भी दिए रहते हैं, जिन पर डायल करके आप उनसे मार्केट और प्रॉपर्टी के बारे में पूछ सकते हैं.

अतिरिक्त ख़र्चों के बारे में जानकारी हासिल करें:
डील फाइनल करने से पहले प्रॉपर्टी से जुड़े अन्य ख़र्चों के बारे में सारी जानकारियां प्राप्त कर लें. ये अन्य ख़र्च हैं- लैंड टैक्स, प्रॉपर्टी मैनेजमेंट टैक्स, काउंसिल रेट्स, डेवलपमेंट टैक्स और इंश्योरेंस आदि. डील फाइनल होने के बाद इन ख़र्चों का भुगतान आपको ही करना पड़ेगा. इसलिए प्रॉपर्टी मैनेजर/ब्रोकर से इन अतिरिक्त ख़र्चों के बारे में सही जानकारी ले लें.

जांच-पड़ताल करें:
यदि आप पुरानी प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो ख़रीदने से पहले प्रॉपर्टी डीलर या मैनेजर से सारी बातें पूछ लें यानी प्रॉपर्टी संबंधी दस्तावेज़ों के बारे में अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर लें. हो सकता है प्रॉपर्टी की ओनरशिप (स्वामित्व) लेने से पहले आपको उसे रिपेयर या रिनोवेट कराना पड़े. इसलिए पुरानी प्रॉपर्टी को ख़रीदने से पहले किसी प्रोफेशनल बिल्डिंग इंस्पेक्टर को हायर करें और उससे बिल्डिंग संबंधी पूरी जानकारी हासिल कर लें. तभी प्रॉपर्टी के पर्चेेज़ कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करें. ऐसा करके आप प्रॉपर्टी पर होनेवाले अनावश्यक ख़र्चे से बच सकते हैं.

अच्छे बैंक या मॉर्गेज़ ब्रोकर की तलाश करें:
यदि आपको प्रॉपर्टी में निवेश करने के लिए किसी फाइनेंसर की ज़रूरत है, तो उसके लिए अपने एरिया के प्रतिष्ठित बैंक या मॉर्गेज़ ब्रोकर की तलाश करें, जो लोन दिलाने में आपकी मदद करें. रियलटर्स भी एक बेस्ट ऑप्शन हैं, जो लोन दिलवाने में आपकी मदद करते हैं. इसके अलावा आप किसी अन्य इन्वेस्टर्स या बैंकों से भी फाइनेंशियल मदद (लोन) ले सकते हैं. आजकल नेशनलाइज़्ड बैंक ही नहीं, प्राइवेट बैंक भी होम लोन की सुविधा अपने कस्टमर्स को उपलब्ध कराते हैं, वो भी आकर्षक ऑफर्स के साथ.

होमलोन संबंधी जानकारियां:
प्रॉपर्टी के लिए लोन लेने से पहले विभिन्न बैंकों से ब्याज दर, समयावधि, टैक्स बेनीफिट्स आदि के बारे में सारी जानकारियां हासिल कर लें. आजकल बैंक अपने ग्राहकों को लुभाने के लिए होमलोन पर सस्ती ब्याज दर पर ङ्गस्पेशल स्कीमम जैसे ऑफर देते हैं, जिससे उन्हें टैक्स में भी फ़ायदा मिले.
डीलर से ही नहीं, ऑक्शन साइट्स में जाकर देखें: अब वह समय बीत गया, जब प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए ख़रीददार को प्रॉपर्टी डीलर/एजेंट के कई चक्कर लगाने पड़ते थे. टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव को प्रॉपर्टी के बिज़नेस में भी देखा जा सकता है. ऑनलाइन वेबसाइट्स के ज़रिए भी आप अपनी मनपसंद प्रॉपर्टी ख़रीद सकते हैं. आजकल कई ऑनलाइन रियल इस्टेट ऑक्शन साइट्स हैं, जो प्रॉपर्टी की ख़रीद-फरोख़्त करती हैं. इन साइट्स पर लॉग इन करके आप अपने मनपसंद एरिया/लोकेशन में जाकर सारी आवश्यक जानकारी हासिल कर सकते हैं.

प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले
– निवेश करने के लिए ऐसी प्रॉपर्टी का चुनाव करें, जिसे भविष्य में यदि बेचना पड़े, तो अच्छा रिटर्न मिलने की पूरी संभावना हो.

– यदि आप दूर-दराज़ के इलाकों में प्रॉपर्टी ख़रीद रहे हैं, तो फ्रॉड से बचने के लिए सारे काग़ज़ी दस्तावेज़ों को अच्छी तरह से जांच-परख लें.

– याद रखें, प्रॉपर्टी के बिज़नेस में क़ीमतें मार्केट के उतार-चढ़ाव के अनुसार बढ़ती और घटती हैं. इसलिए प्रोफेशनल लोगों से सलाह लिए बिना न तो प्रॉपर्टी में निवेश करें और न ही बेचें.

– प्रॉपर्टी केवल ड्रीम होम ही नहीं होता, बल्कि भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए किया गया निवेश होता है, प्रॉपर्टी ख़रीदते समय इमोशनल होने की बजाय समझदारी से काम लें.

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इन्वेस्टमेंट से जुड़ी 10 ग़लतियां

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घर चलाने के साथ ही परिवार के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए महिलाएं हर तरह की फायनांशियल प्लानिंग कर रही हैं. कौन-सा इन्वेस्टमेंट सही और कितना फ़ायदेमंद है? इस बात की पूरी जानकारी भी रखती हैं, लेकिन कई बार पैसे इन्वेस्ट करते समय वो कुछ ग़लतियां कर जाती हैं.

प्लानिंग की कमी:

बिना प्लानिंग के कहीं भी इन्वेस्ट करना भविष्य में आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. उदाहरण के लिए, हर महीने घर में आने वाली इनकम और ख़र्च का सही तालमेल न करने पर आपका बजट बिगड़ सकता है, जिसका असर वर्तमान के साथ ही आपके भविष्य पर भी पड़ सकता है. बच्चे की आगे की पढ़ाई के लिए अभी से आपको इन्वेस्ट करना होगा, वरना सही समय आने पर निराशा हाथ लग सकती है.

रिसर्च की कमी:

भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कई बार दूसरों की बातों पर विश्‍वास करके निवेश करना भी बड़ी ग़लती है. प्रोफेशनल से सलाह लेना सही है, लेकिन ख़ुद भी थोड़ी जांच-पड़ताल ज़रूर करें. आपके घर के ख़र्च और इनकम को आपसे बेहतर कोई और नहीं जानता. इंटरनेट के माध्यम से भी आप कई तरह की वेबसाइट के ज़रिए बेहतर इन्वेस्टमेंट के बारे में जानकारी इकट्ठा कर सकती हैं.

ट्रेंड के पीछे भागना:

जो ट्रेंड चल रहा है, ज़रूरी नहीं कि आपके लिए वो सही हो. बच्चे की पढ़ाई के लिए लिया गया लोन, हाउस लोन, घर के दूसरे ख़र्च आदि पर ही आपका इन्वेस्टमेंट निर्भर करता है. ट्रेंड के पीछे भागने की बजाय अपनी सही फायनांशियल पोजीशन जानने के बाद ही इन्वेस्ट करें.

सही समय से अनजान:

कई बार ऐसा होता है जब बिना सोचे-समझे महिलाएं इन्वेस्ट तो कर देती हैं, लेकिन जब समय पर रिटर्न नहीं मिलता, तो परेशान हो जाती हैं. आपको कितने समय के लिए इन्वेस्ट करना है और पैसे की ज़रूरत कब है? ये जानने के बाद ही पैसे इन्वेस्ट करें. उदाहरण के लिए, अगर आपको लंबे समय के लिए इन्वेस्टमेंट करना है, तो इंश्योरेंस, फिक्स डिपॉज़िट, पीपीएफ आदि में इन्वेस्ट कर सकती हैं. इन्वेस्टमेंट करते समय टाइम फ्रेम का विशेष ध्यान दें और उसी के अनुसार इन्वेस्ट करें.

विविधता की कमी:

कई बार ऐसा देखा गया है कि महिलाएं बिना मार्केट की जांच-पड़ताल किए हर बार किसी एक ही चीज़ में इन्वेस्ट करती रहती हैं. आप भी अगर इसी प्रक्रिया को अपनाती हैं, तो ये आपके लिए नुक़सानदायक हो सकता है. उदाहरण के लिए, हर बार स़िर्फ म्युचुअल फंड या इस तरह के किसी और प्लान में इन्वेस्ट करना सही नहीं. अलग-अलग तरह के इन्वेस्टमेंट करें. पीपीएफ, इंश्योरेंस, एफडी आदि भी इन्वेस्टमेंट के अच्छे विकल्प हैं.

पेपर वर्क की कमी:

घर के कामों की लिस्ट और खाने में किसको क्या पसंद है, इसके साथ ही इन्वेस्टमेंट की सारी जानकारी और उससे जुड़े काग़ज़ात आपको पता होने चाहिए. स़िर्फ इन्वेस्ट करने भर से आपका काम पूरा नहीं हो जाता, कौन-सा इन्वेस्टमेंट कब पूरा हो रहा है और किस तारीख़ को आपको उसका फ़ायदा मिलेगा? आदि बातें भी आपको पता होनी चाहिए.

बुरे व़क्त से अनजान:

जीवन में कभी भी कुछ भी हो सकता है. किस मोड़ पर आपके साथ कोई दुर्घटना हो जाए और घर में आने वाली मंथली इनकम बंद हो जाए, कहा नहीं जा सकता. अतः निवेश करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें. सारे इन्वेस्टमेंट लॉन्ग टर्म के लिए न करें. कुछ ऐसे भी होने चाहिए जो कुछ समय के बाद हर महीने आपको थोड़ा फ़ायदा पहुंचाते रहें.

फॉलोअप न करना:

इन्वेस्टमेंट करके भूल जाना भी एक बड़ी ग़लती है. उदाहरण के लिए, अगर आपने किसी ब्रोकर के ज़रिए पैसे इन्वेस्ट किए हैं, तो ये मत सोचिए कि जब समय पूरा होगा तो वो ख़ुद आपको बता देगा और आपको इसका फ़ायदा भी मिलेगा. इन्वेस्टमेंट के बाद इससे जुड़ी हर जानकारी व सवाल अपने ब्रोकर से करती रहें. साथ ही मार्केट में आपके इन्वेस्टमेंट से जुड़ी कोई ख़बर आती है, तो भी बेझिझक पूछती रहें. आपका प्लान कब मेच्यौर हो रहा है और मेच्यौरिटी के कितने दिन बाद और कितने टुकड़ों में आपको पैसे मिलेंगे आदि की जानकारी ज़रूर रखें.

ग़लत समय पर प्लान तोड़ना:

इन्वेस्टमेंट की तय समय सीमा से पहले ही प्लान तोड़कर बीच में पैसे निकालने की बुरी आदत बहुत से लोगों को होती है. ऐसा करने से इन्वेस्टमेंट का पूरा फ़ायदा नहीं मिल पाता. इसी तरह मार्केट ख़राब होने पर अपने शेयर बेचने की ग़लती भी नुक़सानदायक होती है. थोड़े से पैसों की ख़ातिर कई लोग ऐसी ग़लतियां करते हैं.

देर से शुरुआत:

अक्सर देखा गया है कि इन्वेस्टमेंट को लेकर महिलाएं हमेशा से बैकफुट पर रही हैं. वो घर में पैसा रखना तो पसंद करती हैं, लेकिन जैसे ही इन्वेस्टमेंट की बात आती है, तो अभी नहीं, अभी तो बहुत समय है, मार्केट ठीक नहीं है, पैसा नहीं है या अगले साल-अगले साल कहकर टालती रहती हैं. इस तरह की ग़लती आप न करें. जितनी जल्दी इन्वेस्ट करना शुरू करेंगी उसका फ़ायदा भी आपको ज़्यादा मिलेगा. देर से शुरुआत करने की आदत छोड़ दें.

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टैक्स बचाने के स्मार्ट तरीके

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हर कोई अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई बचाने का प्रयास करता है, मगर आपने यदि सही तरी़के से, सही जगह पर इन्वेस्टमेंट नहीं किया है, तो टैक्स के रूप में आपकी आमदनी का बहुत बड़ा हिस्सा चला जाता है. अपनी मेहनत की कमाई बचाने के लिए कैसा इन्वेस्टमेंट करें जो टैक्स फ्री हो और आपको रिटर्न भी मिले? आइए, जानते हैं.

सुकन्या समृद्धि योजना
सरकार द्वारा ख़ासतौर से स़िर्फ बेटियों के लिए शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना से आप बेटी का भविष्य सुरक्षित करने के साथ ही टैक्स भी बचा सकते हैं. बैंक या पोस्ट ऑफिस में सुकन्या समृद्धि अकाउंट खुलवाएं. इसमें आप हर साल कम से कम 1000 और अधिकतम डेढ़ लाख रुपए तक की बचत कर सकते हैं. इस पर 9.2 फ़ीसदी की दर से ब्याज़ मिलता है और बेटी के 21 साल के होने पर ही आप ये पैसे निकाल सकते हैं.

एनपीएस
सेक्शन 80सी के तहत डेढ़ लाख टैक्स बचाने के साथ ही आप एनपीएस (नेशनल पेंशन सिस्टम) में सालाना 50,000 रुपए तक निवेश करके टैक्स छूट का फ़ायदा उठा सकते हैं. 2015 के बजट में सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 80 सीसीडी के तहत सालाना 50,000 रुपए एनपीएस में निवेश को करमुक्त कर दिया.

पीपीएफ
टैक्स बचाने के लिए पीपीएफ (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) हमेशा से लोगों की पहली पसंद रहा है, क्योंकि पीपीएफ में 15 साल का लॉक इन पीरियड होता है, तो इसमें पैसे डालकर आप अपना भविष्य सुरक्षित करने के साथ ही टैक्स भी बचा सकते हैं. पीपीएफ में निवेश की गई राशि का 50 फ़ीसदी हिस्सा आप 7 साल बाद निकाल सकते हैं. पीपीएफ में किया गया इन्वेस्टमेंट तो टैक्स फ्री होता ही है, इस पर मिलने वाले इंटरेस्ट पर भी किसी तरह का टैक्स नहीं लगता. साथ ही मैच्योरिटी के समय मिलने वाली राशि भी करमुक्त होती है.

इंश्योरेंस प्रीमियम
अपने, पत्नी या बच्चों के नाम पर इंश्योरेंस पॉलिसी लेकर भी आप टैक्स बचा सकते हैं. इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम पर आपको सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट का फ़ायदा मिलता है. इंश्योरेंस निवेश के हिसाब से बहुत फ़ायदेमंद भले ही न हो, मगर आपात स्थिति से निपटने के लिए ये ज़रूरी है.

मेडिकल इंश्योरेंस
यदि आप अपने, पत्नी या बच्चों के लिए मेडिकल इंश्योरेंस लेते हैं, तो इस पर भी आप टैक्स छूट का फ़ायदा उठा सकते हैं. इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80डी के तहत 25,000 रुपए तक का प्रीमियम टैक्स फ्री है. यदि आपने अपने माता-पिता का भी मेडिक्लेम किया है और उनकी उम्र 60 साल से ज़्यादा है, तो 30,000 रुपए तक की प्रीमियम राशि करमुक्त होगी यानी साल में आप 55 हज़ार टैक्स बचा सकते हैं.

फिक्स्ड डिपॉज़िट (एफडी)
यदि आप ये सोचते हैं कि हर तरह की एफडी टैक्स फ्री है, तो ऐसा नहीं है. 5 साल की लॉक इन पीरियड वाली एफडी ही टैक्स फ्री होती है. आमतौर पर बैंक अधिकतम 10 साल के निवेश की सुविधा देते हैं. ब्याज़ की रकम 10,000 रुपए से अधिक होने पर टीडीएस कटता है. इससे कम राशि टैक्स फ्री है.

होम लोन
यदि आपने घर ख़रीदने के लिए लोन लिया है, तो आपको टैक्स छूट का फ़ायदा मिलेगा. होम लोन के लिए अदा किए गए ब्याज़ पर सालाना 2 लाख रुपए तक की टैक्स छूट है. यदि पति-पत्नी दोनों वर्किंग हैं, तो दोनों के नाम पर लोन होने से दोनों को टैक्स बेनिफिट मिलेगा.

स्मार्ट टिप्स
– 80सी के तहत आप कुल डेढ़ लाख रुपए तक टैक्स छूट का फ़ायदा उठा सकते हैं.

– बच्चों की स्कूल फीस (ट्यूशन फीस) पर भी टैक्स छूट मिलती है. इसकी लिमिट 2 बच्चों तक है. यदि आप 80सी के तहत इन्वेस्टमेंट नहीं कर पाए हैं, लेकिन बच्चे की फीस भर रहे हैं, तो आपको टैक्स छूट का लाभ मिलेगा.

– 80 सीसीडी के तहत एनपीएस के रूप में 50,000 का निवेश टैक्स फ्री है.

– ख़ुद की प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए होम लोन पर दिया गया 2 लाख तक का ब्याज करमुक्त होगा.

– यदि कंपनी आपको ट्रैवलिंग अलाउंस देती है, तो 19,200 रुपए तक की राशि पर टैक्स नहीं लगेगा.

– हाउस रेंट अलाउंस यानी एचआरए भी टैक्स सेविंग का ज़रिया है. यदि आप किराए के मकान में रहते हैं, तो रेंट स्लिप दिखाकर एक निश्‍चित सीमा तक टैक्स में छूट का लाभ उठा सकते हैं.

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