lyricist

  1. Gopaldas Neeraj

 

मशहूर कवि गोपालदास नीरज जी का 19 जुलाई 2018 को लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया! उनका जन्म: 4 जनवरी 1925 को हुआ था… हिन्दी साहित्यकार, शिक्षक, एवं कवि सम्मेलनों के मंचों पर वो एक जाना माना नाम थे. उन्होंने कई फ़िल्मी गीत भी लिखे.  वे पहले व्यक्ति थे जिन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भारत सरकार ने दो-दो बार सम्मानित किया, पहले पद्म श्री से, उसके बाद पद्म भूषण से. 

फ़िल्मों में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिये उन्हें लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला. साहित्य की दुनिया को उनके जाने से जो नुक़सान हुआ है उसकी भरपाई लम्बे समय तक भी नहीं हो पाएगी!

मेरी सहेली की ओर से श्रद्धांजलि!

हैप्पी बर्थडे गुलज़ार साहब! देखें उनके 10 बेहतरीन गानेअपने शब्दों से जादू कर लोगों की दिलों में अपनी एक ख़ास जगह बनाने वाले गुलज़ार साहब हो गए हैं 83 साल के. 5 दशकों से अपनी शायरी, कविताओं, गानों और कहानियों के ज़रिए हर किसी को अपना कायल बनाए हुए हैं. उनकी उम्र कभी उनके शब्दों की उड़ान को नहीं रोक पाई. झेलम ज़िलें के दीना गांव, जो अब पाकिस्तान में है जन्मे गुलज़ार साहब बंटवारे के बाद परिवार के साथ पंजाब में आकर बस गए. वो हमेशा से ही राइटर बनना चाहते थे. परिवार के मर्ज़ी के बिना गुलज़ार साहब मुंबई आ गए और यहां वो एक गैरेज में मैकेलिक के तौर पर काम करने लगे, लेकिन दिल में राइटर बनने के जज़्बा लिए हुए. जब भी उन्हें समय मिलता, वो कविताएं लिखने लगते. उन्हें पहला ब्रेक मिला बिमल रॉय की फिल्म बंदिनी में. पद्म भूषण गुलज़ार साहब ने कई बेहतरीन कहानियां तो लिखी ही हैं, साथ ही उन्होंने मौसम, आंधी, माचिस, अंगूर, नमकीन, इजाज़त जैसी फिल्मों का निर्देशन भी किया है.आज के दौर में भी मॉडर्न टेस्ट को समझते हुए गुलज़ार साहब ऐसे गाने लिख जाते हैं कि उनके सामने युवा गीतकार भी फ़ीके पड़ जाते हैं. गुलज़ार साहब जानते हैं कि शब्दों से खेलकर कैसे एक बेहतरीन रचना बनाए जा सकती है. शायद ही कोई हो, जो उनकी तरह प्यार के ख़ूबसूरत एहसास या दिल टूटने के दर्द को गानों के ज़रिए बयां कर पाए. बंटवारे का दर्द भी कई बार उनके गीतों में नज़र आया है.

आइए उनके जन्मदिन के मौक़े पर देखते हैं उनके कुछ बेहतरीन गाने.

फिल्म- खामोशी

फिल्म- मासूम

https://www.youtube.com/watch?v=LZ_YUOr-tYw

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फिल्म- आंधी

फिल्म- इजाज़त

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फिल्म- आनंद

https://www.youtube.com/watch?v=3vgDb4TQneA

फिल्म- माचिस

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फिल्म- डेढ़ इश्किया

फिल्म- घर

https://www.youtube.com/watch?v=NbqCWwlNKrA

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फिल्म- कमीने

फिल्म- बंटी और बबली

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poetबॉलीवुड के गीतकार जावेद अख़्तर (Javed Akhtar) हो गए हैं 72 साल के. हिंदी सिनेमा के लिए एक से एक बेहतरीन गाने लिखने वाले जावेद साहब ने ग़ज़ल को भी एक नया रूप दिया है. उनकी कलम का जादू कुछ इस कदर चला कि लोग उनके गीतों के दिवाने हो गए. स्क्रिप्ट राइटर, गीतकार, शायर और कवि जावेद साहब का जन्म 17 जनवरी 1945 को जान निसार अख़्तर साहब के घर हुआ था. पिता मशहूर गीतकार थे और मां सैफिया अख़्तर गायिका-लेखिका थीं. बचपन से ही जावेद उसी माहौल में रहे हैं, ऐसे में शब्दों से खेलना उनके लिए कोई मुश्किल काम नहीं था. वो बचपन से कविताएं और गाने लिखा करते थे.

मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से जावेद साहब को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं.

आइए, उनके जन्मदिन के मौक़े पर जानते हैं उनके बारे में कुछ रोचक बातें.

  • जावेद साहब का असली नाम जादू है. ये नाम उनके पिता ने जावेद की ही लिखी हुई एक लाइन को पढ़कर दिया था. लाइन थी- लम्हा-लम्हा किसी जादू का फ़साना होगा…
  • स्कूल में उनके दोस्त उनसे लव लेटर लिखवाया करते थे.
  • जब जावेद मुंबई आए, तब उनके पास रहने के लिए घर भी नहीं था. कई रातें उन्होंने सड़कों पर गुज़ारी थीं.
  • सलीम खान और जावेद अख़्तर की मुलाकात सरहदी लुटेरा के सेट पर हुई थी. इस फिल्म में सलीम खान हीरो थे और जावेद क्लैपर ब्वॉय थे.
  • सलीम-जावेद की जोड़ी ने  24 फिल्में साथ लिखीं है, जिनमें से 20 सुपरहिट रहीं.
  • उस दौर में स्क्रिप्ट राइटर का नाम पर्दे पर नहीं आता था. लेकिन सलीम-जावेद की फिल्मों ने यह करिश्मा भी कर दिखाया.
  • फिल्म मिस्टर इंडिया के बाद सलीम-जावेद की जोड़ी टूट गई.
  • बतौर गीतकार उनकी पहली फिल्म रही सिलसिला.
  • जावेद साहब अपना बर्थडे अपनी पहली पत्नी हनी ईरानी के साथ शेयर करते हैं. दोनों का जन्मदिन 17 जनवरी को है.

  • जावेद अख्तर कैफ़ी अाज़मी साहब को असिस्ट किया करते थे. वहीं उनकी मुलाकात शबाना आज़मी से हुई और 6 सालों के अफेयर के बाद दोनों ने शादी कर ली.
  • पद्म श्री और पद्म भूषण जावेद साहब सर्वश्रेष्ठ गीतकार के लिए 5 नेशनल और 14 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स भी अपने नाम कर चुके हैं.

– प्रियंका सिंह

kaifi-azmi-2 (1)हिंदी सिनेमा को बेहतरीन गाने देने वाले शायर, कवि, स्क्रिप्ट राइटर कैफ़ी आज़मी साहब का आज 98वां जन्मदिन है. आज़मी साहब भले ही हमारे बीच आज न हों, लेकिन उनकी लिखे हुई ग़ज़ल, शायरी और गानें हमेशा उनके साथ होने का एहसास कराती रहती है. कैफ़ी साहब का जन्म 14 जनवरी 1919 को आज़मगढ़ ज़िले के मिजवां गांव में हुआ था. उनका असली नाम अख़्तर हुसैन रिज़वी था. बचपने से ही कविताएं पढ़ने के शौक़ीन वाले कैफ़ी साहब ने 11 साल की छोटी-सी उम्र में अपनी पहली ग़ज़ल लिखी थी. उनके पिता उन्हें एक मौलाना के रूप में देखना चाहते थे, लेकिन वह मज़दूर वर्ग के लिए कुछ करना चाहते थे. उन्होंने तय किया कि वो लिखने के हुनर का इस्तेमाल सामाजिक संदेश देने के लिए करेंगे. कैफ़ी साहब को समाज के शोषित वर्ग का शायर कहा जाता था. कैफ़ी साहब केवल शायर ही नहीं थे, वह एक अच्छे स्टेज परफॉर्मर भी थे. स्टेज पर उन्हें सुनना एक अनुभव था. हैदराबाद में एक मुशायरे में कैफ़ी साहब अपनी मशहूर नज़्म ‘औरत’ सुना रहे थे, जिसे सुनकर एक लड़की ने अपनी मंगनी तोड़ दी थी.

कैफ़ी आज़मी की जयंती के मौक़े पर उनकी बेटी शबाना आज़मी ने उनके जुहू स्थित घर जानकी कुटीर पर एक म्यूज़िकल शाम का आयोजन किया है, जिसकी जानकारी उन्होंने टि्वटर पर दी है.

मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से कैफ़ी आज़मी साहब को नमन.

आइए, उनके जन्मदिन के मौक़े पर देखते हैं उनके लिखे कुछ बेहतरीन गानें.

फिल्म- हक़ीक़त

फिल्म- पाकीज़ा

फिल्म- कागज़ के फूल

फिल्म- हंसते ज़ख़्म

फिल्म- नौनिहाल

फिल्म- हीर रांझा

फिल्म- अर्थ

फिल्म- फिर तेरी कहानी याद आई

फिल्म- छोटी बहु 

– प्रियंका सिंह