review

उजड़ा चमन (Ujda Chaman) नाम से ही ज़ाहिर होता है कि किसी की दुनिया लूट गई हो जैसे. हां जी, जिनके सिर पर जवानी में ही बहुत कम बाल हो यानी की वे गंजे हों, तो दर्द-ए-दास्तान कुछ ऐसी ही होती है जैसे फिल्म उजड़ा चमन के नायक की है. एक अछूते विषय को कहीं मनोरंजन, तो कहीं गंभीरता से छूने की सार्थक कोशिश की गई है.

Ujda Chaman

 

फिल्म के हीरो चमन यानी सनी सिंह दिल्ली के कॉलेज में हिंदी के शिक्षक हैं. उनके सिर पर बाल न होने पर अक्सर क्लास में उनका मज़ाक उड़ाया जाता है. वहीं वे अपनी शादी को लेकर भी परेशान रहते हैं. ऐसे में काफ़ी मशक्कत के बाद अप्सरा यानी मानवी गगरू मिलती भी है, तो वो ओवरवेट है.

दोनों परफेक्ट कपल, पर कुछ कमी के साथ हैं. गंजेपन के कारण कई रिश्तों का ठुकराया जाना, पंडितजी का अल्टीमेटम कि इस साल शादी नहीं हुई, तो ज़िदगीभर कुंवारा रहना पड़ सकता है, गंजेपन को लेकर शर्मिंदगी, तो मोटापे को लेकर जगहंसाई… इन तमाम बातों से जुड़ी भावनाओं व प्रतिक्रियाओं से होकर गुज़रती है फिल्म.

कन्नड़ फिल्म ओंदु मोट्टया कथे, जिसकी कहानी राज बी. शेट्टी ने लिखी थी, पर आधारित उजड़ा चमन अलग तरह की फिल्म है. यह इस बात पर भी कटाक्ष करती है कि आज भी हमारे देश में गंजापन और मोटापा कितना बड़ा मुद्दा बना हुआ है. ये शादी में रोड़ा होने के साथ-साथ चिंता का विषय भी बना हुआ है.

Ujda Chaman Ujda Chaman

अजय देवगन के सेक्रेटरी कुमार मंगत फिल्म के निर्माता है. उन्हीं के बेटे अभिषेक पाठक ने इस फिल्म से निर्देशन की शुरुआत की है. फिल्म के प्रमोशन में अजय देवगन, कार्तिक आर्यन, पुलकित सम्राट ने भी काफ़ी सहयोग दिया था. इसी विषय पर आयुष्मान खुराना की बाला फिल्म भी अगले हफ़्ते रिलीज होनेवाली है. दोनों ही फिल्मों को लेकर काफ़ी विवाद भी हुआ था. फिर भी यक़ीनन दोनों ही फिल्में दर्शकों का अलग तरह से मनोरंजन करने में कामयाब रहेंगी.

अन्य कलाकारों में सौरभ शुक्ला, ग्रूशा कपूर, अतुल कुमार, शारिब हाशमी, गगन अरोड़ा, करिश्मा शर्मा सभी ने अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है.

Ujda Chaman

गौरव रोशिन का संगीत ठीकठाक है. गुरु रंधावा के गीत कर्णप्रिय पर सामान्य है. सुधीर चौधरी की फोटोग्राफी ख़ूबसूरत व दर्शनीय है. सनी सिंह प्यार का पंचनामा, सोनू के टीटू की स्वीटी, टीवी आदि में अपने अभिनय का जलवा दिखा चुके हैं. यह फिल्म उनके लिए अभिनय सफ़र की एक और मज़बूत कड़ी साबित होगी. गंजापन किसी के जीवन के लिए कितना बड़ा अभिशाप बन जाता है, उजड़ा चमन इसका बेहतरीन उदाहरण है. लीक से हटकर कुछ अलग देखने की चाह हो, तो इसे ज़रूर देखें.

Ujda ChamanUjda Chaman

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पीएम नरेंद्र मोदी- अब कोई रोक नहीं सकता..वाकई फिल्म के पोस्टर पर दिए गए ये स्लोगन आज के सच को बयां करते हैं. भला कौन रोक पाया मोदीजी को देश के हित में कठोर, सटीक, साहसी निर्णय लेते और देशप्रेम के अपने जज़्बे को अपने अथक कार्यों से पूरा करते हुए. इसी हक़ीक़त को फिल्मी जामा पहनाकर बड़े पर्दे पर दिखाया गया है.

Movie Review PM Narendra Modi

जब कभी किसी ख़ास व्यक्ति विशेष की ज़िंदगी पर बायोपीक फिल्म बनती है, तो हर किसी को उसे देखने-जानने की उत्सुकता बढ़ जाती है. ऐसे में शख़्सियत हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी हों, तो भला कौन नहीं चाहेगा मूवी देखना. उनके बचपन, परिवार, वैराग्य, संन्यासी, राष्ट्रीय सेवा संघ, राजनीति, गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक की स्थिति-परिस्थिति को संक्षेप में निष्पक्ष रूप से दिखाने की कोशिश फिल्म में की गई है. पीएम की भूमिका में विवेक ओबेरॉय ने लाजवाब अभिनय किया है. इसमें कोई दो राय नहीं कि यह उनकी अब तक की सबसे बेहतरीन अदाकारी है. उनके मेकअप, हावभाव व अभिनय ने मोदीजी के व्यक्तित्व को नई परिभाषा दी है.
अक्सर बायोपीक फिल्मों में हक़ीक़त व थोड़ी नाटकीयता का मिश्रण रहता है. लेकिन निर्देशक उमंग कुमार ने पीएम नरेंद्र मोदी फिल्म में ईमानदारी के साथ सच्चाई दिखाने व तथ्यों को स्पष्ट करने की प्रशंसनीय कोशिश की है. नमो यानी हमारे प्यारे प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदीजी के जीवन के उतार-चढ़ाव, श्रम, संघर्ष, आरोप-प्रत्यारोप का दंश, विपक्ष की नफ़रत, जनता का प्यार, लोगों का विश्‍वास, धर्म की आस्था, भगवा पर देश का प्यार… सभी को बेहतरीन ढंग से फिल्माया गया है, ख़ासकर हिमालय के लोकेशन काफ़ी ख़ूबसूरत बन पड़े हैं.
इस फिल्म के ज़रिए मोदीजी का हिमालय के प्रति प्रेम, जप-तप, तपस्वी का जीवन, निस्वार्थ सेवा, मेहनत-लगन, प्रभावशाली भाषाशैली, भाषण आदि को फिल्म के माध्यम से और भी क़रीब से देखने-समझने का मौक़ा मिलता है.
सुरेश ओबेरॉय, आनंद पंडित व संदीप सिंह द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित पीएम नरेंद्र मोदी फिल्म के डिस्ट्रिब्यूटर पैनोरमा स्टूडियोज और व आनंद पंडित मोशन पिक्चर्स है. फिल्म की कहानी संदीप सिंह ने लिखी है. संवाद और पटकथा में विवेक ओबेरॉय ने भी अपनी प्रतिभा दिखाई है, इसलिए उन्हें भी इसका श्रेय दिया गया है. उनके अलावा अनिरुद्ध चावला व हर्ष लिंबचिया के ज़बर्दस्त डॉयलॉग ने फिल्म को और भी आकर्षक बनाया है.

संगीतकार हितेश मोदक का संगीत फिल्म को गति देने के साथ दिल को सुकून भी देता है. सुखविंदर सिंह और सिद्धार्थ महादेवन की आवाज़ में हिंदुस्तानी, नमो नमो, सौंगध मुझे इस मिट्टी की… के गीत कर्णप्रिय हैं. राजेंद्र गुप्ता, ज़रीना वहाब, बरखा बिस्ट सेनगुप्ता, सुरेश ओबेरॉय, मनोज जोशी, किशोरी शहाणे, बोमन ईरानी, अंजन श्रीवास्तव, प्रशांत नारायणन, दर्शन कुमार, राज सलूजा, इमरान हसनी आदि कलाकारों ने प्रभावशाली अदाकारी के साथ अपने क़िरदार के साथ पूरा न्याय किया है. जहां देशभर में अबकी बार फिर मोदी सरकार पर देशवासियों ने मुहर लगा दी है, वहीं फिल्म भी सभी को यक़ीनन पसंद आएगी और बेहतरीन फिल्मों की श्रेणी में शामिल होगी.

– ऊषा गुप्ता

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कार्तिक आर्यन-कृति सेनन (Kartik Aryan-Kriti Sanon) स्टारर लुका छुपी (Luka Chuppi) मूवी जहां दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने में कामयाब रही है, वहीं सोनचिड़िया (Sonchiriya) में डाकुओं की ज़िंदगी के अनकहे पहलुओं को पूरी ईमानदारी से दिखाया गया है. ये दोनों ही फिल्में अलग-अलग तरीक़ों से दर्शकों को प्रभावित करने में सफल रही हैं. इसके लिए निर्देशक लक्ष्मण उतेकर और अभिषेक चौबे बधाई के पात्र हैं.

Luka Chuppi And Sonchiriya

प्यार की लुका छुपी

कार्तिक आर्यन-कृति सेनन की फ्रेश जोड़ी ने अपनी लव व कॉमेडी के डबल डोज़ से सभी को प्रभावित किया है. लिव इन रिलेशन, छोटे शहर की मानसिकता, आज के युवापीढ़ी की सोच इन सभी का निर्देशक लक्ष्मण उतेकर ने बारीक़ी से चित्रण किया है.

कार्तिक मथुरा के लोकल केबल चैनल का रिपोर्टर है. कृति सेनन, जो राजनेता विनय पाठक की बेटी अपनी पढ़ाई पूरी करके इंर्टनशिप के लिए कार्तिक के चैनल को ज्वॉइन करती है. दोनों एक-दूसरे को चाहने लगते हैं. कार्तिक चाहता है कि इस प्यार को रिश्ते का नाम दे दिया जाए यानी जल्द से जल्द शादी कर ली जाए. लेकिन कृति की सोच थोड़ी अलग है, वो पहले अपने जीवनसाथी को जानना-परखना चाहती है फिर किसी बंधन में बंधना चाहती है. वो लिव इन में रहकर एक-दूसरे को अच्छी तरह से समझने का प्रस्ताव रखती है. लेकिन कार्तिक संयुक्पत परिवार से है और परिवार की सोच पारंपरिक है. उसे यह ठीक नहीं लगता. इसमें उसका दोस्त अपारशक्ति खुराना आइडिया देता है कि ऑफिस के काम से उन्हें कुछ दिनों के लिए शूट के सिलसिले में ग्वालियर जाना ही है, तो क्यों ने वे अपने इस प्रयोग को वही आज़मा लें. कार्तिक-कृति को भी यह ठीक लगता है और वहां पर दोनों लिव इन में रहने लगते हैं. कहानी में ज़बरर्दस्त मोड़ तब आता है, जब कार्तिक के भाई का साला पंकज त्रिपाठी दोनों को वहां देख लेता है और कार्तिक के परिवार को वहां पर ले आता है. तब ख़ूब ड्रामा, डायलॉगबाज़ी, कभी हंसना, तो कभी रोना जैसी स्थिति बनती-बिगड़ती है, पर आख़िरकार परिवारवाले इस रिश्ते को स्वीकार कर लेते हैं.

ज़रा रुकिए, कहानी में एक और ट्विस्ट है, वो कृति के पिताजी विनय पाठक. वे प्रेम व लिव इन के सख़्त ख़िलाफ़ है. इसके लिए उन्होंने न केवल प्रेमी लोगों का बहिष्कार किया है, बल्कि मथुरा में ऐसे जोड़ों का मुंह काला करवाकर उन्हें बेइज़्ज़त भी किया जाता है.

क्या कृति के पिता कार्तिक के साथ उसके रिश्ते को स्वीकार करेंगे? क्या कार्तिक-कृति एक हो पाएंगे या फिर उनकी प्रेम कहानी अधूरी ही रह जाएगी? या फिर दोनों को लुका छुपी की तरह ही अपने रिश्ते को आगे बढ़ाना होगा? इन तमाम सवालों को जानने के लिए थिएटर में फिल्म देखना ज़रूरी है और तब ही आप सभी के उम्दा मनोरंजन का लुत्फ़ उठा पाएंगे.

फिल्म में कई गानों का रीमिक्स है, जो अलग ढंग से लुभाता है. कोका कोला… पोस्टर छपवा दो अख़बार में गाने तो पहले से हिट हो चुके हैं. तनिष्क बागची, अभिजीत वघानी, केतन सोढ़ा के संगीत मधुर हैं. सभी ने बेहतरीन एक्टिंग की है, ख़ासतौर पर अपारशक्ति खुराना, पंकज त्रिपाठी की परफेक्ट कॉमेडी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करती है. कार्तिक आर्यन और कृति सेनन ने भी अपने सहज व सशक्त अभिनय से प्रभावित किया है. इसमें कोई दो राय नहीं कि निर्माता दिनेश विजान ने एक मनोरंजक फिल्म देने की कोशिश की है.

Luka Chuppi And Sonchiriya

डैकेतों की ज़िंदगी से रू-ब-रू कराती सोनचिड़िया

यूं तो डाकुओं के जीवन पर कई फिल्में बनी हैं, जैसे शोले, बैंडिट क्वीन, गुलामी, पान सिंह तोमर आदि. लेकिन सोनचिड़िया जैसा ट्रीटमेंट किसी में नहीं दिखा. निर्देशक अभिषेक चौबे ने बड़ी ख़ूबसूरती से डकैतों के जीवन के विभिन्न पहलुओं परिभाषित किया है. यह फिल्म ग्लैमर नहीं पेश करती, बल्कि सिक्के के दूसरे पहलू को सच्चाई के साथ दिखाती है. डाकुओं के गिरोह का बिहड़ जंगलों में रहना, खाने-पीने के लिए संघर्ष करना, उनकी भावनाएं, दर्द को बख़ूबी दर्शया गया है. साथ ही जात-पांत, भेदभाव, ऊंच-नीच, गरीबी, महिलाओं की स्थिति, पुरुषों की मर्दानगी पर भी करारा कटाक्ष किया गया है.

हर कलाकार ने फिर चाहे उसका रोल छोटा हो या बड़ा अपने क़िरदार के साथ न्याय किया है. सुशांत सिंह राजपूत दिनोंदिन अभिनय की ऊंचाइयों को छूते जा रहे हैं. वे अपने रोल में इस कदर रच-बस गए कि एकबारगी यूं लगने लगता है कि यह डाकू तो कितना इनोसेंट है, आख़िर उसके साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है. मनोज बाजपेयी, आशुतोष राणा, रणवीर शौरी, भूमि पेडनेकर अपने लाजवाब अदाकारी से कहानी को बांधे रखते हैं.

रॉनी स्क्रूवाला निर्मित सोनचिड़िया दर्शकों को अपराधियों की एक अलग ही दुनिया से रू-ब-रू कराती है. अनुज राकेश धवन की सिनेमौटोग्राफी काबिल-ए-तारीफ़ है. मेघना सेन की एडिटिंग बेजोड़ है. संगीत ठीक-ठाक है. फिल्म की कहानी अभिषेक चौबे और सुदीप शर्मा ने मिलकर लिखी है. फिल्म में अपराध, मारधाड़, एक्शन-ड्रामा सब कुछ है, जो आमतौर पर पसंद किया जाता है. वैसे डकैतों पर बनी बेहतरीन फिल्मों में से एक है सोनचिड़िया.

– ऊषा गुप्ता

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2.0

जब दो सुपरस्टार रजनीकांत (Rajinikanth) और अक्षय कुमार (Akshay Kumar) एक साथ हों, तो एक बेहतरीन फिल्म की उम्मीद हर किसी को होती है. लेकिन यहां पर इन दोनों से कई ऊपर रहे निर्देशक एस. शंकर. जैसा कि सभी जानते हैं कि इसे रजनीकांत और अक्षय कुमार की फिल्म करके ख़ूब प्रमोट किया गया, पर इसमें सबसे अधिक प्रभावित करते हैं निर्देशक शंकर. उन्होंने पूरी फिल्म में हर एक सीन पर ख़ूब मेहनत की है. सुपर इफेक्ट्स की भरमार है फिल्म में पर व्यवस्थित व योजनाबद्ध तरी़के से. क़रीब आठ साल पहले शंकर की ही रोबोट फिल्म आई थी, जिसमें रजनीकांत और ऐश्‍वर्या राय बच्चन मुख्य भूमिका में थे, 2.0 फिल्म को उसी का सीक्वल कह सकते हैं.

पहली बार इस तरह की साइंस फिक्शन मूवी के एक्शन, सुपर इफेट्स मिक्सिंग देख हॉलीवुड मेकर भी शंकरजी की तारीफ़ किए बगैर नहीं रह सकेंगे. इसमें कोई दो राय नहीं कि भारतीय सिनेमा ने इस फिल्म के ज़रिए फिल्म बनाने में एक और शिखर को छुआ है. फिल्म के विज़ुअल इफेक्ट्स काबिल-ए-तारीफ़ हैं. उस पर थ्रीडी में होने के कारण फिल्म और भी शानदार बन पड़ी है. इस तरह की फिल्मों में कहानी की उम्मीद बहुत कम होती है, क्योंकि निर्देशक का पूरा ध्यान एक्शन, वीएफएक्स पर होता है और यही एस. शंकर ने भी किया.

कहानी बस इतनी है कि अक्षय कुमार, पक्षीराजन, जो ओर्निथोलॉजिस्ट (पक्षी वैज्ञानिक) हैं, मोबाइल टॉवर से कूदकर आत्महत्या कर लेते हैं. दरअसल, मोबाइल फोन के रेडिएशन से पक्षियों को काफ़ी नुक़सान पहुंच रहा होता है, इसका प्रतिशोध अक्षय इंसानों से लेना चाहता है. एक तरह इसके ज़रिए सोशल मैसेज भी देने की कोशिश की गई है. इसके बाद शहरभर के सभी लोगों के मोबाइल फोन उड़ने लगते हैं. वसीकरण यानी रजनीकांत को इसकी छानबीन करने के लिए कहा जाता है. वे अपनी असिस्टेंट नीला यानी एमी जैक्सन जो एक रोबोट हैं, के साथ पता लगाने की कोशिश करते हैं. इसी बीच शहर में मोबाइल फोन की बनी एक चिड़िया (अक्षय कुमार) शहर पर दनादन हमला करने लगती है. आख़िरकार उससे मुक़ाबला करने के लिए वसीकरण को अपने रोबोट चिट्टी (रजनीकांत डबल रोल में) की मदद लेनी पड़ती है, क्योंकि पक्षीराजन और इंसानों के बीच केवल चिट्टी का अपग्रेडेड वर्ज़न 2.0 है.

पक्षीराजन और चिट्टी का आमना-सामना, लड़ाई, दांवपेंच और उसके अविश्‍वसनीय से एक्शन थ्रिल व रोमांच पैदा करते हैं. फिल्म में भावनाओं की कमी थोड़ी खलती है, पर दो सुपर मानव की टक्कर दिलचस्पी भी पैदा करती है. फिल्म की शुरुआत में ही अक्षय कुमार की मौत होने के बाद उनकी आत्मा, भूत या फिर औरा जो समझ लें का इंसानों से बदला लेने, रजनीकांत से संघर्ष देखने काबिल है.

फिल्म में सीन दर सीन स्पेशल इफेक्ट्स का बड़ी ख़ूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है. एक समय ऐसा आता है, जब रजनीकांत व अक्षय कुमार की लड़ाई में पांच सौ रोबोट्स रजनीकांत के रूप में आ जाते हैं, तो हज़ारों अक्षय कुमार, फिर लाखों रजनीकांत- सब कुछ विस्मय, विलक्षण, रोगंटे खड़े कर देनेवाले दृश्य हैं, जो दर्शकों को पलभर के लिए भी हिलने नहीं देते और फिल्म से बांधे रखते हैं. इसके लिए टेकनीशियन और डायरेक्टर बधाई के पात्र हैं.

रजनीकांत, अक्षय कुमार के अलावा एमी जैक्सन, सुधांशु पांडे, आदिल शाह सभी ने बेहतरीन अभिनय किया है. अक्षय कुमार पहली बार रजनीकांत के साथ काम कर रहे हैं, उन्हें इस बात की बेहद ख़ुशी है, फिर चाहे वो खलनायक का ही क़िरदार क्यों न हो. बकौल अक्षय उन्हें शूटिंग के समय अपने पक्षीराजन के गेटअप में तैयार होने में क़रीब छह घंटे लग जाते थे. उन्हें इसके मेकअप के लिए मेकअप आर्टिस्ट के सामने घंटों ख़ामोश होकर बैठे रहना पड़ता था. उनके अनुसार, इस कारण उनकी सब्र करने और अपनी धैर्य की क्षमता को विकसित करने में भी मदद मिली.

निर्माता अलीराजा सुबासकरण व राजू महालिंगम ने इस तरह की फिल्म बनाने का रिस्क लिया, जो सराहनीय है. ए. आर. रहमान का संगीत फिल्म को गति देता है, पर गाने केवल दो ही हैं. फिल्म को टूडी और थ्रीडी फार्मेट में दुनियाभर में प्रदर्शित किया गया है और इसके लिए तकनीकी रूप से शंकरजी के पूरी टीम ने ख़ूब मेहनत भी की है. फिल्म में सरप्राइज़ पैकेज के रूप में 3.0 कुट्टी का भी ज़िक्र किया गया है, ताकि प्रशंसकों को शंकर की अगली फिल्म का इंतज़ार रहे.

फिल्म हिंदी, तमिल और तेलगु- इन तीन भाषाओं के साथ अन्य भाषाओं में भी डब होकर प्रदर्शित की गई है. यूं तो फिल्म 512 करोड़ रुपए की लागत में बनी है, पर उसने अभी से सेटेलाइट, डिजिटल, डिस्ट्रिब्यूशन के राइट्स के ज़रिए 350 करोड़ रुपए कमा लिए हैं. यह तो जगजाहिर है कि 2.0 फिल्म दक्षिण भारतीयों द्वारा सुपर-डुपर हिट हो ही जाएगी. लेकिन हिंदी प्रेमी दर्शकों को यह कितना पसंद आएगी, यह तो व़क्त ही बताएगा.

– ऊषा गुप्ता

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Bhaiaji Superhit Review

इन दिनों सनी देओल की कई सालों से अटकी फिल्में सिलसिलेवार आ रही हैं. पिछले हफ़्ते मौहल्ला अस्सी आई, जो काफ़ी समय से बन रही थी. अब आज भैयाजी सुपरहिट सिनेमा के पर्दे पर आ पाई है. दोनों ही फिल्मों में अभिनय के मामले में सनी देओल ने काबिल-ए-तारीफ़ अभिनय किया है.

भैयाजी अपनी पत्नी सपना के छोड़कर चले जाने से परेशान हैं. वे किसी भी क़ीमत पर अपनी पत्नी को वापस लाना चाहते हैं. इसके लिए फिल्मों में काम करने के लिए मुंबई आना, अभिनय करना, कुछ पुराने दुश्मनों से भिड़ना आदि चलता रहता है. इसमें निर्देशक व लेखक के रूप में अरशद-श्रेयस की जुगलबंदी देखते ही बनती है.

भैयाजी सुपरहिट में भी सनी देओल दबंग के क़िरदार में अपना दबदबा दिखाने में सफल रहे हैं. वे अपनी पत्नी सपना (प्रीति ज़िंटा) को बेइंतहा चाहते हैं और उससे डरते भी हैं. सपना के क़िरदार में प्रीति ने बेहतरीन काम किया है. वे बोलती कम और गोली ज़्यादा चलाती हैं. हमेशा शरारती-चुलबुली अंदाज़ में दिखनेवाली प्रीति एक नए ही अंदाज़ में सपना के रूप में चटक साड़ियों, भरी चूड़ियों में प्रभावशाली पत्नी के ज़बर्दस्त रोल में नज़र आती हैं. लंबे समय बाद प्रीति ज़िंटा को पर्दे पर देखना सुकून की तरह रहा. जब-जब पर्दे पर अरशद और श्रेयस की एंट्री होती है, लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. दोनों ही कलाकारों की कॉमेडी टाइमिंग लाजवाब है. कह सकते हैं कि प्रीति ज़िंटा के अलावा अन्य सभी कलाकारों यानी अमीषा पटेल, अरशद वारसी, श्रेयस तलपड़े, मिथुन चक्रवर्ती, मुकुल देव, जयदीप अहलावत, पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा, प्रकाश राज, एवलिन शर्मा सभी ने अपनी-अपनी भूमिकाओं को पूरी ईमानदारी से निभाया है.

नीरज पाठक का निर्देशन स्तरीय है. थोड़ी-सी और मेहनत करते तो फिल्म के सभी उम्दा कलाकारों से और भी बढ़िया काम करवा सकते थे. निर्माता चिराग धारीवाल और फौजिया अर्शी के साहस की दाद देनी होगी कि इतने सालों बाद ही सही फिल्म रिलीज़ तो हुई. साजिद-वाजिद, संजीव-दर्शन, जीत गांगुली, राघव सच्चर, अमजद नजीम, फौजिया अर्शी जैसे संगीतकारों का जमावड़ा है, पर एक भी गाना दिलोदिमाग़ पर ठहर नहीं पाता है. सुखविंदर सिंह, असीस कौर, यासेर देसाई के गाए गीत बस थोड़ी-सी राहत भर दे पाते हैं. फिल्म में एक्शन, कॉमेडी के साथ ईमोशंस भी है. भैयाजी सुपरहिट  होगी की नहीं पता नहीं पर भैयाजी तो हमेशा ही हिट हैं.

– ऊषा गुप्ता

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फिल्म- सीक्रेट सुपरस्टार
स्टारकास्ट-  आमिर खान, ज़ायरा वसीम, मेहर विज, राज अरुण, तीर्थ शर्मा
निर्देशक- अद्वैत चंदन
रेटिंग- 4 स्टार
कहानी
फिल्म की कहानी है 15 साल की इंसिया (जायरा वसीम) की है, जिसका सपना है कि वो सिंगर बने, लेकिन घर के माहौल और स्वभाव से सख़्त उसके पिता उसे इसकी इजाज़त नहीं देते. इंसिया किसी भी हाल में अपने सपने को पूरा करना चाहती है. एक दिन वो बुर्का पहनकर एक गाना रिकॉर्ड करती हैं और उसे यूट्यूब पर अपलोड कर देती है. यूट्यूब पर उसका गाना पसंद किया जाता है और वो सीक्रेट सुपरस्टार बन जाती है. इंसिया की मां (मेहर विज) और फ्लॉप म्यूज़िक डायरेक्टर शक्ति कुमार (आमिर खान) इसमें इंसिया की मदद करते है.
फिल्म की यूएसपी
आमिर खान की ऐक्टिंग के एक बार फिर दिवाने हो जाएंगे आप. आमिर ने जिस तरह से 90 के दशक के म्यूज़िक डायरेक्टर का किरदार निभाया वो काबिले तारीफ़ है.
फिल्म की कहानी नई नहीं है, लेकिन उसे प्रेज़ेंट करने का तरीक़ा ज़रूर नया है. सभी कलाकारों का अभिनय अच्छा है.
अमित त्रिवेदी का संगीत भी बेहतरीन है.
फिल्म में आपको इमोशन्स, ख़ुशी, कॉमेडी हर चीज़ का तड़का मिलेगा. डायरेक्शन में डेब्यू करने वाले अद्वैत चंदन का निर्देशन कमाल का है. कहीं से भी आपको इस बात का एहसास नहीं होगा कि अद्वैत की ये पहली फिल्म है.
फिल्म में कई मुद्दों, जैसे- घरेलू हिंसा, भ्रूण हत्या, लड़की की आज़ादी पर प्रतिबंध को दिखाया गया है. लेकिन इन सबके बीच कैसे एक लड़की अपनी हिम्मत से आगे बढ़ती है, ये दिखाने का अंदाज़ बेहद ख़ूबसूरत है.
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फिल्म देखने जाए या नहीं?
ज़रूर देखने जाएं. ये फिल्म मिस नहीं कर सकते हैं आप. सीक्रेट सुपरस्टार फिल्म ख़ासकर उन लड़कियों को देखनी चाहिए, जो टैलेंट हैं, लेकिन वो अपने सपनों को साकार करने में सिर्फ़ इसलिए झिझकती है, क्योंकि उसे आज़ादी नहीं है अपने सपनों को जीने की. वीकेंड पर ये फिल्म आपके लिए किसी सुपरस्टार से कम नहीं होगी है.

 

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फिल्म- सिमरन

स्टारकास्ट- कंगना रनौत, सोहम शाह

निर्देशक- हंसल मेहता

रेटिंग- 3 स्टार्स

फिल्म रिव्यू सिमरन

कहानी

ये कहानी है खुलकर अपनी शर्तों पर जीने वाली लड़की प्रफुल पटेल की. प्रफुल पटेल (कंगना) एक बिंदास लड़की है. उसका तलाक हो चुका है और वो अपने माता-पिता के साथ रहती है. एक होटल में वो हाउसकीपर का काम करती है. उसका बॉयफ्रेंड भी है. एक दिन वो पहुंचती है लॉस वेगास, जहां वो गैम्बलिंग करती है और बहुत सा पैसा हार जाती है. कर्ज़ में डूबी बिंदास प्रफुल लूटपाट का काम शुरू करती है और धीरे-धीरे क्राइम की ओर बढ़ जाती है. क्या होता है प्रफुल का? क्या उसकी चोरी की लत उसे बड़ी मुश्किल में फंसा देती है? क्या होता है तब, जब उसके बॉयफ्रेंड को पता चलता है कि प्रफुल को चोरी करने की आदत है? इन सवालों का जवाब आपको फिल्म देखने पर ही मिल पाएगा.

फिल्म की यूएसपी और कमज़ोर कड़ी

फिल्म की यूएसपी है कंगना की ऐक्टिंग, जो हमेशा की तरह अच्छी है. फिल्म में कंगना के कई शेड्स हैं, जो आपको मज़ेदार लगेंगे.

बात करें अगर कमज़ोर कड़ी कि तो फिल्म की कहानी थोड़ी-सी बिखरी नज़र आती है. कई जगहों पर कहानी में कुछ ऐसा होता है, जिस पर यक़ीन करना मुश्किल हो जाता है.

शाहिद, अलीगढ़ और सिटीलाइट जैसी बेहतरीन फइल्में बना चुके हंसल मेहता इस फिल्म में वो कमाल नहीं दिखा पाए.

फिल्म का ट्रेलर काफ़ी मज़ेदार थी, लेकिन फिल्म से ये उम्मीद नहीं की जा सकती है.

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

अगर आप कंगना रनौत के फैन हैं और हल्की-फुल्की कॉमेडी पसंद करते हैं, तो एक बार ये फिल्म देख सकते हैं.

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फिल्म रिव्यू लखनऊ सेंट्रल

फिल्म- लखनऊ सेंट्रल

स्टारकास्ट- फरहान अख्तर, डायना पेंटी, गिप्पी ग्रेवाल, रोनित रॉय, रवि किशन और दीपक डोबरियाल

निर्देशक- रंजीत तिवारी

रेटिंग- 2.5

लखनऊ सेंट्रल का विषय अच्छा है. आइए, जानते हैं फिल्म कैसी है.

कहानी

कहानी है किशन मोहन गिरहोत्रा (फरहान अख़्तर) की, जो मुरादाबाद में रहता है और म्यूज़िक डायरेक्टर बनना चाहता है. एक दिन उसके साथ कुछ ऐसा होता है कि वो एक मामले में आरोपी बना दिया जाता है और जेल पहुंच जाता है. जेल में वो वहां के कैदियों गिप्पी ग्रेवाल, दीपक डोबरियाल, इनामुलहक और राजेश शर्मा के साथ मिलकर बैंड बनाता है. जेलर (रोनित रॉय) की नज़रें इन सब कैदियों पर होती है. सोशल वर्कर बनी डायना पेंटी इन कैदियों से सहानभूति रखती हैं. क्या किशन मोहन ख़ुद को निर्देष साबित कर पाता है? क्या वो संगीतकार बनने का अपना सपना पूरा कर पाता है? इन सब सवालों का जवाब फिल्म में आखिर में मिल जाता है.

फिल्म की यूएसपी और कमज़ोर कड़ी

फिल्म का विषय अच्छा था, लेकिन फिल्म इस विषय पर खरी नहीं उतरती है. बेहद ही कमज़ोर डायरेक्शन है फिल्म का.

फरहान अख़्तर की ऐक्टिंग हमेशा की तरह अच्छी है, लेकिन कमज़ोर डायरेक्शन का असर उन पर साफ़ नज़र आता है.

रवि किशन, दीपक डोबरियाल का काम अच्छा है.

फिल्म में यूं तो बैंड दिखाया गया है, लेकिन गाने ऐसे नहीं की याद रखे जाएं.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

अगर आप फरहान अख़्तर के फैन हैं, तो ये फिल्म देखने जा सकते हैं. वैसे किसी कारणवश अगर ये फिल्म आप नहीं भी देख पाते हैं, तो कोई नुक़सान नहीं होगा आपका.

फिल्म- जब हैरी मेट सेजल

स्टारकास्ट- शाहरुख खान, अनुष्का शर्मा

निर्देशक- इम्तियाज़ अली

रेटिंग- 3.5 स्टार

Movie Review: Jab Harry Met Sejal

बाहुबली 2 से भी बड़ी ओपनर बनी शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा की फिल्म जब हैरी मेट सेजल. गल्फ़ में पहले दिन का शो हाउसफुल रहा है. टॉप 3
इंटरनेशनल ओपनर में ये फिल्म पहले नंबर पर है, जबकि दूसरे नंबर पर बाहुबली 2 और तीसरे नंबर पर रईस है. शाहरुख और अनुष्का की जोड़ी एक बार फिर पसंद की जा रही है. जानते हैं कैसी है फिल्म.

कहानी

फिल्म की कहानी है सेजल (अनुष्का शर्मा) और हरिंदर सिंह नेहरा यानी हैरी (शाहरुख खान) की. एक महीने के यूरोप टूर पर आई सेजल की सगाई की रिंग तब खो जाती है, जब वो फ्लाइट बोर्ड करने वाली होती हैं. गाइड हैरी के साथ मिलकर सेजल अपनी रिंग इन सभी जगह पर ढूंढती है, जहां-जहां वो यूरोप टूर के दौरान घूम चुकी है. इस सफ़र में हैरी और सेजल एक-दूसरे से लड़ते-झगड़ते हैं और फिर इनमें पहले दोस्ती फिर प्यार होने लगता है. क्या सेजल अपने मंगेतर को छोड़कर हैरी को अपनाएगी? अब इसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

यूएसपी

शाहरुख-अनुष्का की जोड़ी, जो बहुत क्यूट लग रही है. दोनों की ऐक्टिंग के बारे में कुछ बोलने की भी ज़रूरत नहीं है. गुजराती लड़की के रोल में अनुष्का और पंजाबी लड़के के रोल में शाहरुख बेस्ट लग रहे हैं.

यूरोप, कहानी, डायलॉग्स, कैमरा वर्क और दिल को छू लेने वाले गाने. सब कुछ परेफक्ट है.

इम्तियाज़ अली जानते हैं कि दर्शकों को क्या पसंद आएगा. इम्तियाज़ की फिल्मों में लव स्टोरी अलग होती है, जो इस फिल्म में भी नज़र आएगी. हमेशा की तरह उनका डायरेक्शन कमाल का है.

चौथी यूएसपी फिल्म की है, इसका क्लाइमेक्स, जो देखकर आप तालियां बजाए बिना रह नहीं पाएंगे. जब से ये फि्म शुरू होगी आप इसकी कहानी के साथ जुड़ते चले जाएंगे.

फिल्म देखने जाएं या नहीं ?

फिल्म के निर्देशक अगर इम्तियाज़ अली हों और शाहरुख-अनुष्का की जोड़ी हो, तो फिल्म को ना देखने का सवाल ही नहीं उठता. इस फिल्म में वो सारा मसाला मौजूद है, जो आपके टिकट के पैसों को वसूल करेगा, तो ज़रूर देखें ये फिल्म.

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सीक्रेट सुपरस्टार का ट्रेलर हुआ आउट 

Movie Review: Gurgaon

फिल्म- गुड़गांव

स्टारकास्ट- पंकज त्रिपाठी, रागिनी खन्ना, अक्षय ओबेरॉय

निर्देशक- शंकर रमन

रेटिंग- 3 स्टार

कहानी

छोटे बजट की फिल्म गुड़गांव एक फैमिली ड्रामा है. शंकर रमन की डायरेक्टोरियल डेब्यू ये फिल्म गुड़गांव में रहने वाले परिवार की एक डार्क स्टोरी है. केहरी सिंह (पंकज त्रिपाठी) अपनी बेटी प्रीतो (रागिनी खन्ना) से बहुत प्यार करता है, जो बात उनके बेटो को पसंद नहीं आती. बेटे अपने ही घर में अनजानों जैसा फील करते हैं और फिर कुछ ऐसा होता है, जिसका असर पूरी फैमिली पर पड़ता है.

यूएसपी

फिल्म की यूएसपी है शंकर रमन का निर्देशन, जो काफ़ी अच्छा है. फिल्म का डार्क हिस्सा बड़े ही बेहतरीन ढंग से शूट किया गया है. पंकज त्रिपाठी का अभिनय हमेश की तरह अच्छा है. रागिनी खन्ना और बाक़ी कलाकार भी अपनी छाप छोड़ते हैं.

देखने जाएं या नहीं फिल्म?

अगर आप डार्क फिल्में पसंद करते हैं, तो ये फिल्म आपके लिए ही है.

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फिल्म- मॉम

स्टारकास्ट- श्रीदेवी, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, अक्षय खन्ना, अदनान सिद्दिकी, सजल अली, अभिमन्यु सिंह

निर्देशक- रवि उद्यावर

रेटिंग- 3.5/5

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मॉम पूरी तरह से श्रीदेवी की फिल्म है. मॉम के रोल में श्रीदेवी के अलावा किसी और अभिनेत्री की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. मॉम की कहानी एक संजीदा विषय पर बनी है. इस फिल्म के साथ श्रीदेवी ने 300 फिल्मों के आंकड़े को छू लिया है. आइए, जानते हैं कैसी है मॉम.

कहानी

मॉम की कहानी है एक मां और उसके बदले की. कहानी शुरू होती है बायोलॉजी की टीचर देवकी (श्रीदेवी) के साथ. देवकी के स्कूल में उसकी सौतेली बेटी आर्या (सजल अली) भी पढ़ती है. आर्या अपनी मां से बिल्कुल प्यार नहीं करती, लेकिन उसकी मां उससे बहुत प्यार करती है. आर्या के स्कूल में पढ़ने वाला एक लड़का मोहित, आर्या को अश्लील मैसेजेस भेज कर परेशान करता है. जब इस बात का पता देवकी को चलता है, तो वह उसे सज़ा देती है. मोहित बदला लेने के लिए एक दिन आर्या को किडनैप कर लेता है और उसका रेप करके सड़क पर फेंक देता है. पुलिस ऑफिसर मैथ्यू फ्रांसिस (अक्षय खन्ना) इस केस की तहकीकात करते हैं. कोर्ट केस में सबूतों के अभाव में मोहित केस जीत जाता है. लेकिन एक मां को ये फैसला नागवार गुज़रता है, वो डिटेक्टिव दयाशंकर (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) की मदद लेती है.यहां से शुरू होता है एक मां का बदला.

यूएसपी

फिल्म की कहानी भले ही नई नहीं हो, लेकिन उसे दिखाने का अंदाज़ बहुत ही अलग है. नए डायरेक्टर रवि उद्यावर का निर्देशन काबिले तारीफ़ है. श्रीदेवी की जितनी तारीफ़ की जाए, उतनी कम है. एक मां का अपने बच्चे के लिए इमोशन और फिर उसकी बेटी का रेप करने वालों के लिए ग़ुस्सा, ये सब देखकर आप एक बार फिर श्रीदेवी के अभिनय के फैन हो जाएेंगे. नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का लुक और उनकी ऐक्टिंग देखने के बाद इस बात का एहसास होता है कि फिल्म में अपने अभिनय की छाप छोड़ने के लिए बड़े-बड़े डायलॉग्स या ज़्यादा फ्रेम्स की ज़रूरत नहीं होती है. एक छोटा-सा रोल करके भी आप पूरी फिल्म अपने नाम कर सकते हैं. पाकिस्तानी ऐक्ट्रेस सजल अली और अदनान सिद्दीकी का अभिनय भी लाजवाब है.

देखने जाएं या नहीं

ज़रूर देखने जाएं ये फिल्म. श्रीदेवी की ऐक्टिंग मिस नहीं कर सकते आप. नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को एक नए अंदाज़ में देखने का मौक़ा बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए. इस वीकेंड एक अच्छी और दमदार मैसेज वाली फिल्म आपका इंतज़ार कर रही है.

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फिल्म- बैंक चोर

स्टारकास्ट- रितेश देशमुख, विवेक ओबेरॉय, रिया चक्रवर्ती, भुवन अरोड़ा , विक्रम थापा

निर्देशक – बम्पी

रेटिंग- 3 स्टार

bank-chor-movie-review-759 (1)विवेक ओबेरॉय और रितेश देशमुख की जोड़ी को आप पहले भी मस्ती, ग्रैंड मस्ती, द ग्रेट ग्रैंड मस्ती में साथ देख चुके हैं. एक बार फिर इनकी जोड़ी साथ नज़र आ रही है फिल्म बैंक चोर में. फिल्म का प्रमोशन तो जमकर किया गया है, आइए, जानते हैं कैसी है फिल्म.

कहानी

बैंक चोर नाम से ही ज़ाहिर होता है कि चोर बैंक को लूटने आते हैं, लेकिन इस दिखाने का अंदाज़ मज़ेदार है. कहानी है चंपक (रितेश देशमुख) और उसके दो दोस्तों- गेंदा और गुलाब की. एक दिन तीनों एक बैंक को लूटने का प्लान बनाते है. अब जहां चोर होंगे, वहां पुलिस की एंट्री तो होगी ही. जैसे ही चंपक अपने दोस्तों के साथ बैंक लूट रहे होते हैं, वहां पुलिस आ जाती है. इंस्पेक्टर अमज़द खान (विवेक ओबेरॉय) इन चोरों को पकड़ने पहुंचते हैं. मीडिया को इस लूट की ख़बर लग जाती है. कुल मिलाकर सब इन चोरों के पीछे पड़ जाते हैं, लेकिन कहानी में टि्वस्ट तब आता है, जब ये चोर कुछ ऐसा करते हैं कि वो हीरो बन जाते हैं. क्या है वो टि्वस्ट ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

किसकी ऐक्टिंग में है दम?

रितेश देशमुख की ऐक्टिंग और कॉमिक टाइमिंग हमेशा की तरह कमाल है. उनके दोस्त बने भुवन अरोड़ा और विक्रम थापा ने अच्छा काम किया है. डायलॉग्स मज़ेदार हैं और आपको ख़ूब हंसाएंगे. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी अच्छा है. दिल्ली और मुंबई की भाषा में होने वाली नोकझोंक भी मज़ेदार है. विवेक ओबेरॉय भी अपने किरदार में जंच रहे हैं.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

अगर आपको कॉमेडी फिल्में पसंद हैं, तो एक बार ये फिल्म देख सकते हैं. वैसे भी रितेश देशमुख और विवेक ओबेरॉय जब एक साथ एक ही फिल्म हों, तो एक बार फिल्म देखनी तो बनती ही है.

फिल्म- राबता

स्टारकास्ट- सुशांत सिंह राजपूत, कृति सेनन, राजकुमार राव

डायरेक्टर- दिनेश विजन

रेटिंग- 2.5 स्टार film-raabta_68d47db4-4b5c-11e7-81ca-1a4d4992589d (1)पुनर्जन्म की कहानी अक्सर लोगों को पसंद आती हैं, लेकिन न्यू जनेरेशन के साथ पुनर्जन्म को जोड़ना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. राबता की कहानी भी पुनर्जन्म पर आधारित है. दिनेश विजन की डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म है राबता. आइए, जानते हैं कैसी है ये फिल्म.

फिल्‍म की कहानी शिव (सुशांत सिंह राजपूत) और सारा ( कृति सेनन) के प्यार की, जो पिछले जन्म में अधूरी रह जाती है. शिव एक बैंकर है और नौकरी के लिए वो बुडापेस्‍ट जाता है, जहां उसकी मुलाकात सारा से होती है. दोनों को लगता है उनमें कोई न कोई कनेक्‍शन है. दोनों को प्यार हो जाता है. लेकिन इस प्यार के बीच तीसरा शख़्स आ जाता है. फिर क्या होता है, ये जानने के लिए आपको ये फिल्म देखनी होगी.

सुशांत सिंह राजपूत और कृति सेनन की केमेस्ट्री अच्छी लग रही है. लेकिन फिल्म की कहानी वो कमाल नहीं कर पाई, जिसकी उम्मीद की जा रही थी. फिल्म के कुछ डायलॉग्स दमदार हैं. अगर विजुअल के मुताबिक़ फिल्म की समीक्षा की जाए, तो विजु्ली फिल्म अच्छी लगती है. लेकिन अगर कहानी में ही दम ना हो, तो न गाने काम आते हैं, न विजुअल्स. फिल्म का सेकंड हाफ काफ़ी स्लो है.

खैर कुल मिलाकर देखा जाए, तो अगर इस वीकेंड आप कुछ नहीं कर रहे हैं, तो एक बार ये फिल्म देख सकते हैं. अगर ये फिल्म आपसे मिस भी हो गई, तो कोई ख़ास नुक़सान नहीं होगा आपका.

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फिल्म- बहन होगी तेरी

स्टारकास्ट- राजकुमार राव, श्रुति हसन, रंजीत, गुलशन ग्रोवर

डायरेक्टर- अजय पन्नालाल

 रेटिंग- 3 स्टार
बहन होगी तेरी कॉमेडी फिल्म है. वो कपल्स इस फिल्म से ज़्यादा इत्तेफ़ाक रख पाएंगे, जो एक ही मोहल्ले में बड़े हुए हैं और एक-दूसरे से इश्क करते हैं. आइए, जानते हैं कैसी है फिल्म.
फिल्म की कहानी है लखनऊ के एक ही मोहल्ले में रहने वाले गट्टू (राजकुमार राव) और श्रुति हसन (बिन्नी) की. दोनों पड़ोसी हैं. दोनों एक-दूसरे को पसंद करते हैं, लेकिन जैसा होता है, अक्सर एक ही मोहल्ले के लड़के-लड़कियों को भाई-बहन समझा जाता है, वैसा ही कुछ हाल इस फिल्म की कहानी में दोनों का है.
गट्टू पर भी यही प्रेशर है. एक दिन बिन्नी की शादी राहुल (गौतम गुलाटी) के साथ तय कर दी जाती है.  बिन्नी पर नज़र रखने की ज़िम्मेदारी गट्टू को दी जाती है.
अंत में क्या गट्टू आगे आकर बिन्नी के घरवालों से अपनी शादी की बात कर पाता है या राहुल बिन्नी से शादी कर लेता है. इन सारे सवालों का जवाब तब मिलेगा, जब आप ये फिल्म देखेंगे.
कहानी अच्छी है, लेकिन इसे सही तरीक़े से दर्शाने में थोड़ी-सी कमी रह गई है. बात करें अगर अभिनय कि तो राजकुमार राव हमेशा की तरह अपने अभिनय से इस फिल्म में भी दिल जीत लेते है. श्रुति हसन का अभिनय भी अच्छा है.
अगर आप राजकुमार राव के फैन हैं, तो ये फिल्म आप ज़रूर देख सकते हैं.

फिल्म- सरकार 3

स्टारकास्ट- अमिताभ बच्चन, अमित साध, जैकी श्रॉफ, यामी गौतम, मनोज बाजपेयी, रॉनित रॉय

निर्देशक- राम गोपाल वर्मा

रेटिंग- 3 स्टार

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सरकार. सरकार राज और अब सरकार 3. 12 साल से दर्शक सरकार और फिल्म के किरदारों को जानते हैं. ऐसे में ये फिल्म लोगों के लिए नई नहीं है. राम गोपाल वर्मा इस फिल्म के साथ अपने पुराने फॉर्म में लौट आए हैं. आइए जानते हैं कि कैसी है सरकार 3.

कहानी

सरकार यानी सुभाष नागरे (अमिताभ बच्चन) का किरदार बूढ़ा भले ही हो गया हो, लेकिन अब भी उतना ही दमदार है. पिछली दो फिल्मों में दोनों बेटों को खोने के बाद अब ये कहानी आगे बढ़ती है पोते शिवाजी नागरे (अमित साध) के साथ. शिवाजी की लव इंट्रेस्ट अनु (यामी गौतम) अपने पिता के मर्डर का बदला सरकार से लेना चाहती है और इसके लिए वो शिवाजी की मदद चाहती है. सुभाष नागरे के क़रीबी और भरोसा करने लायक लोगों में शामिल हैं गोकुल (रोनित रॉय) और गोरख (भरत दाभोलकर) सरकार का काम संभालते हैं. शिवाजी के आने से उनके काम पर असर पड़ता है. घर के बाहर गोविंद देशपांडे (मनोज बाजपेयी) और बिजनेसमैन माइकल वाल्या (जैकी श्रॉफ) भी सरकार के ख़लिाफ साजिश करते हैं. साजिश, षड्यंत्र और बहुत सारे ट्विस्ट्स के साथ कहानी आगे बढ़ती है. फिल्म के अंत में क्या होता है, ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

यूएसपी

अमिताभ बच्चन से बड़ी कोई यूएसपी इस फिल्म में भला कहां हो सकती है. उनका अंदाज़ देखने लायक है. रामगोपाल वर्मा इस फिल्म से ये याद दिलाएंगे कि ऐसी फिल्मों पर उनकी पकड़ अब भी मज़बूत है. फिल्म के डायलॉग्स दमदार हैं. बैकग्राउंड में चलने वाला गाना गोविंदा-गोविंदा और बिग बी का गाया हुआ गणेश आरती शानदार है.

कमज़ोर कड़ी

फिल्म की कहानी कमज़ोर है. जो सस्पेंस क्रिएट होना चाहिए था, वो नहीं हो पाया है. आप आसानी से अंदाज़ा लगा लेंगे कि आगे क्या होने वाला है. जबकि पिछली दो फिल्मों की कहानी ही फिल्म की जान थी.

फिल्म देखें या नहीं

एक बार ज़रूर देखी जा सकती है सरकार 3. बिग बी को बड़े स्क्रीन पर देखना तो बनता है. राम गोपाल वर्मा एक बार फिर अपने स्टाइल की फिल्म लेकर आएं हैं, जिसे देखा जा सकता है. वीकेंड पर ये फिल्म आपको बोर नहीं करेगी.

 

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