Spiritual Parenting

अपनी संतान को सुसंस्कृत, योग्य, बुद्धिमान और तेजस्वी बनाने के लिए आज के मॉडर्न पैरेंट्स स्पिरिचुअल पैरेंटिंग के कॉन्सेप्ट को अपना सकते हैं. आज के मॉडर्न पैरेंट्स ऐसे बना सकते हैं अपने बच्चों को उत्तम संतान…

Concept Of Spiritual Parenting

गर्भ से करें शुरुआत
ये बात वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुकी है कि जब बच्चा मां के गर्भ में होता है, तो मां की मन:स्थिति का बच्चे पर भी असर होता है. अतः मां गर्भावस्था में अच्छे वातावरण में रहकर, अच्छी क़िताबें पढ़कर, अच्छे विचारों से बच्चे को गर्भ में ही अच्छे संस्कार देने की शुरुआत कर सकती है. आप भी जब पैरेंट बनने का मन बनाएं, तो अपनी संतान के मां के गर्भ में आते ही उसे अच्छे संस्कार देने की शुरुआत करें.

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पहले आपको खुद को बदलना होगा
यदि आप अपने बच्चे को अच्छे संस्कार देना चाहते हैं, तो इसके लिए पहले अपनी बुरी आदतों को बदलें, क्योंकि बच्चा वही करता है जो अपने आसपास देखता है. यदि वो अपने पैरेंट्स को हमेशा लड़ते-झगड़ते देखता है, तो उसका व्यवहार भी झगड़ालू और नकारात्मक होने लगता है. अगर आप अपने बच्चे को सच्चा, ईमानदार, आत्मनिर्भर, दयालु, दूसरों से प्रेम करने वाला, अपने आप पर विश्‍वास करने वाला और बदलावों के अनुरूप ख़ुद को ढालने में सक्षम बनाना चाहते हैं, तो पहले आपको ख़ुद में ये गुण विकसित करने होंगे.

ऐसा करके आप बच्चे को गुस्सैल बना सकते हैं
बच्चे के बात न मानने या किसी चीज़ के लिए ज़िद करने पर आमतौर पर हम उसे डांटते-फटकारते हैं, लेकिन इसका बच्चे पर उल्टा असर होता है. जब हम ज़ोर से चिल्लाते हैं, तो बच्चा भी तेज़ आवाज़ में रोने व चीखने-चिल्लाने लगता है. ऐसे में ज़ाहिर है आपका ग़ुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है, लेकिन इस स्थिति में ग़ुस्से से काम बिगड़ सकता है. अतः शांत दिमाग़ से उसे समझाने की कोशिश करें कि वो जो कर रहा है वो ग़लत है. यदि फिर भी वो आपकी बात नहीं सुनता तो कुछ देर के लिए शांत हो जाएं और उससे कुछ बात न करें. आपको चुप देखकर वो भी चुप हो जाएगा.

यह भी पढ़ें: गर्भावस्था (प्रेग्नेंसी) की 6 समस्याएं और उनके घरेलू उपाय (6 Common Pregnancy Problems And Their Solutions)

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बच्चे की हर बात न मानें
बच्चे से प्यार करने का ये मतलब कतई नहीं है कि आप उसकी हर ग़ैरज़रूरी मांग पूरी करें. यदि आप चाहते हैं कि आगे चलकर आपका बच्चा अनुशासित बने, तो अभी से उसकी ग़लत मांगों को मानना छोड़ दें. रोने-धोने पर अक्सर हम बच्चे को वो सब दे देते हैं जिनकी वो डिमांड करता है, लेकिन ऐसा करके हम उसका भविष्य बिगाड़ते हैं. ऐसा करने से बड़ा होने पर भी उसे अपनी मांगें मनवाने की आदत पड़ जाएगी और वो कभी भी अनुशासन का पालन करना नहीं सीख पाएगा. अतः बच्चे की ग़ैरज़रूरी डिमांड के लिए ना कहना सीखें, लेकिन डांटकर नहीं, बल्कि प्यार से. प्यार से समझाने पर वो आपकी हर बात सुनेगा और आपके सही मार्गदर्शन से उसे सही-ग़लत की समझ भी हो जाएगी.

ऐसे पहचानें बच्चे के गुणों को
हर बच्चा अपने आप में ख़ास होता है. हो सकता है, आपके पड़ोसी का बच्चा पढ़ाई में अव्वल हो और आपका बच्चा स्पोर्ट्स में. ऐसे में कम मार्क्स लाने पर उसकी तुलना दूसरे बच्चों से करके उसका आत्मविश्‍वास कमज़ोर न करें, बल्कि स्पोर्ट्स में मेडल जीतकर लाने पर उसकी प्रशंसा करें. आप उसे पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए कह सकते हैं, लेकिन ग़लती सेभी ये न कहें कि फलां लड़का तुमसे इंटेलिजेंट है. ऐसा करने से बच्चे का आत्मविश्‍वास डगमगा सकता है और उसमें हीन भावना भी आ सकती है.

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बच्चे को निर्णय लेना सिखाएं
माना बच्चे को सही-ग़लत का फ़र्क समझाना ज़रूरी है, लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं है कि आप उसे अपनी मर्ज़ी से कोई फैसला लेने ही न दें. ऐसा करके आप उसकी निर्णय लेने की क्षमता को कमज़ोर कर सकते हैं. यदि आप चाहती हैं कि भविष्य में आपका बच्चा अपने फैसले ख़ुद लेने में समक्ष बने, तो अभी से उसे अपने छोटे-मोटे फैसले ख़ुद करने दें, जैसे- दोस्तों का चुनाव, छुट्टी के दिन की प्लानिंग आदि. बच्चे को अपने तरी़के से आगे बढ़ने दें. इससे न स़िर्फ वो आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि उसकी क्रिएटिविटी भी बढ़ेगी.

बच्चे के लिए सकारात्मक माहौल बनाएं
माता-पिता जो भी कहते हैं उसका बच्चों पर गहरा असर होता है. अतः बच्चे से कुछ भी कहते समय ये ध्यान रखें कि आपकी बातों का उस पर सकारात्मक असर हो. उसका ख़ुद पर विश्‍वास बढ़े, उसके मन में दूसरों के प्रति दया का भाव रहे, वो निडर होकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो और सोच-समझकर किसी भी चीज़ का चुनाव करें.

उत्तम संतान के लिए रोज़ सुनें ये मंत्र, जाप और श्लोक, देखें वीडियो:

स्पिरिचुअल पैरेंटिंग से जुड़ी ज़रूरी बातें
बच्चे के व्यवहार और सोच पर उसकी परवरिश का बहुत असर पड़ता है. बच्चे की परवरिश जिस माहौल में होती है उसका असर भविष्य पर भी पड़ता है. अत: बच्चे की परवरिश से जुड़ी इन बातों पर पैरेंट्स को ध्यान देना ज़रूरी है. कैसी परवरिश का बच्चे के भविष्य पर क्या असर पढ़ता है? आइए, जानते हैं:

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  • अगर बचपन से ही उसे आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है, तो वो दूसरों की निंदा करना ही सीखता है.
  • यदि वो बचपन से ही घर में लड़ाई-झगड़े देखता है, तो वो भी लड़ना सीख जाता है.
  • अगर छोटी उम्र से ही उसे किसी तरह के डर का सामना करना पड़ता है, तो बड़े होने पर वो हमेशा आशंकित या चिंतित रहता है.
  • यदि घर और बाहर हमेशा उसका मज़ाक उड़ाया जाता है, तो वो शर्मीला या संकोची बन जाता है.
  • अगर बच्चे की परवरिश ऐसे माहौल में हुई हो जहां उसे जलन की भावना का सामना करना पड़ा हो, तो बड़ा होने पर वो दुश्मनी सीखता है.
  • अगर शुरुआत से ही बच्चे को प्रोत्साहन मिलता है, तो वह आत्मविश्‍वासी बनता है.
  • यदि बच्चा अपने माता-पिता को बहुत कुछ सहते हुए देखता है, तो वह धैर्य और सहनशीलता सीखता है.
  • अगर शुरू से बच्चा तारी़फें पाता है, तो बड़ा होकर वो भी दूसरों की प्रशंसा करना सीखता है.
  • यदि बच्चा अपने घर व आसपास ईमानदारी देखता है, तो वो सच्चाई सीखता है.
  • अगर बच्चा सुरक्षित माहौल में रहता है, तो वो ख़ुद पर और दूसरों पर भरोसा करना सीखता है.

– कमला बडोनी

हर माता-पिता उत्तम संतान की कामना करते हैं. सुसंस्कृत, योग्य, बुद्धिमान और तेजस्वी संतान के लिए हर माता-पिता को करना चाहिए करें इन मंत्रों का जाप.

Mantras To Make Your Child Intelligent

गर्भाधान मंत्र
बच्चे कोे दुनिया में लाने के बारे में सोचना किसी भी दंपति के जीवन में आया एक व्यापक परिवर्तन होता है। प्राचीन भारतीय विज्ञान ने इस बात की हमेशा पुष्टि की है। उसमें व्यक्ति के जीवन के प्रत्येक चरण के लिए यानी जन्म से लेकर मृत्यु तक, सोलह संस्कारों की बात की गई है। गर्भाधान संस्कार उन दंपतियों पर लागू होता है जो गर्भाधान मंत्रों द्वारा शुद्धिकरण विधान व अपनी जीवनशैली में परिवर्तन करते हैं। इन संस्कारों से दंपतियों को स्वस्थ व उत्कृष्ट संतान की प्राप्ति होती है।

Mantras To Make Your Child Intelligent

भावी माता-पिता द्वारा मंत्रों का प्रयोग
नीचे वे गर्भाधान मंत्र दिए गए हैं जिन्हें हम उन दंपतियों को उच्चारण करने की सलाह देते हैं जो हमारे गर्भाधान पूर्व कोर्स में इनका उच्चारण करने को उत्सुक होते हैं। दंपतियों को इन मंत्रों का उच्चारण हर महीने गर्भधारण करने तक, रात को प्रजनन हफ्ते के दौरान (यानी माहवारी चक्र के 10वें दिन से आरंभ करके चक्र के 20वें दिन तक। यही वे दिन होते हैं जब बच्चा गर्भ में आता है) करना चाहिए। इन मंत्रों को ‘गर्भ संस्कृति’ नामक सी.डी. में सुना जा सकता है।

1) यह मंत्र यजुर्वेद से लिया गया है-

आदित्यं गर्भ पयंसा समंङ्धि, सहस्त्रस्य प्रातिमां विश्‍वरूपम् ।
परिंवृन्धि हरसा माभिमगूँस्था:, शतायुषं कृणुहि चीयमान:।

अर्थ – हम ईश्‍वर से यह आशीर्वाद चाहते हैं कि वे हमें ऐसी संतान दें जिसमें सूर्य की चमक व बुद्धि हो, जिसकी दीर्घ आयु हो और जो सौ वर्षों तक जीए।

2) यह मंत्र अथर्ववेद से लिया गया है-

परिहस्त वि धारय, योनिं गर्भायं धातवे
मर्यादे पुत्रमा देहि, तं त्वमा गमयागमे

अर्थ – हे अग्नि देवता, कृपा कर औरत की कोख को आशीर्वाद दें ताकि वह मातृत्व सुख पा सके। हम प्रार्थना करते हैं कि ईश्‍वर उसकी कोख में पुन: जन्म ले और उसे अच्छा बालक बनाने के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दे।

उत्तम संतान के लिए रोज़ सुनें ये मंत्र, जाप और श्लोक, देखें वीडियो:

3) यह श्‍लोक भी अथर्ववेद से लिया गया है-

गर्भं धेहि सिनीवालि गर्भं धेहि सरस्वति ।
गर्भं ते अश्‍विनोभा धत्तां पुष्करस्त्रजा ॥
गर्भं ते मित्रावरूणौ गर्भं देवो बृहस्पति:,
गर्भं त इन्द्रश्‍चाग्निश्‍च गर्भं धाता दधातु ते॥
विष्णुर्योनि कल्पयतु त्वष्टा रूपाणि पिंशतु,
आसिंचतु प्रजापतिर्धाता गर्भं दधातु ते॥

अर्थ – हम अपने भगवान, प्रजापति, सरस्वती और इंद्र के समक्ष सिर झुकाते हैं कि वे हमें एक गुणवान शिशु दें और वह कोख में सुरक्षित रहे। भगवान विष्णु की कृपा से कोख में एक स्वस्थ गर्भ बीज पधारे और मां भी स्वस्थ रहे ताकि गर्भ अंगों का विकास ठीक से हो और उसे सही पोषण मिले।

4) यह श्‍लोक ऋषि संवनन से है-

समानी व आकूती : समाना हृदयानि व: ।
समान मस्तुं वो मनो यथा व: सुसहासनि ॥

अर्थ – हम एक युगल के रूप में हमेशा साथ रहें। हमारे संसार में खुशियां भर जाएं और हर दिन हमें बेहतर स्वास्थ्य, समृद्धि और प्रोत्साहित करने वाला परिवार मिले।

यह भी पढ़ें: गर्भावस्था (प्रेग्नेंसी) की 6 समस्याएं और उनके घरेलू उपाय (6 Common Pregnancy Problems And Their Solutions)

बच्चे (Children) को क़ामयाब इंसान बनाने से पहले उसे अच्छा इंसान बनाना ज़रूरी है, क्योंकि अच्छा इंसान जहां भी जाता है, वहां अपने अच्छे गुणों से सबको अपना बना लेता है, फिर उसे क़ामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता. बच्चों के सर्वांगीय विकास के लिए स्पिरिचुअल पैरेंटिंग (Spiritual Parenting) एक बेहतरीन माध्यम है. आप भी स्पिरिचुअल पैरेंटिंग से अपने बच्चे को एक बेहतर इंसान बना सकते हैं.

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गर्भ से करें शुरुआत

ये बात वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुकी है कि जब बच्चा मां के गर्भ में होता है, तो मां की मन:स्थिति का बच्चे पर भी असर होता है. अतः मां गर्भावस्था में अच्छे वातावरण में रहकर, अच्छी क़िताबें पढ़कर, अच्छे विचारों से बच्चे को गर्भ में ही अच्छे संस्कार देने की शुरुआत कर सकती है. आप भी जब पैरेंट बनने का मन बनाएं, तो अपनी संतान के मां के गर्भ में आते ही उसे अच्छे संस्कार देने की शुरुआत करें.

 पहले ख़ुद को बदलें

यदि आप अपने बच्चे को अच्छे संस्कार देना चाहते हैं, तो इसके लिए पहले अपनी बुरी आदतों को बदलें, क्योंकि बच्चा वही करता है जो अपने आसपास देखता है. यदि वो अपने पैरेंट्स को हमेशा लड़ते-झगड़ते देखता है, तो उसका व्यवहार भी झगड़ालू और नकारात्मक होने लगता है. अगर आप अपने बच्चे को सच्चा, ईमानदार, आत्मनिर्भर, दयालु, दूसरों से प्रेम करने वाला, अपने आप पर विश्‍वास करने वाला और बदलावों के अनुरूप ख़ुद को ढालने में सक्षम बनाना चाहते हैं, तो पहले आपको ख़ुद में ये गुण विकसित करने होंगे.

प्यार से काम लें

बच्चे के बात न मानने या किसी चीज़ के लिए ज़िद करने पर आमतौर पर हम उसे डांटते-फटकारते हैं, लेकिन इसका बच्चे पर उल्टा असर होता है. जब हम ज़ोर से चिल्लाते हैं, तो बच्चा भी तेज़ आवाज़ में रोने व चीखने-चिल्लाने लगता है. ऐसे में ज़ाहिर है आपका ग़ुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है, लेकिन इस स्थिति में ग़ुस्से से काम बिगड़ सकता है. अतः शांत दिमाग़ से उसे समझाने की कोशिश करें कि वो जो कर रहा है वो ग़लत है. यदि फिर भी वो आपकी बात नहीं सुनता तो कुछ देर के लिए शांत हो जाएं और उससे कुछ बात न करें. आपको चुप देखकर वो भी चुप हो जाएगा.

यह भी पढ़े: बच्चे को ज़रूर सिखाएं ये बातें (Important Things You Must Teach Your Child)

ना कहना सीखें  

बच्चे से प्यार करने का ये मतलब कतई नहीं है कि आप उसकी हर ग़ैरज़रूरी मांग पूरी करें. यदि आप चाहते हैं कि आगे चलकर आपका बच्चा अनुशासित बने, तो अभी से उसकी ग़लत मांगों को मानना छोड़ दें. रोने-धोने पर अक्सर हम बच्चे को वो सब दे देते हैं जिनकी वो डिमांड करता है, लेकिन ऐसा करके हम उसका भविष्य बिगाड़ते हैं. ऐसा करने से बड़ा होने पर भी उसे अपनी मांगें मनवाने की आदत पड़ जाएगी और वो कभी भी अनुशासन का पालन करना नहीं सीख पाएगा. अतः बच्चे की ग़ैरज़रूरी डिमांड के लिए ना कहना सीखें,  लेकिन डांटकर नहीं, बल्कि प्यार से. प्यार से समझाने पर वो आपकी हर बात सुनेगा और आपके सही मार्गदर्शन से उसे सही-ग़लत की समझ भी हो जाएगी.

बच्चे के गुणों को पहचानें

हर बच्चा अपने आप में ख़ास होता है. हो सकता है, आपके पड़ोसी का बच्चा पढ़ाई में अव्वल हो और आपका बच्चा स्पोर्ट्स में. ऐसे में कम मार्क्स लाने पर उसकी तुलना दूसरे बच्चों से करके उसका आत्मविश्‍वास कमज़ोर न करें, बल्कि स्पोर्ट्स में मेडल जीतकर लाने पर उसकी प्रशंसा करें. आप उसे पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए कह सकते हैं, लेकिन ग़लती सेभी ये न कहें कि फलां लड़का तुमसे इंटेलिजेंट है. ऐसा करने से बच्चे का आत्मविश्‍वास डगमगा सकता है और उसमें हीन भावना भी आ सकती है.

निर्णय लेना सिखाएं

माना बच्चे को सही-ग़लत का फ़र्क समझाना ज़रूरी है, लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं है कि आप उसे अपनी मर्ज़ी से कोई फैसला लेने ही न दें. ऐसा करके आप उसकी निर्णय लेने की क्षमता को कमज़ोर कर सकते हैं. यदि आप चाहती हैं कि भविष्य में आपका बच्चा अपने ़फैसले ख़ुद लेने में समक्ष बने, तो अभी से उसे अपने छोटे-मोटे ़फैसले ख़ुद करने दें, जैसे- दोस्तों का चुनाव, छुट्टी के दिन की प्लानिंग आदि. बच्चे को अपने तरी़के से आगे बढ़ने दें. इससे न स़िर्फ वो आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि उसकी क्रिएटिविटी भी बढ़ेगी.

सकारात्मक माहौल बनाएं

माता-पिता जो भी कहते हैं उसका बच्चों पर गहरा असर होता है. अतः बच्चे से कुछ भी कहते समय ये ध्यान रखें कि आपकी बातों का उस पर सकारात्मक असर हो. उसका ख़ुद पर विश्‍वास बढ़े, उसके मन में दूसरों के प्रति दया का भाव रहे, वो निडर होकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो और सोच-समझकर किसी भी चीज़ का चुनाव करें.

यह भी पढ़े: बच्चों की परवरिश को यूं बनाएं हेल्दी (Give Your Child A Healthy Upbringing)

बच्चों की परवरिश से जुड़ी ज़रूरी बातें

बच्चे के व्यवहार और सोच पर उसकी परवरिश का बहुत असर पड़ता है. बच्चे की परवरिश जिस माहौल में होती है उसका असर भविष्य पर भी पड़ता है. अत: बच्चे की परवरिश से जुड़ी इन बातों पर पैरेंट्स को ध्यान देना ज़रूरी है. कैसी परवरिश का बच्चे के भविष्य पर क्या असर पढ़ता है? आइए, जानते हैं:

*    अगर बचपन से ही उसे आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है, तो वो दूसरों की निंदा करना ही सीखता है.

*    यदि वो बचपन से ही घर में लड़ाई-झगड़े देखता है, तो वो भी लड़ना सीख जाता है.

*    अगर छोटी उम्र से ही उसे किसी तरह के डर का सामना करना पड़ता है, तो बड़े होने पर वो हमेशा आशंकित या चिंतित रहता है.

*    यदि घर और बाहर हमेशा उसका मज़ाक उड़ाया जाता है, तो वो शर्मीला या संकोची बन जाता है.

*    अगर बच्चे की परवरिश ऐसे माहौल में हुई हो जहां उसे जलन की भावना का सामना करना पड़ा हो, तो बड़ा होने पर वो दुश्मनी सीखता है.

*    अगर शुरुआत से ही बच्चे को प्रोत्साहन मिलता है, तो वह आत्मविश्‍वासी बनता है.

*    यदि बच्चा अपने माता-पिता को बहुत कुछ सहते हुए देखता है, तो वह धैर्य और सहनशीलता सीखता है.

*    अगर शुरू से बच्चा तारी़फें पाता है, तो बड़ा होकर वो भी दूसरों की प्रशंसा करना सीखता है.

*    यदि बच्चा अपने घर व आसपास ईमानदारी देखता है, तो वो सच्चाई सीखता है.

*    अगर बच्चा सुरक्षित माहौल में रहता है, तो वो ख़ुद पर और दूसरों पर भरोसा करना सीखता है.

– कमला बडोनी

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