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लाइफस्टाइल ने कितने बदले रिश्ते? (How Lifestyle Has Changed Your Relationships?)

How Lifestyle Has Changed Your Relationships

ज़िंदगी फास्ट ट्रैक हो गई है…. यानी तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी, मॉडर्न लाइफस्टाइलतेज़ी से बढ़ रहीं ख़्वाहिशेंइन ख़्वाहिशों के पीछे भागते हमन खाने की फ़िक्रन रिश्तों की चिंता, न सेहत की सुध, न अपनों को खोनेपाने की. नतीजा हम बहुत कुछ हासिल तो कर रहे हैं, लेकिन इसमें काफ़ी कुछ छूटता भी जा रहा है. अपने, रिश्ते, तनमन, शांति, सुकूनसब कुछ. इस सो कॉल्ड मॉडर्न लाइफस्टाइल ने हमारे रिश्तों (How Lifestyle Has Changed Your Relationships) को भी प्रभावित किया है और रिश्तों में दूरियां बढ़ा दी हैं.

How Lifestyle Has Changed Your Relationships

प्राथमिकता बदल गईः पहले ज़िंदगी की पहली ज़रूरत हुआ करती थी अपनी और अपनों की ख़ुशी, परिवार के साथ ख़ुशियों के पल. सुबह की चाय और डिनर पूरा परिवार एक साथ करता था, फेवरेट टीवी शोज़ भी पूरा परिवार एक साथ ही देखता था. इच्छाएं सीमित थीं और ख़्वाहिशें गिनती की. लेकिन अब कामयाब ज़िंदगी की चाहत और अधिक पैसा कमाने की चाह आज की लाइफस्टाइल की ज़रूरत बन गई है. अब न अपनों के लिए टाइम है और न ही इस बात की चिंता है किसी को कि परिवार के साथ टाइम बिताना भी ज़रूरी है. सुखसुविधाओं से घर भरा है, बस ख़ुशियां, अपनापन और रिश्तों से प्यार गायब हो गया है.
कम्यूनिकेशन गैपः रिश्तों में ख़ामोशी बढ़ रही है, सूनापन फैल रहा है. अपनापन सिमट रहा है. बिज़ी लाइफ, सुबह से शाम तक की भागदौड़, स्ट्रेसतनाव ने रिश्तों को भी ख़ामोश कर दिया है. मोबाइल और सोशल मीडिया पर घंटों चैटिंग करने को आज की लाइफस्टाइल की ज़रूरत माननेवाले परिवार के बीच रहकर भी उनसे बातचीत करना ज़रूरी नहीं समझते. रिश्तों में ये ख़ामोशी रिश्तों के लिए साइलेंट किलर की तरह साबित हो रही है.
नो टाइम फॉर सेक्सः बदलती लाइफस्टाइल का सबसे ज़्यादा असर सेक्स लाइफ पर पड़ा है. मॉडर्न लाइफस्टाइल यानी सारी सुविधाएं, ऐशोआराम, बिज़ी लाइफ, लेट नाइट तक काम करनाइन सबके बीच लोग भूलते ही जा रहे हैं कि वैवाहिक जीवन में सेक्स कितना महत्वपूर्ण है. नतीजा रिश्तों में दूरियां बढ़ रही हैं. वैवाहिक जीवन के बाहर प्यार की तलाश बढ़ी है, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर बढ़ रहे हैं.
कम होता कमिटमेंटः लाइफस्टाइल ने रिश्तों में कमिटमेंट की ज़रूरत को भी ख़त्म कर दिया है. हर हाल में रिश्ते सहेजने और निभाने की बात अब पुरानी हो चुकी है. एडजस्टमेंट अब लोग एक हद तक ही करना चाहते हैं. और अगर एडजस्ट नहीं हो पाया, तो अलग हो जाना बेहतर समझते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है महिलाओं का इंडिपेंडेंट और फाइनेंशियली व सोशली स्ट्रॉन्ग होना. दूसरे, सोशल साइट्स पर माउस की एक क्लिक पर कई लोग स्क्रीन पर प्रेज़ेंट हो जाते हैं, जिनसे घंटों चैट करना उन्हें स्ट्रेसफ्री करता है. ऐसे में तनावपूर्ण रिश्ते में रहने से बेहतर वे ऑनलाइन रिश्ता जोड़ना अधिक पसंद करते हैं.
रिश्तों में भी बढ़ा है स्ट्रेसः इस फास्ट ट्रैक ज़िंदगी ने स्ट्रेस इतना ज़्यादा बढ़ा दिया है कि ये स्ट्रेस रिश्तों में भी नज़र आने लगा है. लोग अपने लिए ख़ुशियां, फाइनेंशियल सिक्योरिटी, कामयाबी जुटाने में इतने मशगूल हैं कि रिश्तों की फ़िक्र ही नहीं उन्हें और ये सब पाने की चाह ने उन्हें स्ट्रेस्ड बना दिया है. और ये स्ट्रेस, ग़ुस्सा, चिड़चिड़ापन उनके रिश्तों में भी नज़र आने लगा है.
सोशल रिलेशन भी बदल गए हैंः मॉडर्न लाइफस्टाइल ने सोशल रिलेशनशिप को भी बुरी तरह प्रभावित किया है. सुकून से बैठकर अपनों से बात करना अब लोगों को समय की बर्बादी लगती है. चाहे हालचाल पूछना हो या बर्थडेएनिवर्सरी विश करना हो, किसी को इनवाइट करना हो या उनके बारे में और कुछ जानना हो, सब कुछ लोग सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर निपटा देते हैं. उनका कहना है, जो काम घर बैठे फोन पर हो जाता है, उसके लिए मिलने जाना समय बर्बाद करना है. इसी तरह सोशल मीडिया ने उन्हें इतना बिज़ी कर दिया है कि न वो रिश्तेदारदोस्तों के घर आतेजाते हैं, न किसी सोशल फंक्शन का हिस्सा बनते हैं.
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How Lifestyle Has Changed Your Relationships
नो टाइम फॉर किड्सः बच्चे जीने के मक़सद होते हैं. पतिपत्नी के रिश्ते की कड़ी होते हैं. लेकिन करियर बनाने और भविष्य को सुरक्षित करने के चक्कर में आज कपल्स के पास इतना समय ही नहीं होता कि वो बच्चा प्लान करें. सारी सुविधाएं जुटाने और पैसा कमाने में वे इतने मशगूल हैं कि बच्चे की ज़िम्मेदारी उठाने का ख़्याल ही नहीं आता उन्हें. और जब तक ख़्याल आता है, तब तक कई बार देरी हो चुकी होती है और फिर शुरू होता है एकदूसरे को दोष देने का सिलसिला, जिससे रिश्तों में कड़वाहट भी बढ़ती है.
फाइनेंशियल प्रेशर का असर रिश्तों पर भीः मॉडर्न लाइफस्टाइल ने बेतहाशा ज़रूरतें बढ़ा दी हैं और इन ज़रूरतों ने फाइनेंशियल प्रेशर बढ़ाया है. न चाहते हुए भी कई बार ये फाइनेंशियल प्रेशर रिश्तों के बीच तनाव उत्पन्न करता है. कौन कितना ख़र्च उठाएगा, किसका ख़र्च ज़्यादा है, जैसे मुद्दे कई बार विवाद का कारण बन जाते हैं.
स्पेस और आज़ादी की चाहः आजकल किसी को भी अपनी ज़िंदगी में दख़लअंदाज़ी पसंद नहीं. सबको अपनाअपना स्पेस और आज़ादी चाहिए. आज़ादी बोलने की, ज़िंदगी जीने की, उन्मुक्त रहने की, हम चाहते हैं कि हमसे कोई सवाल न करे. हम अपने ़फैसले ख़ुद लें. लेकिन स्पेस की ये चाहत हमें रिश्तों के प्रति बेपरवाह बना दे रही है. इस सो कॉल्ड स्पेस के नाम पर रिश्तों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं. ये दूरियां रिश्तों को कैसे और कब ख़त्म करने लगती हैं, हमें एहसास भी नहीं होता. माना कि बारबार रोकटोक, हर बात में दख़लअंदाज़ी न अब लोग बर्दाश्त करेंगे, न ही ये ठीक भी है, लेकिन स्पेस का इतना ओवरडोज़ भी न हो जाए कि आपको लगने लगे कि आपको उनकी कोई परवाह ही नहीं या आपको उनकी किसी बात से फ़र्क ही नहीं पड़ता.
अपने लिए जीना हो गया है ज़रूरीः पहले हम अपना हर व्यवहार, हर बात लोगों को ध्यान में रखकर करते थे कि लोग क्या कहेंगे, अगर हम फें्रड्स के साथ लेट नाइट मूवी देखने गए, तो लोगों को बातें करने का मौक़ा मिल जाएगा. लेकिन अब लोग इन बातों की परवाह किए बिना अपने लिए, अपनी ख़ुशियों के लिए जीना सीख रहे हैं. दोस्तों के साथ पार्टी करना, कलीग के साथ मूवी देखना, पड़ोसियों या रिश्तेदारों को भले ही पसंद न आए, लेकिन अगर ख़ुद को इसमें ख़ुशी मिलती है, तो लोगों की परवाह किए बिना लोग अपने लिए इनमें ख़ुशी तलाश लेते हैं.

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How Lifestyle Has Changed Your Relationships

ये भी बदला है

समय बदल गया है. लोग रिश्तों को लेकर भी प्रैक्टिकल हो गए हैं. अब लोग सोचते हैं कि जिनसे काम हो, उन्हीं से रिश्ते जोड़े रखो.

बिना मतलब के, बिना काम के रिश्ते रखना, तो अब बेव़कूफ़ी समझी जाती है.

रिश्ते निभाने का समय और इच्छा दोनों ही नहीं रहीं अब लोगों के पास. अब अपना समय लोग उन्हीं चीज़ों पर ख़र्च करते हैं, जिससे फ़ायदा हो.

बड़े शहरों में वर्क कल्चर ऐसा हो गया है कि वीकेंड में ही अपने लिए समय मिलता है, जिसे लोग अपने कलीग्स या फ्रेंड्स के साथ ही एंजॉय करना चाहते हैं.

डिजिटल वर्ल्ड ने हमें बहुत ज़्यादा ओपन स्पेस दे दिया है, जहां हम अपने रिश्तों से दूर हो गए हैं और डिजिटल रिश्तों में ज़्यादा बिज़ी हो गए हैं.

डिजिटल इफेक्ट रिश्तों पर इतना होने लगा है कि एक ही कमरे में बैठकर भी लोग मोबाइल में बिज़ी रहते हैं.

प्रतिभा तिवारी

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अनहेल्दी लाइफस्टाइल कहीं आपको बीमार तो नहीं बना रही है? (Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick?)

Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick

Unhealthy Lifestyle

अनहेल्दी लाइफस्टाइल (Unhealthy Lifestyle) कहीं आपको बीमार (Sick) तो नहीं बना रही है?

ब्रेकफास्ट न करना

इस बारे में डायटीशियन्स व न्यूट्रीशनिस्टस का कहना है कि ब्रेकफास्ट न करने से वज़न बढ़ना, हदय रोग, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग होना, एनर्जी लेवल कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह साबित हुआ है कि जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं, उनमें बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर जल्दी बढ़ता है और रोज़ाना नाश्ता करनेवाले लोगों की तुलना में उन्हें डायबिटीज़ होने की संभावना भी अधिक होती है. जो लोग डायटिंग के नाम पर ब्रेकफास्ट नहीं करते, उन्हें विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखना चाहिए. ब्रेकफास्ट न करने पर दिनभर थकान महसूस होती है, एकाग्रता में कमी आने के साथ-साथ कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है.

खाना चबाकर न खाना

अधिकतर लोगों में खाना अच्छी तरह से चबाकर न खाने की बुरी आदत होती है. शोधकर्ताओं के अनुसार, अच्छे स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है कि खाने को अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाया जाए, लेकिन जो लोग खाने को पूरी तरह से चबाकर नहीं खाते हैं, उनका पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम नहीं करता. पाचन तंत्र के सही ढंग से काम न करने के कारण उन्हें कब्ज़, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है.

ज़्यादा कॉफी पीना

प्रतिदिन कॉफी पीने के बहुत फ़ायदे होते हैं. कॉफी में ऐसे अनेक एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो हमारी याददाश्त को बढ़ाते हैं, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा कॉफी का सेवन सेहत को हानि पहुंचाता है. औसतन एक व्यक्ति के लिए दो से चार कप कॉफी पीना सामान्य है, लेकिन चार से अधिक कप कॉफी पीने से एंज़ायटी, इंसोम्निया (अनिद्रा) और शरीर में कंपकंपी होने लगती है, जिसके कारण सिरदर्द, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा कॉफी में मौजूद कैफीन नामक तत्व बोन मास डेंसिटी को कम करता है. अधिक मात्रा में कॉफी पीने से हड्डियां कमज़ोर होती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है.

ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना

सही एक्सरसाइज़ आपको फिट और फ्रेश होने का एहसास कराती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना भी आपको बीमार बना देता है. जी हां, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से घुटनों को नुक़सान पहुंचता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस होने का ख़तरा होता है. अधिक एक्सरसाइज़ करने से थकान महसूस होती है. कई बार मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है. एक शोध के अनुसार, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने की संभावना ब़ढ़ जाती है.

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भारी बैग कैरी करना

हैवी बैग्स उठाने से क्रॉनिक बैक पेन, कंधे और गर्दन में दर्द जैसी समस्याएं होती हैं. हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 5.5 किलोग्राम से लेकर 7 किलोग्राम तक का भारी बैग उठाने से गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द शुरू होने लगता है, इसलिए बैग ख़रीदते समय ऐसा बैग ख़रीदें, जिसमें हैवी मटेरियल का इस्तेमाल न किया गया हो. हैवी मटेरियलवाले बैग में सामान भरने के कारण बैग और भी भारी हो जाता है और गर्दन व कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है, जिसके कारण गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द होने लगता है. इसके अलावा पतली स्ट्राइप्सवाले बैग से भी ब्लड सर्कुलेशन रुकने का ख़तरा होता है.

हाई हील पहनना

अधिकतर महिलाएं हाई हील को फैशन एक्सेसरीज़ के तौर पर अपने वॉर्डरोब में ज़रूर रखती है, यह जानते हुए भी कि हाई हील सेहत को नुक़सान पहुंचाती है. हाई हील पहनने से स़िर्फ पैरों में ही दर्द नहीं होता, बल्कि शरीर के अन्य भागों में भी तकली़फें बढ़ जाती हैं. एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 70% महिलाएं हाई हील पहनती हैं, जिनमें से 90% महिलाओं को कंधे, पीठ, घुटने और जोड़ों के दर्द की समस्या होती है. हाई हील पहनने से सबसे ज़्यादा दबाव पैरों पर पड़ता है, जिसके कारण बॉडी पोश्‍चर बिगड़ने लगता है. हाई हील का असर स्पाइन पर भी पड़ता है, जिससे पीठ और पिंडलियों में दर्द बढ़ने लगता है.

रात को सोने से पहले ब्रश न करना

ज़्यादातर लोग रात को सोने से पहले ब्रश करने से कतराते हैं. उनकी यह आदत न केवल उनके स्वस्थ दांतों के लिए हानिकारक है, बल्कि उनके हेल्दी रिलेशिपशिप में भी दूरी का कारण बनती है.

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के डेंटिस्ट किमबर्ली हाम्स के अनुसार, दांतों की अच्छी सेहत के लिए दिन में दो बार ब्रश ज़रूर करना चाहिए. क्योंकि दिनभर खाते रहने के कारण दांतों पर प्लाक की परत जम जाती है, जिसके कारण दांतों में छिपे बैक्टीरिया एक्टिव हो जाते हैं. इसलिए जब भी आप खाना खाते हैं, तो ये बैक्टीरिया एसिड का उत्पादन करना शुरू कर देते हैं, जिससे दांतों में सड़न और सांसों में दुर्गंध की समस्या होने लगती है. इन समस्याओं से बचने के लिए दिन में 2 बार ब्रश करना ज़रूरी है.

पूरी नींद न लेना

स्लीप नामक पत्रिका में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग 6 घंटे या 6 घंटे से कम नींद लेते हैं, तो उन्हें कार्डियोेवैस्कुलर डिसीज़, जैसे- दिल की बीमारी, लो ब्लड प्रेशर, तनाव, अवसाद जैसी समस्याएं हो सकती हैं. नींद पूरी न होने के कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे खाना पचने में मुश्किल होती है. इनके अलावा एकाग्रता में भी कमी आने लगती है.

यूरिन रोकना

यूरिन रोकना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, यह जानते हुए भी लोगों में यूरिन रोकने की बुरी आदत होती है. यूरिन के ज़रिए शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं. अगर थोड़ा-सा भी यूरिन शरीर में रह जाता है, तो संक्रमण होने का ख़तरा बढ़ जाता है. 2-3 घंटे से अधिक समय तक यूरिन रोकने से किडनी स्टोन और ब्लैडर में सूजन की समस्या हो सकती है. बहुत देर तक यूरिन रोकने से यूटीआई (यूरिन ट्रैक्ट इंफेक्शन) की समस्या हो सकती है, जिसके कारण यूरिनरी ट्रैक में दर्द और यूरिन के साथ-साथ खून भी आने लगता है.

– अभिषेक शर्मा