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इन 10 तरीक़ों से शक्कर कर सकती है आपको बीमार (10 Reasons Why Too Much Sugar Is Bad For You)

Sugar Tips

इन 10 तरीक़ों से शक्कर कर सकती है आपको बीमार (10 Reasons Why Too Much Sugar Is Bad For You)

खाने में मिठास घोलनेवाली शक्कर (Sugar) की सच्चाई कितनी कड़वी है, इस बारे में शायद ही आपने कभी ध्यान दिया हो. शक्कर न स़िर्फ हमारी ज़िंदगी में पूरी तरह घुल-मिल गई है, बल्कि इसके साइड इफेक्ट्स (Side Effects) से हमारा स्वास्थ्य (Health) भी धीरे-धीरे घुल रहा है. रिफाइंड शक्कर का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल कर अनजाने में ही आप कई बीमारियों को न्योता दे रहे हैं. कौन-सी हैं वो बीमारियां और कितनी हानिकारक है शक्कर, आइए देखते हैं.

मैं शक्कर हूं!

सबसे पहले तो आपको बता दें कि शक्कर एक कार्बोहाइड्रेट है. मार्केट में मिलनेवाली शक्कर गन्ने या स़फेद चुकंदर से बनी प्रोसेस्ड व रिफाइंड शक्कर होती है, जिसमें कोई भी पोषक तत्व नहीं होते. यह हमारे शरीर में स़िर्फ कैलोरीज़ जमा करती है.

क्यों हानिकारक है शक्कर?

प्रोसेसिंग के दौरान शक्कर की चमक बढ़ाने के लिए उसमें सल्फर डाइऑक्साइड, फॉस्फोरिक एसिड, कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, एक्टिवेटेड कार्बन जैसे ख़तरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसके सारे पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं. यह पचने में भी इतनी हेवी होती है कि इसे पचाने के लिए शरीर को अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती है. यह हमारे शरीर में धीरे-धीरे फैट के रूप में जमा होती रहती है, जो किसी न किसी बीमारी के रूप में बाहर निकलती है. यही वजह है कि इसे ‘स्लो व्हाइट पॉयज़न’ भी कहते हैं.

कहां-कहां से मिलती है शक्कर?

मार्केट में मिलनेवाली रिफाइंड शक्कर के अलावा कई और प्राकृतिक स्रोतों से भी हमें शक्कर मिलती है.

ग्लूकोज़: यह फलों और पौधों में पाया जाता है, जो फोटोसिंथेसिस के कारण बनता है. ज़रूरत पड़ने पर हमारा शरीर भी ग्लूकोज़ बनाता है.

फ्रूक्टोज़: यह फ्रूट शुगर होता है, जो फलों से मिलता है. यह गन्ने और शहद में पाया जाता है.

सुक्रोज़: यह गन्ना, स़फेद चुकंदर और कुछ ग्लूकोज़ के साथ कुछ फलों व सब्ज़ियों में भी पाया जाता है.

लैक्टोज़: दूध से मिलनेवाली इस शक्कर को हम मिल्क शुगर भी कहते हैं.

क्या होता है जब हम खाते हैं शक्कर?

जब हम किसी भी फॉर्म में शक्कर खाते हैं, तो हमारे शरीर के पास उसके लिए दो ऑप्शन्स होते हैं-

  1. उन कैलोरीज़ को बर्न करके एनर्जी में कनवर्ट करना.
  2. कार्बोहाइड्रेट्स को फैट में बदलकर फैट सेल्स में जमा करना.

हमारी बॉडी की एक्टिविटी इस बात पर निर्भर करती है कि उस दिन हमारे शरीर में कितनी शक्कर गई है. अगर शक्कर सही मात्रा में है, तो वो एनर्जी में कन्वर्ट होगी, लेकिन अगर ज़रूरत से ज़्यादा है, तो बॉडी फैट में बदल जाएगी.

कितनी शक्कर की होती है ज़रूरत?

वैसे तो हमें फलों और सब्ज़ियों से ज़रूरत के मुताबिक़ शक्कर मिल जाती है, लेकिन अगर आप रोज़ाना फल, सब्ज़ी और दूध नहीं लेते, तो अपने खाने में निम्नलिखित मात्रा से ज़्यादा शक्कर न लें.

पुरुष: रोज़ाना 9 टीस्पून या लगभग

37.5 ग्राम (150 कैलोरीज़)

महिला: रोज़ाना 6 टीस्पून या लगभग

25 ग्राम (100 कैलोरीज़)

रोज़ाना हमारे शरीर को लगभग 2000 कैलोरीज़ की ज़रूरत होती है, जिनमें से शक्कर का हिस्सा इतना ही है, लेकिन अगर आप इससे ज़्यादा शक्कर लेंगे, तो वो एक्स्ट्रा कैलोरीज़ आपको ही नुक़सान पहुंचाएंगी.

किस तरह बना सकती है रोगी?

शक्कर हमारे शरीर को कई तरह से प्रभावित करती है. किसी विशेष अंग को प्रभावित करने के साथ-साथ यह कई शारीरिक क्रियाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है.

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Sugar Control

  1. वज़न बढ़ाकर दे सकती है मोटापा

आजकल हम जो भी पैक्ड फूड, प्रोसेस्ड फूड और शुगरी ड्रिंक्स ले रहे हैं, उनमें भारी मात्रा में शक्कर होती है. इन प्रोडक्ट्स में आमतौर पर फ्रूक्टोज़ का इस्तेमाल किया जाता है, जो शक्कर की क्रेविंग्स को और बढ़ा देता है. जो लोग सॉफ्ट ड्रिंक्स, सोडा और पैक्ड फ्रूट जूसेज़ पीते हैं, उनका वज़न बाकी लोगों के मुक़ाबले तेज़ी से बढ़ता है.

  1. प्रभावित करती है इंसुलिन की प्रक्रिया

ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए हमारा शरीर इंसुलिन रिलीज़ करता रहता है, लेकिन जब हम ज़रूरत से ज़्यादा शक्करवाली चीज़ें

खाने-पीने लगते हैं, तब शरीर को बहुत ज़्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है, जिससे इंसुलिन प्रोडक्शन का पूरा सिस्टम बिगड़ जाता है और शरीर इंसुलिन की ज़रूरत को पूरा नहीं कर पाता. इससे टाइप 2 डायबिटीज़, हार्ट डिसीज़ और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी बीमारियां जन्म लेती हैं.

  1. बढ़ा सकती है हार्ट डिसीज़ का ख़तरा

शक्कर के ओवरडोज़ से कई बीमारियां हो सकती हैं, उन्हीं में से एक है, हार्ट प्रॉब्लम्स, जो पूरी दुनिया में इस समय मौत का सबसे बड़ा कारण बन गया है. रिसर्च में यह बात साबित हो गई है कि ज़्यादा शक्कर के सेवन से ओबेसिटी,

इंफ्लेमेशन, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर हो सकता है. ये सभी हार्ट प्रॉब्लम्स के रिस्क फैक्टर्स हैं.

  1. बढ़ाती है कैंसर के रिस्क फैक्टर्स

मोटापा और इंसुलिन की कमी दोनों ही फैक्टर्स कैंसर को ट्रिगर कर सकते हैं. एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो महिलाएं हफ़्ते में तीन बार या उससे ज़्यादा कुकीज़ और बिस्किट्स खाती हैं, उनमें इंडोमेट्रियल कैंसर का ख़तरा बाकी महिलाओं के मुक़ाबले डेढ़ गुना ज़्यादा बढ़ जाता है.

  1. फंसा सकती है एनर्जी ड्रेनिंग साइकल में

अगर कमज़ोरी महसूस कर रहे हों, तो कुछ मीठा खा लें, एनर्जी तुरंत बूस्ट हो जाती है, पर क्या आप जानते हैं कि अगर शक्कर के साथ प्रोटीन, फाइबर या फैट नहीं हो, तो वो एनर्जी टिक नहीं पाती और तुरंत नष्ट हो जाती है. जितनी तेज़ी से एनर्जी लेवल बढ़ता है, उसी तेज़ी से घट जाएगा, जिससे आप दोबारा विकनेस फील करेंगे. इस एनर्जी ड्रेनिंग साइकल से बचना चाहते हैं, तो स़िर्फ शक्करवाली चीज़ें लेना अवॉइड करें. आप लो फील कर रहे हैं, तो कोई शुगरी ड्रिंक पीने की बजाय सेब के साथ कुछ बादाम खा लें.

  1. दे सकती है आपको फैटी लिवर

लंबे समय तक हाई फ्रूक्टोज़ डायट के इस्तेमाल से फैटी लिवर का ख़तरा बढ़ जाता है. ग्लूकोज़ और अन्य तरह की शक्कर शरीर के अन्य सेल्स में घुल जाती हैं, पर फ्रूक्टोज़ स़िर्फ और स़िर्फ लिवर में घुलती है. लिवर उसे एनर्जी के रूप में इस्तेमाल करता है, लेकिन जब ज़रूरत से ज़्यादा फ्रूक्टोज़ लिवर में आने लगता है, तो वह फैट में बदलने लगता है, जिससे धीरे-धीरे लिवर फैटी होने लगता है.

  1. बढ़ने लगती हैं दांतों की बीमारियां

पिछले कुछ सालों में दांतों की बीमारियां तेज़ी से बढ़ी हैं, क्योंकि हमारे

खान-पान में शक्कर की मात्रा तेज़ी से बढ़ी है. हमारे मुंह में बहुत से हेल्दी व अनहेल्दी बैक्टीरिया रहते हैं. शक्कर एक ऐसी चीज़ है, जिसके कारण अनहेल्दी बैक्टीरिया तेज़ी से बढ़ते हैं और हमें दांतों की समस्याएं होने लगती हैं. शक्कर के कारण दांतों पर एसिड अटैक्स ज़्यादा होते हैं, जो कैविटी का मुख्य कारण बनते हैं.

  1. बढ़ाती है यूरिक एसिड की मात्रा

यूरिक एसिड बनने का मुख्य कारण फ्रूक्टोज़ है. जब शरीर में फ्रूक्टोज़ का लेवल बढ़ जाता है, तो शरीर उसे यूरिक एसिड के रूप में बाहर निकालने लगता है, जिससे हार्ट और किडनी प्रॉब्लम्स शुरू हो जाती हैं.

  1. शुगर एडिक्शन को बढ़ाती है

क्या आप जानते हैं कि शक्कर किसी ड्रग एडिक्शन से कम नहीं है? जी हां, यह हम नहीं बल्कि रिसर्चर्स कहते हैं. उनके मुताबिक़, जब हम शक्करवाली चीज़ें खाते हैं, तो हमारे ब्रेन से डोपामाइन नामक हार्मोन रिलीज़ होता है, जो हमें और शक्कर खाने के लिए उकसाता है और न चाहते हुए भी हम शक्कर का ओवरडोज़ ले लेते हैं.

  1. कम उम्र में बना सकती है अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का शिकार

हमारा खानपान हमारे ब्रेन के स्ट्रक्चर और फंक्शनिंग को प्रभावित करता है. रिसर्चर्स के मुताबिक़, ज़रूरत से ज़्यादा शक्कर ब्रेन की उस फंक्शनिंग को प्रभावित करती है, जो हमारी मेमोरी को कंट्रोल करती है. लगातार शक्कर का ओवरडोज़ बहुत कम उम्र में आपको अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का शिकार बना सकता है.

क्या हैं शक्कर के हेल्दी विकल्प?

ऑर्गैनिक शहद: इसकी एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टीज़ के कारण यह बेस्ट स्वीटनर माना जाता है. यह शक्कर से ज़्यादा मीठा होता है, इसलिए कम क्वांटिटी में इस्तेमाल होता है.

गुड़: इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने, आयरन लेवल को बढ़ाने, लिवर को डिटॉक्सिफाई करने के साथ-साथ यह सर्दी-खांसी में भी आपको राहत दिलाता है. जहां भी आपको शक्कर की ज़रूरत पड़ती हो, वहां गुड़ का इस्तेमाल करें.

खजूर: खजूर का इस्तेमाल आप हलवा, खीर जैसे डेज़र्ट्स और मिठाइयां बनाने के लिए कर सकते हैं. शक्कर की बजाय खजूर और काजू पाउडर आदि इस्तेमाल कर सकते हैं. ब्राउन शुगर की बजाय आप डेट शुगर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

अनरिफाइंड शुगर: इसे रिफाइंड नहीं किया जाता, जिससे आयरन और मैग्नीशियम जैसे प्राकृतिक तत्व बने रहते हैं. देखने में यह भूरे रंग का होता है, जिसका स्वाद शहद जैसा होता है. रिफाइन्ड शक्कर की जगह इसका इस्तेमाल करें.

कोकोनट या पाम शुगर: यह एक बेहतरीन नेचुरल स्वीटनर है, क्योंकि इसे प्रोसेस करने के लिए किसी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता. रोज़ाना की कुकिंग में इसे शामिल करें. चाय में डालकर आप रिफाइंड शक्कर से बच सकते हैं.

– अनीता सिंह

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रात की ये 10 आदतें बना सकती हैं आपको मोटा (10 Nighttime Habits That Make You Fat)

रात की ये 10 आदतें बना सकती हैं आपको मोटा (10 Nighttime Habits That Make You Fat)

क्या आप मोटापा कम करने के लिए जिम में पसीना बहा रहे हैं या फिर डायटिंग के नाम पर अपने शरीर को टार्चर कर रहे हैं, फिर भी आपका मोटापा कम नहीं हो रहा है, तो एक नज़र अपनी लाइफस्टाइल संबंधी आदतों पर डालिए. जी हां, आपके मोटापे का एक अन्य और महत्वपूर्ण कारण है रात की   ग़लत आदतें, जो आपके मोटापे को कम नहीं होने देती हैं. आइए जानें, कैसे?

1 क्या आप हैवी डिनर करते हैं?

क्या आप जानते हैं कि आपकी इस आदत से आपका मोटापा बढ़ सकता है? आपकी यह आदत आपको अपने फिटनेस गोल से भटका सकती है? अगर फिट रहना चाहते हैं, तो अपनी इस आदत को तुरंत बदल डालिए. सुबह के समय हम अधिक एक्टिव रहते हैं. शाम होने पर थकावट के कारण शरीर का एनर्जी लेवल कम होने लगता है, जिसके कारण शरीर को कम कैलोरी की आवश्यकता होती है. पर हैवी डिनर करने से पाचन तंत्र पर अनावश्यक लोड बढ़ने लगता है, जिसके कारण अतिरिक्त कैलोरी अतिरिक्त फैट में बदलने लगती है और धीरे-धीरे मोटापा बढ़ने लगता है.

2 क्या आप टीवी देखते हुए खाना खाते हैं?

अधिकतर लोगों को टीवी के सामने बैठकर भोजन करना अच्छा लगता है. यह जानते हुए कि उनकी इस आदत से न स़िर्फ ओवरईटिंग होती है, बल्कि मोटापा भी बढ़ता है. अमेरिकन जनरल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रीशन (2013) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, खाने के प्रति जागरूक न होने पर आप ज़रूरत से ज़्यादा खा सकते हैं और आपको पता भी नहीं चलेगा. अगर अपना ध्यान खाने पर केन्द्रित करके खाते हैं, तो आप निश्‍चित तौर पर कम खाएंगे. यदि टीवी देखते हुए खाते हैं, तो आप खाने के स्वाद को दिमाग़ी तौर पर महसूस नहीं कर पाएंगे और ओवरइंटिंग कर लेंगे.

3 रात के समय आप क्या खाते हैं?

मोटापा इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि आप कितना (कम/ज़्यादा) खाते हैं, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि रात के समय आप किस तरह का खाना खाते हैं यानी आपकी फूड चॉइस पर निर्भर करता है. अगर आप रात को क्रीम बेस्ड सूप और ग्रेवी, फ्राइड फूड, डेज़र्ट आदि खाते हैं, तो पचने में थोड़ा मुश्किल होता है, इसलिए रात के समय हाई कैलोरी फूड का सेवन नहीं करना चाहिए.

4 क्या आप डिनर के बाद ब्रश नहीं करते हैं?

डिनर के बाद ब्रश करना बहुत बोरिंग काम है. अपनी इस आदत से आप ख़ुद को न केवल अतिरिक्त स्नैक्स खाने से रोक सकते हैं, बल्कि मोटापा भी कंट्रोल कर सकते हैं. डायटीशियन्स के अनुसार, डिनर के बाद ब्रश करने की आदत से आप पोस्ट डिनर स्नैकिंग से बच सकते हैं. बहुत से लोग डिनर के बाद डेज़र्ट और कैलोरीवाले फूड खाते हैं, चाहे उन्हें भूख न हो तो भी. ब्रश करने के बाद वे ख़ुद को ऐसी चीज़ें खाने से रोक सकते हैं, क्योंकि ब्रशिंग जैसा बोरिंग काम दोबारा नहीं करना चाहते. परिणामस्वरूप मोटापा नहीं बढ़ेगा.

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5 खाने के बाद क्या आप वॉक पर नहीं जाते हैं?

अगर नहीं जाते हैं, तो जाना शुरू करें. एक अध्ययन के अनुसार, अगर आप रात को खाने के बाद वॉक करते हैं या फिर 5 मिनट तक वज्रासन में बैठते हैं, तो निश्‍चित रूप से आपका वज़न नियंत्रित रहेगा. यदि आप अपनी पाचन प्रक्रिया और मेटाबॉलिज़्म में सुधार करना चाहते हैं, तो डिनर के बाद वॉक ज़रूर करें. इससे आपका मोटापा नियंत्रित रहेगा और आपका मूड भी फ्रेश होगा.

6 क्या आप रात को मोबाइल या लैपटॉप पर व्यस्त रहते हैं?

अधिकतर लोगों में यह आदत होती है सोने से पहले मोबाइल-लैपटॉप पर अपने ईमेल चेक करना, अगले दिन की टु डू लिस्ट बनाना, अगले प्रोजेक्ट या असाइनमेंट का ड्राफ्ट तैयार करना आदि, जिसकी वजह से अनावश्यक रूप से तनाव बढ़ता है. अधिक तनाव होने से कार्टिसोल नामक हार्मोन का उत्पादन होता है. इस हार्मोन में ऐसे गुण होते हैं कि तनाव की तीव्रता स्वत: ही बढ़ जाती है, जिसके कारण फैट के स्तर में वृद्धि होने लगती है. इसके अलावा कार्टिसोल मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर देता है, जिसके कारण खाना सही तरह से नहीं पचता है और मोटापा बढ़ने लगता है.

7 क्या आप रात को देर से सोते हैं?

देर रात तक जागने से मंचिंग करने के चांस काफ़ी बढ़ जाते हैं. मंचिंग के दौरान भूख बढ़ानेवाले हार्मोंस (घ्रेलीन- जिसे हंगर हार्मोन भी कहा जाता है) का स्तर बढ़ जाता है और वो स्ट्रेस बढ़ानेवाले हार्मोंस (लेप्टिन) के स्तर को कम करता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ते वर्कलोड के कारण अधिकतर लोग रात को देर से खाना खाते हैं, जिससे उनके शरीर का मेटाबॉलिज़्म बिगड़ने लगता है और धीरे-धीरे मोटापा हावी होने लगता है.

8 क्या आप सायकियाट्रिक मेडिसिन लेते हैं

रात को सोने से पहले कुछ लोग एंटीडिप्रेशन और सायकियाट्रिक मेडिसिन लेते हैं, जिससे मोटापा बढ़ता है. अगर आप अपने मोटापे को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो इन दवाओं को अपनी मर्ज़ी से बंद न करें, बल्कि अपने डॉक्टर से बात करके इनके डोज में बदलाव करें. ऐसी कोई एक मेडिसिन नियमित रूप से न खाएं, जिसका कोई साइड इफेक्ट हो.

9 क्या आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं?

पर्याप्त नींद न लेना और आवश्यकता से अधिक नींद लेने से मोटापा बढ़ता है. इसका कारण है कि आपका शरीर कैलोरी को बर्न करने में सक्षम नहीं है. अगर आप 7-8 घंटे से कम सोते हैं या फिर ज़रूरत से ज़्यादा सोते हैं, तो इसका मतलब है कि आपका मेटाबॉलिज़्म ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है.

हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह साबित हुआ है कि जो लोग केवल 6 घंटे की नींद लेते हैं, उनका वज़न, उन लोगों की तुलना में अधिक होता है, जो 8-10 घंटे की पर्याप्त नींद लेते हैं. जो लोग 6 या 6 से कम घंटे सोते हैं, उनमें मोटापे के लक्षण दिखाई देते हैं. इसके अलावा पूरी नींद न लेने के कारण डायबिटीज़ और इंसोम्निया के होने की संभावना भी बढ़ जाती है.

10 क्या आप कैफीन या अल्कोहल का सेवन करते हैं?

अगर आप रात के व़क्त कैफीन और अल्कोहल का सेवन करते हैं, तो अपनी इस आदत को तुरंत सुधार लें. आपकी यह आदत धीरे-धीेरे आपके बढ़ते वज़न की ओर संकेत करती है. कैफीन और अल्कोहल में बहुत अधिक कैलोरी होती है. इनका सेवन करने से नींद में रुकावट आती है. नींद में बाधा आने के कारण मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है और शरीर में अतिरिक्त फैट जमने लगता है.

रात को जल्दी खाने के फ़ायदे

  • लंच और डिनर के बीच में बहुत अधिक अंतर होने के कारण भूख अधिक लगती है. इस अंतराल को कम करें. टी टाइम में स्नैक्स खाएं.
  • डिनर के दौरान टीवी न देखें, क्योंकि टीवी देखते हुए ओवरईटिंग की संभावना बढ़ जाती है.
  • कोशिश करें कि डिनर रात 9 बजे से पहले कर लें.
  • अगर यह संभव न हो, तो टी टाइम पर लाइट स्नैक्स लें और डिनर में हल्का भोजन करें.
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डिनर अवॉइड न करें. कम से कम सूप, सलाद या फ्रूट्स ज़रूर खाएं.
  • डिनर बैलेंस्ड लेकिन लाइट होगा, तो अगले दिन भी आप फ्रेश महसूस करेंगे.
  • डिनर में लो कार्ब और हाई प्रोटीन फूड लें. इन्हें पचने में अधिक समय लगता है.
  • लगातार कई दिनों तक डिनर में फ्राइड फूड और डेज़र्ट न लें. अगर इन्हें खाने की बहुत अधिक क्रेविंग हो, तो सुबह नाश्ते में लें.
  • डिनर के बाद तुरंत सोने की बजाय 5 मिनट वज्रासन में ज़रूर बैठें.
  • रात के समय चाय, कॉफी और चॉकलेट के सेवन से बचें.
  • इसकी बजाय गरम दूध में इलायची पाउडर डालकर पीएं.

– देवांश शर्मा

वेट लॉस टिप ऑफ द डे (Weightloss Tip Of The Day)

Weight loss Tip Of The Day

how to loose weight

  • खाना खाने से आधा घंटा पहले पानी पीएं.
  • जी हां, रिसर्च में यह साबित हुआ है कि पानी पीने से मेटाबॉलिज़्म फास्ट होता है और कैलोरीज़ फास्ट बर्न होती है.
  • खाने से आधा घंटा पहले आधा लिटर पानी पीने से आप कम कैलोरीज़ कंज़्यूम करते हैं और 44% अधिक वेट लूज़ कर पाते हैं.
  • पानी आपको हाइड्रेटेड रखता है.
  • काने से पहले पानी पीने से आप ओवरईटिंग से भी बच जाते हैं, क्योंकि अक्सर ऐसा देखा गया है कि हमें भूख महसूस होती है, लेकिन पानी पीने के बाद वो भूख कम हो जाती है.

 

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  • आप सुबह-सुबह भी गुनगुना पानी पी सकते हैं. यह भी मेटाबॉलिज़्म को फास्ट करता है.
  • गुनगुने पानी में शहद और नींबू का रस भी मिला सकते हैं.
  • इसके अलावा अगर आपको कुछ ऑयली या जंक फूड खाने की क्रेविंग हो रही है, तो वो खाने के बाद आप एक या आधा कप गर्म पानी घूंट-घूंट करके पीएं, इससे फैट्स जमा नहीं होगा और जंक फूड खाने से जो एक्स्ट्रा कैलोरीज़ आपने कंज़्यूम कर ली है, उसका भी असर नहीं होगा. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप अक्सर ऐसा करें. जंक फूड जितना संभव हो अवॉइड ही करें.

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बचें ऐसी दवाओं से जो दे सकती है आपको मोटापा (Know the medicines which make you fat)

side effects of medicines

वैसे तो वज़न बढ़ने के कई कारण होते हैं, जैसे- ग़लत खान-पान, आनुवांशिकता, पर्यावरण, तनाव, नींद की कमी आदि. पर इन सबके अलावा कई दवाइयां भी आपका वज़न बढ़ा सकती हैं. इसलिए अगर आप भी दवाइयों का सेवन कर रहे हैं, तो इस बारे में जानना आपके लिए बहुत ज़रूरी है. आइए जानें, कुछ ऐसी ही दवाइयों के बारे में, जो दे सकती हैं आपको मोटापा.

side effects of medicines

 

हम जो भी दवाइयां इस्तेमाल करते हैं, उनके साइड इफेक्ट होते ही हैं, ऐसे में यहां हम कुछ ऐसी दवाइयों के बारे में बता रहे हैं, जिनका सबसे बड़ा साइड इफेक्ट है, वज़न बढ़ाना. नियमित या लंबे अंतराल तक ली गई दवाइयां हमारा वज़न बढ़ा देती हैं. ऐसे में अगर आपको इनके बारे में पता हो, तो आप दवाइयों का ऑप्शन या फिर कोई और ट्रीटमेंट अपना सकते हैं.
दवाएं जो वज़न बढ़ाती हैं
एंटीबायोटिक्स: इंफेक्शन से निजात दिलाने के लिए बहुत-से डॉक्टर बिना सोचे-समझे एंटीबायोटिक्स प्रिस्क्राइब कर देते हैं. पर यह जितना फ़ायदेमंद है, उतना ही
नुक़सानदेह भी है. लंबे समय तक इसका इस्तेमाल आपको मोटापा दे सकता है.

स्टेरॉइड्स: यह तो जगज़ाहिर है कि स्टेरॉइड्स नुक़सानदेह होते हैं, पर यह भी उतना ही सच है कि यह अस्थमा और आर्थराइटिस जैसी बहुत-सी बीमारियों से निजात भी दिलाते हैं. स्टेरॉइड्स से वज़न बढ़ने का कारण है कि ये आपकी जठराग्नि को तेज़ कर भूख बढ़ाते हैं, साथ ही ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को बढ़ाकर शरीर के मेटाबॉलिज़्म को भी प्रभावित करते हैं. इससे न स़िर्फ आपका वज़न बढ़ता है, बल्कि इसके लगातार सेवन से डायबिटीज़ की संभावना भी बढ़ जाती है.

बर्थ कंट्रोल पिल्स: स्टडी से यह पता चला है कि कुछ गर्भनिरोधक गोलियों के कारण महिलाओं का वज़न बढ़ता है, जो फ्लूइड रिटेंशन के कारण होता है, पर ज़रूरी नहीं कि ऐसा सभी गोलियों के साथ हो. अगर आपकी वर्तमान गोली से आपका वज़न बढ़ रहा है, तो डॉक्टर की मदद से आप उसकी जगह कोई और विकल्प ले सकती हैं.

एंटीडिप्रेज़ेंट दवाइयां: डिप्रेशन से जूझ रहे मरीज़ों के इलाज के लिए एंटीडिप्रज़ेंट दवाइयां दी जाती हैं. इन दवाइयों में ऐसे तत्व होते हैं, जो हमारे मूड के साथ-साथ हमारी भूख लगने की क्षमता को भी प्रभावित करते हैं. यही वजह है कि ये दवाइयां ले रहे 25% लोगों का वज़न समय के साथ 4 से 5 किलो तक बढ़ जाता है.

हाई ब्लड प्रेशर की दवाइयां: हार्ट प्रॉब्लम्स से बचाव करने और हाई ब्लड प्रेशर को कम करने के लिए जिन अल्फा ब्लॉकर्स और बीटा ब्लॉकर्स का इस्तेमाल किया जाता है, उनके कारण अक्सर लोगों का वज़न बढ़ता है. ये कैलोरीज़ बर्न करने की प्रक्रिया को धीमा करने के साथ-साथ वॉटर रिटेंशन को भी बढ़ा देते हैं. लेकिन ज़रूरी नहीं कि ऐसा सभी के साथ हो.

हार्मोंन ट्रीटमेंट्स: शरीर में होनेवाले हार्मोंस के असंतुलन के लिए एस्ट्रोजेन-प्रोजेस्टेरॉन थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है. इस थेरेपी से भूख और वॉटर रिटेंशन बढ़ जाता है. इसके हाई डोज़ के कारण ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है, जिससे शरीर में फैट की मात्रा भी बढ़ने लगती है.

माइग्रेन पिल्स: माइग्रेन की दवाइयां भले ही आपका सिरदर्द दूर करती हैं, पर बढ़ता हुआ वज़न आपको कई और दर्द दे सकता है. कई शोधों से पता चला है कि इनका सेवन करनेवाले 70% से ज़्यादा लोगों का वज़न बढ़ता ही है.

डायबिटीज़ की दवा: इंसुलिन शरीर का वज़न बढ़ाने में अहम् भूमिका निभाता है. टाइप 2 डायबिटीज़ के इलाज के लिए इस्तेमाल की जानेवाली कई दवाइयां ब्लड शुगर कम करने की बजाय वज़न बढ़ाने का काम करती हैं. हाल ही में हुई एक स्टडी में पाया गया कि इंसुलिन के लगातार सेवन से 3-12 महीने के भीतर लोगों का वज़न 4 से 5 किलो तक बढ़ गया था.

मूड डिसऑर्डर्स: एपिलेप्सी, नर्वस डिसऑर्डर, सीज़र जैसी मानसिक बीमारियों के लिए मूड स्टेबलाइज़र का काम करनेवाली कई दवाइयां समय के साथ आपका वज़न बढ़ा सकती हैं. दरअसल, ये दवाइयां दिमाग़ के उस हिस्से को प्रभावित करती हैं, जो हमारी भूख को कंट्रोल करके हमारे बॉडी वेट को बनाए रखता है.
कैसे पहचानें वज़न बढ़ रहा है?
– किसी नई दवा के सेवन या ट्रीटमेंट से वज़न पहले के मुक़ाबले थोड़ा ज़्यादा बढ़ गया है.
-कभी-कभी तो आपको तब तक एहसास नहीं होता, जब तक कि आपका डॉक्टर इस ओर आपका ध्यान आकर्षित न करे.
– आपको बार-बार भूख लगती है.
– सुस्ती के कारण एक्सरसाइज़ करना आपको अच्छा नहीं लगता.
– पर ज़रूरी नहीं कि ये सारे लक्षण आप में मौजूद हों.
क्यों बढ़ता है इन दवाइयों से वज़न?
– ये दवाइयां शरीर के मेटाबॉलिज़्म को प्रभावित करती हैं, जिससे कैलोरी बर्न करने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है.
-शरीर में इंसुलिन के स्राव को बढ़ाकर फैट टिश्यूज़ की मात्रा बढ़ाती हैं.
– शरीर के पोषक तत्वों को ग्रहण करने की क्षमता को प्रभावित करती हैं.
– जठराग्नि को तेज़ कर भूख बढ़ाती हैं.
– बार-बार प्यास लगती है.
– शरीर में वॉटर रिटेंशन को बढ़ाती हैं.
= टेस्ट बड्स को प्रभावित करती हैं, जिससे बार-बार खाने की इच्छा होती है.
क्या कॉम्प्लीकेशन्स हो सकती हैं?
जहां वज़न बढ़ने से आपको कई हेल्थ प्रॉब्लम्स शुरू हो सकती हैं, वहीं पहले की कोई समस्या गंभीर भी हो सकती है. कॉम्प्लीकेशन्स से जुड़ी कुछ बीमारियां इस प्रकार हैं-
– डायबिटीज़
– आर्थराइटिस
– हाई ब्लड प्रेशर
– हार्ट डिसीज़
– स्ट्रोक
– स्लीप एप्निया
– लिवर डिसीज़
– फेफड़ों की बीमारियां
– इंफर्टिलिटी
– कैंसर
– मनोवैज्ञानिक समस्याएं.
इससे बचने के लिए क्या करें?
– अगर आपको लगता है कि किसी ख़ास दवाई या ट्रीटमेंट के कारण आपका वज़न बढ़ रहा है, तो आप तुरंत अपने डॉक्टर को इस बारे में बताएं.
– आपका डॉक्टर आपको उस दवाई के विकल्प के तौर पर दूसरी दवा लेने की सलाह दे सकता है, जिसमें ये साइड इफेक्ट न हो.
– दवाइयों को लाइफ सेविंग ड्रग्स भी कहा जाता है, ऐसे में महज़ इसलिए कि वो आपका वज़न बढ़ा रही हैं, उन्हें बिल्कुल नज़रअंदाज़ न करें.
– दवाइयों से संबंधित कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें.
– डॉक्टर आपके दवा की डोज़ को कम कर सकता है, ताकि वज़न बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाए.
– डॉक्टर से किसी और तरह के ट्रीटमेंट ऑप्शन के बारे में सलाह ले सकते हैं.
– हर हाल में याद रखें कि आपका इलाज बहुत ज़रूरी है, क्योंकि बढ़ते वज़न को रोकने या कम करने के और भी उपाय अपनाए जा सकते हैं.
– डॉक्टर आपको किसी डायटीशियन की मदद लेने की सलाह दे सकते हैं, जो आपके डायट को कंट्रोल कर उसे हेल्दी बनाने के तरी़के बताएंगे.
– खाने की मात्रा को कम करके भी आप इस समस्या को कुछ हद तक कम कर सकते हैं.

– संतारा सिंह