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कादर खान एक बड़ा नाम, पहले विलेन, फिर हास्य कलाकार और फिर कैरेक्टर रोल्स… इन सबके बीच कादर खान एक बेहद अच्छे डायलॉग राइटर भी थे. कम लोग ही जानते हैं कि फिल्म रोटी में राजेश खन्ना ने कादर खान को बतौर डायलॉग राइटर ब्रेक दिया था और इसके बाद कादर ने कई कामयाब फ़िल्मों के डायलॉग लिखे. इसी तरह सुपर स्टार अमिताभ बच्चन की भी कई फ़िल्मों के डायलॉग कादर ने ही लिखे.

ऐसे में अगर यह कहा जाए कि अमिताभ की कामयाबी में कादर का भी बड़ा हाथ है तो ग़लत नहीं होगा. अमिताभ और कादर बेहद अच्छे दोस्त भी थे. अमिताभ की कामयाब फ़िल्में- लावारिस, शराबी, अमर अकबर एंथनी और अग्निपथ की स्क्रिप्ट भी कादर खान ने लिखी थी. अमिताभ और कादर खान ने कई फ़िल्मों में साथ काम भी किया लेकिन फिर एक छोटी सी बात की वजह से दोनों के बीच दरार आ गई.

Kader Khan and Amitabh Bachchan

कादर खान ने खुद इंटरव्यू में इस घटना का ज़िक्र किया था कि अमिताभ को मैं अमित अमित कहता था. एक बार साउथ के एक प्रोड्यूसर कादर खान के पास आकर बोले क्या आप सर जी से मिले, कादर ने कहा कौन सर जी, वो प्रोड्यूसर बोला- आप सर जी को नहीं जानते? वो देखिए लंबे से, कादर बोले- ये तो अमित है, सर जी कबसे हो गया!

Amitabh Bachchan

सोशल मीडिया पर कादर खान का वो इंटरव्यू मौजूद है जिसमें उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम का ज़िक्र किया है.

कादर ने बताया कि तबसे लोग अमित को सर जी सर जी कहने लगे लेकिन मेरे मुंह से कभी निकला नहीं, बस मेरे मुंह से सर जी ना निकला इसलिए मैं उस ग्रुप से निकल गया. मेरी समझ में नहीं आता कि क्या कोई अपने दोस्त या अपने भाई को किसी और नाम से बुला सकता है?

मैं खुदा गवाह से निकला, गंगा जमुना सरस्वती भी आधी लिख कि छोड़ दी और कई फ़िल्में जो छूट गई.

Video courtesy: Twitter/BUSINESSOFCINEMA

अपने आख़री दिनों में कादर खान कनाडा शिफ़्ट हो गए थे और उनके बेटे ब खुद कादर का भी कहना था कि इंडस्ट्री ने उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया, इस बात की तकलीफ़ उन्हें हमेशा रही.

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इतिहास गवाह है कि किसी भी जेनुईन शायर ने अपनी प्रजाति बदलने की कोशिश नहीं की. न ही उसने अपनी शायरी के अलावा किसी और बात का क्रेडिट लिया. वैसे भी जिस पर शायर का ठप्पा लग गया, वह बस शायर ही रहा और कुछ नहीं बन पाया. उसकी शक्ल ही अलग-सी हो जाती है शायराना टाइप, जिसे देखकर दूर से ही अंदाज़ा लग जाता है कि फलाना शायर चला आ रहा है.

आपसे क्या बताएं, कोई मुझसे पूछे, तो मैं शायरों की बातें न ही करूं पर क्या करें इनके बिना गुज़ारा भी तो नहीं है.
गीत-गाने, सुर-ताल, रस-छंद, दोहे, सोरठा ग्रंथ, महाकाव्य सब इनकी बदौलत ही तो हैं. शायर का कलाम बढ़िया हो, तो एक से एक अदना सिंगर स्टार बन जाए, एक मामूली हीरो भी हिट हो जाए, एक साधारण-सा प्रोड्यूसर भी नाम कमा लें और डायरेक्टर के तो कहने ही क्या! काम किसी और का नाम उसका.
वैसे ही अगर किसी फिल्म में स्टोरी, गीत और डायलाॅग अच्छे न हों, तो बड़े से बड़ा हीरो फ्लाप होते देर नहीं लगती, नामी प्रोड्यूसर और डायरेक्टर भी ऐसी फिल्म की नैया डूबने से नहीं बचा सकते.
ख़ैर यह स्टोरी और डायलाॅग वाला मामला दूसरा है, गीत-ग़ज़ल और शायरीवाला दूसरा. एक अच्छा शायर एक अच्छा गीतकार, बस शायर और गीतकार ही होता है. यह अलग बात है कि बहुत से स्टोरी राइटर, प्रोड्यूसर, डायरेक्टर या फिर एक्टर ख़ुद को मल्टी टैलेंटेड घोषित कर देते हैं. वे फिल्म में गीत-गज़ल लिखने से लेकर उसे डायरेक्ट करने तक का क्रेडिट ख़ुद लूट लेते हैं. मगर इतिहास गवाह है कि किसी भी जेनुईन शायर ने अपनी प्रजाति बदलने की कोशिश नहीं की. न ही उसने अपनी शायरी के अलावा किसी और बात का क्रेडिट लिया. वैसे भी जिस पर शायर का ठप्पा लग गया, वह बस शायर ही रहा और कुछ नहीं बन पाया. उसकी शक्ल ही अलग-सी हो जाती है शायराना टाइप, जिसे देखकर दूर से ही अंदाज़ा लग जाता है कि फलाना शायर चला आ रहा है. बड़ी ही अजीब टाइप की शख्सियत होती है इनकी. इन्हें समझ पाना और उससे बड़ी बात यह कि इनके साथ निभा पाना बड़ा मुश्किल काम होता है.
कुछ पता नहीं इनका कि कब किस बात पर ख़ुश हो जाएं और कब किस बात पर किसी से नाराज़. ये बड़े मूडी क़िस्म के प्राणी होते हैं. मूड है तो ये कुछ भी कर डालेंगे और मूड नहीं है, तो एक लाइन नहीं लिखवा सकते आप इनसे.
अपनी रौ में आ जाएं, तो कहो एक ही दिन में कई फिल्मों का कोटा पूरा कर दें और मूड न बने तो बड़े से बड़े प्रोड्यूसर का एडवांस वापस कर दें. कभी लाखों का ऑफर ठुकरा दें, तो कहीं मुफ़्त में खड़े होकर सुनाने लगें.
कई बार स्टडी हुई कि आख़िर ये ऐसे होते क्यों हैं या कोई शख़्स शायर क्यों और कैसे बनता है, पर कोई सही और ठोस उत्तर इस मामले में मिल नहीं सका. एक आम धारणा घर कर गई कि जो लोग इश्क़ में असफल होते हैं, वे शायर बन जाते हैं, पर यह बात भी सही नहीं मालूम होती. ऐसा होता तो हर फ्लाॅप मजनू शायर होता, लेकिन न जाने कितने प्यार-व्यार में असफल लोग क्रिमिनल बन जाते हैं. कई तो समाज की दूसरी फील्ड चुनकर उसमें हाथ आज़माने लगते हैं, कुछ साधू-सन्यासी बन जाते हैं. कुछ प्रभु प्रेम में लीन हो जाते हैं. कहने का अर्थ यह कि शायर बन जाने का कोई हिट या डिफाइन फार्मूला नहीं है.
जो शायर हैं, उनकी एक ख़ासियत तो होती है, वे भीड़ को इम्प्रेस कर लेते हैं. जहां बड़े-बड़े लोग किसी से अपनी बात कहने में सोचते हुए पूरी उम्र निकाल देते हैं. वहीं ये दो मिनट में अनजान लोगों से भी ऐसे घुलमिल कर बातें करने लगते हैं, जैसे न जाने कितने जन्मों की जान-पहचान हो इनकी. ये लोग लेडीज़ के प्रति एक्स्ट्रा साॅफ्ट कार्नर रखते हैं, जिसका नतीज़ा यह कि कहीं भी इन्हें बड़ी जल्दी शायर होंने के नाते लेडीज़ की सिम्पैथी मिलते देर नहीं लगती.
पता नहीं क्यों मुझे तो लगता है इनमें चाहे जितने ऐब हों, चाहे ये स्मार्ट फिट और जिमनास्टिक बाॅडी न रखते हों, सेंटर ऑफ अट्रेक्शन बन ही जाते हैं. सभा समारोह हो, मुहल्ले का जलसा हो या किसी रिश्ते-नाते में पार्टी… ये सबसे व्यस्त नज़र आते हैं और ढेरों लोगों से घिरे हुए. कभी किसी को कुछ सुनाते हुए, तो कभी किसी पर कुछ सुनाते हुए. हाय इनकी नफासत और नजाकत का क्या कहना. जिसे देखकर अपना बना लें वह बस लुट जाए इनके अंदाज़ पर.
प्लीज़ मुझे रुकना पड़ेगा, वर्ना हारोस्कोप देखकर लोगों का भूत, भविष्य और उनके गुण-नेचर बताने वाले ज्योतिषाचार्य मुझसे नाराज़ हो जाएंगे. इस मामले में मेरे पास एकाधा फोन आ जाए. इन गुणी लोंगों का तो कोई बड़ी बात नहीं है. हो सकता है कोई नामी भविष्यवक्ता महोदय यह कह दें कि तुम मेरी फील्ड में इंटरफीयर क्यों कर रहे हो. इतना ही शौक है किसी के बारे में कुछ बताने का तो यह लिखना-पढ़ना छोड़कर ज्योतिष का अध्ययन करो और टीवी पर आ कर हमें चैलेंज करो, तब देखते हैं कितनी देर टिक पाते हो.
ख़ैर मुझे क्या पड़ी है कि मैं बैठे-बिठाये दुनियाभर के लोगों से पंगा लेता फिरू. इस मामले में मुझे संज्ञान इसलिए लेना पड़ा कि आज सुबह मुझसे मुहल्ले के सम्मानित शायर ‘बेचैन सुराहीवाले’ टकरा गए.
वैसे तो वे हमेशा अपने जिगर का दर्द सीने में दबाए हंसते-मुस्कुराते मिलते थे, पर आज न जाने क्यों मुझे लगा कि उनका दर्द चेहरे से लेकर शरीर तक छलका पड़ रहा है. यह जो फिजिकल दर्द होता है, वह बड़ा पीड़ादायक होता है. दिल-विल में दर्द हो, वह पलता रहे, आदमी शायरी-वायरी करता रहे. उससे फ़र्क नहीं पड़ता. हां, कभी-कभी ऐसे दिल का दर्द शौक से पालनेवालों को जब डाॅक्टर असली दिल के दर्द यानी हार्ट अटैक के ख़तरे के बारे में आगाह करता है, तो उसका नकली दर्द छूमंतर होते देर नहीं लगती. तब वह भूल जाता है कि अपने पाले हुए दिल के दर्द से शायर बना है. उस वक़्त उसे अपना दर्द सच में पीड़ा देने लगता है. वह जल्द से जल्द उससे छुटकारा पाने को बेचैन हो जाता है. वह पूछता है डाॅक्टर साहब यह जो दिल मेरे पास है और वह जो दिल आप बता रहे हैं, जिस पर हार्ट अटैक का ख़तरा मंडरा रहा है, वह एक ही है या अलग-अलग.
और जैसे ही डाॅक्टर कहता है कि सीने में दिल तो एक ही होता है और अटैक भी उसी पर आता है, यह शायर घबरा जाता है.
वह सोचता है यह जो दर्द मैंने पाला हुआ है हो न हो अटैक का कारण वही दर्द है, वह पूछता है, “डाॅक्टर साहब, अगर मैं अपने दिल के दर्द को मिटा लूं, तो क्या बाईपास सर्जरी नहीं करानी पड़ेगी?”

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और उस की ऐसी भोली बातें सुनकर डाॅक्टर सिर पकड़ लेता है, “कहता है, जनाब आप किस दिल और कौन से दर्द की बात कर रहे हैं. यह मेरी समझ से बाहर है. मुझे इतना पता है कि यह जो आपके सींने में दिल है इसे हार्ट अटैक आया है और यह बिना ऑपरेशन के ठीक नहीं होगा. अगर मुझे आपकी जान बचानी है, तो मुझे इसका ऑपरेशन करना ही पड़ेगा.
शायर सोचता है यह दिल तो न जाने कब से घायल है. चलो मरहम-पट्टी और दवा-दारू से कुछ रिपेयर हो जाएगा, कर लेने दो डाॅक्टर को भी अपनी मनमानी कौन-सा ऑपरेशन करने से मेरे दिल की किताब से मेरी ग़ज़लें चुरा लेगा.
ख़ैर, मुझे बेचैन सुराहीवाला के दिल का दर्द आज डाॅक्टरवाले दिल के दर्द सा फील हुआ. वे भी मुझे देखकर बात करने को तड़प उठे.
मैंने दुआ-सलाम की, तो थोड़ा नाॅर्मल हुए. मुझसे रहा न गया, मैंने पूछ ही लिया, “सब खैरियत तो है. आज न जानें क्यों आप अपने नाम की तरह बेचैन लग रहे हैं.
वे तड़पते हुए बोले, “अरे, क्या ख़ाक खैरियत है तुम्हें. क्या पता कि पिछले चार महींने कितनी टेंशन में बीते हैं.”
मैं चौंका, “आख़िर ऐसी क्या बात हो गई, जो आप इतना परेशान हैं सेहत तो ठीक है ?”
वे बोले अब क्या बताऊं सेहत +-वेहत की कोई बात नहीं है बात ऐसी है कि कहते-सुनते भी डर लगता है.
मैं सोच में पड़ गया कि आखिर शायर साहब के साथ लफडा क्या है?
वे और इंतजार न करते हुए बोले, “तुम ने मी टू सुना…“
मैं हंसा, “आप भी कमाल करते हैं. आज बच्चा-बच्चा मी टू के बारे में जानता है. इसमें न सुनने की कौन-सी बात है. बड़े-बड़े नाम इस लपेटे में आ रहे हैं. कहीं आपका नाम भी तो नहीं. वैसे आ जाए, तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा. हां, एक बात है, आप पॉपुलर हो जाएंगे इसके बाद.
वे गु़स्साते हुए बोले, “लाहौल वला कूवत, मेरा तुमसे इसीलिए बात करने का मन नहीं होता. तुम्हें सीरियस मैटर में भी व्यंग्य दिखाई देता है.”
मैंने कान पकड़ा, “नहीं, नहीं ऐसी कोई बात नहीं है. आप अपनी बात बताइए.” मैंने थोड़ी सिंपैथी दिखाई.
वे बोले पता नहीं क्यों मुझे जब से यह मी टू चला है बड़ा डर लग रहा है.
मैं बोला, “बेचैन साहब, जब आपने कोई ग़लत काम किया ही नहीं है, तो डरते क्यों हैं.”
वे सिटपिटाये बोले, “तुम नहीं समझोगे– ये शायरी-वायरी बड़ी बेकार चीज़ होती है. इसमें कहीं भी और कभी भी फंसने का चांस बन सकता है.
तुम्हें तो पता ही है बिना इंस्पायर हुये तो कोई लिख नहीं सकता – जब काॅलेज में था, तो मैंने कई शेर लिखे थे-
“तुम्हारी निगाह में समंदर ढूढ़ लाया हूं, चेहरे झील का पानी है, जो नूर बन के ठहरा है.“
वैसे ही एक लिखा था-
यह जो काली रात मेरे कमरे में उतर आई है, लगता है तेरी जुल्फ का तब्बसुम उतर आया है .
वहीं एक था कि – बिजली सी कौंधती है तेरी एक हंसी के साथ ए खयालों की मलिका तू यूं हंसा न कर .
मैं चौंक गया – बेचैन साहब यह सब तो आपकी हिट शायरी के शेर हैं जो हर मंच से आप सालों से सुना रहे हैं .
वे बोले यही तो लफड़ा है– हर शेर किसी न किसी से इंस्पायर है और मज़ा यह कि शेर मे जिससे वह इंस्पायर है ख़ुद-ब-ख़ुद उसका नाम आ रहा है %.
इतना ही नहीं मेरी हर गज़ल में इंडायरेक्टली कोई न कोई करेक्टर रिफ्लेक्ट हो जाता है.
मामला इतना सीधा नहीं है आजकल मेरी गज़लों के कैरेक्टर मुझे संदेहास्प्रद नज़रों से देखते हैं. ऐसे एक दो नहीं हैं कई कैरेक्टर हैं कोई सब्जी मार्केट में मिल जाता है तो कोई शापिंग माल में , किसी से पार्क में मुलाकात हो जाती है तो कोई बच्चों को स्कूल कालेज छोडते मिल जाता है .
मुझे रश्क हुआ (मेन विल बी मेन) तो बेचैन साहब आपने जितनी ग़ज़लें और शेर लिखे हैं उतने ही इंस्पायरिंग कैरेक्टर हैं आपकी लाइफ में.
इस बार वे कुछ बोले नहीं, बस मुस्कुरा के रह गए.
मैं सोचने लगा क्या आइटम है. अगला कम से कम सौ-दो सौ ग़ज़ल तो लिखी है इसने और हजार-पांच सौ शेर से कम का खजाना नहीं होगा इसका. मन में ख़्याल आया फंसने दो फिर देखता हूं.
ख़ैर ऊपर से मैं कुछ नहीं बोला, बस इतना ही कहा, “बेचैन साहब, यह आग जो जली है, इसका धुआं दूर तक उठ रहा है. और हां, कम से कम अब इंस्पायर होना बंद कर दीजिए. ऐसा न हो कल को आप कोई नई ग़ज़ल लिखो और फिर जलोटाजी की तरह टीवी पर आकर सफ़ाई देते फिरो कि ऐसा-वैसा कुछ नहीं है, मैं तो उस का कन्यादान कर रहा हूं.”
उन्हें शायद मेरी बात अच्छी नहीं लगी. वे अपने फेवर में कुछ सुनना चाहते थे वे चाहते थे कि मैं कह दूं किसी से इंस्पायर होने में कोई हर्ज नहीं है, लेकिन इस तेज़ चलती आंधी में कोई भी स्टेटमेंट देंना भला कौन-सी समझदारी है. भले ही मुझे पता है कि आज “मेन” कितनी पीड़ा में हैं, पर सब कुछ के बाद भी ग़लत काम की तरफ़दारी तो नहीं की जा सकती है न.
जिसे लोग इंसिपिरेशन समझ इग्नोर कर देते हैं, न जाने वह दूसरे को कितना फिजिकल व मेंटल पीड़ा देता हो?

मुरली मनोहर श्रीवास्तव
Satire

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काफ़ी समय से सीएए को लेकर आए दिन कुछ-न-कुछ हो रहा है. इसमें आम जनता तो कम, लेकिन शरारती तत्व अधिक परेशान कर रहे हैं. तभी तो फिल्म निर्माता- लेखक विवेक अग्निहोत्री ने इसे अरबन नक्सल तक नाम दे दिया. हर भारतीय की तरह उन्हें भी देश व लोगों की चिंता है. तभी तो वे लगातार सोशल मीडिया पर इसे लेकर अपनी बात व पक्ष रख रहे हैं.

Statement Of Filmmaker

 

इस रात की कोई सुबह नहीं… जैसे बयां उनके आहत मन को ही दर्शा रहे हैं. उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें जिस तरह देश में कहीं-न-कहीं हर रोज़ तोड़-फोड़ के समीकरण बन-बिगड़ रहे हैं, यह कहीं सिविल वॉर के संकेत तो नहीं? वे कौन लोग हैं, जो इस तरह की कामों में लिप्त हैं.

कहीं ये सब दुनिया में देश को अपमानित करने का षड़यंत्र तो नहीं रचा जा रहा.,. इस तरह की आशंका भी विवेकजी ने जताई है. आख़िर कोई कैसे अपने ही देश की संपत्ति को इस कदर नुक़सान पहुंचा सकता है. यह है तो हम सभी का घर ना!.. कैसे इसके बारे में ग़लत व बुरा बोल सकते हैं. क्योंकर? हमारी परवरिश में कमी रह गई या फिर अभिभावकों के संस्कार में.

https://twitter.com/vivekagnihotri/status/1231894212003729408

 

अपनी बात को मनवाने की ज़िद… आम नागरिक को परेशान करना… रक्षक को ही भक्षक की संज्ञा देना… जान-बूझकर पत्थरबाज़ी, आगजनी करना, ताकि माहौल और बिगड़ जाए. इन सब हालातों में सितारे भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आते. कुछ प्रतिष्ठित लेखक, कलाकार हैं, जो अक्सर कुछ-न-कुछ ऐसा कहते जा रहे हैं, जिससे स्थिति सुधरने की बजाय और बिगड़ जाती है. इसमें फिल्म इंडस्ट्री भी दो भागों में बंट गई है. जहां एक तरफ़ जावेद अख़्तर, स्वारा भास्कर, रिचा चड्ढा, अनुराग कश्यप जैसे नफ़रत की राजनीति कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ़ वंो पक्ष भी है, जो शांति बहाल करना चाहता है. इसमें अनुपम खेर तो कई बार सटीक व समझदारीभरे तथ्य रख रहे हैं और लोगों को जागरूक होने की पैरवी भी कर रहे हैं.

https://twitter.com/vivekagnihotri/status/1231981378889142272

कौन कितना सही है और कितना ग़लत, यह तो हम सभी देख रहे हैं. लेकिन कुछ असमाजिक तत्व जिस तरह की हरकतें कर रहे हैं, वो ठीक नहीं. स्पष्टतौर पर कहें, तो इसकी ज़रूरत भी नहीं है, लेकिन फिर भी वे तिल का ताड़ बनाते जा रहे है, जिसे हम सभी को गंभीरता से सोचना व समझना होगा. चुभते शब्द, व्यंग्यबाण, धर्म की आड़, जाति की दुहाई कहां तक जायज़ है. इस पर ध्यान देना होगा.

कल रात मुंबई में भी सीएए को लेकर स्थिति बिगड़ रही थी, पर पुलिस द्वारा इसे नियंत्रण में कर लिया गया.

https://twitter.com/vivekagnihotri/status/1232215384679301121

विवेक अग्निहोत्री ने अपने कुछ बातों, वीडियो आदि के ज़रिए कम में ही बहुत कुछ कहने की कोशिश की है. हर समस्या का समाधान शांति की नींव पर ही टिका होता है, इसके मर्म को जानना होगा.

https://twitter.com/vivekagnihotri/status/1231981386015240193

भारतभर में हो रहे हंगामे, धरने, हल्ला बोल जैसी स्थिति के बारे में आप क्या सोचते हैं? आपकी क्या राय है, ज़रूर बताएं. शेष फिर…

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हिंदी सिनेमा के उम्दा व बेहतरीन शायर, गीतकार, लेखक जावेद अख़्तर आज अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं. कल रात से ही उनके जन्मदिन की धूम मची रही, ख़ासतौर पर रेट्रो थीम पर रहे बर्थडे पार्टी में फिल्मी हस्तियों का लुक मज़ेदार व शानदार रहा.

Javed Akhtar

जावेद अख़्तर और शबाना आज़मी लाल रंग के आउटफिट में काफ़ी ख़ूबसूरत व आकर्षक लग रहे थे. उनके बेटे फरहान अख़्तर ने तो डॉन फिल्म में अमिताभ बच्चन की वेशभूषा धारण की थी, उस पर सिर पर गमछा भी बांध रखा था. बिल्कुल डॉन के गीत खइके पान बनारसवाला खुल जाए बंद अक्ल का ताला… गाने में अमितजी के अंदाज़ की नकल की थी फरहान ने.

Farhan Akthar

इस फेहरिस्त में सतीश कौशिक भी अपनी पत्नी के साथ काले रंग के पोल्का डॉट्स के ड्रेसेस में कुछ कम दिलचस्प नहीं लग रहे थे.

Javed Akhtar Birthday Party

अनिल कपूर पत्नी सुनीता के साथ हमेशा की तरह डैशिंग व अट्रैक्टिव दिखे. बड़े भाई बोनी कपूर तो अपनी इमेज से हटकर रेट्रो लुक में शरारतभरी मुस्कान के साथ छाए रहे.

Anik Kapoor Javed Akhtar Birthday Party Javed Akhtar Birthday Party

उर्मिला मातोंडकर भी फराह ख़ान के साथ अपने हुस्न का जलवा दिखाते हुए रंगाीला हो रही थीं.

Javed Akhtar Birthday Party

दिव्या दत्ता लाल रंग के शरारे में गज़ब ढा रही थीं. उस पर मैचिंग करते गहने और क़ातिल मुस्कान, भई वाह क्या बात है.

Javed Akhtar Birthday Party

आमिर ख़ान पत्नी किरण राव के साथ रेट्रो लुक में कुछ अलग ही दिख रहे थे. वैसे भी यह जोड़ा जहां कहीं जाता है, अपनी छाप छोड़ जाता है.

Aamir Khan

आशुतोष गोवरिकर भी अपनी धर्मपत्नी के साथ मुस्कुराते हुए रंग जमाने पहुंचे.

Javed Akhtar Birthday Partyफोटो: योगेन शाह

कह सकते हैं कि जावेद साहब के जन्मदिन पार्टी को यादगार बनाने में बॉलीवुड के स्टार्स ने कोई कसर बाकी नहीं रखी.

Javed Akhtar Javed AkhtarJaved Akhtar

ज़िंदगीनामा…

* आज जावेद साहब अपना प्लेटिनम जुबली सालगिरह मना रहे हैं.

* वे बचपन से ही कविताएं और गीत लिखा करते थे.

* उनका असली नाम जादू है. ये नाम उनके पिता ने उनकी ही लिखी हुई पंक्ति- लम्हा-लम्हा किसी जादू का फ़साना होगा… से लेकर उन्हें दी थी.

* स्कूल में उनके मित्र उनसे प्रेमपत्र लिखवाया करते थे.

* गीतकार, कवि, शायर व स्क्रिप्ट राइटर जावेदजी का जन्म 17 जनवरी 1945 को पिता जाननिसार अख़्तर के यहां हुआ था.

* पिता मशहूर गीतकार थे और मां सैफिया अख़्तर गायिका व लेखिका थीं.

* बचपन से ही जावेद उसी माहौल में रहे हैं, ऐसे में शब्दों से खेलना उनके लिए कोई मुश्किल काम नहीं था.

* हिंदी सिनेमा के लिए बेहतरीन गीत लिखनेवाले जावेदजी ने ग़ज़ल को भी एक नया रूप दिया.

* जब जावेद मुंबई आए, तब उनके पास रहने के लिए घर भी नहीं था. कई रातें उन्होंने सड़कों पर गुज़ारी थीं.

* सलीम ख़ान और जावेद अख़्तर की मुलाक़ात सरहदी लुटेरा फिल्म के सेट पर हुई थी. इस फिल्म में सलीम ख़ान हीरो थे और जावेद क्लैपर बॉय थे.

* सलीम ख़ान व जावेद अख़्तर की जोड़ी ने साथ में 24 फिल्में लिखीं, जिनमें से 20 सुपर डुपर हिट रहीं.

* उस दौर में स्क्रिप्ट राइटर का नाम फिल्मी पर्दे पर नहीं दिखाया जाता था, लेकिन सलीम-जावेद की फिल्मों ने यह करिश्मा कर दिखाया.

* मिस्टर इंडिया फिल्म के बाद सलीम-जावेद की जोड़ी टूट गई.

* बतौर गीतकार जावेदजी की पहली फिल्म सिलसिला रही.

* बहुत कम लोग जानते हैं कि जावेदजी अपना जन्मदिन अपनी पहली पत्नी हनी ईरानी के साथ शेयर करते हैं. दोनों का ही जन्मदिन 17 जनवरी को है.

* जावेदजी कैफ़ी आज़मी को असिस्ट किया करते थे. वहीं उनकी मुलाक़ात शबाना आज़मी से हुई और छह साल तक अफेयर के बाद दोनों ने शादी कर ली.

* पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित जावेद सर्वश्रेष्ठ गीतकार के लिए पांच राष्ट्रीय और 14 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स भी जीत चुके हैं.

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जावेद अख़्तर के शानदार संवाद पर एक नज़र…

* मेरे पास मां है…

* अरे ओ सांबा कितने आदमी थे…

* आज ख़ुश तो बहुत होंगे तुम…

* जब तक बैठने को ना कहा जाए, शराफ़त से खड़े रहो… यह पुलिस स्टेशन है, तुम्हारे बाप का घर नहीं है…

* मैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठाता…

* ये हाथ हमको दे दे ठाकुर…

* हमारे देश में काम ढूंढ़ना भी एक काम हैे…

* मैं जब भी किसी से दुश्मनी मोल लेता हूं, तो सस्ते-महंगे की परवाह नहीं करता…

* तू अभी इतना अमीर नहीं हुआ बेटा कि अपनी मां को ख़रीद सके…

* इस दुनिया में दो टांगवाला जानवर सबसे ख़तरनाक है…

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उम्दा गीत, ग़ज़ल, शायरी…

आप भी आइए हमको भी बुलाते रहिए

दोस्ती ज़ुर्म नहीं दोस्त बनाते रहिए

ज़हर पी जाइए और बांटिए अमृत सबको

ज़ख़्म भी खाइए और गीत भी गाते रहिए

व़क्त ने लूट लीं लोगों की तमन्नाएं भी

ख़्वाब जो देखिए औरों को दिखाते रहिए

शक्ल तो आपके भी ज़ेहन में होगी कोई

कभी बन जाएगी तस्वीर बनाते रहिए

 

अगर पलक पे है मोती तो ये नहीं काफ़ी

हुनर भी चाहिए अल्फ़ाज़ में पिरोने का

 

ज़रा-सी बात जो फैली तो दास्तान बनी

वो बात ख़त्म हुई दास्तान बाक़ी है

 

बंध गई थी दिल में कुछ उम्मीद-सी

ख़ैर तुम ने जो किया अच्छा किया

 

छोड़ कर जिस को गए थे आप कोई और था

अब मैं कोई और हूं वापस तो आ कर देखिए

 

अक्ल ये कहती दुनिया मिलती है बाज़ार में

दिल मगर ये कहता है कुछ और बेहतर देखिए

 

मैं पा सका न कभी इस ख़लिश से छुटकारा

वो मुझ से जीत भी सकता था जाने क्यूं हारा

– ऊषा गुप्ता

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हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता बहुमुखी प्रतिभा के धनी कादर ख़ान (Kadar Khan) हमारे बीच नहीं रहे. वे एक नेकदिल इंसान के साथ-साथ एक सच्चे हमदर्द व दोस्त थे. अपने हो या पराए सभी के साथ उनका अपनापन उन्हें बेहद ख़ास बना देता था. हम सभी उन्हें उनकी लाजवाब अभिनय, फिर चाहे वो चरित्र अभिनेता, खलनायक, कॉमेडी ही क्यों न हो के लिए हमेशा याद करते रहेंगे.

Kadar Khan

अभिनय के साथ-साथ उनकी कथा, पटकथा, संवाद की लेखनी भी दमदार थी. उन्होंने मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा के साथ मिलकर कई सुपरहिट फिल्मों की स्क्रिप्ट भी लिखी है. इसमें धर्म वीर, अमर अकबर एंथनी, देश प्रेमी, सुहाग, कुली, गंगा जमुना सरस्वती, मुकद्दर का सिकंदर, लावारिस, कुली नंबर वन, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, कर्मा आदि ख़ास हैं. उन्होंने क़रीब ढाई सौ फिल्मों के संवाद लिखे और तीन सौ से भी अधिक फिल्मों में काम किया.

उनकी कॉमेडी तो इतनी उम्दा थी कि जब भी वे पर्दे पर आते थे दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती थी. यूं तो उन्होंने अमिताभ बच्चन से लेकर शाहरुख ख़ान तक सभी कलाकारों के साथ काम किया, पर गोविंदा के साथ उनकी जोड़ी सुपरहिट रही. दोनों के कॉमेडी के पंच और सीन्स आज भी लोगों को ख़ूब हंसाते-गुदगुदाते हैं.

आज कादर ख़ान भले ही हमसे दूर चले गए हों, पर उनके संवाद व सशक्त अभिनय हमारे दिलों में सदा ज़िंदा रहेंगे.

ज़िंदगी के सफ़र पर एक नज़र…

* कादर ख़ान का जन्म काबुल में 22 अक्टूबर 1937 को हुआ था.

* उन्होंने अपनी फिल्मी करियर की शुरुआत दाग़ फिल्म से की थी.

* फिल्म में अभिनय करने से पहले उन्होंने फिल्म जवानी दीवानी के संवाद लिखे थे.

* मेरी आवाज़ सुनो और अंगार फिल्मों के लिए उन्हें बेस्ट डायलॉग के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था.

* हिंदी सिनेमा में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें साहित्य शिरोमणि पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था.

* वे मुंबई के इंजीनियरिंग कॉलेज में लेक्चरर भी रहे थे.

* शक्ति कपूर के साथ उनकी यादगार जोड़ी रही थी. दोनों ने सौ से भी अधिक फिल्मों में साथ काम किया.

* उनकी आख़िरी फिल्म दिमाग़ का दही थी, जो साल 2015 में आई थी.

* अभिनय से रिटायरमेंट लेने के बाद वे मुंबई से कनाडा अपने बेटे सरफराज़ के यहां चले गए.

* 81 वर्षीय कादर ख़ान के अंतिम समय में उनकी पत्नी हिज्रा, उनके बेटे, बहू, नातियां उनके साथ थीं.

* उनके बेटे के अनुसार, कनाडा में ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

* फिल्म इंडस्ट्री व अन्य लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, स्मृति ईरानी, असरानी, परेश रावल, अनिल कपूर, अक्षय कुमार, अर्जुन कपूर, वरुण धवन, मधुर भंडराकर के साथ-साथ अन्य लोगों ने अपनी भावनाएं व्यक्त की.

* अमिताभ बच्चन ने भावुक होते हुए कहा कि कादर ख़ान बहुमुखी प्रतिभा के धनी व समर्पित कलाकार थे. उनकी लेखनी भी ग़ज़ब की थी. मेरे अधिकतर सफल फिल्में, जैसे- मुकद्दर का सिकंदर, कुली, हम, शहंशाह, मि. नटरवरलाल, सुहाग, अदालत सहित तक़रीबन 21 फिल्मों में अभिनेता, संवाद, पटकथा लेखक के रूप में उन्होंने काम किया था.

* ज़िंदगी का सफ़र हमें कहां से कहां ले जाता है, कई बार इसे हम भी नहीं समझ पाते. तभी तो कादर ख़ान अफगानिस्तान के काबुल में जन्मे, भारत में मुंबई में अपनी अदाकारी-लेखनी का लोहा मनवाया, अंतिम पड़ाव पर परिवार के साथ कनाडा में बिताए.

मेरी सहेली परिवार की ओर से भानभीनी श्रद्धांजलि!

– ऊषा गुप्ता

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Work From Home
बदलते जमाने के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना ही समझदारी है, गया वो जमाना जब लोग परमानेंट नौकरी की तलाश में पूरी जिंदगी यूं ही बिता देते थे. अब वक्त है स्मार्टली काम करके का. घर बैठे किन नौकरियों को आप बना सकती है अपना करियर.
टीचर:

Teacherकिसी स्कूल में वैकेंसी का इंतजार करने की बजाय स्टूडेंट्स को घर पर ट्यूशन पढ़ाकर आप काफ़ी पैसे कमा सकते हैं. ट्यूशन ही नहीं, इंटरनेट के माध्यम से आप घर बैठे-बैठे दूर-दराज़ के स्टूडेंट्स को भी पढ़ा सकते हैं. आज स्कूल में एक्स्ट्रा क्लास और एडिशनल पढ़ाई के लिए टीचर्स की ऑनलाइन मदद ली जाती है. स्कूल के अलावा कई ट्यूशन क्लासेस में भी इस तकनीक का भरपूर उपयोग किया जा रहा है. इस क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने के लिए आपको कड़ी मेहनत और अपने हुनर का प्रचार करने की ज़रूरत है.

ऑनलाइन काउंसिलिंग
घर बैठे पैसा कमाने का ये एक बेहतरीन ऑप्शन है स्कूल, कॉलेज, और बड़े-बड़े इंस्टीट्यूट में स्टूडेंट्स को विषय की अच्छी जानकारी देने के लिए एकेडमिक ईयर शुरू होने से पहले काउंसलर की मदद ली जाती है. समय बचाने के लिए लोग ऑनलाइन काउंसलर का सहारा लेते हैं. पढ़ाई के अलावा अन्य क्षेत्रों में काउंसलर की ज़रूरत होती है. ऐसे में ऑनलाइन काउंसलर की डिमांड बढ़ रही है.

ट्रांसलेटर
अगर आपको एक से ज्यादा भाषाओं का ज्ञान है और उन पर मज़बूत पकड़ भी है, तो ये आपके लिए बेस्ट ऑप्शन है. कई कंपनिया घर बैठे-बैठे ट्रांसलेटर को काम देती हैं. देश ही नहीं, आप विदेश का काम भी कर सकते हैं. इस क्षेत्र में आने के लिए भाषा के ज्ञान के साथ-साथ स्मार्ट और तेज़ होना भी आवश्यक है.

वेब डिजाइनर
इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक ऐसा सेक्टर है, जहां घर बैठे लोगों को अधिक वरीयता दी जाती है. बड़ी-बड़ी कंपनियां ऐसे लोगों को हायर करती हैं, तजो बिना ऑफिस आए, अपने घर से ही सारे काम कर सकेें. वेब डेवलपर्स/डिजाइनर की डिमांड आज बहुत बढ़ गई है. 10वी और 12वीं के बाद युवा तेज़ी से इस कोर्स की ओर बढ़ रहे हैं, घर बैठे काम करके वो अपनी आगे की पढ़ाई भी जारी रख सकते हैं.

मेडिकल ट्रांसिक्रप्टनिस्ट
डॉक्टरों की मेडिकल वॉइस रिकॉर्डिग्स को सुनकर उसे लिखित रूप में जारी करा इस प्रोफेशन का मुख्य काम होता है. इसमें पेशेंट की मेडिकल रिपोर्ट की हिस्ट्री से लेकर डिस्चार्ज समरी और दूसरे डॉक्यूमेंट्स भी शामिल होते हैं. बड़े-बड़े डॉक्टर, फिजिशियन मेडिकल ट्रांसिक्रप्टनिस्ट पर ही निर्भर होते हैं, इस प्रोफेशन में आने के लिए आपके मेडिकल टर्मिनोलोजी, ट्रीटमेंट असेसमेंट, डाइग्नॉस्टिक प्रोसिजर, अनाटॉमी और फिशियोलॉजी की अच्छी समझ होनी चाहिए.

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कॉल सेंटर रिप्रेजेटेटिव

Call Center Representative
इस जॉब के लिए कंपनी की सभी जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का बखूबी प्रयोग करना आना चाहिए. आप भी घर बैठे ये काम कर सकते हैं.

टेक सपोर्ट स्पेलिस्ट
इस फील्ड के लिए आपके अंदर किसी भी तरह की टेक्नीकल प्रॉब्लम का हल निकालने की क्षमता होनी चाहिए. इस काम को घर बैठे-बैठे फोन पर और ऑनलाइन किया जा सकता है. इस जॉब से घर बैठे ही अच्छी कमाई हो जाती है. इस फील्ड में तरक्की के लिए आपका अपना एडवरटाइजिंग स्वयं करनी पड़ेगी, ताकि लोग आपको याद रखें.

ट्रैवल एजेंट

Travel Agent

ये काम आप छोटे से कमरे से भी शुरू कर सकते हैं. इसमें बहुत ज़्यादा पढ़ाई-लिखाई की ज़रूरत नहीं होती. इंटरनेट के जमाने में ट्रैवल एजेंसी चलाना और भी आसान हो गया, इस काम के लिए आपको कंप्यूटर, लैपटॉप और इंटरनेट का यूज करना आना चाहिए.

राइटर

Writer
क्रिएटिव राइटिंग घर बैठे पैसा कमाने का सबसे आसान तरीका है. अगर आपको लिखने का शौक है, तो आप ये काम कर सकती हैं. अखबार, पत्रिका, धारावाहिक, फिल्म या वेबसाइट के लिए लिए सकती हैं. आजकल हर फ्रीलांस राइटर की ज़रूरत होती है.

रिसर्च असिस्टेंट
कई कंपनियां अपने स्पेशल प्रोजेक्ट के लिए विशेष होम रिसर्च असिस्टेंट को अप्वाइंट करती हैं. इसके लिए वो उनको पेमेंट भी करती है. रिसर्च असिस्टेंट के लिए ज़रूरी है उसका काम में फिट होना, कंप्यूटर और लैपटॉप का स्मार्टली इस्तेमाल करना. इस काम के लिए स्मार्टनेस के साथ दिमाग़ का तेज होना भी ज़रूरी है.

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  1. Gopaldas Neeraj

 

मशहूर कवि गोपालदास नीरज जी का 19 जुलाई 2018 को लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया! उनका जन्म: 4 जनवरी 1925 को हुआ था… हिन्दी साहित्यकार, शिक्षक, एवं कवि सम्मेलनों के मंचों पर वो एक जाना माना नाम थे. उन्होंने कई फ़िल्मी गीत भी लिखे.  वे पहले व्यक्ति थे जिन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भारत सरकार ने दो-दो बार सम्मानित किया, पहले पद्म श्री से, उसके बाद पद्म भूषण से. 

फ़िल्मों में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिये उन्हें लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला. साहित्य की दुनिया को उनके जाने से जो नुक़सान हुआ है उसकी भरपाई लम्बे समय तक भी नहीं हो पाएगी!

मेरी सहेली की ओर से श्रद्धांजलि!

Cornelia Sorabji, India's First Woman Advocate

 

15 नवंबर, 1866 में महाराष्ट्र के नासिक में जन्मीं कॉर्नेलिया (Cornelia Sorabji) न केवल भारत की पहली महिला वकील हैं, बल्कि देश में व लंदन में लॉ की प्रैक्टिस करनेवाली पहली बैरिस्टर भी हैं. उन्हें देश व समाज सेवा की प्रेरणा उनकी मां से विरासत में मिली. उनकी मां फ्रांसिना फोर्ड नारी शिक्षा की प्रबल पक्षधर थीं. उन्होंने पुणे में लड़कियों की पढ़ाई के लिए कई स्कूल भी खोले. कॉर्नेलिया छह भाइयों में इकलौती बहन थीं.

* वे लेखिका व सोशल वर्कर भी थीं.
* वे बॉम्बे यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होने के साथ-साथ ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के समरविले कॉलेज से लॉ की पढ़ाई करनेवाली पहली भारतीय महिला भी थीं.
* सन् 1892 में वे लॉ की पढ़ाई के लिए विदेश गईं.
* उस ज़माने में महिलाओं को लेकर बहुत सारी पाबंदियां थीं. भारतीय महिला वकील को कोर्ट में प्रैक्टिस की अनुमति नहीं थी. ऐसे में उन्हें इसके लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ा.
* आख़िरकार लंबे संघर्ष के बाद 1904 में बंगाल कोर्ट में लेडी असिस्टेंट के रूप में जुड़ीं.

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* 1907 में उन्हें असम, बिहार, उड़ीसा के कोर्ट में सहायक महिला एडवोकेट के पोस्ट पर काम करने को मिला.
* साल 1924 में उन्होंने कोलकाता व ब्रिटेन में भी प्रैक्टिस शुरू की.
* उन्होंने लंबी क़ानूनी लड़ाई लड़ते हुए अंततः महिलाओं को वकालत से रोकनेवाले क़ानून को कमज़ोर कर उनके लिए लॉ की प्रैक्टिस करने के रास्ते बनाएं.
* उन्होंने देश की क़रीब छह सौ महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने में सहायता की.
* अंत में 1929 में हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट के रूप में रिटायरमेंट लिया.

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* उन्होंने लॉ के अलावा सोशल वर्क व कई लेख, शॉर्ट स्टोरीज़, बुक्स आदि भी लिखीं, जिनमें से उनकी ऑटोबायोग्राफी ‘इंडिया कॉलिंग’ सुर्ख़ियों में रही.
* आज उनके 151 जन्मदिवस पर गूगल ने उन्हें डूडल कर सम्मानित किया.
* 6 जुलाई, 1954 में लंदन में 88 की उम्र में उनका देहांत हुआ.
* देश में ही नहीं, बल्कि इंग्लैंड में भी कॉर्नेलिया सोराबजी को सम्मान के साथ याद किया जाता है.

– ऊषा गुप्ता

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jamini-roy

बर्थ एनीवर्सरी: जेमिनी के रंगों को गूगल ने भी सजाया! (Jamini Roy: Google Placed An Image As Doodle To Honour His Work On His Birth Anniversary)

  • कुछ ख़ास ही होते हैं वो लोग जिनकी भावनाओं के रंग जब कल्पना में सजकर ब्रश का आकार लेकर कैनवास पर उतर आते हैं, तो उनकी हर कृति नायाब ही बनती हैं.
  • ऐसे ही एक शख़्स रहे हैं जेमिनी रॉय, जो अपनी उत्कृष्ट पेंटिंग्स व लेखन के लिए भी काफ़ी मशहूर रह चुके हैं.
  • 11 अप्रैल 1887 को बंगाल में जन्मे जेमिनी 1954 में पद्म भूषण से नवाज़े जा चुके हैं और उनकी मज़बूत शख़्सियत का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि उनकी बर्थ एनीवर्सरी पर गूगल (Google) ने भी अपने डूडल (Doodle) को उनकी यादों के रंगों से सजाकर उन्हें समर्पित किया है.
  • जेमिनी की ख़ासियत यह रही कि उन्होंने भारतीय संस्कृति व परंपराओं को अपनी पेंटिंग में जगह दी.

Jamini Roy

  • वो कालीघाट पेंटिंग्स से काफ़ी प्रभावित थे और उन्होंने पश्‍चिम की जगह देश की स्थानीय परंपराओं और जनजातियों को अपनी पेंटिग्स की प्रेरणा बनाया.
  • उन्हें अपनी पेंटिंग्स के लिए कई इनाम मिले और भारत सरकार ने भी उन्हें पद्म भूषण से नवाज़ा.
  • 24 अप्रैल 1972 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था, लेकिन अपने पीछे वो अपनी यादों के कई उत्कृष्ट रंग छोड़ गए थे, जिन्हें देखकर आज भी मन उन रंगों में खोकर मंत्रमुग्ध हो जाता है.
  • उनकी बर्थ एनीवर्सरी पर उन्हें नमन करते हैं.

तारक मेहता

गुजराती हास्य लेखक और नाटककार तारक मेहता का लंबी बीमारी के बाद 87 साल की उम्र में निधन हो गया है. अहमदाबाद में जन्में तारक मेहता ने गुजराती पत्रिका चित्रलेखा के लिए साल 1971 में अपना कॉलम दुनिया ना उंधा चश्मा शुरु किया था. सब टीवी पर आने वाला कॉमेडी शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा उनकी इसी किताब पर आधारित है. इस शो ने 2 हज़ार एपिसोड पूरे कर लिए हैं और ये भारतीय टेलिविज़न का सबसे लंबा चलने वाला शो बन गया है. उन्हें पद्मश्री से भी नवाज़ा जा चुका है.

मेरी सहेली (Meri Saheli) ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि.

Dharamvir Bharati

डॉक्टर धर्मवीर भारती (dr dharamvir bharati) का जन्म 25 दिसंबर 1926 को इलाहाबाद के अतर सुइया मोहल्ले में हुआ था. उनके पिता का नाम श्री चिरंजीव लाल वर्मा और माँ का श्रीमती चंदादेवी था.

डॉक्टर भारती सामाजिक विचारक थे और प्रख्यात साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग के प्रधान संपादक भी थे.

डॉ धर्मवीर भारती को १९७२ में पद्मश्री से सम्मानित किया गया. उनका उपन्यास गुनाहों का देवता बेहतरीन रचना मानी जाती है. इसके अलावा सूरज का सातवां घोड़ा भी काफ़ी चर्चा में रही  जिस पर श्याम बेनेगल ने फिल्म बनायी,

अंधा युग भी उनका प्रसिद्ध नाटक है.

४ सितंबर १९९७ को वो दुनिया को अलविदा कह गए.

उनके जन्मदिन पर हम उन्हें नमन करते हैं!

touching songs
किशोर कुमार का आज जन्मदिन है. 4 अगस्त १९२९ को मध्य प्रदेश के खंडवा गाँव में जन्में किशोर दा एक बेहतरीन गायक, ऐक्टर, राइटर और म्यूज़िक डायरेक्टर थे. हमेशा मस्ती के मूड में रहने वाले किशोर दा सही मायनों में एक कंप्लीट एंटरटेनर थे. किशोर दा भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें हैं, उनकी आवाज़ और उनके गाये अनगिनत मस्ती भरे और दर्द भरे गाने हमारे साथ ज़रूर हैं.

फिल्म- मि. एक्स इन बॉम्बे (1964)

 

फिल्म- मेरे जीवन साथी (1972)

https://youtu.be/heXQRxM2Gro

 

फिल्म- नौ दो ग्यारह (1957)

https://youtu.be/O4frWRP0WnA

 

फिल्म- ज़हरीला इंसान (1974)

 

फिल्म- चोर मचाए शोर (1974)

https://youtu.be/SRY4oEWaYsk