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भावभीनी श्रद्धांजलि: कादर ख़ान नहीं रहे… (Veteran Film Star Kadar Khan Leaves Behind A Versatile Legacy…)

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता बहुमुखी प्रतिभा के धनी कादर ख़ान (Kadar Khan) हमारे बीच नहीं रहे. वे एक नेकदिल इंसान के साथ-साथ एक सच्चे हमदर्द व दोस्त थे. अपने हो या पराए सभी के साथ उनका अपनापन उन्हें बेहद ख़ास बना देता था. हम सभी उन्हें उनकी लाजवाब अभिनय, फिर चाहे वो चरित्र अभिनेता, खलनायक, कॉमेडी ही क्यों न हो के लिए हमेशा याद करते रहेंगे.

Kadar Khan

अभिनय के साथ-साथ उनकी कथा, पटकथा, संवाद की लेखनी भी दमदार थी. उन्होंने मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा के साथ मिलकर कई सुपरहिट फिल्मों की स्क्रिप्ट भी लिखी है. इसमें धर्म वीर, अमर अकबर एंथनी, देश प्रेमी, सुहाग, कुली, गंगा जमुना सरस्वती, मुकद्दर का सिकंदर, लावारिस, कुली नंबर वन, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, कर्मा आदि ख़ास हैं. उन्होंने क़रीब ढाई सौ फिल्मों के संवाद लिखे और तीन सौ से भी अधिक फिल्मों में काम किया.

उनकी कॉमेडी तो इतनी उम्दा थी कि जब भी वे पर्दे पर आते थे दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती थी. यूं तो उन्होंने अमिताभ बच्चन से लेकर शाहरुख ख़ान तक सभी कलाकारों के साथ काम किया, पर गोविंदा के साथ उनकी जोड़ी सुपरहिट रही. दोनों के कॉमेडी के पंच और सीन्स आज भी लोगों को ख़ूब हंसाते-गुदगुदाते हैं.

आज कादर ख़ान भले ही हमसे दूर चले गए हों, पर उनके संवाद व सशक्त अभिनय हमारे दिलों में सदा ज़िंदा रहेंगे.

ज़िंदगी के सफ़र पर एक नज़र…

* कादर ख़ान का जन्म काबुल में 22 अक्टूबर 1937 को हुआ था.

* उन्होंने अपनी फिल्मी करियर की शुरुआत दाग़ फिल्म से की थी.

* फिल्म में अभिनय करने से पहले उन्होंने फिल्म जवानी दीवानी के संवाद लिखे थे.

* मेरी आवाज़ सुनो और अंगार फिल्मों के लिए उन्हें बेस्ट डायलॉग के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था.

* हिंदी सिनेमा में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें साहित्य शिरोमणि पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था.

* वे मुंबई के इंजीनियरिंग कॉलेज में लेक्चरर भी रहे थे.

* शक्ति कपूर के साथ उनकी यादगार जोड़ी रही थी. दोनों ने सौ से भी अधिक फिल्मों में साथ काम किया.

* उनकी आख़िरी फिल्म दिमाग़ का दही थी, जो साल 2015 में आई थी.

* अभिनय से रिटायरमेंट लेने के बाद वे मुंबई से कनाडा अपने बेटे सरफराज़ के यहां चले गए.

* 81 वर्षीय कादर ख़ान के अंतिम समय में उनकी पत्नी हिज्रा, उनके बेटे, बहू, नातियां उनके साथ थीं.

* उनके बेटे के अनुसार, कनाडा में ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

* फिल्म इंडस्ट्री व अन्य लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, स्मृति ईरानी, असरानी, परेश रावल, अनिल कपूर, अक्षय कुमार, अर्जुन कपूर, वरुण धवन, मधुर भंडराकर के साथ-साथ अन्य लोगों ने अपनी भावनाएं व्यक्त की.

* अमिताभ बच्चन ने भावुक होते हुए कहा कि कादर ख़ान बहुमुखी प्रतिभा के धनी व समर्पित कलाकार थे. उनकी लेखनी भी ग़ज़ब की थी. मेरे अधिकतर सफल फिल्में, जैसे- मुकद्दर का सिकंदर, कुली, हम, शहंशाह, मि. नटरवरलाल, सुहाग, अदालत सहित तक़रीबन 21 फिल्मों में अभिनेता, संवाद, पटकथा लेखक के रूप में उन्होंने काम किया था.

* ज़िंदगी का सफ़र हमें कहां से कहां ले जाता है, कई बार इसे हम भी नहीं समझ पाते. तभी तो कादर ख़ान अफगानिस्तान के काबुल में जन्मे, भारत में मुंबई में अपनी अदाकारी-लेखनी का लोहा मनवाया, अंतिम पड़ाव पर परिवार के साथ कनाडा में बिताए.

मेरी सहेली परिवार की ओर से भानभीनी श्रद्धांजलि!

– ऊषा गुप्ता

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तो अब नौकरी को कहें बाय-बाय! (How To Make Money From Home?)

Work From Home
बदलते जमाने के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना ही समझदारी है, गया वो जमाना जब लोग परमानेंट नौकरी की तलाश में पूरी जिंदगी यूं ही बिता देते थे. अब वक्त है स्मार्टली काम करके का. घर बैठे किन नौकरियों को आप बना सकती है अपना करियर.
टीचर:

Teacherकिसी स्कूल में वैकेंसी का इंतजार करने की बजाय स्टूडेंट्स को घर पर ट्यूशन पढ़ाकर आप काफ़ी पैसे कमा सकते हैं. ट्यूशन ही नहीं, इंटरनेट के माध्यम से आप घर बैठे-बैठे दूर-दराज़ के स्टूडेंट्स को भी पढ़ा सकते हैं. आज स्कूल में एक्स्ट्रा क्लास और एडिशनल पढ़ाई के लिए टीचर्स की ऑनलाइन मदद ली जाती है. स्कूल के अलावा कई ट्यूशन क्लासेस में भी इस तकनीक का भरपूर उपयोग किया जा रहा है. इस क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने के लिए आपको कड़ी मेहनत और अपने हुनर का प्रचार करने की ज़रूरत है.

ऑनलाइन काउंसिलिंग
घर बैठे पैसा कमाने का ये एक बेहतरीन ऑप्शन है स्कूल, कॉलेज, और बड़े-बड़े इंस्टीट्यूट में स्टूडेंट्स को विषय की अच्छी जानकारी देने के लिए एकेडमिक ईयर शुरू होने से पहले काउंसलर की मदद ली जाती है. समय बचाने के लिए लोग ऑनलाइन काउंसलर का सहारा लेते हैं. पढ़ाई के अलावा अन्य क्षेत्रों में काउंसलर की ज़रूरत होती है. ऐसे में ऑनलाइन काउंसलर की डिमांड बढ़ रही है.

ट्रांसलेटर
अगर आपको एक से ज्यादा भाषाओं का ज्ञान है और उन पर मज़बूत पकड़ भी है, तो ये आपके लिए बेस्ट ऑप्शन है. कई कंपनिया घर बैठे-बैठे ट्रांसलेटर को काम देती हैं. देश ही नहीं, आप विदेश का काम भी कर सकते हैं. इस क्षेत्र में आने के लिए भाषा के ज्ञान के साथ-साथ स्मार्ट और तेज़ होना भी आवश्यक है.

वेब डिजाइनर
इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक ऐसा सेक्टर है, जहां घर बैठे लोगों को अधिक वरीयता दी जाती है. बड़ी-बड़ी कंपनियां ऐसे लोगों को हायर करती हैं, तजो बिना ऑफिस आए, अपने घर से ही सारे काम कर सकेें. वेब डेवलपर्स/डिजाइनर की डिमांड आज बहुत बढ़ गई है. 10वी और 12वीं के बाद युवा तेज़ी से इस कोर्स की ओर बढ़ रहे हैं, घर बैठे काम करके वो अपनी आगे की पढ़ाई भी जारी रख सकते हैं.

मेडिकल ट्रांसिक्रप्टनिस्ट
डॉक्टरों की मेडिकल वॉइस रिकॉर्डिग्स को सुनकर उसे लिखित रूप में जारी करा इस प्रोफेशन का मुख्य काम होता है. इसमें पेशेंट की मेडिकल रिपोर्ट की हिस्ट्री से लेकर डिस्चार्ज समरी और दूसरे डॉक्यूमेंट्स भी शामिल होते हैं. बड़े-बड़े डॉक्टर, फिजिशियन मेडिकल ट्रांसिक्रप्टनिस्ट पर ही निर्भर होते हैं, इस प्रोफेशन में आने के लिए आपके मेडिकल टर्मिनोलोजी, ट्रीटमेंट असेसमेंट, डाइग्नॉस्टिक प्रोसिजर, अनाटॉमी और फिशियोलॉजी की अच्छी समझ होनी चाहिए.

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कॉल सेंटर रिप्रेजेटेटिव

Call Center Representative
इस जॉब के लिए कंपनी की सभी जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का बखूबी प्रयोग करना आना चाहिए. आप भी घर बैठे ये काम कर सकते हैं.

टेक सपोर्ट स्पेलिस्ट
इस फील्ड के लिए आपके अंदर किसी भी तरह की टेक्नीकल प्रॉब्लम का हल निकालने की क्षमता होनी चाहिए. इस काम को घर बैठे-बैठे फोन पर और ऑनलाइन किया जा सकता है. इस जॉब से घर बैठे ही अच्छी कमाई हो जाती है. इस फील्ड में तरक्की के लिए आपका अपना एडवरटाइजिंग स्वयं करनी पड़ेगी, ताकि लोग आपको याद रखें.

ट्रैवल एजेंट

Travel Agent

ये काम आप छोटे से कमरे से भी शुरू कर सकते हैं. इसमें बहुत ज़्यादा पढ़ाई-लिखाई की ज़रूरत नहीं होती. इंटरनेट के जमाने में ट्रैवल एजेंसी चलाना और भी आसान हो गया, इस काम के लिए आपको कंप्यूटर, लैपटॉप और इंटरनेट का यूज करना आना चाहिए.

राइटर

Writer
क्रिएटिव राइटिंग घर बैठे पैसा कमाने का सबसे आसान तरीका है. अगर आपको लिखने का शौक है, तो आप ये काम कर सकती हैं. अखबार, पत्रिका, धारावाहिक, फिल्म या वेबसाइट के लिए लिए सकती हैं. आजकल हर फ्रीलांस राइटर की ज़रूरत होती है.

रिसर्च असिस्टेंट
कई कंपनियां अपने स्पेशल प्रोजेक्ट के लिए विशेष होम रिसर्च असिस्टेंट को अप्वाइंट करती हैं. इसके लिए वो उनको पेमेंट भी करती है. रिसर्च असिस्टेंट के लिए ज़रूरी है उसका काम में फिट होना, कंप्यूटर और लैपटॉप का स्मार्टली इस्तेमाल करना. इस काम के लिए स्मार्टनेस के साथ दिमाग़ का तेज होना भी ज़रूरी है.

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नीरज का कारवां… गुज़र गया! नहीं रहे कवि गोपालदास नीरज (Poet Gopaldas Neeraj Died)

  1. Gopaldas Neeraj

 

मशहूर कवि गोपालदास नीरज जी का 19 जुलाई 2018 को लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया! उनका जन्म: 4 जनवरी 1925 को हुआ था… हिन्दी साहित्यकार, शिक्षक, एवं कवि सम्मेलनों के मंचों पर वो एक जाना माना नाम थे. उन्होंने कई फ़िल्मी गीत भी लिखे.  वे पहले व्यक्ति थे जिन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भारत सरकार ने दो-दो बार सम्मानित किया, पहले पद्म श्री से, उसके बाद पद्म भूषण से. 

फ़िल्मों में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिये उन्हें लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला. साहित्य की दुनिया को उनके जाने से जो नुक़सान हुआ है उसकी भरपाई लम्बे समय तक भी नहीं हो पाएगी!

मेरी सहेली की ओर से श्रद्धांजलि!

कॉर्नेलिया सोराबजी- भारत की पहली महिला एडवोकेट… (Cornelia Sorabji: Know India’s First Woman Advocate…)

Cornelia Sorabji, India's First Woman Advocate

 

15 नवंबर, 1866 में महाराष्ट्र के नासिक में जन्मीं कॉर्नेलिया (Cornelia Sorabji) न केवल भारत की पहली महिला वकील हैं, बल्कि देश में व लंदन में लॉ की प्रैक्टिस करनेवाली पहली बैरिस्टर भी हैं. उन्हें देश व समाज सेवा की प्रेरणा उनकी मां से विरासत में मिली. उनकी मां फ्रांसिना फोर्ड नारी शिक्षा की प्रबल पक्षधर थीं. उन्होंने पुणे में लड़कियों की पढ़ाई के लिए कई स्कूल भी खोले. कॉर्नेलिया छह भाइयों में इकलौती बहन थीं.

* वे लेखिका व सोशल वर्कर भी थीं.
* वे बॉम्बे यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होने के साथ-साथ ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के समरविले कॉलेज से लॉ की पढ़ाई करनेवाली पहली भारतीय महिला भी थीं.
* सन् 1892 में वे लॉ की पढ़ाई के लिए विदेश गईं.
* उस ज़माने में महिलाओं को लेकर बहुत सारी पाबंदियां थीं. भारतीय महिला वकील को कोर्ट में प्रैक्टिस की अनुमति नहीं थी. ऐसे में उन्हें इसके लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ा.
* आख़िरकार लंबे संघर्ष के बाद 1904 में बंगाल कोर्ट में लेडी असिस्टेंट के रूप में जुड़ीं.

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* 1907 में उन्हें असम, बिहार, उड़ीसा के कोर्ट में सहायक महिला एडवोकेट के पोस्ट पर काम करने को मिला.
* साल 1924 में उन्होंने कोलकाता व ब्रिटेन में भी प्रैक्टिस शुरू की.
* उन्होंने लंबी क़ानूनी लड़ाई लड़ते हुए अंततः महिलाओं को वकालत से रोकनेवाले क़ानून को कमज़ोर कर उनके लिए लॉ की प्रैक्टिस करने के रास्ते बनाएं.
* उन्होंने देश की क़रीब छह सौ महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने में सहायता की.
* अंत में 1929 में हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट के रूप में रिटायरमेंट लिया.

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* उन्होंने लॉ के अलावा सोशल वर्क व कई लेख, शॉर्ट स्टोरीज़, बुक्स आदि भी लिखीं, जिनमें से उनकी ऑटोबायोग्राफी ‘इंडिया कॉलिंग’ सुर्ख़ियों में रही.
* आज उनके 151 जन्मदिवस पर गूगल ने उन्हें डूडल कर सम्मानित किया.
* 6 जुलाई, 1954 में लंदन में 88 की उम्र में उनका देहांत हुआ.
* देश में ही नहीं, बल्कि इंग्लैंड में भी कॉर्नेलिया सोराबजी को सम्मान के साथ याद किया जाता है.

– ऊषा गुप्ता

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बर्थ एनीवर्सरी: जेमिनी के रंगों को गूगल ने भी सजाया! ( Jamini Roy: Google Placed An Image As Doodle To Honour His Work On His Birth Anniversary)

Jamini Roy

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बर्थ एनीवर्सरी: जेमिनी के रंगों को गूगल ने भी सजाया! (Jamini Roy: Google Placed An Image As Doodle To Honour His Work On His Birth Anniversary)

  • कुछ ख़ास ही होते हैं वो लोग जिनकी भावनाओं के रंग जब कल्पना में सजकर ब्रश का आकार लेकर कैनवास पर उतर आते हैं, तो उनकी हर कृति नायाब ही बनती हैं.
  • ऐसे ही एक शख़्स रहे हैं जेमिनी रॉय, जो अपनी उत्कृष्ट पेंटिंग्स व लेखन के लिए भी काफ़ी मशहूर रह चुके हैं.
  • 11 अप्रैल 1887 को बंगाल में जन्मे जेमिनी 1954 में पद्म भूषण से नवाज़े जा चुके हैं और उनकी मज़बूत शख़्सियत का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि उनकी बर्थ एनीवर्सरी पर गूगल (Google) ने भी अपने डूडल (Doodle) को उनकी यादों के रंगों से सजाकर उन्हें समर्पित किया है.
  • जेमिनी की ख़ासियत यह रही कि उन्होंने भारतीय संस्कृति व परंपराओं को अपनी पेंटिंग में जगह दी.

Jamini Roy

  • वो कालीघाट पेंटिंग्स से काफ़ी प्रभावित थे और उन्होंने पश्‍चिम की जगह देश की स्थानीय परंपराओं और जनजातियों को अपनी पेंटिग्स की प्रेरणा बनाया.
  • उन्हें अपनी पेंटिंग्स के लिए कई इनाम मिले और भारत सरकार ने भी उन्हें पद्म भूषण से नवाज़ा.
  • 24 अप्रैल 1972 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था, लेकिन अपने पीछे वो अपनी यादों के कई उत्कृष्ट रंग छोड़ गए थे, जिन्हें देखकर आज भी मन उन रंगों में खोकर मंत्रमुग्ध हो जाता है.
  • उनकी बर्थ एनीवर्सरी पर उन्हें नमन करते हैं.

नहीं रहे मशहूर हास्य लेखक तारक मेहता (Writer Taarak Mehta Passes Away at 87)

तारक मेहता

तारक मेहता

गुजराती हास्य लेखक और नाटककार तारक मेहता का लंबी बीमारी के बाद 87 साल की उम्र में निधन हो गया है. अहमदाबाद में जन्में तारक मेहता ने गुजराती पत्रिका चित्रलेखा के लिए साल 1971 में अपना कॉलम दुनिया ना उंधा चश्मा शुरु किया था. सब टीवी पर आने वाला कॉमेडी शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा उनकी इसी किताब पर आधारित है. इस शो ने 2 हज़ार एपिसोड पूरे कर लिए हैं और ये भारतीय टेलिविज़न का सबसे लंबा चलने वाला शो बन गया है. उन्हें पद्मश्री से भी नवाज़ा जा चुका है.

मेरी सहेली (Meri Saheli) ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि.

महान रचनाकार डॉक्टर धर्मवीर भारती को जन्मदिन पर नमन! (Happy birthday Dr Dharamvir Bharati)

Dharamvir Bharati

Dharamvir Bharati

डॉक्टर धर्मवीर भारती (dr dharamvir bharati) का जन्म 25 दिसंबर 1926 को इलाहाबाद के अतर सुइया मोहल्ले में हुआ था. उनके पिता का नाम श्री चिरंजीव लाल वर्मा और माँ का श्रीमती चंदादेवी था.

डॉक्टर भारती सामाजिक विचारक थे और प्रख्यात साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग के प्रधान संपादक भी थे.

डॉ धर्मवीर भारती को १९७२ में पद्मश्री से सम्मानित किया गया. उनका उपन्यास गुनाहों का देवता बेहतरीन रचना मानी जाती है. इसके अलावा सूरज का सातवां घोड़ा भी काफ़ी चर्चा में रही  जिस पर श्याम बेनेगल ने फिल्म बनायी,

अंधा युग भी उनका प्रसिद्ध नाटक है.

४ सितंबर १९९७ को वो दुनिया को अलविदा कह गए.

उनके जन्मदिन पर हम उन्हें नमन करते हैं!

हैप्पी बर्थ डे किशोर दा…देखिए उनके दिल को छू लेने वाले गाने (Happy Birthday Kishore Da … see their touching songs)

touching songs
touching songs
किशोर कुमार का आज जन्मदिन है. 4 अगस्त १९२९ को मध्य प्रदेश के खंडवा गाँव में जन्में किशोर दा एक बेहतरीन गायक, ऐक्टर, राइटर और म्यूज़िक डायरेक्टर थे. हमेशा मस्ती के मूड में रहने वाले किशोर दा सही मायनों में एक कंप्लीट एंटरटेनर थे. किशोर दा भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें हैं, उनकी आवाज़ और उनके गाये अनगिनत मस्ती भरे और दर्द भरे गाने हमारे साथ ज़रूर हैं.

फिल्म- मि. एक्स इन बॉम्बे (1964)

 

फिल्म- मेरे जीवन साथी (1972)

 

फिल्म- नौ दो ग्यारह (1957)

 

फिल्म- ज़हरीला इंसान (1974)

 

फिल्म- चोर मचाए शोर (1974)