ख़ुद पर भरोसा रखें (Trust YourSelf)

क्या आपके अंदर अचानक निराशा जन्म लेने लगी है? आपका आत्मविश्‍वास कम होता जा रहा है? आपको मन चाही सफलता नहीं मिल पा रही है? क्या आप अपने आपको लूज़र मानने लगे हैं? अगर ऐसा है, तो आप लो सेल्फइस्टीम के शिकार हो रहे हैं. यह एक मानसिक बीमारी है. यह धीरे-धीरे आपका आत्मविश्‍वास डिगाकर आपके अंदर इनफिरिऑरिटी कॉम्प्लेक्स पैदा कर सकती है. इसलिए समय रहते इस स्टेट ऑफ माइंड से निकलने की कोशिश करें. यक़ीन मानें, आप चाहेंगे तो इससे ज़रूर निकल जाएंगे.

इंसान की सेहत उसकी सबसे बडी दौलत है, संतोष उसका सबसे बड़ा ख़ज़ाना है और आत्मविश्‍वास उसका सबसे अच्छा दोस्त है. लिहाज़ा, इन तीनों को कभी अपने से दूर मत होने दीजिए. बस शांत मन से कोशिश जारी रखिए. इतना ही नहीं, आप अपनी अब तक की गई तमाम कोशिशों का मूल्यांकन भी करिए और यह पता लगाइए कि किन-किन वजहों से आप आशातीत सफलता हासिल करने से वंचित रह गए. एक बात शत-प्रतिशत सच है कि कहीं न कहीं आपसे चूक हुई है, इसलिए आप अपने समकालीन लोगों से पिछड़ गए. उस चूक को स्वीकार करके उसे दूर कीजिए. हर भूल को सुधारने की कोशिश कीजिए. भूल को सोर्स ऑफ इंसपिरेशन बनाइए न कि बाधा. यक़ीन मानिए, अगर आप अपना आत्मविश्‍वास नहीं खोएंगे तो सफलता आपके चरण चूमेगी.
यह सर्वविदित हो चुका है कि असफलता एक गंभीर बीमारी की तरह है. इस बीमारी से जो भी एक बार ग्रसित हुआ, वह जल्दी उबर नहीं पाता. इसीलिए पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम भी असफलता को एक बीमारी मानते थे और कहा करते थे कि आत्मविश्‍वास और कठिन परिश्रम असफलता रूपी इस बीमारी को मारने के लिए सर्वोत्तम औषधि है. उनके कहने का मतलब है कि अगर आपको अपने ऊपर भरोसा है, यानी आप आत्मविश्‍वास से भरे हैं, तो आप कठिन परिश्रम करने से बिल्कुल पीछे नहीं हटेंगे.जब आप कठिन परिश्रम करेंगे, तो ज़ाहिर है आप सफल होंगे.

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कह सकते हैं कि आत्मविश्‍वास जीवन का आधार है. अगर इसमें कमी हो रही है, तो इसका मतलब है कि आपके जीवन का आधार ही हिल गया है. किसी में कितना ही बड़ा गुण क्यों ना हो, अगर उसका आत्मविश्वास एक बार डिग गया तो वह गुमनामी की ज़िंदगी जीने को मजबूर हो जाता है. जीवन में सफलता पाने के लिए हर कोई हर संभव कोशिश करता रहता है. जो जिस क्षेत्र है उसी में प्रयासरत है, जैसे- छात्र अच्छा करियर बनाने के लिए पढ़ाई में मेहनत करता है और अच्छे नंबर से पास होकर एक अच्छी नौकरी का अपना सपना पूरा करता है. इसी तरह खिलाङी खेल में बेस्ट प्रर्दशन करके सफलता हासिल करता है. ऐसे ही हर कोई अपने-अपने क्षेत्रों में अपना बेस्ट देने का प्रयास करता है.

मनचाही सफलता बहुत कम लोगों को मिलती है या कह सकते हैं कि मन के मुताबिक़ कामयाबी उन्हीं लोगों को मिलती है, जो स्ट्रगल के समय अपना आत्मविश्‍वास नहीं खोते. मुसीबत और बाधाएं हर किसी के जीवन में आती हैं, जिससे उत्साह में कमी आ ही जाती है. इस तरह की परिस्थितियों में आत्मविश्‍वास उत्साह को बढ़ाता है और उसका परिणाम कामयाबी के रूप में मिलता है. स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं, ”जिसमें आत्मविश्‍वास नही उसमें अन्य चीजों के प्रति कैसे विश्‍वास हो सकता है? आप कभी कमज़ोर न पड़ें. अपने आपको शक्तिशाली बनाओ. आपके भीतर अनंत शक्ति है, जो आपके हर काम को आसान कर देगी. बस, आपको अपना आत्मविश्‍वास बनाए रखना है.”
जीवन में किसी भी समस्या का हल न हो, ऐसा बिल्कुल नहीं है. जीवन की कई कमियां तो सकारात्मक विचारों से ही पूरी हो जाती हैं. दरअसल, आत्मविश्‍वास की कमी तब होती हैं, जब हम किसी बात से डरते हैं या ये मानने लगते हैं कि वह हमारे अंदर नहीं है. इन दोनों ही वजहों से उबरना आपके अपने हाथ में है. इसीलिए कई मनोचिकित्सक कहते हैं कि आत्मविश्‍वास बढ़ाने के लिए सबसे पहले ख़ुद पर यक़ीन करना सीखें. अपनी कमी को पूरा करने की कोशिश करें. अगर आप बहुत ज़्यादा सफल न हों तो भी बिल्कुल न डरे. यह प्रकृति का ही नियम है कि हर आदमी सभी कार्यों के लिए नहीं बना होता. इसलिए आपने कोशिश की, यही सबसे बड़ी जीत है.

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Priyanka Singh :
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