जब डॉक्टर दें बेड रेस्ट की सलाह(When doctor suggests bed rest)

आराम करना भला किसे पसंद नहीं. रोज़ के कामकाज में लोग इतने व्यस्त होते हैं कि अगर आराम करने का मौक़ा मिल जाए, तो यक़ीनन कोई भी ये मौक़ा छोड़ना नहीं चाहेगा. ख़ैर, ये तो हुई मन की बात, लेकिन अगर डॉक्टर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को बेड रेस्ट करने की सलाह दे, तो कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी हो जाता है.

क्या है कंप्लीट बेड रेस्ट?

यूं तो बेड रेस्ट के लिए अस्पताल से बेहतर कोई जगह नहीं होती. अस्पताल में मरीज़ के स्वास्थ्य के मुताबिक़ सभी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं. लेकिन कई बार पैसों की वजह से, तो कई बार लंबी बीमारी के चलते अस्पताल में मरीज़ को रखना संभव नहीं हो पाता.
– डॉक्टर बेड रेस्ट की सलाह तभी देते हैं, जब मरीज़ के चलने-फिरने से उसकी तबीयत पर असर हो.
– कई बार ऑपरेशन, किसी बीमारी या कमज़ोरी की वजह से डॉक्टर्स कंप्लीट बेड रेस्ट की सलाह देते हैं.
– बेड रेस्ट की सीमा डॉक्टर्स ही निर्धारित करते हैं.
– बेड रेस्ट कुछ हफ़्तों, महीनों या फिर कुछ सालों का हो सकता है. यह पूरी तरह से मरीज़ की कंडिशन पर निर्भर करता है.
– बेड रेस्ट के दौरान डॉक्टर्स द्वारा दी गई हिदायतों का पालन अवश्य करें.

कैसा हो पलंग?

– पूरे दिन चूंकि मरीज़ को पलंग पर ही रहना होता है, इसलिए पलंग का आरामदायक होना ज़रूरी है.
– बेड ऐसा हो जिसे मरीज़ की सुविधा के मुताबिक़ एडजेस्ट किया जा सके.
– मरीज़ के लिए इस तरह के पलंग मार्केट में मिलते भी हैं.
– अगर पलंग की क़ीमत ज़्यादा हो या इस तरह की पलंग न मिले, तो इसे किराए पर भी लिया जा सकता है.
– जो मरीज़ कोमा में हैं, उनके लिए वाटर बेड सही विकल्प है. कोमा के मरीज़ लेटे ही रहते हैं, ऐसे में लेटे-लेटे उनकी पीठ पर घाव होने लगता है. वॉटर बेड नर्म होता है, जिससे घाव होने का ख़तरा कम हो जाता है.
– पलंग पर चादर के नीचे प्लास्टिक की एक शीट भी ज़रूर बिछाएं.

कैसा हो मरीज़ का कमरा?

– मरीज़ का कमरा साफ़-सुथरा होना चाहिए. नियमित रूप से कमरे की साफ़-सफ़ाई होनी चाहिए.
– कमरा ऐसा हो जहां पर्याप्त रोशनी और हवा आती हो.
– कमरे में मरीज़ का पलंग ऐसी जगह लगाएं, जहां से धूप पलंग पर पड़े. इससे मरीज़ को विटामिन डी तो मिलेगा ही, कमरे के बैक्टीरिया भी ख़त्म हो जाएंगे.
– कमरे की खिड़कियों पर पर्दे लगे हों, ताकि जब मरीज़ का सोने का मन करे तब रोशनी से उसकी नींद न खराब हो.
– कमरे में टीवी भी अवश्य लगाएं. बेड पर बैठे-बैठे या लेटकर मरीज़ बोर हो जाता है. ऐसे में मन बहलाने के लिए और व़क्त बिताने के लिए टीवी या रेडियो का कमरे में रहना ज़रूरी है.
– कमरे में मैगज़ीन, मरीज़ की पसंदीदा क़िताबें या फिर समाचार पत्र रखने के लिए भी एक जगह बनाएं.
– मरीज़ के पलंग के पास एक छोटा-सा टेबल भी होना चाहिए. टेबल पर मरीज़ की दवाइयां, पानी की बॉटल, ग्लास आदि रखें.
– कमरे में ताज़े फूलों का गुलदस्ता अवश्य रखें. ताज़े फूलों को देखकर मरीज़ भी फ्रेश फील करेगा.

डायट का रखें ख़्याल

– मरीज़ का आहार डॉक्टर के निर्देश के अनुसार ही होना चाहिए.
– समय पर खाना और दवाई लेना बेहद ज़रूरी है.
– कई मरीज़ों को लिक्विड आहार, जैसे- जूस, दाल आदि पाइप या नली के ज़रिए देना होता है. अगर आप मरीज़ को नली के माध्यम से खाना खिलाने में सहज महसूस न कर रहे हों, तो किसी नर्स या कंपाउंडर की व्यवस्था करें.
– मरीज़ का आहार ऐसा हो, जो आसानी से पच जाए. डॉक्टर के बताए अनुसार फल, जूस आदि दें.

माहौल पॉज़िटिव रखें

– बेड रेस्ट करनेवाला मरीज़ काफ़ी परेशान और चिढ़चिढ़ा हो जाता है. ऐसे में उससे बीमारी को लेकर या कोई और निगेटिव बातें न करें.
– मरीज़ का मनोबल बढ़ानेवाली बातें करें.
– मरीज़ के दोस्तों को घर पर बुलाएं. दोस्तों के साथ हंसी-मज़ाक़ करने से और व़क्त बिताने से मरीज़ पॉज़िटिव महसूस करने लगता है.

ध्यान देनेवाली ज़रूरी बातें

– मरीज़ को अगर कंप्लीट बेड रेस्ट करने के लिए कहा गया है या मरीज़ कोमा में है, तो ऐसे में मरीज़ के शरीर की सफ़ाई का ध्यान आपको ही रखना पड़ेगा.
– मुलायम कपड़े को गुनगुने पानी में भिगोकर मरीज़ के शरीर को पोंछें. फिर सूखे तौलिए से पूरे शरीर को अच्छी तरह से पोंछें.
– रोज़ाना मरीज़ के तौलिए और बेड शीट को गर्म पानी से धोएं. हो सके तो पानी में एंटीसेप्टिक लिक्विड की दो-चार बूंदें भी डाल दें.
– शरीर की सफ़ाई के व़क्त ध्यान दें कि कहीं लेटे रहने की वजह से मरीज़ के शरीर पर कोई घाव तो नहीं बन रहा. अगर घाव नज़र आए तो डॉक्टर से संपर्क करें.

– प्रियंका सिंह

Meri Saheli Team :
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