मन की बात लिखने से दूर होता है तनाव (Writing About Your Emotions Can Help Reduce Stress)

मन (Mind) की बात लिखने (Writing) से दूर होता है तनाव (Tension) और ये बात बिल्कुल सही है. मन की बात कहने के लिए जब आसपास कोई न हो, तो काग़ज़-कलम को अपना साथी बना लीजिए. ख़ुशी, ग़म, उदासी... अपने मन के हर भाव को काग़ज़ पर उतार दीजिए. मन की बात काग़ज़ पर लिख देने से मन हल्का हो जाता है. डायरी लिखें सपनों, आकांक्षाओं, उम्मीदों और विचारों का डेरा है मन... और जिस मन पर इतना बोझ हो, उसे कभी-कभी हल्का करना भी ज़रूरी है. मन का बोझ हल्का करने का सबसे आसान तरीक़ा है किसी से बात करना, लेकिन जब आपके पास बात करने के लिए कोई न हो या जो व्यक्ति आपके सामने है उससे आप अपने दिल के राज़ साझा नहीं कर सकते, तो सबसे बेहतर विकल्प है डायरी लिखना. डायरी के पन्नों पर अपने मन के विचार चाहे वो अच्छे हों या बुरे लिख दें. इससे न स़िर्फ आपके दिल का बोझ उतर जाएगा, बल्कि आप बाद में अपने लिखे हुए शब्दों पर विचार करके सही-ग़लत का ़फैसला भी कर सकते हैं. दूसरों के सामने कुछ कहते समय जहां आपको इस बात का ख़्याल रखना पड़ता है कि कहीं वो आपकी बातों का ग़लत मतलब न निकाल ले, वहीं मन की बात लिखते समय ऐसा कोई डर नहीं रहता, जो जी में आए आप वो सब लिख सकते हैं. लिखी हुई भावनाओं को आप फिर से जी सकते हैं जब भी आप जीवन में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल करें, तो उस पल की ख़ुशी…

मन (Mind) की बात लिखने (Writing) से दूर होता है तनाव (Tension) और ये बात बिल्कुल सही है. मन की बात कहने के लिए जब आसपास कोई न हो, तो काग़ज़-कलम को अपना साथी बना लीजिए. ख़ुशी, ग़म, उदासी… अपने मन के हर भाव को काग़ज़ पर उतार दीजिए. मन की बात काग़ज़ पर लिख देने से मन हल्का हो जाता है.

डायरी लिखें
सपनों, आकांक्षाओं, उम्मीदों और विचारों का डेरा है मन… और जिस मन पर इतना बोझ हो, उसे कभी-कभी हल्का करना भी ज़रूरी है. मन का बोझ हल्का करने का सबसे आसान तरीक़ा है किसी से बात करना, लेकिन जब आपके पास बात करने के लिए कोई न हो या जो व्यक्ति आपके सामने है उससे आप अपने दिल के राज़ साझा नहीं कर सकते, तो सबसे बेहतर विकल्प है डायरी लिखना. डायरी के पन्नों पर अपने मन के विचार चाहे वो अच्छे हों या बुरे लिख दें. इससे न स़िर्फ आपके दिल का बोझ उतर जाएगा, बल्कि आप बाद में अपने लिखे हुए शब्दों पर विचार करके सही-ग़लत का ़फैसला भी कर सकते हैं. दूसरों के सामने कुछ कहते समय जहां आपको इस बात का ख़्याल रखना पड़ता है कि कहीं वो आपकी बातों का ग़लत मतलब न निकाल ले, वहीं मन की बात लिखते समय ऐसा कोई डर नहीं रहता, जो जी में आए आप वो सब लिख सकते हैं.

लिखी हुई भावनाओं को आप फिर से जी सकते हैं
जब भी आप जीवन में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल करें, तो उस पल की ख़ुशी को डायरी के पन्नों पर शब्दों में बयां कर दें. कुछ समय बाद जब आप उन पन्नों को पलटकर देखेंगे, तो उस पल को फिर से जी सकेंगे, अपनी उपलब्धि पर एक बार फिर नाज़ कर सकेंगे. ज़िंदगी की कुछ ऐसी बातें या पल जिन्हें आप जीवनभर याद रखना चाहते हैं, उन्हें संजोए रखने का सबसे अच्छा तरीक़ा है उन्हें लिख लेना.

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मन की बात लिख देने से मन हल्का हो जाता है
किसी बात पर आपका पड़ोसी से झगड़ा हो जाए या ऑफिस में कलीग आपसे उलझ जाए, उस समय संकोचवश आप उससे कुछ नहीं कहते, लेकिन मन ही मन उसे भला-बुरा कहते रहते हैं. ऐसी स्थिति में अपने मन की भड़ास काग़ज़ पर उतार दें. इससे जहां आपका ग़ुस्सा शांत हो जाएगा, वहीं आप उस बात पर फिर से विचार कर पाएंगे कि आख़िर झगड़ा हुआ क्यों? पुनर्विचार से कई बार एहसास होता है कि बेकार की बातों को तूल देकर हम अपना मूड और रिश्ता दोनों ख़राब कर रहे हैं. इस तरह मंथन करने से हमारे मन से नफ़रत की भावना निकल जाती है और मन हल्का हो जाता है.

मन की बात लिखने से बनी रहती है सेहत
किसी के प्रति घृणा और ग़ुस्से के भाव को बहुत दिनों तक मन में दबाए रखने से आप तनाव, अवसाद आदि के शिकार हो सकते हैं. इन भावों को आप दूसरों के सामने व्यक्त भी नहीं कर सकते. ऐसे में इन भावों को लिख देने से तनाव दूर होता है और मन शांत हो जाता है, जिससे सेहत भी बनी रहती है.

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Published by
Kamla Badoni

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