हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं! (How To Overcome Failure)

हार कर जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं! शाहरुख़ ख़ान की फिल्म बाज़ीगर का ये डायलॉग यूं ही मशहूर नहीं हो गया. इस डायलॉग में जीवन का सार छुपा है. जब हम हार से हारते नहीं, लगातार जीतने की कोशिश करते रहते हैं, तो हमारी जीत निश्‍चित होती है. हम तब तक नहीं हारते, जब तक हम हार नहीं मान लेते.   सुपरस्टार भी हारते हैं सुपरस्टार अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ ख़ान से लेकर उद्योग जगत के बादशाह टाटा और बिड़ला तक सबने एक ही प्रयास में सफलता का स्वाद नहीं चखा, बल्कि हर बार हारने पर दुगुने जोश से आगे बढ़कर आज वो क़ामयाबी की बुलंदियों पर हैं. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन बार-बार चुनाव हारते रहे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आख़िरकार 52 वर्ष की उम्र में राष्ट्रपति का पद हासिल किया. कहने का अर्थ है कि आपकी हार में जीत का रास्ता छुपा होता है. ज़रूरत है तो बस उसे पहचानने की. हार को जीत में बदलें परिक्षा या प्यार में असफल हो जाने, नौकरी न मिलने और ऑफिस में कोई प्रॉजेक्ट हाथ से निकल जाने पर आप मायूस हो जाते हैं, लेकिन क्या मायूस होने से आपकी हार जीत में बदल सकती है? नहीं, क्योंकि कमान से निकला तीर और जुबान से निकले शब्द की ही तरह बीता व़क़्त भी लौटकर नहीं आता. आप अपने बीते कल को तो नहीं बदल सकते, लेकिन हार में छुपी जीते के अवसर को पहचानकर आप आने वाले कल को ज़रूर संवार सकते हैं. यह भी पढ़ें: इसलिए सिखाएं बच्चों…

हार कर जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं! शाहरुख़ ख़ान की फिल्म बाज़ीगर का ये डायलॉग यूं ही मशहूर नहीं हो गया. इस डायलॉग में जीवन का सार छुपा है. जब हम हार से हारते नहीं, लगातार जीतने की कोशिश करते रहते हैं, तो हमारी जीत निश्‍चित होती है. हम तब तक नहीं हारते, जब तक हम हार नहीं मान लेते.

 

सुपरस्टार भी हारते हैं
सुपरस्टार अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ ख़ान से लेकर उद्योग जगत के बादशाह टाटा और बिड़ला तक सबने एक ही प्रयास में सफलता का स्वाद नहीं चखा, बल्कि हर बार हारने पर दुगुने जोश से आगे बढ़कर आज वो क़ामयाबी की बुलंदियों पर हैं. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन बार-बार चुनाव हारते रहे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आख़िरकार 52 वर्ष की उम्र में राष्ट्रपति का पद हासिल किया. कहने का अर्थ है कि आपकी हार में जीत का रास्ता छुपा होता है. ज़रूरत है तो बस उसे पहचानने की.

हार को जीत में बदलें
परिक्षा या प्यार में असफल हो जाने, नौकरी न मिलने और ऑफिस में कोई प्रॉजेक्ट हाथ से निकल जाने पर आप मायूस हो जाते हैं, लेकिन क्या मायूस होने से आपकी हार जीत में बदल सकती है? नहीं, क्योंकि कमान से निकला तीर और जुबान से निकले शब्द की ही तरह बीता व़क़्त भी लौटकर नहीं आता. आप अपने बीते कल को तो नहीं बदल सकते, लेकिन हार में छुपी जीते के अवसर को पहचानकर आप आने वाले कल को ज़रूर संवार सकते हैं.

यह भी पढ़ें: इसलिए सिखाएं बच्चों को हेल्दी कॉम्पटीशन

 

क्योंकि हारना ज़रूरी है
अगर आपको पता ही न हो कि कड़वाहट क्या होती है तो क्या आप कभी मिठास का असली म़जा ले सकते हैं? नहीं न, उसी तरह जब तक आप असफलता का स्वाद नहीं चख लेते, तब तक आपको सफलता के असली मायने समझ नहीं आएंगे. जिस तरह दुख के बाद मिली ख़ुशी अनमोल होती है, उसी तरह हार के बाद मिली जीत का कोई मोल नहीं होता. बार-बार प्रयास करके हासिल की गई चीज़ की अहमियत एक बार प्रयास करने पर मिली चीज़ से कहीं ़ज़्यादा होती है. हार के रूप में मिली ठोकरें हमें मज़बूत बनाती हैं, इसलिए इसे सकारात्मक रूप में लें.

हार से लें सबक
हार के आगे नतमस्तक होने की बजाय उसे एक सीख की तरह लें. एक बार यह जानने की कोशिश करें कि आख़िर आप हारे क्यों? क्या आपके प्रयासों में कहीं कोई कमी रह गई थी? अगर हां, तो अगली बार उसे दुुगुनी मेहनत से उन्हें सुधारने की कोशिश करें. और अगर नहीं, तो भी उदास न हों, बल्कि एक नए जोश से फिर आगे बढ़ने की कोशिश करें. हो सकता है, इससे बेहतर मौक़ा आपका इंतज़ार कर रहा हो. एक बात हमेशा याद रखें कि गिरते वही हैं जो आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं.

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