गाय के गोबर को क्यों पवित्र माना जाता है और क्यों श्रावण में शिवलिंग पर दूध चढ़ाने की परंपरा है, जानें इन 7 हिंदू मान्यताओं के पीछे छिपे विज्ञान व स्वास्थ्य के कारणों को! (7 Scientific Reasons Behind Popular Hindu Traditions)

महामृत्युंजय जाप का विज्ञान इसमें अक्षरों का संयोजन इस प्रकार से है कि इसके नियमित जाप से सूर्य व चंद्र नाड़ियों में कंपन होता है और शरीर केसातों चक्रों में ऊर्जा का संचार होता है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है और शरीर निरोगी रहता है.  स्फटिक माला का स्वास्थ्य लाभ इसकी प्रकृति ठंडी होती है, इसलिए यह बुखार में बेहद लाभदायक है, क्योंकि यह शरीर की गर्मी यानी बढ़े हुए तापमानको नीचे लाने में कारगर है. यदि किसी को बुखार है, तो स्फटिक की माला को धोकर व्यक्ति के नाभि स्थान पर रख दें. इससे काफ़ी लाभ मिलेगा. इसी तरह से यदि कोई यह माला धारण करता है, तो उसे सिरदर्द की समस्या नहीं होता वउसका मन शांत रहता है.  श्रावण में शिवलिंग पर दूध चढ़ाने का वैज्ञानिक कारण...इस माह दूध व उससे बने पदार्थ विष के समान होते हैं, क्योंकि ऋतु परिवर्तन से ये सब वात को बढ़ाते हैं.  शिवजी विषों को पीकर हमारी रक्षा करते हैं, यही वजह है कि आयुर्वेद में भी श्रावण में शिवजी को दूध चढ़ाने का प्रावधान है, क्योंकि वह दूध हेल्दी नहीं होता. इस दौरान गाय-भैंस भी जो चारा खाती हैं, उसके ज़रिए कुछ कीटाणु शरीर में चले जाते हैं, जिससे उनका दूध दूषित हो जाता है.  शास्त्रों में ग़ुस्से से दूर रहने पर इतना ज़ोर क्यों दिया जाता है? दरअसल, ग़ुस्सा मानव का नेचुरल इमोशन है और ग़ुस्साआना बुरी बात नहीं है, लेकिन उसका बेक़ाबू हो जाना ज़रूर बुरा है. अधिक ग़ुस्सा करने से हमारे नर्वस सिस्टम पर बुराअसर पड़ता है, जिससे हार्ट डिसीज़, ब्लड प्रेशर जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए अगर तंदुरुस्त रहना है तो ग़ुस्सेपर अंकुश लगाना होगा. क्या आप जानते नवरात्रि में उपवास क्यों रखे जाते हैं? इसका वैज्ञानिक पहलू यह है कि उस दौरान मौसम बदलता है औरइस वजह से हल्का-पाचक भोजन करने पर ज़ोर दिया जाता है, ताकि पाचन क्रिया ठीक से रहे और शरीर ऊर्जावान बनारहे. यही वजह है कि वर्ष में दो बार मौसम परिवर्तन के दौरान ही नवरात्रि आती है.  बच्चों के स्वास्थ्य में भी लाभदायक है ॐ का उच्चारण! ॐ को सबसे शक्तिशाली मंत्र माना गया है. इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि आपका बच्चा भी इसका आसानी सेजाप कर सकता है. ॐ का जाप बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद लाभदायक है और यह उसे सकारात्मक ऊर्जा सेभर देगा.  गाय के गोबर को क्यों पवित्र माना जाता है? पूजा व यज्ञ में गोबर व उसके उपलों का बेहद महत्व है, क्योंकि गोबर में हैजे य टीबी के कीटाणुओं को ख़त्म करने कीक्षमता है. यही वजह है कि गोबर में लक्ष्मी का वास भी माना जाता है.  यह भी पढ़ें: कृष्ण की माखनचोरी…

लघुकथा- किनारों का गठबंधन… (Short Story- Kinaron Ka Gathbandhan)

"कितने मतभेद हैं तुम दोनों के बीच, किसी बात में एकमत नहीं हो. आश्चर्य है तब भी इतना सुखी दाम्पत्य…

अकबर-बीरबल की कहानी: जादुई गधा! (Akbar-Birbal Story: The Magical Donkey)

बादशाह अकबर ने अपनी बेगम साहिबा के जन्मदिन पर उन्हें एक बेशकीमती हार दिया. ये हार उन्होंने ख़ास कारीगरों से…

मदर्स डे पर विशेष.. कहानी- सर्वे (Short Story- Survey)

"तुम्हें पता है कार्तिक, जनतंत्र का चौथा महत्वपूर्ण स्तंभ होता है- प्रेस यानी समाचारपत्र. आधे से ज़्यादा देश किसी भी…

कविता- मैं फिर लौट आऊंगी… (Poem- Main Phir Laut Aaungi…)

मैं फिर लौट आऊंगी धूप के उजास सी कि करूंगी ढेरों मन भर बातें उस जाती हुई ओस से भी…

कहानी- टाइगर सिंह का न्याय (Kids Story- Tiger Sinah Ka Nyay)

‘‘आप ठीक कह रहे हैं. इन दोनों को सज़ा ज़रूर मिलनी चाहिए.’’ टाइगर सिंह ने सिर हिलाया और आंख बंद…

कहानी- काकी का टिफिन (Short Story- Kaki Ka Tifin)

विभा काकी से आते-जाते ख़ूब बातें करती. काकी भी कभी उसके पास आकर बैठ जाया करतीं. विभा के दिमाग़ में…

कृष्ण की माखनचोरी हो, गर्भावस्था में मंत्रों का प्रभाव या पीपल के पेड़ की पूजा… जानें ऐसी 10 मान्यताओं के पीछे क्या हैं हेल्थ व विज्ञान से जुड़े कारण! (10 Amazing Scientific Reasons Behind Hindu Traditions)

खड़ाऊ पहनें और स्वस्थ रहें... खड़ाऊ हमारी संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन इसके हेल्थ बेनीफिट्स भी हैं. खड़ाऊ से रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है, पैरों केएक्युप्रेशर पॉइंट्स पर प्रेशर पड़ता है, जिससे रक्त संचार संतुलित रहता है. साथ ही यह पैरों की मांसपेशियों को भीरिलैक्स करता है.  क्या आप जानते हैं पैरों में बिछिया पहनने से बढ़ती है फर्टिलिटी यह नसों व प्रेशर पॉइंट्स को दबाती है, जिससे यूटेरस, ब्लैडर व आंतों में रक्त प्रवाह तेज़ होता है. इससे मासिक धर्म भीनियमित होता है और प्रजनन क्षमता भी बढ़ती है.  एक गोत्र में विवाह न करने के पीछे छिपा है सेपरेशन ऑफ जींस का विज्ञान! हिंदू धर्म में एक गोत्र में शादी करना वर्जित है, ताकि जींस विभाजित रहें. जेनेटिक व कई गंभीर रोगों से बचना है, तो साइंसकहता है सेपरेशन ऑफ जींस ज़रूरी है. यही वजह है कि हिंदू धर्म में नज़दीकी रिश्तेदारों में शादी नहीं की जाती, ताकिसेपरेशन ऑफ जींस का सिद्धांत बना रहे.  गर्भावस्था के दौरान मंत्रों का प्रभाव... मंत्रों को सुनना गर्भस्थ शिशु के विकास में काफ़ी सहायक होता है. 23वें हफ़्ते के बाद गर्भस्थ शिशु कुछ आवाज़ों परप्रतिक्रिया भी करना शुरू कर देते हैं. ऐसे में मंत्रों को सुनने से व भक्तिमय वंदना से शिशु के मस्तिष्क का विकास तेज़ी सेहोता है.  कानों में छेद करवाने से बौद्धिक क्षमता व बोलने की शक्ति का होता है विकास... हिंदू धर्म में लड़कियों के ही नहीं, लड़कों के भी कानों को छिदवाने का रिवाज़ था. इससे कानों से होकर मस्तिष्क तकजानेवाले नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है, जिससे सोचने की शक्ति व बोलने की क्षमता बेहतर होती है.  ज़मीन पर बैठकर भोजन करना होता है स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद पालथी मारकर बैठना एक तरह का योगासन माना जाता है, जिससे मस्तिष्क शांत व पाचन क्रिया बेहतर होती है.  भोजन से पहले तीखा, अंत में मीठा क्यों? धार्मिक अनुष्ठानों में भोजन से पहले तीखा और अंत में मीठा खाने की परंपरा है. इससे पाचन तंत्र ठीक से काम करता है. अंत में मीठे से पेट में जलन नहीं होती और एसिड का असर कम होता है.  चम्मच की जगह हाथों से भोजन करना है बेहद फ़ायदेमंद हाथों की उंगलियां पंच तत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं. जब हम हाथों से भोजन ग्रहण करते हैं, तो ये तत्व सक्रिय हो जातेहैं और शरीर में इनका संतुलन बेहतर होता है. पीपल के पेड़ की पूजा का ये है वैज्ञानिक कारण... हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को पूजनीय व पवित्र माना जाता है, क्योंकि पीपल का पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन रिलीज़ करता हैऔर वातावरण शुद्ध करने में अहम् भूमिका निभाता है. अधिकतर पेड़ दिन में कार्बनडाइऑक्साइड लेकर ऑक्सीजनरिलीज़ करते हैं, लेकिन रात के समय यह प्रक्रिया उलट जाती है.…

कविता- सुनो दोस्तों!.. (Poetry- Suno Dosto!..)

सुनो दोस्तों, तुम घबराना मत.. जल्दी ही हम फिर मिलेंगे जो साथी छूट गए उनकी बातें याद करेंगे कभी हंस…

लघुकथा- अपनी जिंदगी… (Short Story- Apni Zindagi…)

जीवन का अधिकांश हिस्सा दूसरों की मर्ज़ी से जीते ही निकल गया, पहले पिता, फिर भाई और अब पति. इसके…

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