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मिर्ज़ा ग़ालिब… एक ख़्याल! गूगल ने भी बनाया डूडल (Remembering Mirza Ghalib)

...चंद तस्वीर-ऐ-बुतां, चंद हसीनों के खतूत बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला मिर्ज़ा ग़ालिब एक ऐसा नाम है, जिनके लिए शायर या…

…चंद तस्वीर-ऐ-बुतां, चंद हसीनों के खतूत बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला

  • मिर्ज़ा ग़ालिब एक ऐसा नाम है, जिनके लिए शायर या महान जैसे शब्द भी छोटे लगते हैं…
  • उनके 220 वें जन्मदिन पर हमारी तरफ से नमन
  • गूगल ने भी उनकी याद में ख़ास डूडल बनाया है.
  • उनका जन्म 27 दिसम्बर 1796 को आगरा में हुआ था और 15 फरवरी 1869 को वो दुनिया को अलविदा कह गए.
  • ग़ालिब मुग़ल काल के आख़िरी शासक बहादुर शाह ज़फ़र के दरबारी कवि भी रहे थे.
  • ग़ालिब को मुख्यतः उनकी उर्दू ग़ज़लों को लिए याद किया जाता है.
  • आप भी पढ़ें उनकी शायरी

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हम रहें यूँ तश्ना-ऐ-लब पैगाम के
खत लिखेंगे गरचे मतलब कुछ न हो
हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के
इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के

मैं नादान था जो वफ़ा को तलाश करता रहा ग़ालिब
यह न सोचा के एक दिन अपनी साँस भी बेवफा हो जाएगी

बे-वजह नहीं रोता इश्क़ में कोई ग़ालिब
जिसे खुद से बढ़ कर चाहो वो रूलाता ज़रूर है

तेरी दुआओं में असर हो तो मस्जिद को हिला के दिखा
नहीं तो दो घूँट पी और मस्जिद को हिलता देख

लफ़्ज़ों की तरतीब मुझे बांधनी नहीं आती “ग़ालिब”
हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है

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Published by
Geeta Sharma

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