Health

85+ डेली हेल्थ टिप आइडियाज़: इन छोटे-छोटे हेल्थ और लाइफ़स्टाइल टिप्स से होगा बड़ा फ़ायदा… (Health And Lifestyle Tips: 85+ Daily Health Tip Ideas)

हेल्दी रहना जितना चुनौतीपूर्ण लगता है, ये उतना है नहीं, क्योंकि हेल्दी और फिट रहने के लिए हम कुछ ज़्यादा…

वर्ल्ड हार्ट डे: भारतीय युवाओं में तेज़ी से बढ़ रहे हैं हार्ट फेलियर के मामले, जानें इसे कैसे मैनेज करें, ताकि आपका दिल सुरक्षित रहे! (World Heart Day: Managing The Rise Of Failure In India)

हार्ट फेलियर धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है. इसमें हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं. इसका मतलब यह नहीं है…

भारतीय युवाओं में तेज़ी से पैर पसार रहा है डिप्रेशन, समझें इसकी गंभीरता, क्योंकि यह जानलेवा भी हो सकता है! (Health Alert: Shocking! India leads The World In Teenage Depression)

क्या है डिप्रेशन- समझें इसकी गंभीरता को, क्योंकि यह जानलेवा भी हो सकता है! डिप्रेशन भले ही बेहद सामान्य सा शब्द लगता हो, क्योंकि इसे हम लगभग रोज़ाना ही सुनते कहते आए हैं और शायद यहीवजह है कि हम इसे बहुत हल्के में लेते हैं. लेकिन सावधान, डिप्रेशन एक गंभीर मानसिक समस्या है जो जानलेवा भी साबित हो सकती है.  ना जाने कितने सेलिब्रिटीज़ इसको लेकर बात भी कर चुके हैं और कुछ ने तो इसी के चलते अपना जीवन तक समाप्त करलिया. डिप्रेशन की गंभीरता को समझने के लिए यह सबसे पहले डिप्रेशन को समझना होगा. डिप्रेशन क्या है? यह एक मानसिक समस्या है, जिसमें व्यक्ति धीरे-धीरे निराशा की तरफ़ बढ़ने लगता है. रोज़मर्रा के क्रिया कलापों मेंउसकी दिलचस्पी कम होने लगती है. वो खुद में ही सिमटता जाता है, किसी से मिलने जुलने और यहां तक कि बात तककरने में उसे कोई रुचि नहीं रहती. खाने पीने व सोने की आदतों में बदलाव आने लगता है. अपने बारे में नकारात्मक ख़्यालआने लगते हैं. ऊर्जा कम हो जाती है. यदि समय रहते डिप्रेशन का इलाज नहीं किया गया तो यह व्यक्ति को आत्महत्याजैसा क़दम तक उठाने को मजबूर कर देता है. कारण विशेषज्ञ कहते हैं कि डिप्रेशन कई वजहों से हो सकता है, जिनमें शारीरिक, मानसिक और समाजिक कारण मुख्य हैं.  शारीरिक: गंभीर या लंबी बीमारी, हार्मोंस, आनुवंशिकता, दवाओं का सेवन, साइडइफेक्ट,   नशे की लत या दुर्घटना आदि. मानसिक: रिश्तों में तनाव, धोखा, भावनात्मक कारण, किसी अपने से अलगाव या मृत्यु आदि. समाजिक: नौकरी, आर्थिक तंगी, आस पास का वातावरण व लोग, मौसम में बदलाव, अप्रिय स्थितियाँ, तनाव आदि. इन कारणों से मस्तिष्क के काम करने के तरीक़े में बदलाव व सोचने समझने को क्षमता पर असर होता है. जिससे मस्तिष्कके कुछ न्यूरल सर्किट्स की कार्य प्रणाली में बदलाव आता है.  मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर्स की कमी के कारण डिप्रेशन होता है. न्यूरोट्रांसमीटर्स मस्तिष्क में पाए जानेवाले रसायन होते हैं, जो मस्तिष्क और शरीर के विभिन्न हिस्सों में सामंजस्य या तारतम्यता स्थापित करते हैं. इनकी कमी से व्यक्ति में डिप्रेशनके लक्षण नज़र आने लगते हैं. यह आनुवांशिक होता है इसलिए कुछ लोगों में अन्य लोगों के मुक़ाबले डिप्रेशन में जाने कीआशंका अधिक होती है. बेहद ख़तरनाक हो सकता है डिप्रेशन! आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत सहित विश्वभर में डिप्रेशन की समस्या तेज़ी से फैलती जा रही है. भारतदुनिया का सबसे डिप्रेस्ड यानी अवसादग्रस्त देश है, दूसरे नंबर पर चीन व तीसरे पर अमेरिका आता है. इस दिशा में WHO (डब्ल्यूएचओ) यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार,  भारत में 56,675,969 लोग डिप्रेशनके शिकार हैं, जो कि भारत की जनसंख्या का 4.5% है. इतना ही नहीं, डब्ल्यूएचओ के आंकड़े बताते हैं कि 36% भारतीयअपने जीवन के किसी न किसी हिस्से में डिप्रेशन का शिकार होते हैं. भारतीय युवाओं में भी डिप्रेशन तेज़ी से पैर पसार रहा है. बात रिसर्च की करें तो हर 4 में से 1 किशोर डिप्रेशन का शिकार…

माथे पर भस्म लगाना क्यों माना जाता है शुभ और रुद्राक्ष कैसे करता है ब्रेन व हार्ट को मज़बूत… ऐसी हिंदू मान्यताओं के पीछे क्या हैं हेल्थ और वैज्ञानिक कारण? (Science Behind Popular Hindu Traditions)

पूजनीय है गंगा, साथ ही औषधीय गुणों से भरपूर भी... गंगा नदी को हम मां मानते हैं, इसके पीछे का विज्ञान यह है कि गंगा जल औषधीय गुणों से भरपूर है. वैज्ञानिकों का कहनाहै कि गोमुख से निकलकर मैदानों में आने तक नदी कई प्राकृतिक स्थानों, वनस्पतियों से होकर गुज़रती है, जिससे उसकेपानी में बैक्टीरिया को मारने की शक्ति होती है.  स्वास्थ्य का ख़ज़ाना है बेलपत्र...  शिवजी की पूजा में बेलपत्र बेहद शुभ व उनके प्रिय माने जाते हैं, लेकिन बेलपत्र के हेल्थ बेनीफिट्स भी हैं- इसका काढ़ाबुखार व श्‍वास रोग में, हृदय को स्वस्थ रखने में कारगर है. मुंह में छाले होने पर इसके पत्ते को चबाएं. यह शरीर की गर्मी वपेट की बीमारियों को भी दूर करता है.  माथे भस्म लगाने के फ़ायदे यज्ञ के बाद भस्म वा विभूति को माथे पर लगाना शुभ माना जाता है. इसके वैज्ञानिक कारण हैं. आज्ञा चक्र पर भस्म लगानेसे शरीर के चक्र जागृत हो जाते हैं, जिससे निगेटिव एनर्जी अंदर नहीं आ पाती और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी बेहतरहोता है. भस्म शरीर में मौजूद अतिरिक्त नमी को सोख लेती है और आपको सर्दी से बचाती है.  रुद्राक्ष पहनने से ब्रेन-हार्ट होते हैं स्ट्रॉन्ग रुद्राक्ष की माला पहनने से न सिर्फ ब्रेन और हार्ट स्ट्रॉन्ग होते हैं, बल्कि ब्लड प्रेशर भी नॉर्मल बना रहता है, क्योंकि रुद्राक्ष मेंमेडिसिनल प्रॉपर्टीज़ होती हैं, इसी वजह से यह हिंदू धर्म में पूजनीय है. यह एंटैसिड और एंटी-इंफ्लेमेटरी भी है.  जादू की झप्पी होती है हेल्दी रिचर्स बताते हैं कि गले मिलने से हैप्पी व हेल्दी हार्मोंस रिलीज़ होते हैं. दरअसल गले मिलने से ऑक्सिटोसिन हार्मोंस कास्तर तुरंत बढ़ता है, जो अकेलापन, तनाव और ग़ुस्से जैसी नकारात्मक भावनाओं को ख़त्म करता है.  यह भी पढ़ें: कृष्ण की माखनचोरी हो, गर्भावस्था में मंत्रों…

वर्ल्ड मेडिटेशन डे 2021: मेडिटेशन से दूर होता है डिप्रेशन, क्योंकि ध्यान भावनाओं को संतुलित कर, बदलता है सोचने का तरीक़ा, महामारी के इस दौर में रोज़ करें मेडिटेशन! (World Meditation Day 2021: How Meditation Helps Fight Depression)

मेडिटेशन यानी ध्यान की वो अवस्था जहां सारा फोकस मन पर होता है. भीतर की ओर होता है. भीतरी शक्तियों व ऊर्जाको पहचानने व जगाने पर होता है. मेडिटेशन के बहुत से फ़ायदे हैं और चूँकि यह मन पे फोकस करता है तो ज़ाहिर हैडिप्रेशन जैसे रोग जो मन से ही जुड़े होते हैं उनसे निपटने में यह बेहद कारगर साबित हुआ है. ध्यान से कैसे दूर भागता है डिप्रेशन? मेडिटेशन किस तरह डिप्रेशन को कम कर सकता है इसके कई वैज्ञानिक आधार हैं. दरअसल ध्यानावस्था में मस्तिष्क अल्फा स्टेट में पहुंच जाता है, जिससे शरीर में हैप्पी हार्मोंस का रिसाव होता है, यही वजह है कि मेडिटेशन से स्ट्रेस वडिप्रेशन संबंधी तकलीफ़ों में भी राहत मिलती है.  मेडिटेशन करने पर शरीर में ऊर्जा का संचार होता है, क्योंकि मेडिटेशन शरीर के चक्रों को जागृत करता है, जिससे होर्मोन्समें संतुलन पैदा होता है और विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं. रिसर्च कहते हैं कि मेडिटेशन से ब्रेन में रक्त संचार और इम्यूनिटी बढ़ती है स्टडीज़ व कई तरह के शोधों से यह पता चला है कि मेडिटेशन से पैरासिम्पथेटिक नर्वस सिस्टम सुकून की अवस्थामें पहुंच जाता है, जिससे ब्रेन के उस हिस्से में एक्टीविटी बढ़ जाती है, जो फील गुड केमिकल्स व हार्मोंस रिलीज़करता है.   मेडिटेशन आपके सोचने का नज़रिया बदलकर अकेलेपन की भावना को दूर करता है जिससे नेगेटिविटी दूर होतीऔर डिप्रेशन से राहत मिलती है. रिसर्च कहते हैं कि मेडिटेशन कार्टिसॉल हार्मोन का स्तर घटता है, जिससे ब्रेन हैप्पी स्टेट में पहुंच जाता है. स्टडीज़ यह साबित कर चुकी हैं कि मेडिटेशन स्ट्रेस के कारण बने इंफ्लेमेटरी केमिकल्स को कम करता है. येकेमिकल्स मूड को प्रभावित करके डिप्रेशन पैदा करते हैं. ऐसे में मेडिटेशन के ज़रिए इन केमिकल्स को कम करकेडिप्रेशन को भी कम किया का सकता है. मेडिटेशन से मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ता है और शरीर ऑक्सीजन का इस्तेमाल बेहतर ढंग से कर पाता है.मेडिटेशन से सेल्स का निर्माण बेहतर होता है. स्टैमिना बढ़ता है और साथ ही इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होती है. इस तरहमेडिटेशन पॉज़िटिविटी बढ़ाता है डिप्रेशन के एहसास को दूर करता है. यही नहीं मेडिटेशन कर चुके लोगों ने भी अपने अनुभवों में यह बताया है कि मेडिटेशन सेल्फ डिस्ट्रक्शन से जुड़े विचारों और भावनाओं को दूर करता है और पॉज़िटिव विचारों को बढ़ाता है. मेडिटेशन चक्रों को जगाकर भावनाओं को संतुलित करता है. हमारे शरीर में मौजूद सात ऊर्जा चक्र शरीर के किसी ना किसी अंग और भावना से जुड़े होते हैं. ये चक्रों सुप्त अवस्था मेंरहते हैं तो इनकी ऊर्जा का हम इस्तेमाल नहीं कर पाते. ये तभी जागते हैं जब हम प्रयास करते हैं और उस प्रयास का रास्तामेडिटेशन से होकर ही गुज़रता है.  मेडिटेशन से इन चक्रों में वाइब्रेशन पैदा होता है जिससे ये चक्र जाग जाते हैं. इनके जागने से ऊर्जा पैदा होती है, ग्लैंड्सएक्टीव होते हैं, टॉकसिन्स दूर होते हैं, होर्मोन्स बैलेंस्ड होते हैं और भावनायें संतुलित व नियंत्रित रहती हैं. सकारात्मकभावनायें बढ़ती हैं. नकारात्मक और डिप्रेशन से जुड़ी भावनायें दूर होती हैं. सेल्फ अवेयरनेस बढ़ाकर, थिंकिंग प्रोसेस को बदलता है मेडिटेशन मेडिटेशन हमें भीतर से जागरुक करता और सेल्फ अवेयरनेस बढ़ाता है, जिससे हम अपने विचारों को कंट्रोल करसकते हैं. मेडिटेशन से हम अपने प्रति अच्छा महसूस कर पाते हैं, सही दिशा में सोच पाते हैं, क्योंकि मेडिटेशन हमारेथिंकिंग प्रोसेस को बदलता है. जिससे मेंटल हेल्थ बेहतर होती है. जब मेंटली हम मज़बूत होंगे तो डिप्रेशन दूर रहेगा. मेडिटेशन से ब्रेन में ब्लड फ्लो बेहतर होता है जिससे हानिकारक केमिकल्स घटते हैं.मेडिटेशन से नींद बेहतर होती है और हम सभी जानते हैं कि डिप्रेशन को दूर करने के लिए अच्छी और बेहतर नींदकितनी ज़रूरी है.मेडिटेशन आपके कॉन्फ़िडेंस को बूस्ट करता है, जिससे खुद पर विश्वास बढ़ने लगता है, शरीर में एनर्जी महसूस होनेलगती है और नकारात्मक भाव दूर होने लगते हैं. बढ़ा हुआ आत्मविश्वास ही डिप्रेशन को दूर करता है क्योंकिडिप्रेशन में सबसे ज़्यादा कमी आत्मविश्वास में आती है, जिससे एनर्जी लो होने लगती है. ऐसे में मेडिटेशन किसी वरदान से कम नहीं. - गुड्डु…

कृष्ण की माखनचोरी हो, गर्भावस्था में मंत्रों का प्रभाव या पीपल के पेड़ की पूजा… जानें ऐसी 10 मान्यताओं के पीछे क्या हैं हेल्थ व विज्ञान से जुड़े कारण! (10 Amazing Scientific Reasons Behind Hindu Traditions)

खड़ाऊ पहनें और स्वस्थ रहें... खड़ाऊ हमारी संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन इसके हेल्थ बेनीफिट्स भी हैं. खड़ाऊ से रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है, पैरों केएक्युप्रेशर पॉइंट्स पर प्रेशर पड़ता है, जिससे रक्त संचार संतुलित रहता है. साथ ही यह पैरों की मांसपेशियों को भीरिलैक्स करता है.  क्या आप जानते हैं पैरों में बिछिया पहनने से बढ़ती है फर्टिलिटी यह नसों व प्रेशर पॉइंट्स को दबाती है, जिससे यूटेरस, ब्लैडर व आंतों में रक्त प्रवाह तेज़ होता है. इससे मासिक धर्म भीनियमित होता है और प्रजनन क्षमता भी बढ़ती है.  एक गोत्र में विवाह न करने के पीछे छिपा है सेपरेशन ऑफ जींस का विज्ञान! हिंदू धर्म में एक गोत्र में शादी करना वर्जित है, ताकि जींस विभाजित रहें. जेनेटिक व कई गंभीर रोगों से बचना है, तो साइंसकहता है सेपरेशन ऑफ जींस ज़रूरी है. यही वजह है कि हिंदू धर्म में नज़दीकी रिश्तेदारों में शादी नहीं की जाती, ताकिसेपरेशन ऑफ जींस का सिद्धांत बना रहे.  गर्भावस्था के दौरान मंत्रों का प्रभाव... मंत्रों को सुनना गर्भस्थ शिशु के विकास में काफ़ी सहायक होता है. 23वें हफ़्ते के बाद गर्भस्थ शिशु कुछ आवाज़ों परप्रतिक्रिया भी करना शुरू कर देते हैं. ऐसे में मंत्रों को सुनने से व भक्तिमय वंदना से शिशु के मस्तिष्क का विकास तेज़ी सेहोता है.  कानों में छेद करवाने से बौद्धिक क्षमता व बोलने की शक्ति का होता है विकास... हिंदू धर्म में लड़कियों के ही नहीं, लड़कों के भी कानों को छिदवाने का रिवाज़ था. इससे कानों से होकर मस्तिष्क तकजानेवाले नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है, जिससे सोचने की शक्ति व बोलने की क्षमता बेहतर होती है.  ज़मीन पर बैठकर भोजन करना होता है स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद पालथी मारकर बैठना एक तरह का योगासन माना जाता है, जिससे मस्तिष्क शांत व पाचन क्रिया बेहतर होती है.  भोजन से पहले तीखा, अंत में मीठा क्यों? धार्मिक अनुष्ठानों में भोजन से पहले तीखा और अंत में मीठा खाने की परंपरा है. इससे पाचन तंत्र ठीक से काम करता है. अंत में मीठे से पेट में जलन नहीं होती और एसिड का असर कम होता है.  चम्मच की जगह हाथों से भोजन करना है बेहद फ़ायदेमंद हाथों की उंगलियां पंच तत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं. जब हम हाथों से भोजन ग्रहण करते हैं, तो ये तत्व सक्रिय हो जातेहैं और शरीर में इनका संतुलन बेहतर होता है. पीपल के पेड़ की पूजा का ये है वैज्ञानिक कारण... हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को पूजनीय व पवित्र माना जाता है, क्योंकि पीपल का पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन रिलीज़ करता हैऔर वातावरण शुद्ध करने में अहम् भूमिका निभाता है. अधिकतर पेड़ दिन में कार्बनडाइऑक्साइड लेकर ऑक्सीजनरिलीज़ करते हैं, लेकिन रात के समय यह प्रक्रिया उलट जाती है.…

पर्सनलाइज़्ड डायट प्लान व लाइफ़स्टाइल से जुड़े ये 6 तत्व रखेंगे आपके पेट और गट यानी आंतों को हमेशा हेल्दी! (6 Components For A Personalized Diet Plan To Achieve A Healthy Gut)

हमारा स्वास्थ्य काफ़ी हद तक पेट और आंतोंके स्वास्थ्य से संबंध रखता है, लेकिन आजकल हमारी लाइफ़स्टाइल और हमारा खानपान ऐसा हो चुका है कि पेट संबंधी कई तकलीफ़ें अब आम हो चुकी हैं, जैसे- गैस, एसिडिटी और पाचन संबंधी परेशनियां और जब ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं तो गंभीर रूप औरअन्य रोगों को हुई जन्म देती हैं, जैसे- फ़ैटी लिवर, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और जब इन समस्याओं का समय पर इलाज नहींहो पाता तो ये और गंभीर होकर डायबिटीज़ टाइप 2 और हृदय रोगों ke जन्मों का कारण बन जातीं हैं.  इनसे बचने के लिए महत्वपूर्ण है कि आप अपनी ज़रूरत अनुसार अपनी लाइफ़स्टाइल और डायट चेंज करें ताकि आपकापेट और पाचन रहे फिट, हेल्दी और गैस्ट्रोइंस्टेस्टाइनल संबंधी समस्याओं से मुक्त! इसलिए गैस्ट्रोइंस्टेस्टाइनल संबंधी समस्याओं से ग्रसित रोगियों को उनकी स्थिति और व्यक्तिगत परिस्थितियों केअनुसार, आहार और जीवनशैली की में बदलाव की आवश्यकता होती है, जो एक्सपर्ट अड्वाइस से ही संभव है.  डॉ. रमेश गर्ग, सलाहकार गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट इस संदर्भ में दे रहे हैं ज़रूरी जानकारी- पूरे भारत में गैस्ट्रोइंस्टेस्टाइनल संबंधीसमस्याएं काफ़ी व्यापक हैं, जिसकी मुख्य वजह है- इनएक्टिव लाइफ़स्टाइल यानी गतिहीन जीवनशैली और अनहेल्दीडायट! इनसे निपटने का एक ही तरीक़ा है- दवाओं व इलाज के साथ-साथ डायट में बदलाव और एक्सरसाइज़, जिनमेंइस बात का पूरा ध्यान रखना होगा कि भारत भिन्नता का देश है, आपकी भौगोलिक स्थिति, जलवायु, मौसम, खान-पान, रहन-सहन आदि इसमें बड़ी भूमिका अदा करते हैं! इसलिए लाइफ़स्टाइल और डायट में बदलाव के लिए ये 6 तत्व हैं बेहदमहत्वपूर्ण-  खाना कितनी मात्रा में और कितनी बार खाया जाए: ये हर किसी की व्यक्तिगत ज़रूरत पर निर्भर करता है लेकिन जिन्हेंपेट और आंत संबंधी समस्या है वो 5-6 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं और हाई बीपी से हो ग्रसित हैं वो दिन में 3 बार खाना खाएंजिससे एसिड का अधिक निर्माण और स्राव संतुलित हो. खाना बनाने का तरीक़ा: जी हां, आप खाने को उबालते हैं, स्टीम करते हैं या तलते हैं- ये तमाम बातें प्रभावित करती हैं. जैसेडीप फ़्राई यानी तला हुआ खाना डायबिटीज़, फ़ैटी लिवर और क़ब्ज़ से परेशान लोगों को अवॉइड करना चाहिए. इसकेअलावा सब्ज़ियों को अगर बिना छीले पकाया जाए तो वो सबसे बेहतर है क्योंकि धोने और साफ़ लेने के बाद बिनाछिलका निकाले उन्हें पकाया जाए तो हेल्दी होता है क्योंकि छिलके पोषण और फाइबर का बेहतरीन स्रोत होते हैं जिससेआंतों का स्वास्थ्य भी बना रहता है. …

रिसर्च कहता है ये डायट हैबिट्स आपको हमेशा रख सकती हैं फिट और स्लिम! (Healthy Diet Habits: Eat To Stay Fit & Slim)

हर कोई स्लिम दिखना चाहता है लेकिन स्लिम होने के साथ-साथ आपका फिटनेस लेवल भी उतना ही बेहतर होना चाहिए!…

बच्चों में बढ़ रहा है कोरोना का रिस्क, क्या करें जब बच्चे में दिखाई दें कोरोना के ये लक्षण (Coronavirus: Now Kids Are At High Risk, What To Do If Your Child Tests Positive)

भारत समेत कई देशों में कोरोना फिर से रफ्तार पकड़ने लगा है और हालात खराब ही होते जा रहे हैं.…

क्या होता है वॉटर रिटेंशन? जानें कारण, लक्षण और होम रेमेडीज़ (What is water retention? Know Causes, Symptoms And Home Remedies)

क्या आपको अपना ही शरीर अचानक से भारी लगने लगा है? क्या आपका वज़न अचानक बढ़ गया है? क्या आपके…

ऐसे खाएंगे खाना, तो आसान होगा वज़न घटाना, ये 15 आदतें बदल देंगी वेट लॉस के प्रति आपका नज़रिया! (Top 15 Habits That Can Help You Lose Weight)

हेल्दी भला कौन नहीं रहना चाहता और यह ज़रूरी भी है, लेकिन हेल्दी रहने के लिए बेहद ज़रूरी है कि…

हेल्दी रहने के 50 सिंपल गोल्डन रूल्स, इन छोटे-छोटे स्टेप्स को फॉलो करें और रहें हमेशा फिट (50 Simple Tips To Stay Healthy & Fit)

हेल्दी रहना भले ही आज के दौर में इतना आसान नहीं लेकिन छोटी-छोटी कोशिशें बड़े रंग ला सकती हैं. आप…

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