भैया दूज
दिवाली के अंतिम दिनों का पांचवां त्योहार भैया दूज है.
  • भाई दूज के दिन विवाहित या अविवाहित बहनों को प्रात: स्नान आदि से निपटकर भाई के स्वागत की तैयारी करनी चाहिए.
  • इस दिन यम की पूजा या भाई के आवभगत का तरीक़ा अलग होता है. इसके अनुसार बहनों को भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारनी चाहिए और कलावा बांधकर मुंह मीठा करने के लिए उन्हें माखन-मिश्री खिलानी चाहिए.
  • इस विधि के संपन्न होने तक दोनों को व्रती रहना चाहिए.
  • बहनों को शाम के समय यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखना चाहिए. इस समय आसमान में चील उड़ती दिखाई देने पर बहुत ही शुभ माना जाता है.
  • इस संदर्भ में मान्यता यह है कि बहनें भाई की आयु के लिए जो दुआ मांग रही हैं, उसे यमराज ने क़बूल कर लिया है.यह भी पढ़ें: दिवाली स्पेशल: टॉप 5 रंगोली डिज़ाइन्स से करें ख़ुशियों का स्वागत

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क्या करें?
  • भाई को अपनी विवाहिता बहन के घर अवश्य जाना चाहिए.
  • बहन को अपने भाई का आतिथ्य सत्कार करना चाहिए और तिलक लगाकर उनके उज्ज्वल भविष्य, जीवन, स्वास्थ्य आदि की कामना करनी चाहिए.
क्या न करें?
  •  भाई को अपने घर बहन के आने का इंतज़ार नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे ही बहन के घर जाना चाहिए.
  • बहन यमदेव की पूजा तक कुछ भी न खाए-पीए.

– मनीषा कौशिक

(वास्तु-फेंगशुई एक्सपर्ट)