Geet / Gazal

काव्य- विरही मन… (Kavya- Virahi Mann…)

दुख में भीगे मन के काग़ज़ सूख गयी कलम की स्याही बीच विरह की लंबी रात है कैसे मिलन के…

ग़ज़ल- ख़ामोश निगाहें… (Gazal- Khamosh Nigahen…)

क्यों ख़ामोश हो इस कदर इन अधरों को खुलने दो जो एहसास जगे है तुममें उन्हें लबों पर आने दो…

कविता- प्रेम (Poetry- Prem)

हां मैं प्रेम करता हूं बेइंतहा प्रेम लेकिन मेरा प्रेम तुम्हारे संसार की उस परिधि में नहीं आता जिसे तुम…

गीत- राह… (Poetry- Raah…)

राह आसान हो जाएगी सुनो तुम ताउम्र बस ऐसे ही बने रहना मैं भी वक़्त के साथ न बदलने की…

ग़ज़ल (Gazal)

क्या कहें आज क्या माजरा हो गया ज़िंदगी से मेरा वास्ता हो गया इक ख़ुशी क्या मिली मैं निखरती गई…

नज़्में- मेरे एहसास… (Nazame- Mere Ehsaas…)

उम्र मेरे पास थी ही नहीं मैं ज़िंदगी के आसपास ख़्वाब ढूंढ़ता रहा सवाल तो सिर्फ़ इतना था मेरे सीने…

कविता- मेरी नज़र से… (Poem- Meri Nazar Se…)

अब अपनी आंखें खोल देना और आईने में ख़ुद को देखना मेरी नज़र से जैसे तुम्हें आईना नहीं  मैं देख…

कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष…गीत- फिर आओ लिए कर बाँसुरिया… (Geet- Phir Aao Liye Kar Bansuriya…)

1 वसुदेव चले शिशु शीश धरे, तट तीर-लता हरषाय रहीं। चम से चमके नभ दामिनियाँ, तम चीरत राह दिखाय रहीं।…

ग़ज़ल (Gazal)

आ गए आपकी मेहरबानी हुई दिल की सरगम बजी शादमानी हुई मिल गई प्यार की सल्तनत अब हमें वो भी…

गीत- ख़ुशहाल ज़िंदगी की तस्वीर… (Geet- Khushhaal Zindagi Ki Tasvir…)

बड़ी चीज़ें कहां मांगता हूं मुझे वक़्त बीतने के बाद भी बस छोटी-छोटी चीज़ों से प्यार है मैं तो बस…

ग़ज़ल (Gazal)

देख लेती हूं तुम्हें ख़्वाब में सोते-सोते चैन मिलता है शब-ए-हिज्र में रोते-रोते इक तेरे ग़म के सिवा और बचा…

कविता- अभी वक़्त गुजरा कहां है… (Kavita- Abhi Waqt Gujra kahan Hai?)

अभी वक़्त गुजरा कहां है अभी भोर होते ही आसमां में सुबह की लाली नज़र आती है सुबह टहलने निकले…

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