Geet / Gazal

कविता- मिस करता हूं… (Kavita- Miss Karta Hun…)

तुम्हें एहसास है मैं तुम्हारे साथ गुज़रे लम्हे और वक़्त नहीं मिस करता वे तो एक दिन दूर जाने थे…

काव्य- समर शेष है… (Poetry- Samar Shesh Hai…)

और… प्रेम के लिए क्या गया स्त्री का समर्पण ना जाने कब बदल गया समझौते में उपेक्षा तिरस्कार से कुम्हला…

कविता- बासंतिक पर्व… (Kavita- Basantik Parv)

बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं! माँ शारदे की कृपा बनी रहे!.. दिवस आज है पंचमी, यौवन पर ऋतुराज। बसें शारदा…

ग़ज़ल- थोड़ी सी ज़िंदगी दे दे… (Gazal- Thodi Si Zindagi De De…)

तेरी आंखों से कब राहों का उजाला मांगा अपनी आंखों में बस थोड़ी सी ज़िंदगी दे दे सदियों से इस…

काव्य- लौट आएंगे हम-तुम भी… (Kavya- Laut Aayenge Hum-Tum Bhi…)

जैसे लौट आती हैं चिड़ियां दिनभर की उड़ान के बाद थकी-हारी वापस घोंसलों में जैसे लौट आते हैं बीज ओढ़े…

कविता- यात्रा.. आत्मिक एहसास की… (Kavita- Yatra.. Aatmik Ehsaas Ki…)

यात्रा हो या ज़िंदगी कुछ न कुछ छूट ही जाता है पीछे अधजिया सा फिर.. 'जिए' से ज़्यादा 'अधजिए' को…

हास्य व्यंग्य काव्य- स्त्री की अभिलाषा- चाटुकारपति! (Hasya Vyang Kavya- Stri Ki Abhilasha- Chatukarpati)

सुबह हुई सब पंछी जागे, एक चाटुकार गृहस्वामी अर्धांगिनी से यह बोला-बीत गई रात सपन की, नयन खोलो देखो, चाय…

कविता- स्त्री का यथार्थ (Kavita- Stri Ka Yatharth)

चाहकर भी कोई कवि कभी नहीं लिख सकेगा शोकगीत स्त्री की उन इच्छाओं की मृत्यु पर जो अभिव्यक्त होने से…

कविता- सब्र (Kavita- Sabr)

चांदनी लहराती हुई ज़मीं पर उतरी और लिपट गई खेत, खलिहान ताल तलैया नदी और समंदर की लहरों से धरती…

काव्य- ईश्वर की खोज जारी है… (Kavya- Ishwar Ki Khoj Jari Hai…)

मनमुटाव तो शुरुआत से ही रहा इसीलिए खींच दी गई लक्ष्मण-रेखाएं ईश्वर को ढूंढ़ा गया उससे मिन्नतें-मनुहार की फ़ैसला तब…

कविता- झूठ-मूठ का मनुष्यपन… (Kavita- Jhuth-Muth Ka Manushypan)

गर्मी में भी सबसे ज़्यादा खीझ मनुष्य को हुई उसने हवाओं को क़ैद किया बना डाले एसी और.. रही-सही हवा…

कविता- वक़्त और लम्हे… (Kavita- Waqt Aur Lamhe…)

वक़्त से लम्हों को ख़रीदने की कोशिश की वह मुस्कुराया बोला क्या क़ीमत दे सकोगे मैं बोला अपने जज़्बात दे…

© Merisaheli