Shayeri

कविता- क्यों रखा उसको पराश्रित ही… (Kavita- Kyon Rakha Usko Parashrit Hi…)

सुनो कवि.. पहाड़ी के उस पार वो स्त्री.. रोप रही है नई-नई पौध सभ्यताओं की और उधर.. गंगा के किनारे…

हास्य कविताएं- करोना कहर (Hasay Kavitayen- Corona Qahar…)

झूठ-मूठ खांसा क्या बहू ने बन गए झटपट काम पलंग छोड़ सासू भागी, उनका जीना हुआ हराम जीना हुआ हराम…

काव्य- एक चुप होती हुई स्त्री… (Kavya- Ek Chup Hoti Hui Stri…)

एक चुप होती हुई स्त्री कहती है बहुत कुछ… तुलसी जताती है नाराज़गी नहीं बिखेरती वो मंजरी सारी फुलवारियां गुमसुम…

कविता- शब्दों से परे प्यार… (Kavita- Shabdo Se Pare Pyar…)

इस से पहले कि मैं तुम्हें आई लव यू कहने का साहस जुटा सकूं डरता हूं कहीं ये तीन शब्द…

कविता- प्रेम पत्र… (Kavita- Prem Patra)

लिखा था धड़कते दिल से और दिया था कांपते हाथों से मैंने नजरें ज़मीन में ही गड़ा रखी थी फिर…

काव्य- हार गए तुम… (Kavya- Haar Gaye Tum…)

जिस दिन तमन्ना बड़ी और हौसला छोटा हो जाए समझना कि हार गए तुम जिस दिन राजनीति बड़ी और दोस्ती…

ग़ज़ल- तस्तीक़ (Gazal- Tastik)

अब न कोई शक़-ओ-शुबा है, हर ढंग से तस्तीक़ हो गई निराशाओं से लड़ने की, मेरी बीमारी ठीक हो गई…

कविता- हर प्रलय में… (Kavita- Har Pralay Mein…)

आज के हालातों में हर कोई 'बचा' रहा है कुछ न कुछ पर, नहीं सोचा जा रहा है 'प्रेम' के…

काव्य- मेरी हस्ती निसार हो जाए… (Kavya- Meri Hasti Nisar Ho Jaye…)

सांस, ख़ुशबू गुलाब की हो धड़कन ख़्वाब हो जाए उम्र तो ठहरी रहे हसरत जवान हो जाए बहार उतरे तो…

कविताएं (Poetry)

तेरी तस्वीर… मैं जहां में कुछ अनोखी चीज़ ढूंढ़ने निकला और शहर में मुझे सिर्फ़ आईना मिला जो मेरी बेबसी…

कविता- वह स्त्री… (Kavita- Vah Stree…)

वह स्त्री.. बचाए रखती है कुछ 'सिक्के' पुरानी गुल्लक में पता नहीं कब से कभी खोलती भी नहीं कभी-कभार देखकर…

काव्य- काश! एहसास के साथ… (Kavya- Kaash! Ehsaas Ke Sath…)

काश कि कभी तुमने अपने स्कूल के बस्ते को घर लौटते वक़्त मेरे कंधे पर रक्खा होता काश कि मैंने…

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