Category: Geet / Gazal

काव्य- सावन से पहले चले आना… (Kavay- Sawan Se Pahle Chale Aana…)

सुनो ना... सावन से पहले चले आना बड़ा तरसी है आरज़ू तेरी ख़ातिर इस बरस खुल के बरस जाना मद्धिम…

काव्य- क्यों है? (Kavay- Kyon Hai?

किसी की ज़िंदगी इतनी आसान तो किसी की इतनी मुश्किल क्यों है? किसी के पास सब कुछ है तो कोई…

ग़ज़ल- जब भी मैंने देखा है… (Gazal- Jab Bhi Maine Dekha Hai…)

जब भी मैंने देखा है दिलदार तुम्हारी आंखों में चाहत का इक़रार मिला हर बार तुम्हारी आंखों में   रमता…

काव्य- कौन कहता है… (Kavay- Kaun Kahta Hai…)

  कौन कहता है अकेले ज़िंदगी नहीं गुज़रती मैंने चांद को तन्हा देखा है सितारों के बीच में   कौन…

ग़ज़ल- मेरे होंठों के तबस्सुम कहीं गुम हो गए हैं (Gazal- Mere Honthon Ke Tabassum Kahin Gum Ho Gaye Hain…)

  मेरे होंठों के तबस्सुम कहीं गुम हो गए हैं जब से सुना है ग़ैर के वो हो गए हैं…

काव्य- तुम सम्हालो ख़ुद को… (Kavay- Tum Samhalo Khud Ko…)

बेटी तो होती है एक कली अगर खिलेगी वह नन्ही कली तो बनेगी एक दिन फूल वह कली चाहे हो…

काव्य- स्त्री हूं… (Kavya- Stri Hoon…)

मैं पीतल नहीं सोना हूं और चमकूंगी सितम की आंधियां कितनी चला लोगे? स्त्री हूं दीया हिम्मत का जलाए रखूंगी…

काव्य- मुझ पर एक किताब… (Kavay- Mujh Par Ek Kitab…)

लिख दे लिखनेवाले मुझ पर एक किताब संग बैठ आ किसी पहर दूं जीवन का हिसाब   अश्क दिखें ना…

काव्य- जीवन-मृत्यु (Kavay- Jeevan-Mrityu)

जीवन-मृत्यु अद्भुत प्रेमी मिल जाने को हैं ये आतुर जीवन जूझ रहा है पल-पल बढ़ा जा रहा है मिलने उससे…

काव्य- उम्मीद की ज़रूरत क्या है? (Kavay- Ummeed Ki Zarurat Kya Hai?)

  आईने को आईने की ज़रूरत क्या है दिल हो आईना तो सूरत की ज़रूरत क्या है ज़िंदगी मुश्किल है…

ग़ज़ल- तेरी पाकीज़गी में हमदम (Gazal- Teri Pakeezgi Mein Humdam)

मेरी आंख से बता क्यों ख़्वाब झांकता है एहसास का समंदर तेरी आंख में छुपा है दिल मेरा स़िर्फ लफ़्ज़ों…

काव्य- वो निगाह मेरी है… (Kavya- Wo Nigah Meri Hai…)

  कुछ तो मिलता है सोच कर तुझको हर उड़ान की जद में आसमां नहीं होता   दिल अगर आंख,…

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