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अब नो मोर रोना जब घर में पड़ा हो सोना (Earn with your gold Jewellery)

क्या आपको भी लगता है कि आप कुछ ख़ास मौक़ों पर ही गोल्ड ज्वेलरी पहनती हैं और बाकी के समय में ये बैंक के लॉकर…

क्या आपको भी लगता है कि आप कुछ ख़ास मौक़ों पर ही गोल्ड ज्वेलरी पहनती हैं और बाकी के समय में ये बैंक के लॉकर में बेकार पड़े रहते हैं, तो चलिए हम आपको बताते हैं एक बेहतरीन आइडिया. वैसे तो सरकार की ओर से पिछले साल ही इस नई योजना की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन आप अभी तक अगर इसका फ़ायदा नहीं उठा पाए हैं और इसके बारे में सही जानकारी नहीं है, तो चलिए एक बार फिर से हम आपको अपडेट कर देते हैं. 

क्या है गोल्ड मॉनिटाइजेशन स्कीम?
हाल ही में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दो प्रमुख स्कीम आम लोगों के लिए लॉन्च किया. इसमें से एक है- गोल्ड मॉनिटाइजेशन स्कीम. इसके तहत आप अपने घर में पड़े पुराने गहने, गोल्ड बिस्किट आदि बैंक में कुछ समय के लिए जमा कर सकते हैं, जिस पर आपको बैंक ब्याज देगा. इसका मतलब ये हुआ कि आपके पुराने गहनों पर आपको ब्याज तो मिलेगा साथ ही आपके गहने भी आपको मिल जाते हैं.

कौन कर सकता है इन्वेस्ट?
ये कुछ विशेष वर्ग के लिए नहीं है. इस स्कीम में आम आदमी से लेकर मंदिर, ट्रस्ट और बड़े बिज़नेसमैन भी इन्वेस्ट कर सकते हैं.

गोल्ड मॉनिटाइजेशन स्कीम का उद्देश्य
गोल्ड बॉन्ड स्कीम को मंज़ूरी देने का सबसे बड़ा कारण है कि लोगों को घर में पड़े सोने के आभूषण और दूसरे गोल्ड पर पैसे मिल सकें और इसके साथ ही सरकार को भी फ़ायदा पहुंच सके. गोल्ड मॉनिटाइजेशन का मकसद भारतीय परिवारोें के पास पड़े लगभग 20 हज़ार टन सोने को
निकालकर बैंकिंग तंत्र में लाना है ताकि विदेशों से सोना आयात न करना पड़े.

गोल्ड मॉनिटाइजेशन स्कीम की ख़ास बातें
कोई भी व्यक्ति न्यूनतम 1.94 ग्राम सोना (आभूषण या बुलियन) इस योजना के तहत जमा कर सकता है.

इस स्कीम में सोना शॉर्ट टर्म, मिड टर्म और लॉन्ग टर्म के लिए जमा कर सकते हैं. शॉर्ट टर्म में 1-3 साल, मिड टर्म में 5-7 और लॉन्ग टर्म में 12-15 साल तक के लिए आप अपना सोना बैंक में जमा कर सकते हैं.

जमा सोने पर मिलने वाला ब्याज रुपए में होगा.

छोटी अवधि यानी कम समय के लिए रखे गए सोने पर ब्याज बैंक निश्‍चित करेंगे, जबकि मिड टर्म और लॉन्ग टर्म के लिए रखे गए सोने की ब्याज दरें और बैंकों को उनकी सेवा के लिए दी जाने वाली फीस सरकार रिज़र्व बैंक के साथ परामर्श करके तय करेगी.

कोई भी व्यक्ति गोल्ड सेविंग अकाउंट खुलवा सकता है.

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम
आमतौर पर भविष्य का ख़्याल रखते हुए हर व्यक्ति अपने शक्ति और सामर्थ के हिसाब से इन्वेस्टमेंट करता है. कभी शेयर मार्केट में, तो कभी म्यूचुअल फंड में, कभी इंश्योरेंस, तो कभी फिक्स डिपॉज़िट. कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो गोल्ड में ही इन्वेस्ट करना चाहते हैं. ऐसे में बहुत होता है, तो वो हर साल ज्वेलरी शॉप से किसी स्कीम के तहत हर महीने पैसे जमा करते रहते हैं और बाद में लास्ट की इंस्टॉलमेंट ज्वेलरी शॉप भर देती है और फिर स्कीम मेच्योर होने पर लोग ज्वेलरी ख़रीद लेते हैं. इसी तरह के लोगों को सम्मोहित करने और फ़ायदा पहुंचाने के लिए सरकार ने एक स्कीम लॉन्च की है, जो गोल्ड में इन्वेस्ट करने की रुचि रखते हैं. इस स्कीम का नाम है- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम.

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की ख़ास बातें
– गोल्ड बॉन्ड 5, 10, 50 और 100 ग्राम के वर्ग में उपलब्ध होंगे.

– गोल्ड बॉन्ड की अवधि 5-7 साल होगी.

– अपने गोल्ड बॉन्ड को गिरवी रखकर आप लोन भी ले सकते हैं.

– बॉन्ड के मेच्यौरिटी पर गोल्ड बॉन्ड के मूल्य के बराबर राशि मिलेगी.

– इन गोल्ड बॉन्ड्स को शेयर बाज़ार में ख़रीदा और बेचा जा सकता है.

– एक साल में कोई भी 500 ग्राम से ज़्यादा के बॉन्ड नहीं ख़रीद सकेगा.

– गोल्ड बॉन्ड पर किस दर से ब्याज मिलेगा, ये सरकार तय करेगी.

– गोल्ड बॉन्ड पेपर और डीमैट दोनों स्वरूप में उपलब्ध होगा.
भारत हर साल तक़रीबन 1 हज़ार टन गोल्ड दूसरे देशों से आयात करता है. इसका असर देश के एक्स्टर्नल अकाउंट पर भारी पड़ता है. इन दोनों स्कीम से आम लोगों के साथ ही देश को भी फ़ायदा मिलेगा.

– श्वेता सिंह

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Published by
Meri Saheli Team

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