शादी तय करते समय न करें झूठ बोलने की गलती, वरना आ सकती है मैरिड लाइफ में प्रॉब्लम (Don’t Make Mistakes Of Telling Lies Before Marriage, It Will Destroy Your Marriage)

कहते हैं, शादी जन्मों का बंधन होता है. कांच से भी ज़्यादा नाजुक इस रिश्ते को ताउम्र प्यार और विश्‍वास से सहेजना पड़ता है. लेकिन…

कहते हैं, शादी जन्मों का बंधन होता है. कांच से भी ज़्यादा नाजुक इस रिश्ते को ताउम्र प्यार और विश्‍वास से सहेजना पड़ता है. लेकिन अब या तो लोग इस बंधन के महत्व को अनदेखा करने लगे हैं या उनके लिए शादी का रिश्ता महज एक मजाक बन कर रह गया है. तभी तो आजकल शादी के बंधन भी झूठ (Telling Lies Before Marriage) के सहारे बनाए जा रहे हैं.

मंजरी दुखी मन से अपनी सहेली नीलिमा को बता रही थी, मेरे साथ धोखा हुआ है. मुझे बताया गया था कि मेरा पति एक निजी लिमिटेड कम्पनी में बड़ा अफसर है. चूंकि मैं खुद एक बड़े पद पर कार्यरत थी, इसलिए इस रिश्ते के लिए मंजूरी दे दी, लेकिन शादी के बाद मुझे पता चला कि वह एक मामूली क्लर्क है. समझ में नहीं आता है कि मैं क्या करूं. मंजरी के मन में अपने पति व ससुराल वालों के प्रति अनादर के भाव थे. पहले तो उसने अपने मम्मी-पापा से कहा भी कि यह संबंध तोड़ दो और मुझे तलाक दिला दो, परंतु रिश्तेदारों व समाज के लोगों ने समझाया, जो हुआ, सो हो गया. अब इसे ही नियति मान लो. मंजरी ने तलाक नहीं लिया, पर अब वह पति व सास-ससुर के प्रति मन में हमेशा अविश्‍वास का भाव रखती है. न वह पति से जुड़ाव महसूस करती है, न ही उनके प्रति उसके मन में सम्मान की भावना है. उनके रिश्तों में एक अजीब-सा खिंचाव आ गया है. अब ज़िंदगीभर इस रिश्ते को ढोना उसकी मजबूरी हो गई है.

ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां शादी के लिए लड़के या लड़की पक्ष वाले अक्सर झूठ बोल देते हैं, जिसका असर उनकी जिंदगी पर पड़ता है. वैवाहिक संबंधों के मामलों में झूठ का सहारा लेना अत्यंत दुखदाई साबित होता है. उपर्युक्त उदाहरण में ही देखें, चूंकि विवाह तो हो ही गया है, अतः मंजरी को ससुराल में ही रहना है. उसने सामाजिक दबाव के कारण तलाक भले ही नहीं लिया, किंतु एक झूठ के कारण ससुरालवाले उसकी नज़रों में गिर गए हैं.

दोनों पक्ष करते हैं गलती


अक्सर वैवाहिक संबंध स्थापित करने के लिए कभी वर पक्ष, तो कभी वधू पक्ष झूठ का सहारा लेने लगते हैं. कारण अनेक होते हैं – कभी अच्छी लड़की और अधिक दहेज की उम्मीद के कारण वर पक्ष ग़लत जानकारी देता है, तो कभी अच्छा घर-वर देखकर वधू पक्ष फरेब कर बैठता है. उस समय उनके मन में यह विचार नहीं उठता कि बाद में जब सच्चाई सामने आएगी तब क्या होगा.

वैवाहिक संबंधों में बोले जानेवाले झूठ

विवाह संबंधों के लिए कई तरह के झूठ बोले जाते हैं.

  • लड़के या लड़की की उम्र कम बताना.
  • लड़की के गुणों की बढ़ा-चढ़ाकर प्रशंसा करना.
  • लड़के की पढ़ाई, नौकरी या फिर उसकी कमाई दो-तीन गुना बता देना.
  • बीमारियों को छिपाना.
  • गलत चाल-चलन और आदतें आदि.

मैरिज ब्यूरो वालों की संदिग्ध भूमिका


कई बार वर या वधू के माता-पिता द्वारा सम्पूर्ण तथ्य सही बताने के बावजूद बिचौलिए या शादी-ब्याह के दलाल (मेट्रीमोनियल एजेन्ट) या कथित एजेंसियां अपने मोटे कमीशन की लालच में जैसे-तैसे झूठे-सच्चे वादे एवं ग़लत जानकारियां देकर रिश्ते करवा देते हैं. बाद में सच्चाई सामने आने पर वर और वधू लड़ते -झगड़ते रहते हैं. पति-पत्नी में तनातनी चलती रहती है और कई बार मामला अदालत तक पहुंच जाता है, जिसकी परिणति तलाक के रूप में होती है. वस्तुतः विवाहोपरान्त किसी रिश्तेदार या अन्य माध्यम से जब प्रभावित पक्ष को झूठ का पता चलता है, तो वह ठगा-सा महसूस करता है और आक्रामक हो उठता है. परिणामस्वरूप झगड़ा होकर परिवार बिखर जाता है, संबंध टूट जाते हैं.

इंटरनेट पर छिपायी जाती है सही जानकारी


आजकल की फास्ट लाइफ में किसी के पास किसी के लिए वक्त नहीं है, इसलिए आपसी संबंध खत्म होने लगे हैं. शायद यही वजह है कि अब अधिकतर शादियां इंटरनेट के जरिए हो रही हैं, जहां बायोडेटा में ग़लत जानकारियां दे दी जाती हैं. अब पहले ज़माने की तरह खानदान का विस्तार तो रहा नहीं, परिवार सिमटकर पति-पत्नी और दो बच्चों तक रह गया है. ऐसे में शादी के लिए खानदान की जांच-पड़ताल करवा पाना भी मुश्किल हो जा रहा है. अखबार के विज्ञापन हों या फिर इंटरनेट के जरिए की जा रही शादी, दोनों ही सूरतों में सही जांच-पड़ताल हो पाना थोड़ा मुश्किल होता हैश. पर यह भी ध्यान रखिए कि यह दो ज़िंदगियों का सवाल है. जब तक सामनेवाले पक्ष के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त न कर लें, शादी के लिए जल्दबाज़ी न करें, वरना कहीं आपको ताउम्र पछताना न पड़ जाए.

हरगिज़ न छिपाएं बीमारी
रागिनी किशोरावस्था पार कर गई, पर उसे मासिक नहीं हुआ. तीन साल तक लगातार इलाज और उसके बाद मामूली ऑपरेशन से भी कोई फायदा नहीं हुआ. माता-पिता ने रिश्तेदारों के कहने पर बी. कॉम करते ही रागिनी की शादी कर दी. रागिनी की कमी के बारे में वर पक्ष वालों को उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी. छह महीने तक रागिनी भी झूठे बहाने बनाती रही, परंतु सच तो सामने आना ही था.
सच सामने आते ही दोनों परिवारों में जम कर झगड़ा हुआ. लड़के वालों ने डॉक्टर की सलाह ली. डॉक्टर ने स्पष्ट कह दिया कि रागिनी कभी मां नहीं बन सकेगी. नतीजा तलाक और दो परिवारों की ज़िंदगी तनावयुक्त. रागिनी के घरवालों की ग़लती से लड़के वालों का भी शादी में पैसा बरबाद हुआ और स्वयं उनका भी. रागिनी ने जिल्लत झेली, सो अलग.
अतः लड़के या लड़की में दांपत्य या संतान की उत्पत्ति संबंधी कोई कमी हो, तो जैसे-तैसे विवाह करके पीछा छुड़ाने भी की कोशिश करना व्यर्थ है. देर-सवेर सच सामने आता ही है. इससे दो परिवार आर्थिक और मानसिक कष्ट झेलते हैं. इलाज संभव न हो तो विवाह न करना ही श्रेयस्कर है या फिर वैसे ही जीवनसाथी का चयन करना चाहिए, जो उस कमी के साथ लड़के/लड़की को स्वीकार करने के लिए तैयार हो.
कई बार तो माता-पिता कमियां जानने के बावजूद इस सोच में बच्चों की शादी तय कर देते हैं कि शायद शादी के बाद सब ठीक हो जाए. निधि इस बात से बहुत ख़ुश थी कि उसे बहुत सम्पन्न परिवार और डॉक्टर पति मिला है. माता-पिता भी शादी करके संतुष्ट थे, लेकिन शादी की रात ही पति अमर ने बताया कि यह शादी उसकी मर्जी के खिलाफ हुई है. वह तो पहले से शादीशुदा है. यह बात वह अपने माता-पिता को बताने की हिम्मत नहीं कर पाया, क्योंकि वे उसे बहू के रूप में स्वीकारने के लिए तैयार नहीं थे.
माता-पिता ने सोचा कि शादी के बाद बेटा सुधर जाएगा, लेकिन हुआ इसके विपरीत. लड़का घर छोड़कर अपनी पूर्व पत्नी के पास चला गया और लड़की के पास ससुराल में रहने की वजह नहीं रही और मायके जाकर वह माता-पिता को दुख देना नहीं चाहती थी. ऐसे में एक लड़की ज़िंदगी को बरबाद करने का दोषी कौन है.

विश्‍वास की नींव पर बनें संबंध
एक झूठ से कई ज़िंदगियां बरबाद हो जाती हैं. इस बात पर यदि पहले से दोनों पक्ष सोच-विचार कर लें तो रिश्ते बिगड़े ही नहीं. एक बार शादी हो जाए, फिर सब ठीक हो जाएगा, ऐसा सोचकर जैसे-तैसे झूठी-सच्ची बातें बनाकर तय किए गए संबंधों का नतीजा कभी भी अच्छा नहीं होता. कई बार तो लड़का या लड़की आत्महत्या जैसे प्राणघाती कदम उठा लेते हैं. अतः समझदारी इसी में है कि तथ्यों को सही-सही बयान करें.
ऐसा नहीं है कि किसी में कमी नहीं होती, लेकिन यदि उन कमियों को सही रूप में पहले ही सामने रख दिया जाए, तो शायद बाद में सब ठीक हो जाए्. थोड़ा बहुत झूठ ऐसा न हो कि वह रिश्तों को बिगाड़ दे, या मन में हमेशा के लिए गांठ पड़ जाए. ईमानदारी, स्पष्टवादिता और विश्‍वास की नींव पर खड़े वैवाहिक संबंध ही सहज और खूबसूरत होते हैं. झूठ और आत्मविश्‍वास की नींव पर रचे गए संबंधों में न तो स्थिरता होती है और न ही मधुरता.

शिखर चन्द जैन

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Published by
Pratibha Tiwari

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