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एग्ज़ाम गाइड- कैसे करें परीक्षा की तैयारी? (Exam Guide- How To Prepare For The Examination?)

अक्सर परीक्षा (Exam) को लेकर बच्चों (Kids) के मन में एक अनजाना-सा डर बना ही रहता है. ऐसे में पैरेंट्स के साथ-साथ टीचर्स की भी यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों पर इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़ने दें. इसलिए एग्ज़ाम के पहले और दौरान अभिभावकों को विशेष ध्यान देना चाहिए कि बच्चे के दिलोदिमाग़ पर किसी बात का बुरा असर न पड़े. इस संबंध में हिंदुजा हेल्थकेयर के कंसल्टेंट सायकोलॉजिस्ट डॉ. केरसी चावड़ा और परमिंदर निज्जर ने भी कई उपयोगी जानकारियां दीं. पैरेंटिंग केयर * बच्चे को सकारात्मक और तनावमुक्त वातावरण दें. यानी घर में बेवजह के झगड़ों से बचें, ख़ासकर पति-पत्नी उलझें नहीं. * मां बच्चे के भोजन में पौष्टिकता का ध्यान रखे. अक्सर मांएं लाड़-दुलार में या फिर बच्चे की ज़िद पर उसे जंक फूड, फास्ट फूड, सॉफ्ट ड्रिंक्स आदि ज़रूरत से अधिक पीने पर रोकती या टोकती नहीं हैं. यह ठीक नहीं है. परीक्षा के समय इस बात का विशेष ख़्याल रखें कि बच्चा घर का ही स्वादभरा, पर सिंपल भोजन करें. * पिता भी बच्चे से पढ़ाई से जुड़ी परेशानियां को जानने-समझने की कोशिश करें. उन्हें और अधिक मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित करते रहें. * जब पैरेंट्स बच्चों की पढ़ाई को लेकर नियम बनाते हैं, तब उन्हें भी इसका अनुसरण करना चाहिए. यदि आप बच्चे को टीवी, फिल्म, मनोरंजन आदि के लिए मना करते हैं, तो परीक्षा के दिनों तक आप भी इनसे दूरी बनाए रखें. * परीक्षा के दिनों में पढ़ाई को लेकर पैरेंट्स अधिक एग्रेसिव न बन जाएं यानी बच्चे को डांटना,…

अक्सर परीक्षा (Exam) को लेकर बच्चों (Kids) के मन में एक अनजाना-सा डर बना ही रहता है. ऐसे में पैरेंट्स के साथ-साथ टीचर्स की भी यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों पर इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़ने दें. इसलिए एग्ज़ाम के पहले और दौरान अभिभावकों को विशेष ध्यान देना चाहिए कि बच्चे के दिलोदिमाग़ पर किसी बात का बुरा असर न पड़े. इस संबंध में हिंदुजा हेल्थकेयर के कंसल्टेंट सायकोलॉजिस्ट डॉ. केरसी चावड़ा और परमिंदर निज्जर ने भी कई उपयोगी जानकारियां दीं.

पैरेंटिंग केयर

* बच्चे को सकारात्मक और तनावमुक्त वातावरण दें. यानी घर में बेवजह के झगड़ों से बचें, ख़ासकर पति-पत्नी उलझें नहीं.

* मां बच्चे के भोजन में पौष्टिकता का ध्यान रखे. अक्सर मांएं लाड़-दुलार में या फिर बच्चे की ज़िद पर उसे जंक फूड, फास्ट फूड, सॉफ्ट ड्रिंक्स आदि ज़रूरत से अधिक पीने पर रोकती या टोकती नहीं हैं. यह ठीक नहीं है. परीक्षा के समय इस बात का विशेष ख़्याल रखें कि बच्चा घर का ही स्वादभरा, पर सिंपल भोजन करें.

* पिता भी बच्चे से पढ़ाई से जुड़ी परेशानियां को जानने-समझने की कोशिश करें. उन्हें और अधिक मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित करते रहें.

* जब पैरेंट्स बच्चों की पढ़ाई को लेकर नियम बनाते हैं, तब उन्हें भी इसका अनुसरण करना चाहिए. यदि आप बच्चे को टीवी, फिल्म, मनोरंजन आदि के लिए मना करते हैं, तो परीक्षा के दिनों तक आप भी इनसे दूरी बनाए रखें.

* परीक्षा के दिनों में पढ़ाई को लेकर पैरेंट्स अधिक एग्रेसिव न बन जाएं यानी बच्चे को डांटना, मारना, पढ़ने के लिए अधिक दबाव बनाना आदि न करें. ध्यान रहे, इससे बच्चे को घबराहट, पेटदर्द, सांस लेने में तकलीफ़, तनाव आदि जैसी समस्या हो सकती है. इसलिए थोड़ा स्ट्रेस ठीक है, पर अधिक स्ट्रेस नुक़सानदायक हो सकता है.

* पढ़ने के लिए सुबह जल्दी उठना हो, तो यह ज़रूरी है कि बच्चे रात को समय पर जल्दी सोएं. इसके लिए पढ़ने की और रिविज़न करने की समय सीमा निर्धारित कर ली जाए, तो बेहतर है.

* अपने ऑफिस-घर आदि के कामों से समय निकालकर बच्चे की पढ़ाई व परीक्षा में दिलचस्पी लें, वरना कई पैरेंट्स बस स्कूल, ट्यूशन, क्लासेस लगा देने भर से ही अपनी ज़िम्मेदारियां ख़त्म समझते हैं. जबकि एग्ज़ाम के समय बच्चों को पैरेंट्स के साथ, सहयोग, प्रोत्साहन की ख़ास ज़रूरत होती है.

* यदि कोई रिश्तेदार या फिर मेहमान बच्चों की परीक्षा के दिनों में आना चाहे, तो विनम्रतापूर्वक उन्हें वस्तुस्थिति बताकर मना कर दें.

* यदि बच्चे को कोई सब्जेक्ट डिफिकल्ट लग रहा है, तो पैरेंट्स उसे डांटने-फटकराने, तुम करना नहीं चाहते… तुम पर कितने पैसे ख़र्च कर रहे हैं… जैसी निगेटिव बातें न कहें.  उसकी डिफिकल्टी को समझें और उसे दूर करने की कोशिश करें. साथ ही जिन विषयों में वो अच्छा कर रहा है, उसकी तारीफ़ करें, उसे शाबाशी दें.

टीचर्स डायरेक्शन

* पैरेंट्स को बच्चों की क्लास टीचर से परीक्षा से पहले ज़रूर मिलना चाहिए, ताकि वे जान सकें कि उनका बच्चा किस विषय में अच्छा और किसमें कमज़ोर है. इससे बच्चे की एक्स्ट्रा केयर करने में मदद मिलेगी.

* शिक्षकों का भी यह फर्ज़ बनता है कि वे परीक्षा से पहले स्टूडेंट्स के पैरेंट्स को उनके बच्चे हर तैयारी से अवगत कराएं.

* पैरेंट्स मीटिंग में बच्चे के दिए गए रिपोर्ट्स, इम्प्रूवमेंट आदि को चेक करके उसके अनुसार माता-पिता का मार्गदर्शन करें कि उन्हें परीक्षा के समय बच्चे की किन बातों पर अधिक ध्यान देना है.

* समय के साथ बहुत कुछ बदला है. दरअसल, एग्ज़ाम केवल बच्चे का ही नहीं होता, बल्कि उनके मम्मी-पापा, टीचर्स, परिवार, स्कूल आदि भी

जाने-अनजाने में इसमें शामिल होते हैं. फिर वो मानसिक रूप से हों या बौद्धिक तौर पर.

* आज टीचर्स की ज़िम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं. उन्हें भी स्टूडेंट्स की पढ़ाई के साथ-साथ उनके बैकग्राउंड, माहौल आदि के बारे में अपडेट होना पड़ता है, ताकि वे बच्चों को सही शिक्षा दे सकें और उनका उचित मार्गदर्शन कर सकें.

यह भी पढ़े: एग्ज़ाम टाइम: क्या करें कि बच्चे पढ़ाई में मन लगाएं? (Exam Time: How To Concentrate On Studies)

स्टूडेंट्स-मास्टर स्ट्रोक्स

* छात्र-छात्राओं दोनों को ही एग्ज़ाम को पॉज़िटिवली लेना चाहिए.

* सालभर उन्होंने जितनी मेहनत व पढ़ाई की है, उसी पर अधिक ध्यान दें. ऐन एग्ज़ाम के समय कुछ नया पढ़ने की कोशिश न करें.

* सभी विषय के हर चैप्टर का पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ रिविज़न करें.

* एग्ज़ाम फोबिया से बचें. यानी इसे लेकर डरें, घबराएं नहीं. ख़ुद पर और अपनी तैयारी पर विश्‍वास करें.

* एग्ज़ाम से एक दिन पहले जल्दी सो जाएं. यानी सब कुछ अभी तक पढ़ा नहीं, कुछ छूट गया है, ये भी महत्वपूर्ण है, अरे वो तो पढ़ना बाकी रह गया… इस तरह की दुविधा में न फंसें. आपने जितनी अच्छी तरह से जो पढ़ा है, बस परीक्षा से पहले उसे एक बार सरसरी तौर पर देख लें.

* एग्ज़ाम हॉल में समय से थोड़ा पहले पहुंचें, ताकि अपनी सीट, रूम आदि को देख-समझ सकें.

* सबसे ज़रूरी बात अपनी परीक्षा की तैयारी को बेहतर समझें और उसी सोच के साथ सकारात्मक होकर परीक्षा दें. ऑल द बेस्ट!

यह भी पढ़े: बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताने के 11 आसान तरी़के (10+ Ways To Spend Quality Time With Your Kids)

एग्ज़ाम अलर्ट…

* एग्ज़ाम के समय अच्छी नींद लेना बहुत ज़रूरी है. यानी कम से कम 7-8 घंटे की नींद, ताकि अगले दिन परीक्षा के समय स्टूडेंट्स फ्रेश व एनर्जिटिक रहें.

* अक्सर परीक्षा के दिनों में बच्चे खाना कम खाते हैं या फिर नहीं खाते. ऐसा न करें, क्योंकि ऐसा करने से परीक्षा के समय घबराहट व हल्की बेचैनी-सी होने लगती है. इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि परीक्षा चाहे सुबह की हो या दोपहर की- स्टूडेंट्स अच्छी तरह से नाश्ता करके जाएं. इससे उनका एनर्जी लेवल बेहतर रहेगा.

* एग्ज़ाम के समय एक पेपर हो जाने के बाद उस पर चर्चा न करते बैठें. न ही बच्चे व अभिभावक माथापच्ची करते रहें कि इस सवाल को और भी अच्छे से कर सकते थे. इस सवाल पर इतना नंबर मिलेगा, इस पर अधिक नंबर कटेंगे इत्यादि करने की बजाय जो पेपर हो चुका है, उसे भूल जाएं और फ्रेश मूड से अगले पेपर की तैयारी करें.

* एग्ज़ाम के दौरान दिनभर पढ़ाई के अलावा बीच-बीच में ब्रेक ज़रूर लें. साथ ही आधा या एक घंटा कोई भी फिजिकल एक्टीविटीज़, जैसे- वॉकिंग, रनिंग, प्राणायाम, योग या फिर टहलना आदि ज़रूर करें. इससे बच्चे की बैटरी पूरी तरह चार्ज हो जाएगी और वे तरोताज़ा भी महसूस करेंगे.

* हर बच्चा युनीक होता है. फिर चाहे वो पढ़ाई में एवरेज हो या फिर बहुत अच्छा. यह ज़रूरी नहीं कि जो बच्चे 95-99% लाते हैं, वे ही ज़िंदगी में कामयाब होते हैं. कई बार देखा गया है कि जो बच्चे पढ़ाई में औसत दर्जे के रहे, वे भी जीवन में बेहद सफल रहे हैं. ध्यान रहे पढ़ाई जीवन का एक हिस्सा है, पूरा जीवन नहीं. अतः अच्छी सोच, ईमानदारीभरी मेहनत और कॉन्फिडेंस के साथ एग़्जाम दें.

– ऊषा गुप्ता

अधिक पैरेंटिंग टिप्स के लिए यहां क्लिक करेंः Parenting Guide

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