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करणवीर बोहरा के दिल की बात अपनी लिटिल एंजेल्स के लिए (Karanvir Bohra’s heartfelf message for his little angels)

मानो पूरी कायनात मेरे हाथों में सिमट आई हो... यह अल्फ़ाज़ एक पिता यानी करणवीर बोहरा के, जो दिल को छू जाते हैं. हाल ही में करणवीर जुड़वां बच्चियों के पिता बने हैं, वो भी शादी के 11 साल बाद. वे और उनकी पत्नी तीजे सिद्धू को तो मानो सारे जहां की ख़ुशियां मिल गई हैं. उन्होंने बेटियों को लेकर अपने जज़्बात कुछ इस तरह बयां किए- मुझे यूं लग रहा है जैसे मेरे हाथों में पूरी दुनिया सिमट आई है. हम दोनों को अब तक विश्‍वास नहीं हो रहा कि हम दो प्यारी-प्यारी बेटियों के माता-पिता बन गए हैं. हम ऊपरवाले के शुक्रगुज़ार हैं, जिन्होंने इन दो लिटिल एंजेल्स से हमारे घर को गुलज़ार कर दिया. पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लगता है कि ये नन्हीं परियां किसी ख़ास उद्देश्य से हमारे जीवन में आई हैं. वो क्या है, मुझे नहीं मालूम. दोनों की मासूम-निश्छल नज़रें बहुत कुछ कहती हैं... जब वे रोती हैं, तब बड़े प्यार से मासूमियत व असहाय भाव से हमें देखती हैं... तब या तो उन्हें भूख लगी रहती है या फिर वे चाहती हैं कि हम उन्हें बांहों में ले लें. मेरे लिए उस पल उन्हें अपने से अलग करना बहुत मुश्किल होता है. तब मेरा दिल यही चाहत है कि उन्हें यूं ही बांहों में लिए रहूं,.. देखता रहूं... बातें करता रहूं... जब मैं अपनी नन्हीं परी को सीने से लगाकर सुलाने की कोशिश करता रहता हूं, तब वो अपनी नन्हीं-नन्हीं उंगलियों से मुझे इस तरह से पकड़ लेती है कि... सच, तब…

मानो पूरी कायनात मेरे हाथों में सिमट आई हो… यह अल्फ़ाज़ एक पिता यानी करणवीर बोहरा के, जो दिल को छू जाते हैं. हाल ही में करणवीर जुड़वां बच्चियों के पिता बने हैं, वो भी शादी के 11 साल बाद. वे और उनकी पत्नी तीजे सिद्धू को तो मानो सारे जहां की ख़ुशियां मिल गई हैं. उन्होंने बेटियों को लेकर अपने जज़्बात कुछ इस तरह बयां किए- मुझे यूं लग रहा है जैसे मेरे हाथों में पूरी दुनिया सिमट आई है. हम दोनों को अब तक विश्‍वास नहीं हो रहा कि हम दो प्यारी-प्यारी बेटियों के माता-पिता बन गए हैं. हम ऊपरवाले के शुक्रगुज़ार हैं, जिन्होंने इन दो लिटिल एंजेल्स से हमारे घर को गुलज़ार कर दिया. पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लगता है कि ये नन्हीं परियां किसी ख़ास उद्देश्य से हमारे जीवन में आई हैं. वो क्या है, मुझे नहीं मालूम. दोनों की मासूम-निश्छल नज़रें बहुत कुछ कहती हैं… जब वे रोती हैं, तब बड़े प्यार से मासूमियत व असहाय भाव से हमें देखती हैं… तब या तो उन्हें भूख लगी रहती है या फिर वे चाहती हैं कि हम उन्हें बांहों में ले लें. मेरे लिए उस पल उन्हें अपने से अलग करना बहुत मुश्किल होता है. तब मेरा दिल यही चाहत है कि उन्हें यूं ही बांहों में लिए रहूं,.. देखता रहूं… बातें करता रहूं… जब मैं अपनी नन्हीं परी को सीने से लगाकर सुलाने की कोशिश करता रहता हूं, तब वो अपनी नन्हीं-नन्हीं उंगलियों से मुझे इस तरह से पकड़ लेती है कि… सच, तब मेरी यही इच्छा होती है कि उनकी ज़रूरत के लिए मैं दुनिया का सब कुछ छोड़ दूं…
– ऊषा गुप्ता
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Meri Saheli Team

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