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महिलाओं के लिए उम्मीद की रौशनी बनेंगे साईं बाबा (Mahilaon Ke Liye Ummeed Ki Roshani Banenge Sai Baba)

सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन का पॉपुलर शो ‘मेरे साईं- श्रद्धा और सबुरी’ ने दर्शकों को अपनी प्रेरित करती और समाज को संदेश देती कहानियों से दर्शकों…

सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन का पॉपुलर शो ‘मेरे साईं- श्रद्धा और सबुरी’ ने दर्शकों को अपनी प्रेरित करती और समाज को संदेश देती कहानियों से दर्शकों को मोहित कर रखा है। अपनी इस यात्रा को आगे बढ़ाते हुए यह शो तीन कहानियों के जरिए दहेज, अनचाही बच्ची और पति द्वारा परित्याग की गई महिला जैसे उन मुद्दों को उजागर करेगा जिनका सामना समाज में लड़कियों और महिलाओं को करना पड़ता है।

कहानी में दिखाया जाएगा कि कैसे साईं बाबा उनके लिए आशा की किरण बनकर एक ‘उम्मीद का उजाला’ बन गए, जिससे उन्हें परिस्थितियों का सामना करने और समस्या को दूर करने में मदद मिली। वर्षों से प्रासंगिक बने हुए उनकी बुद्धि और शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए निर्माताओं ने वर्तमान दुनिया में बदलाव लाने की कोशिश की है जहां महिलाएं अभी भी समान अधिकारों के लिए लड़ रही हैं।

पहली कहानी में साईं बाबा की बहन चंद्रा बोरकर का पति परिवार को त्याग देता है, क्योंकि वह ज्ञान प्राप्त करना चाहता था और इसलिए वह अपने परिवार के प्रति कर्तव्यों को अपने तरीके से एक बाधा मानता है।

अन्य कहानी में एक ऐसी लड़की जिसके माता-पिता ने उसकी शादी के समय उसे भरपूर दहेज दिया था, इस उम्मीद में कि वह उसे ससुराल में खुश रखेगी। हालांकि, इसे एक संकेत के रूप में लेते हुए उसके ससुराल वाले लड़की के माता-पिता से नियमित रूप से किसी न किसी रूप में दहेज की मांग करते रहते हैं और जब तक लड़की के माता-पिता पूरी तरह गरीब नहीं हाेे जाते वह लड़की को अंधेरे में ही रखते हैं। इस कहानी के जरिए मेकर्स इस कहानी को सामने रखकर, निर्माताओं की कोशिश दहेज प्रथा के बुरे परिणामों का प्रदर्शन करना है, जिसकी वजह से महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ते हैं।

तीसरी कहानी में, एक लड़की शिरडी से बाहर एक मंदिर की सीढ़ियों पर उस महिला को मिली थी जिसने उसे गोद लिया था। सच्चाई जानने के बाद, वह अपने माता-पिता के बारे में जानने के लिए शिरडी जाने का संकल्प लेती है। वहां उसे पता चलता है कि उसे उसके परिवार द्वारा छोड़ दिया गया था, क्योंकि उनकी पहले से दो बेटियां थीं और अपने तीसरे बच्चे के रूप में वो एक बेटा चाहते थे।

इन तीन वास्तविक जीवन से प्रेरित कहानियों को जोड़कर रखती है उनकी प्रासंगिकता और साईं बाबा का दैवीय हथतक्षेप, जो न केवल व्यावहारिक समाधान देता है, बल्कि नायक की कठिनाइयों को खत्म भी करता है और उन्हें उनका वह सम्मान दिलाने में मदद भी करता है, जिसके वे हकदार हैं। इन कहानियों का बड़ा उद्देश्य यह याद दिलाना है कि समाज में महिलाओं को महत्व देना चाहिए और उनका पोषण करना चाहिए।

देखिए, मेरे साईं हर सोम से शुक्र शाम 7 बजे सिर्फ सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर

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Published by
Kamla Badoni

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