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जिस्मफ़रोशी के ख़िलाफ़ फ़ातिमा ख़ातून के हौसले व जज़्बे को सलाम! फ़ातिमा की ज़ुबानी, सुनें रोंगटे खड़े कर देनेवाली उनकी कहानी (Meet Fatima Khatoon…Victim Of Trafficking: Exclusive Interview)

कभी अंधे रास्तों पर चलते-चलते ख़ुद ही अपनी रोशनी तलाश कर लेना… कभी ठोकरों के बीच ख़ुद संभलकर अपनीमंज़िल को पा लेना… ज़िंदगी की तपती धूप के बीच सूरज को ही हथेली में कैद कर लेना, तो कभी चुभती चांदनी कोदामन में समेटकर दूसरों के जीवन को रोशन कर देना… जहां ख़ुद का रास्ता बेहद कठिन हो, वहां मासूम-सी, नासमझ उम्र में दूसरों की राहें न स़िर्फ आसान बनाने का जज़्बा रखना, बल्कि उन्हें नई मंज़िलों तक पहुंचाने कासंकल्प लेना साधारण बात नहीं है… यही वजह है कि साधारण-सी नज़र आनेवाली फ़ातिमा ख़ातून (Fatima Khatoon) ने बेहद असाधारण काम किया है अपने जीवन में… जिस्मफ़रोशी के दलदल से ख़ुद निकलकर दूसरों के जीवन कोसंवारना बेहद कठिन है… लेकिन नामुमकिन नहीं… यह साबित कर दिखाया है फ़ातिमा ने. मासूम उम्र में दिखाए बड़े हौसले…  “नौ वर्ष की मासूम उम्र में तीन गुना अधिक उम्र के व्यक्ति से शादी और कुछ ही समय बाद इस बात का एहसास होना कियह दरअसल शादी थी ही नहीं, यह तो सीधे-सीधे जिस्मफ़रोशी थी… दरअसल, शादी के नाम पर ख़रीद-फ़रोख़्त कीशिकार हुई थी मैं. जब तक कुछ समझ पाती, तब तक मैं इस चक्रव्यूह में फंस चुकी थी. धीरे-धीरे समझने लगी कि मेरेपति और सास असल में वेश्यालय चलाते हैं.” बिहार की रहनेवाली फ़ातिमा अपने आप में हिम्मत व हौसले की बड़ी मिसाल हैं. उनके इसी जज़्बे को सलाम करते हुएहमने उनसे उनके संघर्षपूर्ण जीवन की चुनौतियों पर बात की. अपने संघर्ष के बारे में वो आगे कहती हैं, “मैं अक्सर देखती थी कि लड़कियां व महिलाएं यहां बहुत सज-धजकर रहती थीं. बचपन में ज़्यादा समझ नहीं पाती थी, लेकिन धीरे-धीरे मुझे एहसास हो गया कि यहां सब कुछ ठीक नहीं है. अपनी साससे पूछने पर मुझे यही कहा जाता कि मैं अभी छोटी हूं. ये सब समझने के लिए और मुझे अपने काम से काम रखना चाहिए. समय बीत रहा था कि इस बीच मेरी बात वहां एक लड़की से होने लगी, जिससे मुझे पता चला कि उस लड़की को औरवहां रह रही अन्य लड़कियों से भी ज़बर्दस्ती वेश्यावृत्ति करवाई जाती है. जब मैं 12 साल की थी, तब मुझे एक रोज़ मौक़ामिला. मेरा परिवार एक शादी में गया हुआ था और मैंने वहां से 4 लड़कियों को आज़ाद करवाने में मदद की. उसके बादमुझे काफ़ी मारा-पीटा गया. कमरे में बंद करके रखा गया. खाना नहीं दिया गया.” इतनी कम उम्र में इतना हौसला? क्या कभी डर नहीं लगा? “कहते हैं ना कि एक स्तर पर आकर डर भी दम तोड़ देता है. मेरे साथ भी यही हुआ. रोज़ इतना अत्याचार और मार खाते-खाते मेरा सारा डर ही ख़त्म हो चुका था. मार-पीट के डर ने मेरे हौसले कम नहीं होने दिए. मैंने भी सोच लिया था कि वैसे भी एक रोज़ तो मरना ही है, तो क्यों न कुछ बेहतर काम करके मरें. 12 साल की उम्र में ही मैंमां बन चुकी थी. अक्सर मुझे मेरी बेटी के नाम पर इमोशनली ब्लैकमेल किया जाता कि अगर मैं चुप न रही, तो मेरी बेटीको मार दिया जाएगा. लेकिन मैंने भी यह सोच लिया था कि एक बेटी को बचाने के बदले में बहुत-सी बेटियों की कुर्बानीदेना कितना सही होगा? ‘अपने आप’ नामक एनजीओ से जुड़ने के बाद मुझे हौसला मिला, जिससे मेरी लड़ाई को भी बलमिला कि कैसे एक लड़की रोज़ इन लड़कियों को मरते हुए देख सकती है? मेरे घरवालों तक जब यह बात पहुंची, तो वो भी बीच-बीच में आते थे, लेकिन मुझे वापस घर ले जाने को वो भी तैयार नहीं थे. इसी बीच समय गुज़रता गया, मेरी उम्र बढ़ रही थी, मेरी हिम्मत भी बढ़ गई थी. मेरी सास ने मेरी ही एक दोस्त, जो वहींकाम करनेवाली एक सेक्स वर्कर की बेटी थी, को ज़बर्दस्ती जिस्मफ़रोशी में शामिल करने की कोशिश की. यह जानने केबाद मैं काफ़ी ग़ुस्से में थी और मैंने अपनी सास को लकड़ी से पीट डाला. उसके बाद तो मैं खुलेआम उन सबका विरोधकरने लगी. साल 2004 में मुझे एक बहुत बड़ा सपोर्ट मिला, जब एनजीओ ‘अपने आप’ से मेरा संपर्क हुआ और मैंने वो जॉइन कर लिया.” आपके मन में कोई शिकायत, कोई सवाल या किसी भी तरह की भावनाएं, जज़्बात… जो आप कहना चाहती हों लोगोंसे? “बहुत कुछ है मन में… मेरा कहना यही है कि ख़रीददारों को क्यों नहीं पकड़ा जाता है?ज भी महिलाओं की स्थिति में अधिक बदलाव नहीं आया है, चारदीवारी में कैद उस औरत को कोई नहीं पूछता.परिवारवाले हमें वापस अपनाना ही नहीं चाहते. ऐसे में परिवारों को व समाज को अपनी सोच बदलनी चाहिए, क्योंकि इसमें हमारा तो कोई क़ुसूर नहीं होता, तो सज़ा स़िर्फ हमें ही क्यों मिलती है?जब तक समाज की मानसिकता नहीं बदलेगी, कुछ भी नहीं बदलेगा.” क्या आप लोग ऐसा कोई अभियान भी चलाते हैं, जिसमें परिवारवालों से संपर्क करके अपनी बच्चियों को अपनाने की बातहोती हो? “जी हां, हम परिवारवालों को भी जागरूक करते हैं. हम चाहते हैं कि समाज इन बच्चियों को अपनाए. लेकिन समाज तोपरिवार से ही बनता है, तो इसमें पहल परिवारवालों को ही करनी होगी. दरअसल, मैं यह देखती और महसूस करती हूं कि जब एक आम लड़की का बलात्कार होता है, तो किस तरह सेमीडियावालों से लेकर देश का हर आदमी जागरूक हो जाता है. बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, न्यूज़ में भी दिखाया जाता है, लोगविरोध करते हैं, मोर्चा निकालते हैं, चक्का जाम करते हैं, लेकिन लाल बत्ती इलाकों में रोज़ 100 बार लड़कियों काबलात्कार होता है… कितने लोग परवाह करते हैं? सच में औरत आज भी आज़ाद नहीं हुई है. यही वजह है कि हम ऐसी महिलाओं को न स़िर्फ उस गंदगी से बाहर निकालनेका प्रयास करते हैं, बल्कि उन्हें पढ़ा-लिखाकर अपने पैरों पर खड़ा करते हैं, ताकि परिवार व समाज के मुंह फेरने के बाद भीवो दोबारा उस जगह जाने को मजबूर न हों. ख़ुद अपना गुज़ारा कर सकें और अपने बच्चों को बेहतर भविष्य दे सकें.”…

कभी अंधे रास्तों पर चलते-चलते ख़ुद ही अपनी रोशनी तलाश कर लेना… कभी ठोकरों के बीच ख़ुद संभलकर अपनीमंज़िल को पा लेना… ज़िंदगी की तपती धूप के बीच सूरज को ही हथेली में कैद कर लेना, तो कभी चुभती चांदनी कोदामन में समेटकर दूसरों के जीवन को रोशन कर देना… जहां ख़ुद का रास्ता बेहद कठिन हो, वहां मासूम-सी, नासमझ उम्र में दूसरों की राहें न स़िर्फ आसान बनाने का जज़्बा रखना, बल्कि उन्हें नई मंज़िलों तक पहुंचाने कासंकल्प लेना साधारण बात नहीं है… यही वजह है कि साधारण-सी नज़र आनेवाली फ़ातिमा ख़ातून (Fatima Khatoon) ने बेहद असाधारण काम किया है अपने जीवन में… जिस्मफ़रोशी के दलदल से ख़ुद निकलकर दूसरों के जीवन कोसंवारना बेहद कठिन है… लेकिन नामुमकिन नहीं… यह साबित कर दिखाया है फ़ातिमा ने.

मासूम उम्र में दिखाए बड़े हौसले… 

“नौ वर्ष की मासूम उम्र में तीन गुना अधिक उम्र के व्यक्ति से शादी और कुछ ही समय बाद इस बात का एहसास होना कियह दरअसल शादी थी ही नहीं, यह तो सीधे-सीधे जिस्मफ़रोशी थी… दरअसल, शादी के नाम पर ख़रीद-फ़रोख़्त कीशिकार हुई थी मैं. जब तक कुछ समझ पाती, तब तक मैं इस चक्रव्यूह में फंस चुकी थी. धीरे-धीरे समझने लगी कि मेरेपति और सास असल में वेश्यालय चलाते हैं.”

बिहार की रहनेवाली फ़ातिमा अपने आप में हिम्मत व हौसले की बड़ी मिसाल हैं. उनके इसी जज़्बे को सलाम करते हुएहमने उनसे उनके संघर्षपूर्ण जीवन की चुनौतियों पर बात की.

अपने संघर्ष के बारे में वो आगे कहती हैं, “मैं अक्सर देखती थी कि लड़कियां व महिलाएं यहां बहुत सज-धजकर रहती थीं. बचपन में ज़्यादा समझ नहीं पाती थी, लेकिन धीरे-धीरे मुझे एहसास हो गया कि यहां सब कुछ ठीक नहीं है. अपनी साससे पूछने पर मुझे यही कहा जाता कि मैं अभी छोटी हूं. ये सब समझने के लिए और मुझे अपने काम से काम रखना चाहिए. समय बीत रहा था कि इस बीच मेरी बात वहां एक लड़की से होने लगी, जिससे मुझे पता चला कि उस लड़की को औरवहां रह रही अन्य लड़कियों से भी ज़बर्दस्ती वेश्यावृत्ति करवाई जाती है. जब मैं 12 साल की थी, तब मुझे एक रोज़ मौक़ामिला. मेरा परिवार एक शादी में गया हुआ था और मैंने वहां से 4 लड़कियों को आज़ाद करवाने में मदद की. उसके बादमुझे काफ़ी मारा-पीटा गया. कमरे में बंद करके रखा गया. खाना नहीं दिया गया.”

इतनी कम उम्र में इतना हौसला? क्या कभी डर नहीं लगा?

“कहते हैं ना कि एक स्तर पर आकर डर भी दम तोड़ देता है. मेरे साथ भी यही हुआ. रोज़ इतना अत्याचार और मार खाते-खाते मेरा सारा डर ही ख़त्म हो चुका था. मार-पीट के डर ने मेरे हौसले कम नहीं होने दिए.

मैंने भी सोच लिया था कि वैसे भी एक रोज़ तो मरना ही है, तो क्यों न कुछ बेहतर काम करके मरें. 12 साल की उम्र में ही मैंमां बन चुकी थी. अक्सर मुझे मेरी बेटी के नाम पर इमोशनली ब्लैकमेल किया जाता कि अगर मैं चुप न रही, तो मेरी बेटीको मार दिया जाएगा. लेकिन मैंने भी यह सोच लिया था कि एक बेटी को बचाने के बदले में बहुत-सी बेटियों की कुर्बानीदेना कितना सही होगा? ‘अपने आप’ नामक एनजीओ से जुड़ने के बाद मुझे हौसला मिला, जिससे मेरी लड़ाई को भी बलमिला कि कैसे एक लड़की रोज़ इन लड़कियों को मरते हुए देख सकती है?

मेरे घरवालों तक जब यह बात पहुंची, तो वो भी बीच-बीच में आते थे, लेकिन मुझे वापस घर ले जाने को वो भी तैयार नहीं थे.

इसी बीच समय गुज़रता गया, मेरी उम्र बढ़ रही थी, मेरी हिम्मत भी बढ़ गई थी. मेरी सास ने मेरी ही एक दोस्त, जो वहींकाम करनेवाली एक सेक्स वर्कर की बेटी थी, को ज़बर्दस्ती जिस्मफ़रोशी में शामिल करने की कोशिश की. यह जानने केबाद मैं काफ़ी ग़ुस्से में थी और मैंने अपनी सास को लकड़ी से पीट डाला. उसके बाद तो मैं खुलेआम उन सबका विरोधकरने लगी.

साल 2004 में मुझे एक बहुत बड़ा सपोर्ट मिला, जब एनजीओ ‘अपने आप’ से मेरा संपर्क हुआ और मैंने वो जॉइन कर लिया.”

आपके मन में कोई शिकायत, कोई सवाल या किसी भी तरह की भावनाएं, जज़्बात… जो आप कहना चाहती हों लोगोंसे?

“बहुत कुछ है मन में…

  • मेरा कहना यही है कि ख़रीददारों को क्यों नहीं पकड़ा जाता है?
  • ज भी महिलाओं की स्थिति में अधिक बदलाव नहीं आया है, चारदीवारी में कैद उस औरत को कोई नहीं पूछता.
  • परिवारवाले हमें वापस अपनाना ही नहीं चाहते. ऐसे में परिवारों को व समाज को अपनी सोच बदलनी चाहिए, क्योंकि इसमें हमारा तो कोई क़ुसूर नहीं होता, तो सज़ा स़िर्फ हमें ही क्यों मिलती है?
  • जब तक समाज की मानसिकता नहीं बदलेगी, कुछ भी नहीं बदलेगा.”

क्या आप लोग ऐसा कोई अभियान भी चलाते हैं, जिसमें परिवारवालों से संपर्क करके अपनी बच्चियों को अपनाने की बातहोती हो?

“जी हां, हम परिवारवालों को भी जागरूक करते हैं. हम चाहते हैं कि समाज इन बच्चियों को अपनाए. लेकिन समाज तोपरिवार से ही बनता है, तो इसमें पहल परिवारवालों को ही करनी होगी.

दरअसल, मैं यह देखती और महसूस करती हूं कि जब एक आम लड़की का बलात्कार होता है, तो किस तरह सेमीडियावालों से लेकर देश का हर आदमी जागरूक हो जाता है. बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, न्यूज़ में भी दिखाया जाता है, लोगविरोध करते हैं, मोर्चा निकालते हैं, चक्का जाम करते हैं, लेकिन लाल बत्ती इलाकों में रोज़ 100 बार लड़कियों काबलात्कार होता है… कितने लोग परवाह करते हैं?

सच में औरत आज भी आज़ाद नहीं हुई है. यही वजह है कि हम ऐसी महिलाओं को न स़िर्फ उस गंदगी से बाहर निकालनेका प्रयास करते हैं, बल्कि उन्हें पढ़ा-लिखाकर अपने पैरों पर खड़ा करते हैं, ताकि परिवार व समाज के मुंह फेरने के बाद भीवो दोबारा उस जगह जाने को मजबूर न हों. ख़ुद अपना गुज़ारा कर सकें और अपने बच्चों को बेहतर भविष्य दे सकें.”

फ़ातिमा को उनके बेहतरीन काम के लिए अन्य संस्था से भी इनाम मिला, वे ‘कौन बनेगा करोड़पति’ शो में भी आकर 25 लाख का इनाम जीतकर गई थीं. अमिताभ बच्चन साहब और उस एपिसोड में ख़ास अतिथि रानी मुखर्जी ने भी फ़ातिमा केहौसलों को सलाम किया. हम भी उनकी निर्भीकता व कम उम्र में ही बड़ा काम करने की परिपक्वता को सेल्यूट करते हैं.

– गीता शर्मा

यह भी पढ़ें: ब्रह्म मुहूर्त का क्या महत्व है और संस्कृत को क्यों माना जाता है वैज्ञानिक भाषा… जानें इन मान्यताओं के पीछे का साइंस! (Science Behind Practising Hindu Rituals & Rites)

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ईज़ी वेटलॉस के लिए बेस्ट होम रेमेडीज़ (Best Home Remedies For Easy Weight Loss)

स्लिम-ट्रिम बॉडी तो हम सभी चाहते हैं लेकिन मुश्किल डायट प्लांस और उतनी ही कठिन एक्सरसाइज़ के चलते हम सभीके लिए वज़न को कंट्रोल करना चुनौतीपूर्ण काम बन जाता है. ऐसे में बढ़ते वज़न का क्या करें जो हमारे फिटनेस गोल कोपूरा नहीं होने देता. ऊपर से हमारी बिज़ी लाइफ़स्टाइल के चलते भी स्ट्रिक्ट डायट फ़ॉलो करना बेहद मुश्किल हो जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि हम आपको वज़न कम करने के आसान घरेलू उपाय बताने जा रहे हैं जिनको फ़ॉलोकरना है बेहद आसान.  बदलें अपना रूटीन और बदलें अपनी सोच भी…  सबसे पहले एक डायरी में उस रूटीन को नोट करें जो आप अब तक फ़ॉलो करते आए हैं. क्या-क्या और कब-कब कितना खाते हैं. फ़िज़िकल एक्टिविटी कितनी है और स्ट्रेस लेवल कितना है.अब खुद से सवाल करें- क्या आप अपनी बॉडी से खुश हैं? क्या आप अपने इस रूटीन से खुश हैं? क्या आप वाक़ईवेटलॉस करना चाहते हैं?खुद ही जवाब ढूंढ़ें कि आप इस रूटीन में क्या बदलाव चाहते हैं? निराश न हों सकारात्मक सोच बनाकर शुरुआत करें. क्या बदलाव करें? वेटलॉस का मतलब खाना एकदम से बंद कर देना नहीं होता, बल्कि अनहेल्दी फूड को हेल्दी फूड से रिप्लेस करनाहोता है. अनहेल्दी लाइफ़स्टाइल हैबिट्स को हेल्दी में बदलना होता है. शुगर और नमक का सेवन कम करें.प्रासेस्ड फूड न खाएं. मैदा न खाएं और गेहूं व चावल के और भी हेल्दी ऑप्शंस ट्राई करें. मसाला चाय को ग्रीन टी से रिप्लेस करें. फ़िज़िकली थोड़े और एक्टिव हो जाएं. वॉक करें. सीढ़ियां चढ़ें. स्विमिंग या साइक्लिंग भी बेटर ऑप्शन है. चाहें तो डान्स क्लास जॉइन करें. समय पर सोएं, देर रात तक न जागें. नींद पूरी न होने से भी वज़न बढ़ता है.लेट नाइट स्नैकिंग से बचें. मंचिंग के लिए हेल्दी चीज़ें घर में रखें. सनसेट के बाद खाना अवॉइड करें. अगर फ़िज़िकल एक्टिविटी कम है तो ड्राई फ़्रूट्स का ज़्यादा सेवन न करें. इसी तरह शुगरी फ़्रूट्स भी ज़्यादा नखाएं. ग्रीन की जगह ब्लैक ग्रेप्स खाएं. पपीते का सेवन करें. इसे आप रात को भी खा सकते हैं. ये पेट भी साफ़ करता है और पाचन तंत्र को हेल्दी बनाताहै. टीवी या लैपटॉप देखते हुए खाना न खाएं. जल्दी-जल्दी न खाएं. एरिएटेड शुगरी ड्रिंक्स बंद कर दें.दो या तीन बार भरपेट खाने की बजाय मील्स को 5-6 छोटी-छोटी मील्स में बांट लें.हेल्दी व पौष्टिक नाश्ता करना शुरू करें. स्टडीज़ से साबित हुआ है जो लोग ब्रेकफ़ास्ट करते हैं उनको मोटापा वडायबिटीज़ का ख़तरा कम रहता है. साथ ही उनको अनहेल्दी, जंक फ़ूड खाने की क्रेविंग्स भी कम होती है.स्ट्रेस ईटिंग से बचें. स्ट्रेस कम करने के लिए रोज़ कुछ देर मेडिटेशन करें. योगा व प्राणायाम भी कारगर हैं काफ़ी. भोजन के बाद वज्रासन में कुछ देर बैठें. खुद खाना पकाएं और बाहर का खाना कम से कम खाएं.मोबाइल फ़ोन पर बात कर रहे हों तो टहलते हुए करें. बहुत देर तक एक ही जगह पर न बैठे रहें.  होम रेमेडीज़  ठंडे पानी की बजाय गुनगुना पानी पिएं. दिन भर ऐसा ही गुनगुना पानी पिएं. सुबह गुनगुने नींबू पानी में शहद मिलाकर पिएं.एलोवीरा जूस व आंवले के रस का सेवन भी वेटलॉस करता है.दालचीनी भी वज़न कम करने में बेहद कारगर है. अपने सलाद या दही में इसका पाउडर मिलाकर सेवन करें या फिरदालचीनी को पानी में उबालकर छानकर इसमें शहद मिलाकर पिएं.खाने से पहले पानी पिएं और भूख से हमेशा थोड़ा कम खाएं. पानी को भी भोजन समझें क्योंकि कभी-कभी भूख सिर्फ़ दिमाग़ में होती है, इसलिए कुछ भी खाने से पहले पानीपिएं, इससे हो सकता है आपकी दिमाग़ी भूख शांत हो जाए.हेल्दी ऑयल यूज़ करें, जैसे- ऑलिव ऑयल, नारियल तेल, सरसों का तेल, सूरजमुखी का तेल और देसी घी.घी को रोटी या परांठे पर लगाने की बजाय एक अलग कटोरी में लेकर उसके साथ रोटी खाएं. अदरक के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से ने सिर्फ़ फैट्स बर्न होता है बल्कि मेटाबॉलिज़्म भी तेज़ होता है.सलाद और मौसमी फल व सब्ज़ियों का सेवन करें.पत्ता गोभी का सलाद खाएं. ये पेट के लिए ठंडा रहता है और बॉडी में ज़्यादा फैट्स बनने नहीं देता.सुबह ख़ाली पेट सौंफ के कुछ दानों को पानी में उबालकर छानकर गुनगुना पिएं. पुदीने का सेवन चाहे तो चटनी के रूप में करें या फिर इसका रस गुनगुने पानी में मिक्स करके पिएं. बेहतर होगा किखाना खाने के कुछ समय बाद ये उपाय करें इससे मेटाबॉलिज़्म तेज़ होता है. गेहूं की बजाय जौ, नाचनी, ज्वार-बाजरा, मल्टीग्रेन आटा, बादाम, रागी, सत्तू, सोयाबीन आटा या फिर चोकरयुक्तआटा यूज़ करना शुरू कर दें. स्टीम्ड फ़ूड लें- जैसे, इडली, सादा डोसा, ढोकला, मोमोज़ आदि. नाश्ते में पोहा, उपमा या फ़्रूट सलाद लें. दोपहर में एक चपाती, दाल-सब्ज़ी-सलाद और छाछ लें.शाम के नाश्ते में ब्राउन ब्रेड वेज सैंडविच, सूखा भेल, खाखरा, सूप, कोई फ़्रूट, एक मुट्ठी चना-मूंगफली, इडली वग्रीन टी या ब्लैक कॉफ़ी ले सकते हैं.चपाती के जगह आप बेसन का चीला, सूजी की रोटी या थालीपीठ भी ट्राई कर सकते हैं. रात को उबली सब्ज़ी या सूप व सलाद लें. हरी सब्ज़ियों को ज़रूर अपने मील के शामिल करें. वाइट राइस की बजाय ब्राउन राइस खिचड़ी खाना शुरू कर दें.स्प्राउटेड मूंग भी काफ़ी हेल्दी होता है. सीड्ज़ और फ़िश ऑयल का सेवन करें. ये वेटलॉस करते हैं. ऐप्पल साइडर विनेगर वेटलॉस में काफ़ी प्रभावी है. एक ग्लास पानी में एक टीस्पून ऐप्पल साइडर विनेगर व एकटीस्पून नींबू का रस मिलाकर रोज़ सेवन करें. ये फ़ैट्स को तेज़ी से बर्न करता है और फ़्लैट टमी में भी मदद करता है. प्रोटीन और फाइबर रिच डायट लें. ये फैट्स को बर्न करने में काफ़ी मददगार है, इसलिए अपने भोजन में पनीर, बींस, फ़िश, अंडे, टोफ़ू, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, एवोकैडो, ब्रोकोली आदि शामिल करें.काली मिर्च को अपने डायट में शामिल करें क्योंकि इसमें वज़न घटानेवाले तत्व मौजूद रहते हैं. छाछ, सलाद आदि मेंइसके पाउडर को यूज़ करें.जीरे का पानी पिएं. ये भी काफ़ी उपयोगी है. जीरा एंटीओक्सिडेंट्स, मिनरल्स व विटामिन से भरपूर होता है और येमेटाबॉलिज़्म को बूस्ट करता है. एक ग्लास पानी में एक टीस्पून जीरा रात भर भिगोकर सुबह छानकर खाली पेटपिएं. चाहें तो इसमें नींबू ka रस भी मिलाया जा सकता है. सफ़ेद नमक की जगह सेंधा नमक या काला नमक यूज़ करें. इलायची भी वेटलॉस में बेहद प्रभावी है. इसे अपने खाने में शामिल करें और साथ ही रातभर इसे पानी में भिगोकररखें और सुबह ख़ाली पेट वो पानी पिएं. ये मेटाबॉलिज़्म फ़ास्ट करके फैट्स बर्न करती है.लौकी की सब्ज़ी खाएं. लौकी का जूस भी वज़न कम करता है. दही व छाछ को शामिल करें अपने डायट में क्योंकि ये आंतों को हेल्दी रखते हुए पाचन तंत्र को बेहतर करते हैं औरवज़न को नियंत्रित रखते हैं. अर्टिफिशियल जूस की बजाय देसी ड्रिंक्स का सेवन करें- नारियल पानी, शिकंजी, आम पना, गन्ने का रस आदि. नारियल पानी इलेक्ट्रोलाइटिस से भरपूर होता है और मेटाबॉलिज़्म को भी फ़ास्ट करता है. खीरे का सेवन करें. इसमें वॉटर कंटेंट बहुत ज़्यादा होता है. अलसी के बीज ज़रूर खाएं क्योंकि इनमें डाइटरी फाइबर पाया जाता है जिससे भूख कंट्रोल में रहती है. इसी तरहचिया सीड्स भी वेटलॉस में लाभकारी हैं. अजवायन भी बेहद कारगर है. अजवायन को पानी में उबाल कर छान लें और इस पानी को गुनगुना पिएं.तुलसी की कुछ पत्तियों को एक ग्लास पानी में तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए. इस पानी का सुबहखाली पेट करें. ये फैट्स बर्न करता है.लहसुन भी वेटलॉस करता है. लहसुन की कुछ कलियों को छीलकर शहद में डालकर स्टोर कर लें. रोज़ सुबह खालीपेट एक कली लहसुन की खाएं.एक ग्लास पानी में एक टीस्पून साबूत धनिया डालकर पानी आधा रह जाने तक उबाल लें. छानकर इस पानी कासेवन करें. वज़न कंट्रोल में आने लगेगा.एक टीस्पून गिलोय का रस पिएं. ये वज़न तेज़ी से कम करता है.करौंदा भी काफ़ी गुणकारी है. रोज़ करौंदे का रस पीने से भी वज़न कम होता है. जीरा, भुनी हुई हींग और काला नमक- तीनों को समान मात्रा में लेकर पीस लें और इस पाउडर को दही के साथखाएं. vetलॉस जल्दी होगा.खाने में गाजर, शिमला मिर्च, मटर, टमाटर, चुकंदर को शामिल करें.हेल्दी फैट्स लें. अंडा भी खाएं. रोज़ सुबह 8-10 करीपत्तों को चबाकर खाने से भी वेटलॉस होता है.बेरीज़ खाएं, ये वज़न कम करती हैं और बेहद हेल्दी भी होती हैं. रोज़ एक सेब ज़रूर खाएं. इसी तरह अमरूद भी वज़न कम करने के लिए जाना जाता है. सिल्की शर्मा

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