पंचतंत्र की कहानी: दो सांपों की कहानी (Panchtantra Ki Kahani: The Tale Of Two Snakes)

देवशक्ति  नाम का एक राजा था, वो बेहद परेशान था और उसकी परेशानी की वजह थी, उसका बेटा, जो बहुत कमज़ोर था. वह दिन व…

देवशक्ति  नाम का एक राजा था, वो बेहद परेशान था और उसकी परेशानी की वजह थी, उसका बेटा, जो बहुत कमज़ोर था. वह दिन व दिन और कमज़ोर होता जा रहा था.

कई प्रसिद्ध चिकित्सक भी उसे ठीक नहीं कर पा रहे थे. दूर-दराज़ के कई मशहूर चिकित्सकों को भी बुलाया गया, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ, क्योंकि उसके पेट में सांप था.

वह राजकुमार भी अपनी कमज़ोरी और सेहत को लेकर बेहद परेशान था. अपने पिता को दुखी देखकर बहुत निराश भी था. अपनी ज़िंदगी से तंग आकर एक रात वह महल छोड़कर कहीं दूसरे राज्य में चला गया. उसने एक मंदिर में रहना शुरू कर दिया और अन्य लोग जो कुछ भी उसे दान देते थे,  उसी से उसका काम चल रहा था. वो वही खा-पी लेता था.

इस नए राज्य का जो राजा था, उसकी दो जवान बेटियां थीं. वे बेहद अच्छे संस्कारी और ख़ूबसूरत थीं. बेटियों में से एक ने कहा, पिताजी, आपके आशीर्वाद से हमें दुनिया के सभी सुख प्राप्त हैं, वहीं दूसरी बेटी ने कहा इंसान को स़िर्फ अपने कार्यों का ही फल मिलता है. दूसरी बेटी की इस टिप्पणी से राजा क्रोधित हो गया. एक दिन उसने अपने मंत्रियों को बुलाकर कहा कि इसे ले जाओ और इसका महल के बाहर किसी के भी साथ इसका विवाह कर दो. यह अपने कार्यों का फल भोगेगी.

मंत्रियों ने मंदिर में रह रहे युवा राजकुमार से उसका विवाह कर दिया, क्योंकि उन्हें कोई और नहीं मिल रहा था. राजकुमारी अपने पति को भगवान मानती थी. वह ख़ुश थी और अपनी शादी से संतुष्ट थी. उन्होंने देश के एक अलग हिस्से की यात्रा करने का निर्णय लिया, क्योंकि मंदिर में घर बनाना सही नहीं था.

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चलते-चलते राजकुमार थक गया था और एक पेड़ की छाया के नीचे आराम करने लगा. राजकुमारी ने पास के बाज़ार से कुछ भोजन लाने का फैसला किया. जब वह लौटकर आई, तो उसने अपने पति को सोया देखा और पास के एक बिल से उभरते सांप को भी देखा. उसकी नज़र पति के मुख पर गई, तो उसने अपने पति के मुंह से उभरते हुए एक और सांप को देखा. वह छिपकर सब देखने लगी.

पेड़ के पास  के सांप ने दूसरे सांप से कहा,  तुम इस प्यारे राजकुमार को इतना दुःख क्यों दे रहे हो? इस तरह तुम खुद का जीवन खतरे में डाल रहे हो. अगर राजकुमार जीरा और सरसों का गर्म पानी पी लेगा, तो तुम मर जाओगे.

राजकुमार के मुंह के सांप ने कहा, तुम सोने की दो घड़ों की रक्षा अपनी ज़िंदगी को ख़तरे में डालकर भी क्यों करते हैं? इसकी तुमको कोई ज़रूरत नहीं है. अगर किसी ने गर्म पानी और तेल को डाला, तो तुम भी तो मर जाओगे.

बातें करने के बाद, वे अपने-अपने स्थानों के अंदर चले गए, लेकिन राजकुमारी उनके रहस्य जान चुकी थी.

 

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उसने जीरा और सरसों का गर्म पानी तैयार करके अपने पति को भोजन के साथ दिया. कुछ ही घंटों में राजकुमार ठीक होना शुरू हो गया और उसकी ऊर्जा व ताकत वापस आ गई. उसके बाद, उसने सांप के बिल में गर्म पानी और तेल डाला और सोने के दो बर्तन ले लिए. वह राजकुमार अब पूरी तरह से ठीक हो गया था और उनके पास दो बर्तन भर सोना भी था. वे दोनों ही ख़ुशी-ख़ुशी से रहने लगे.

सीख: दुश्मनों की लड़ाई में आपको फ़ायदा हो सकता है, इसलिए सतर्क रहें और अपने दुश्मनों पर नज़र रखें.

 

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Published by
Geeta Sharma

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