कविता

कविता- हर प्रलय में… (Kavita- Har Pralay Mein…)

आज के हालातों में हर कोई 'बचा' रहा है कुछ न कुछ पर, नहीं सोचा जा रहा है 'प्रेम' के…

काव्य- क़ैद (Kavya- Qaid)

लो बीत गया दिन एक और चाहे जैसा गुज़रा यह दिन अब बंद हो चुका है मेरी स्मृति की क़ैद…

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