Kavita

कविता- मैं फिर लौट आऊंगी… (Poem- Main Phir Laut Aaungi…)

मैं फिर लौट आऊंगी धूप के उजास सी कि करूंगी ढेरों मन भर बातें उस जाती हुई ओस से भी…

काव्य- सफ़र है ये, कुछ तो छूटना ही था… (Kavya- Safar Hai Yeh, Kuch Toh Chhutna Hi Tha…)

अलग फ़लसफ़े हैं हमेशा ही तेरे, सुन ऐ ज़िंदगी बटोरकर डिग्रियां भी यूं लगे कि कुछ पढ़ा ही नहीं ये…

काव्य- प्रेम युद्ध और मेरी मांग… (Poem- Prem Yudh Aur Meri Mang…)

हे प्रभु जब मैं तुमसे प्रेम मांगता था तब तुमने जीवन के संघर्ष के रूप में मुझे युद्ध प्रदान किया…

कविता- मत करो विलाप ऐ स्त्रियों… (Poetry- Mat Karo Vilap Ae Striyon…)

मत करो विलाप ऐ स्त्रियों! कि विलापने से कांपती है धरती दरकता है आसमां भी कि सुख और दुख दो…

कविता- अधिकार के साथ (Poetry- Adhikar Ke Sath)

थक गया हूं मुझे अपनी गोद में सिर रखने दो समझदार हो गया हूं इसलिए संकोच पैदा हो गया है…

कविता- कहानी… (Poetry- Kahani…)

कहानी अपना लेखक ख़ुद खोज लेती है जब उतरना होता है उस भागीरथी को पन्नों पर सुनानी होती है आपबीती…

कविता- मिस करता हूं… (Kavita- Miss Karta Hun…)

तुम्हें एहसास है मैं तुम्हारे साथ गुज़रे लम्हे और वक़्त नहीं मिस करता वे तो एक दिन दूर जाने थे…

कविता- बासंतिक पर्व… (Kavita- Basantik Parv)

बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं! माँ शारदे की कृपा बनी रहे!.. दिवस आज है पंचमी, यौवन पर ऋतुराज। बसें शारदा…

ग़ज़ल- थोड़ी सी ज़िंदगी दे दे… (Gazal- Thodi Si Zindagi De De…)

तेरी आंखों से कब राहों का उजाला मांगा अपनी आंखों में बस थोड़ी सी ज़िंदगी दे दे सदियों से इस…

कविता- यात्रा.. आत्मिक एहसास की… (Kavita- Yatra.. Aatmik Ehsaas Ki…)

यात्रा हो या ज़िंदगी कुछ न कुछ छूट ही जाता है पीछे अधजिया सा फिर.. 'जिए' से ज़्यादा 'अधजिए' को…

कविता- स्त्री का यथार्थ (Kavita- Stri Ka Yatharth)

चाहकर भी कोई कवि कभी नहीं लिख सकेगा शोकगीत स्त्री की उन इच्छाओं की मृत्यु पर जो अभिव्यक्त होने से…

कविता- झूठ-मूठ का मनुष्यपन… (Kavita- Jhuth-Muth Ka Manushypan)

गर्मी में भी सबसे ज़्यादा खीझ मनुष्य को हुई उसने हवाओं को क़ैद किया बना डाले एसी और.. रही-सही हवा…

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