pahla affair

पहला अफेयर: तेरा साथ है तो… (Pahla Affair… Love Story: Tera Sath Hai To)

मैं अपनी चचेरी बहन के पास अस्पताल में बैठी थी. उसका छोटा-सा एक्सीडेंट हुआ था और पांव में फ़्रैक्चर हो जाने कीवजह से वह तीन-चार दिनों के लिए एडमिट थी. मैं उसके पास कुर्सी पर बैठी कोर्स की किताब पढ़ रही थी कि तभी उसकेस्कूल के दोस्त उससे मिलने आए. दो लड़कियां और तीन लड़के. कुछ ही देर में बाकी सब तो चले गए लेकिन रश्मि काएक दोस्त, जिसका नाम जतिन था रुक गया. हम तीनों बातें करने लगे. बातों के सिलसिले में पूरी दोपहर कब निकल गईपता ही नहीं चला. दूसरे दिन फिर आने का वादा करके वह घर चला गया.  उसके जाने के बाद मैं यूं ही उसके बारे में सोचने लगी… बिखरे बालों वाला वह बहुत सीधा-सादा, भोला-सा लगा मुझे. रात में चाची रश्मि के पास रुकी और मैं घर चली गई. सुबह नहाकर जब वापस आई तो देखा जतिन महाराज पहले से ही वहां बैठे थे. चाची के चले जाने के बाद हम तीनों फिर गप्पे मारने लगे. एक आम और साधारण-सा चेहरा होने के बाद भीएक अजब-सी, प्यारी-सी रूमानियत थी जतिन के चेहरे पर और उसकी बातों में कि दिल और आंखें बरबस उसकी ओर खींची चली जाती थी. चार दोपहरें कब निकल गई पता नहीं चला. रश्मि को अभी डेढ़ महीना घर पर ही रहना था. इस बीच उसके बाकी दोस्तों के साथ ही जतिन भी घर आता रहा. वह स्कूल में होने वाली पढ़ाई की जानकारी रश्मि को देकर उसकी मदद करता और खाली समय में हम तीनों खूब बातें करते और मस्ती करते. अब तो जतिन से मेरी भी बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी. जिस दिन वह नहीं आता वो दिन खाली-खाली-सा लगता और मैं बेसब्री से उसका इंतजार करती. रश्मि भी हंसी-हंसी में उसे ताना मारती, "तुम मुझसे मिलने थोड़े ही आते हो, तुम तो चेतना से मिलने आते हो…" तब जतिन एक शर्मीली-सी हंसी भरी नज़र मुझ पर डाल कर सिर झुका लेता. बारहवीं पास होते ही मैं डेंटल कॉलेज में पढ़ने दूसरे शहर चली गई और जतिन भी आगे की पढ़ाई करने दूसरे शहर चला गया, लेकिन फोन पर हम बराबर संपर्क में बने रहते. कभी-कभी रात की ट्रेन से सफर करके जतिन मुझसे मिलने आता. दिन भर हम साथ में घूमते, लंच करते और रात की ट्रेन से वह वापस चल आ जाता. पढ़ाई खत्म होने तक हम दोनों को ही इस बात का एहसास हो चुका था कि हम दोस्ती से आगे बढ़ चुके हैं. हम एक-दूसरे से प्यार करने लगे हैं और अब अलग नहीं रह सकते. हम दोनों ही अपनी एक अलग रूमानी दुनिया बसा चुके हैं, जहां से लौटना अब संभव नहीं था. कितनी खूबसूरत थी वह दुनिया, बिल्कुल जतिन की दिलकश मुस्कुराहट की तरह और उसकी आंखों में झलकते प्यार सेसराबोर जिसमें मैं पूरी तरह भीग चुकी थी. नौकरी मिलते ही जतिन ने अपने घर में इस बारे में बात की. उसके माता-पिता अपने इकलौते बेटे की खुशी के लिए सहर्षतैयार हो गए, लेकिन मेरे पिताजी ने दूसरी जाति में शादी से साफ इनकार कर दिया. यहां तक कि जतिन के घर आने पर अपनी बंदूक तान दी. महीनों घर में तनाव बना रहा, लेकिन मैं जतिन के अतिरिक्त किसी और से शादी करने के लिए किसी भी हालत में तैयार न थी. महीनों बाद सब के समझाने पर पिताजी थोड़े नरम हुए. उन्होंने पंडित जी से कुंडली मिलवाई तोपंडित जी ने मुझे मंगली बता कर कहा कि यदि यह शादी हुई, तो लड़की महीने भर में ही विधवा हो जाएगी. साथ ही लड़के की कुंडली में संतान योग भी नहीं है. घर में सब पर वज्रपात हो गया. अब तो शादी की बिल्कुल ही मनाही हो गई. चार-पांच पंडितों ने यही बात की. अलबत्ता जतिन के घर वाले अब भी अपने बेटे की खुशी की खातिर इस शादी के लिए तैयार थे. बहुत संघर्षों और विवादों के बाद…

पहला अफेयर: प्यार की परिणति (Pahla Affair… Love Story: Pyar Ki Parinati)

कभी सोचा नही था यूं किसी से प्यार हो जाएगा… ये कहां जानती थी कि खुद का दिल खुद का…

पहला अफ़ेयर: आख़िरी मुलाक़ात (Pahla Affair… Love Story: Akhri Mulaqat)

“काजल तू यहां क्या कर रही है? आज शाम को तो शशि जा रहा है न फिर से ड्यूटी जॉइन करने, उसके साथ होना चाहिएतुझे. आख़िर शादी होने वाली है तुम दोनों की… वैसे भी शशि न सिर्फ़ तेरे भइया के साथ फ़ौज में था, उनका दोस्त था, बल्कि तेरा प्यार भी तो है.” “नहीं भाभी, मुझे शशि से बात नहीं करनी और ना ही शादी, उसके लिए उसका काम ही सब कुछ है…” “काजल इतनी सी बात के लिए ऐसा नाराज़ नहीं होते… मैं बस इतना कहूंगी कि प्यार भरे पलों को यूं व्यर्थ की बातों मेंबर्बाद मत करो, उनको जितना हो सके समेट लो, वक़्त का कोई भरोसा नहीं, न जाने फिर कभी किसी को मौक़ा दे, नदे…” काजल से बात करते हुए मैं पुराने दिनों की यादों में खो गई…  मैं और काजल बचपन के साथी थे. हम साथ ही कॉलेज के लिए निकलते थे. रोज़ की तरह आज भी मैं काजल के घर गईतो दरवाज़ा खुलते ही एक बेहद आकर्षक लड़का मेरे सामने था. मैं एक पल के लिए तो सकपका गई, फिर पूछा मैंने- “जीवो काजल?” “काजल पास के मेडिकल स्टोर पर गई है अभी आती होगी. अंदर आ जाओ.” मैं भीतर चली गई, घर में कोई नहीं था. इतने में ही आवाज़ आई- “तुम ख़ुशबू हो ना?” “हां, और आप विनोद?” “अरे वाह! बड़ी जल्दी पहचान लिया, दरवाज़े पर तो ऐसे खड़ी थी जैसे कि भूत देख लिया हो…” “नहीं वो इतने टाइम के बाद आपको देखा… काफ़ी बदल गए हो.” “हां, क्या करें, फ़ौजी हूं, पोस्टिंग होती रहती है, तो यहां आना ही कम होता है, फ़िलहाल बॉर्डर पर हूं. वैसे बदल तो तुम भी गई हो, मेरा मतलब कि काफ़ी खूबसूरत हो गई हो.” मैं झेंप गई और इतने में ही काजल भी आ गई थी. “ख़ुशबू विनोद भइया से मिलीं?” “हां काजल, चल अब कॉलेज के लिए देर हो रही है.” कॉलेज से आने के बाद मैं बचपन के दिनों में खो गई. विनोद, काजल और मैं बचपन में साथ खेला करते थे. विनोद हमसे बड़े थे थोड़ा, लेकिन हमारी खूब पटती थी. उसके बाद विनोद डिफेंस फ़ोर्स में चले गए और उनसे मुलाक़ातें भी ना केबराबर हुईं. लेकिन आज विनोद को एक अरसे बाद देख न जाने मन में क्यों हलचल सी हो गई. …

पहला अफेयर: लॉन्ग डिसटेंस (Pahla Affair… Love Story: Long Distance)

आज उसकी शादी है… वो वाक़ई आगे बढ़ चुका है अपनी ज़िंदगी में… और मैं? कहने को तो मैं भी मूव ऑन कर चुकी हैं, लेकिन मेरा दिल जानता है कि ये सच नहीं है.  एक कॉमन फ्रेंड के ज़रिए हमारी पहली मुलाक़ात हुई थी और तभी लग गया था कि ये मुलाक़ातें और बढ़ेंगी और हमारा रिश्ता भी… उसको यू एस में जॉब मिला था और मैं अभी स्टूडेंट थी, मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी. हमने फ़ोन नम्बर्स लिए एक-दूसरे के और कब थोड़े ही समय में दोस्त से हमसफ़र बनने का फ़ैसला हमने ले लिया उसका एहसास ही नहीं हुआ.  वो जब भी इंडिया आता तो सबसे पहले मेरे घर जयपुर आता, मेरी फ़ैमिली भी उसको पसंद करती थी और उसकी फ़ैमिलीभी खुले विचारों की थी. वो अक्सर अमेरिका में मेरे लिए चॉकलेट्स और गिफ़्ट्स कलेक्ट करके रखता था. हमने साथ मेंबहुत अच्छा वक़्त गुज़ारा, गोवा से लेकर मुंबई तक हॉलिडे मनाई. लेकिन कहते हैं ना जब सब कुछ इतना परफेक्ट लगे तो समझ जाना चाहिए कि कहीं न कहीं कुछ सही नहीं है. विकास को लेकर मैं ज़्यादा ही पज़ेसिव होती जा रही थी. अगर मेरा फ़ोन नहीं उठाता या मैसेज का जवाब नहीं देता तो मैंलड़ पड़ती. धीरे-धीरे हमारे झगड़े बढ़ने लगे. मैं हर बात पर उससे सवाल करती और वो यही कहता कि रितु काम में बिज़ी रहता हूं तो ज़रूरी नहीं कि हमेशा जिस वक़्त तुम फ़ोन करो मैं कॉल ले सकूं, इतना तो समझो इंडिया और अमेरिका काटाइम अलग-अलग है!  लेकिन मैं समझने को ही तैयार नहीं थी, हम जितने क़रीब थे अब उतने ही दूर होते जा रहे थे. मेरे इस तरह के बर्ताव से विकास भी मुझसे उखड़ा-उखड़ा रहने लगा था. उसका मानना था कि मेरे और उसके मैच्योरिटी लेवल में बहुत फ़र्क़ है, मैं स्टूडेंट वाली टीन एज की सोच और व्यवहार से बाहर ही नहीं आ रही थी, तो ऐसे में वो मानसिक रूप से डिस्टर्ब रहने लगाथा और खुद इसका असर उसके नेचर और बर्ताव पर पड़ने लगा था. विकास और मैंने यही निर्णय लिया कि हमको ब्रेकअप कर लेना चाहिए. हालांकि मैं नहीं चाहती थी कि हम अलग हों, लेकिन वो निर्णय ले चुका था. मैंने कहा कि हम दोस्त तो रह सकते हैं ना, उसने भी हामी भर ली, लेकिन मैं खुद को सम्भाल नहीं पा रही थी, दोस्ती का रिश्ता मुझे दर्द दे रहा था और इसीलिए विकास ने मुझे सोशल मीडिया पर ब्लॉक कर दिया ये कहकर कि इस तरह हम आगे नहीं बढ़ पाएंगे और न ही इस रिश्ते में भी रह पाएंगे! उसके निर्णय का मैं सम्मान करती हूं और आज जब एक कॉमन फ्रेंड ने उसकी शादी की खबर दी तो मैं टूट गई, लगा कोई अपना अब हमेशा के लिए किसी और का हो गया है… मैं भी अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ रही हूं, लेकिन दिल के किसी कोने में उसका प्यार आज भी दबा हुआ है जो वक़्त-वक़्त पर दस्तक दे ही देता है… विकास और मुझे लगा था कि हमारी लॉन्ग डिसटेंस रिलेशनशिप एक बड़ा कारण था हमारे बीच मनमुटाव और ग़लतफहमियों का, लेकिन आज सोचती हूं कि मेरी ज़्यादा क़रीब रहने की कोशिश ही हमारी दूरियों का कारण बन गई थी. मैं अपने दिल और प्यार को सम्भाल ही नहीं…

लव स्टोरी- मैं आ रहा हूं अंजली… (Love Story- Main Aa Raha Hoon Anjali…)

मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो तुम मेरा सामना करने से कतरा रही हो. बहुत अनुनय-विनय करने के बाद…

पहला अफेयर: बरसता सावन… (Pahla Affair… Love Story: Barasta Sawan)

सावन बरस रहा है... मेरा विरही मन जल रहा है.. मुझे याद आ रही है सावन की वो पहली बारिश… उस पहली बारिश की वो की भीगती हुई खूबसूरत शाम और उस शाम का वो हसीन लम्हा... मन सुलग रहा था ...तन मचल रहा था...लजाती खामोश आंखें... जज़्बातों का उफान चरम पर था, हम दोनों अकेले उस कमरे में थे कि अचानक बिजली कड़कने से मैं डरकर तुम्हारे सीने से लिपट गई थी और तुमने मुझे मजबूती से थाम लिया था. मैं झिझक रही थी... लजा रही थी और खुद को तुमसे छुड़ाने का असफल प्रयास कर रही थी. बारिश जब तक थम नहीं गई, तब तक हमारी खामोशियां रोमांचित होकर सरगोशियां करती रहीं... मौन मुखर होकर सिर्फ़ आंखों के रास्ते से एक-दूसरे के दिल को अपने मन का हाल बता रहा था. बारिश में भीगते अरमान मुहब्बत के नग़मे गुनगुना रहे थे… इतना हसीन मंजर था वो कि आज भी याद कर मां रोमांचित हो उठता है… लग रहा था कि ये बारिश ताउम्र यूं ही होती रहे, ये बदल ऐसेही मुहब्बत बरसाते रहें… ये बिजली कौंधकर यूं ही डराती रहे ताकि मैं तुमसे यूं ही लिपटी रहूं… चाहत के ये पल यूं ही थमे रहें…  मन इश्क़ के नशे में डूबा हुआ था कि अचानक बारिश और भी तेज़ हो गई. लग रहा था भगवान ने मेरी सुन ली थी… यूं लग रहा था कि बाहर एक तूफ़ान चल रहा है और यहां अंदर, मन के भीतर भी एक तूफ़ान शुरू हो गया था. तुमने अपने हाथों से मेरे आरक्त चेहरे को उठाकर मेरे सुर्ख और तपते हुए अधरों को अपनी चाहत भरी पावन नज़रों से  निहारा, फिर कहा… "अभी नहीं, अभी पाप है यह" ये कहते हुए तुमने अपनी नज़रों को झुका लिया था. यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: अलविदा! (Pahla Affair… Love…

पहला अफेयर: अलविदा! (Pahla Affair… Love Story: Alvida)

क्या अब भी कोई उम्मीद बाक़ी है तुम्हारे आने की? क्या अब भी कोई हल्की सी गुंजाइश बची है हमारी मोहब्बत की? क्योंआज भी हर आहट पर धड़क उठता है मेरा दिल, क्यों आज भी रह-रहकर ये महसूस होता है कि तुम हो, कहीं आसपास हीहो… लेकिन बस निगाहों से न जाने क्यों ओझल हो!  सात बरस गुज़र गए जय तुमको मेरी ज़िंदगी से गए हुए लेकिन मैं आज भी, अब भी उसी मोड़ पर रुकी तुम्हारा इंतज़ार कररही हूं… एक छोटी-सी बात पर यूं तनहा छोड़ गए तुम मुझे! मैं तो अपने घर भी वापस नहीं जा सकती क्योंकि सबसेबग़ावत करके तुम्हारे संग भागकर शादी जो कर ली थी मैंने. शुरुआती दिन बेहद हसीन थे, हां, घरवालों की कमी ज़रूरखलती थी पर तुम्हारे प्यार के सब कुछ भुला बैठी थी मैं. लेकिन फिर धीरे-धीरे एहसास हुआ कि तुम्हारी और मेरी सोच तोकाफ़ी अलग है. तुमको मेरा करियर बनाना, काम करना पसंद नहीं था, जबकि मैं कुछ करना चाहती थी ज़िंदगी में.  बस इसी बात को लेकर अक्सर बहस होने लगी थी हम दोनों में और धीरे-धीरे हमारी राहें भी जुदा होने लगीं. एक दिनसुबह उठी तो तुम्हारा एक छोटा-सा नोट सिरहाने रखा मिला, जिसमें लिखा था- जा रहा हूं, अलविदा!… और तुम वाक़ई जा चुके थे…  मन अतीत के गलियारों में भटक ही रहा था कि डोरबेल की आवाज़ से मैं वर्तमान में लौटी!  “निशा, ऑफ़िस नहीं चलना क्या? आज डिपार्टमेंट के नए हेड आनेवाले हैं…” “हां रेखा, बस मैं तैयार होकर अभी आई…” ऑफिस पहुंचे तो नए हेड के साथ मीटिंग शुरू हो चुकी थी… मैं देखकर स्तब्ध थी- जय माथुर! ये तुम थे. अब समझ मेंआया कि जब हमें बताया गया था कि मिस्टर जे माथुर नए हेड के तौर पर जॉइन होंगे, तो वो तुम ही थे. ज़रा भी नहीं बदले थे तुम, व्यक्तित्व और चेहरे पर वही ग़ुरूर!  दो-तीन दिन यूं ही नज़रें चुराते रहे हम दोनों एक-दूसरे से, फिर एक दिन तुम्हारे कैबिन में जब मैं अकेली थी तब एक हल्कीसे आवाज़ सुनाई पड़ी- “आई एम सॉरी निशा!” मैंने अनसुना करना चाहा पर तुमने आगे बढ़कर मेरा हाथ पकड़ लिया- “मैं जानता हूं, ज़िंदगी में तुम्हारा साथ छोड़कर मैंनेबहुत बड़ा अपराध किया. मैं अपनी सोच नहीं बदल सका, लेकिन जब तुमसे दूर जाकर दुनिया को देखा-परखा तो समझआया कि मैं कितना ग़लत था, लड़कियों को भी आगे बढ़ने का पूरा हक़ है, घर-गृहस्थी से अलग अपनी पहचान औरअस्तित्व बनाने की छूट है. प्लीज़, मुझे माफ़ कर दो और लौट आओ मेरी ज़िंदगी में!” “क्या कहा जय? लौट आओ? सात साल पहले एक दिन यूं ही अचानक छोटी-सी बात पर मुझे यूं अकेला छोड़ तुम चलेगए थे और अब मुझे कह रहे हो लौटने के लिए? जय मैं आज भी तुम्हारी चाहत की गिरफ़्त से खुद को पूरी तरह मुक्त तोनहीं कर पाई हूं, लेकिन एक बात ज़रूर कहना चाहूंगी कि तुमने मुझसे अलग रहकर जो भी परखा दुनिया को उसमें तुमने येभी तो जाना ही होगा कि बात जब स्वाभिमान की आती है तो एक औरत उसके लिए सब कुछ क़ुर्बान कर सकती है. तुमनेमेरे स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई और अपनी सुविधा के हिसाब से मेरी ज़िंदगी से चले गए वो भी बिना कुछ कहे-सुने… औरआज भी तुम अपनी सुविधा के हिसाब से मुझे अपनी ज़िंदगी में चाहते हो!  मैं ज़्यादा कुछ तो नहीं कहूंगी, क्योंकि तुमने भी जाते वक़्त सिर्फ़ अलविदा कहा था… तो मैं भी इतना ही कहूंगी- सॉरीबॉस!” इतना कहकर मैं वहां से चली आई. ऐसा लगा मानो बरसों का एक बोझ जो सीने और अपने अस्तित्व पर रखा था वो उतरगया हो… अब सब कुछ साफ़ था और बेहद हल्का, क्योंकि बरसों पुराना मेरा इंतज़ार अब ख़त्म हो चुका था, ज़िंदगी की नई राह अब मेरा इंतज़ार कर रही थी!  - रिंकी शर्मा…

पहला अफेयर: अधूरा प्यार, मुकम्मल एहसास! (Pahla Affair, Love Story: Adhura Pyar, Mukammal Ehsaas)

ये भीगता मौसम, ये बरसती फ़िज़ा… मन के किसी कोने में तुम्हारी यादों की सोंधी महक को फिर हवा दे जाते हैं… जब-जब ये बारिश होती है, तन के साथ-साथ मन को भी भिगो देती है… कैसी अजीब सी कशिश थी तुम्हारी उस सादगी में भी, कैसी रूमानियत थी तुम्हारी आंखों की उस सच्चाई में भी… मेरा पहला जॉब वो भी इतने बड़े बैंक में. थोड़ा डर लग रहा थालेकिन तुमने मुझे काफ़ी कम्फ़र्टेबल फील कराया था. हर वक्त मेरी मदद की और न जाने कैसे धीरे-धीरे एक दिन अचानक मुझे ये एहसास हुआ कि कहीं मैं प्यार में तो नहीं?  कुछ दिन अपने दिल को समझने और समझाने में ही बीत गए और उसके बाद मैंने निर्णय ले लिया कि तुमसे अपनीफ़ीलिंग्स का इज़हार कर दूंगी क्योंकि घर में भी मेरी शादी को लेकर बात चलने लगी थी.  मैंने देर करना ठीक नहीं समझा और कहीं न कहीं मुझे भी ये लगने लगा था कि तुम्हारा भी खिंचाव और लगाव है मेरीतरफ़. मैंने लंच में तुमसे बिना झिझके साफ़-साफ़ अपने दिल की बात कह दी. तुमने भी बड़े सहज तरीक़े से मुझसे कहाकि तुम भी मुझसे प्यार करने लगे हो लेकिन एक सच है जो तुम मुझे बताना चाहते हो, लेकिन शाम को फ़ुर्सत में…  ‘निशांत, कहो क्या कहना चाहते हो?’ ‘निधि मैंने तुमको अपने घर इसलिए बुलाया कि बात गंभीर है और मैं तुमको अंधेरे में नहीं रखना चाहता. निधि ये तस्वीर मेरी 3 साल की बेटी किट्टू की है.’  ‘तुम शादीशुदा हो? तो तुमने मुझे अपने घर क्यों बुलाया? तुम्हारी पत्नी और बेटी कहां हैं?’ ‘निधि, यही सब बताने के लिए तो बुलाया है तुम्हें! मेरी पत्नी और मैं अलग रहते हैं. हमने तलाक़ का फ़ैसला लिया है. किट्टू भी राधिका के साथ ही है. मेरी पत्नी राधिका को मेरी सादगी और सहजता पसंद नहीं थी. उसको शुरू से लगता था कि मैंऔरों की तरह स्मार्ट नहीं. उसकी ख्वाहिशें भी बहुत बड़ी थीं जो मैं पूरी न कर सका, इसलिए हमने अलग होने का फ़ैसला किया है.’ ‘निशांत मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं, मैं तुमसे बेहद प्यार करती हूं और तलाक़ तक तो क्या, ताउम्र तुम्हारा इंतज़ार कर सकती हूं!’  इसके बाद सब कुछ ठीक चल रहा था, मेरी शामों में रूमानियत घुलने लगी थी, दिन रंगीन हो ही रहे थे कि निशांत ने बताया उसकी बेटी किट्टू बहुत बीमार है और राधिका वापस घर लौट आई है क्योंकि किट्टू अपने मम्मी-पापा दोनों के साथ रहना चाहती थी. किट्टू की रिपोर्ट्स से पता चला कि उसको ब्रेन ट्यूमर है और सर्जरी करनी पड़ेगी, जो काफ़ी रिस्की है!  मैंने निशांत को कहा कि फ़िलहाल वो किट्टू पर ध्यान दे.  ‘क्या बात है निशांत, तुम इतने उलझे-उलझे क्यों रहते हैं इन दिनों? किट्टू ठीक हो जाएगी, ज़्यादा सोचो मत!’ ‘निधि किट्टू की फ़िक्र तो है ही लेकिन एक और बात है, राधिका काफ़ी बदल गई है. उसका कहना है कि किट्टू हम दोनों केसाथ रहना चाहती है और उसकी ख़ातिर वो खुद को बदलना चाहती है, लेकिन मैंने उसे अपने और तुम्हारे रिश्ते के बारे मेंबता दिया है, राधिका को कोई आपत्ति नहीं, पर किट्टू की ज़िद का क्या करूं. वो बस यही कहती है कि उसको मम्मी-पापा दोनों के साथ रहना है!…

लव स्टोरी- मेरे सपनों का राजकुमार… (Love Story- Mere Sapno Ka Rajkumar…)

शादी से लेकर हनीमून तक के सफ़र में वे हर पल मेरे संग बने रहने का प्रयास करते रहे और…

लव स्टोरी- केसरिया रंग रंगा रे मन… (Love Story- Kesariya Rang Ranga Re Maan…)

ढलती शाम के आसमान में छाया केसरिया रंग मुझे बेहद प्रिय है. किस उम्र में मन उस केसरिया रंग में…

पहला अफेयर: वो एक हसीन ख़्वाब था… (Pahla Affair: Wo Ek Haseen Khwab Tha)

ऑफ़िस में पहला दिन था. सहमी-सहमी सी थी मैं. खुद को यहां साबित करना है, आगे बढ़ना है... अपनी मेहनत औरइरादों के बूते. इतने में ही ऑफ़िस बॉय आया और कहने लगा सर ने आपको बुलाया है. मैं नॉक करके अंदर गई- सो मिस शक्ति, वेल्कम! आपका स्वागत है इस कम्पनी में. उम्मीद है आप जैसी होनहार लड़कीबहुत जल्द आगे बढ़ेगी. मैं उनको थैंक यू कहकर बाहर आई तो अलग ही ऊर्जा महसूस कर रही थी. कितने अच्छे बॉस मिलें हैं मुझे, इतना हौसलादेनेवाले और ज़िंदादिल. मैं अपने काम में जुट गई और फिर धीरे-धीरे बॉस के दिल में अपने काम से अलग जगह भी हासिल कर ली.  वो मुझपर भरोसा करते थे इसलिए बड़ी ज़िम्मेदारी मुझे ही देते. उनके साथ काम करते करते कब मैं उनके इतने क़रीब आगई ख़ुद मैं भी नहीं जान पाई. आजकल ना जाने क्या हो गया था, वो बोलते रहते और मैं बस उनको देखती रह जाती. गुड लुकिंग तो वो थे ही, हमउम्र भीथे.  उनकी ग़ैरहाज़िरी में उनके टेबल पर रखी चीजों को छूकर उनका एहसास, उनकी ख़ुशबू अपने अंदर समेट लेती. जब भी वो पास से गुज़रते या मैं उनके क़रीब रहती तो उनकी वो भीनी-भीनी ख़ुशबू मुझे मदहोश कर देती. मन में कई हसीनऔर रंगीन ख़्वाब पलने लगे थे. अगले ऑफ़िस जाने का इंतज़ार रात से ही रहता. ख़ुद को कई बार आइने में निहारती औरफिर यही सोचती कि उनको तो मैं पसंद ही हूं... लेकिन पता नहीं अब तक प्रपोज़ क्यों नहीं किया...  एक रोज़ पता चला उनकी पोस्टिंग दूसरे शहर हो गई है, मन आहत हुआ, मैंने सोचा उनसे अपने दिल की बात मैं ही कह दूं.  उनके कैबिन में गई तो कोई और भी था. उन्होंने कहा कि आ जाओ सब अपने ही हैं, कोई पराया नहीं. फिर उन्होंने मेरापरिचय करवाया- शीतल, यही है शक्ति, जिनकी तारीफ़ों के पुल मैं अक्सर तुम्हारे सामने बांधता था और तुम कहती थीकभी मिलवाओ भी अपनी शक्ति से.  यह सुन मैं शर्म से लाल हो गई... धड़कनें तेज़ थीं क्योंकि मुझे लगा कि विनोद सर भी मेरे बारे में वही सोचते हैं जो मैं, तभीतो सबको बता रखा है.  अरे शक्ति, कहां खो गई? तुम्हारा तो परिचय करवा दिया पर तुम भी इनसे मिल लो, ye है रितु, मेरी मंगेतर, मेरी जान!  ये सुनते ही मेरे होश उड़ गए, ऐसा कैसे हो सकता है? मुझे प्यार के ख़्वाब दिखाकर... किसी और के साथ...  अरे तुम फिर खो गई कहीं... क्या बात है शक्ति? तुम ठीक हो ना? सॉरी शक्ति मैं अपनी पोस्टिंग की बात तुम्हें कल बतानहीं पाया. मैं तुम्हें मिस करुंगा. तुम्हारे बिना काम करने की आदत नहीं. तुम जैसी होनहार लड़की और कॉलीग मिलनामुश्किल है. मैं तुम्हें बहुत एडमायर करता हूं, यक़ीन ना हो तो रितु से पूछ लो... विनोद सर बोलते जा रहे थे और मैं किसीतरह अपने आंसू रोकने की कोशिश में थी.  इतने में रितु ने कहा- हां शक्ति, विनोद अक्सर तुम्हारे टैलेंट और मेहनत का ज़िक्र करते रहते हैं. कल कह रहे थे कि शक्तिके बिना नई जगह खुद को अधूरा महसूस करुंगा. तुम बहुत आगे जाओगी अपने करीयर में, क्योंकि विनोद इतनी जल्दीकिसी से इम्प्रेस नहीं होते.  मैंने उन दोनों को शुभकामनाएँ दीं और घर आकर ख़ूब रोई. जब मन का सारा कड़वापन धुल गया तब सब कुछ साफ़ नज़रआया.  सच तो है, सर ने तो हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया था, मेरे काम और करीयर से जुड़ी ही बातें करते थे वो तो मैं ही थी जोउनकी तरफ़ खिंचती गई और उनके बड़प्पन को ग़लत नज़रिए से देखने लगी. कितना साफ़ दिल है उनका. अपनी मंगेतर केसामने भी कितनी साफ़गोई से मेरे हुनर को सराह रहे थे.  और रितु भी उतनी ही साफ़ दिल की है जो बिना किसी परेशानी के मुझे ही हौसला दे रही थी. सच में बहुत प्यारी जोड़ी थीदोनों की. मेड फ़ॉर ईच अदर!  मुझे अब उनसे और भी गहरा प्यार हो गया था, पर इस प्यार में शारीरिक आकर्षण नहीं, ख़ालिस मोहब्बत थी, इज़्ज़त थी, स्नेह था और ढेर सारी दुआएं... इस पाक मुहब्बत पर नाज़ था अब मुझे और अपनी पसंद पर भी. …

पहला अफेयर: तुम कभी तो मिलोगे (Pahla Affair: Tum Kabhi To Miloge)

पहला अफेयर: तुम कभी तो मिलोगे (Pahla Affair: Tum Kabhi To Miloge) आज फिर मेघों से रिमझिम वर्षा रूपी नेह…

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