poem

कविता- मेरी नज़र से… (Poem- Meri Nazar Se…)

अब अपनी आंखें खोल देना और आईने में ख़ुद को देखना मेरी नज़र से जैसे तुम्हें आईना नहीं  मैं देख…

गीत- ख़ुशहाल ज़िंदगी की तस्वीर… (Geet- Khushhaal Zindagi Ki Tasvir…)

बड़ी चीज़ें कहां मांगता हूं मुझे वक़्त बीतने के बाद भी बस छोटी-छोटी चीज़ों से प्यार है मैं तो बस…

ग़ज़ल (Gazal)

देख लेती हूं तुम्हें ख़्वाब में सोते-सोते चैन मिलता है शब-ए-हिज्र में रोते-रोते इक तेरे ग़म के सिवा और बचा…

गीत- प्रेम कथाओं के पृष्ठों पर… (Geet- Prem Kathaon Ke Prishthon Par…)

प्रेम कथाओं के पृष्ठों पर, जब-जब कहीं निहारा होगा सच मानो मेरी आंखों में केवल चित्र तुम्हारा होगा कभी याद…

ग़ज़ल- अब मैं अकेला हूं, कितनी बड़ी राहत है… (Gazal- Ab Main Akela Hun, Kitni Badi Rahat Hai…)

अब मुझे किसी से शिकवा ना शिकायत है अब मैं अकेला हूं, कितनी बड़ी राहत है थी चोट लगी उनको…

काव्य- बहुत ख़ूबसूरत मेरा इंतज़ार हो गया… (Poetry- Bahut Khoobsurat Mera Intezaar Ho Gaya…)

कशमकश में थी कि कहूं कैसे मैं मन के जज़्बात को पढ़ा तुमको जब, कि मन मेरा भी बेनकाब हो…

ग़ज़ल- मौन की भाषा… (Gazal- Moun Ki Bhasha…)

मैं आज भी  वही तो कह रहा हूं जो सालों से कह रहा था तुम भी तो सुन रहे हो सालों…

ग़ज़ल- धड़कन… (Gazal- Dhadkan…)

एक दिन मैं अपनी ही धड़कनों से नाराज़ हो गया इतनी सी शिकायत लेकर कि जब तुम उसके सीने में…

कविता- सिर्फ़ लिखी थी एक कविता, खाली लिफ़ाफ़ों से क्या कहूं… (Poetry- Sirf Likhi Thi Ek Kavita, Khali Lifafon Se Kya Kahoon…)

सुबहों को व्यस्त ही रखा, दुपहरियां थकी-थकी सी रही कुछ जो न कह सकी, इन उदास शामों से क्या कहूं..…

नज़्म- मुहब्बत (Nazam- Mohabbat…)

मुहब्बत इस जहां के जर्रे जर्रे में समाई है मुहब्बत संत सूफी पीर पैगम्बर से आई है कोई ताकत मिटा…

कविता- तुम साथ हो… (Poem- Tum Sath Ho…)

मैं तन्हाई में कहां जी रहा हूं तुम एहसास की तरह मेरे साथ हो ठीक वैसे ही जैसे हमारी दुनिया…

कविता- लव यू ज़िंदगी… (Poetry- Love You Zindagi…)

न जाने क्यों, सुबह से ज़िंदगी ढूढ़ रहा हूं बस उसे धन्यवाद देना था ख़ुद से ही अपने लिए माफ़ी…

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