poem

कविता- तुम्हें छूने की इजाज़त… (Poetry- Tumhe Chhune Ki Ijazat…)

कई बार तुम्हें दिल के बेहद क़रीब पाता हूं लेकिन ख़्यालों में भी तुम्हें छूने से डर जाता हूं दिल…

कविता- आईने में ख़ुद को देखना मेरी नज़र से… (Poem- Aaina Mein Khud Ko Dekhna Meri Nazron Se…)

अब अपनी आंखें खोल देना और आईने में ख़ुद को देखना मेरी नज़र से जैसे तुम्हें आईना नहीं मैं देख…

कविता- अपनी सी दुनिया… (Poetry- Apni Si Duniya…)

अब भी आती होगी गौरैया चोंच में तिनके दबाए बरामदे की जाली से अंदर तार पर सूख रहे कपड़ों पर…

काव्य- कविता लिखने चला हूं… (Poem- Kavita Likhne Chala Hun…)

सुनो आज मुझे मुझे बेहद ख़ूबसूरत शब्द देना जैसे गुलाब चेहरे के लिए झील आंखों के लिए हंस के पंख…

काव्य- उड़ने वाली स्त्रियां… (Poetry- Udne Wali Striyan…)

बातों में बेखटकी है हंसने में बेफ़िक्री है पंख फैलना आता है हवा से हाथ मिलना भाता है पंछी की…

कविता- सुबह होते ही बंट जाता हूं मैं… (Poetry- Subah Hote Hi Bant Jata Hun Main…)

सुबह होते ही बंट जाता हूं ढेर सारे हिस्सों में नैतिकता का हिस्सा सर्वाधिक तंग करता है मुझे जो मेरी…

कविता- तमन्ना‌ (Poetry- Tamanna)

कभी कभी सोचता हूं तमन्ना में जी लूं वह अधूरी ज़िंदगी कि जिसे जीने की ख़्वाहिश में उम्र गुज़र गई…

काव्य- दिवाली पर जब परिवार जुड़ेंगे… (Kavay- Diwali Par Jab Parivar Judenge…)

श्रद्धा के सुमनों से सजी, पूजा की थाली मुबारक धनतेरस और दूज सहित, सबको दिवाली मुबारक खट्टी-मीठी बहस के बीच,…

कविता- दिवाली की शुभकामनाएं… (Poetry- Diwali Ki Shubhkamnayen…)

प्रभु इतनी सद्बुद्धि देना हमें उज्जवल सबकी दिवाली हो कोई न घायल या बीमार पड़े कल भी घर में ख़ुशहाली…

कविता- भूख (Poem- Bhukh)

सामने दलिया या खिचड़ी के आते ही तलाशने लगती उसकी सूखी आंखें अचार के किसी मर्तबान या स्टोर रूम के…

ग़ज़ल- ख़ामोश निगाहें… (Gazal- Khamosh Nigahen…)

क्यों ख़ामोश हो इस कदर इन अधरों को खुलने दो जो एहसास जगे है तुममें उन्हें लबों पर आने दो…

कविता- प्रेम (Poetry- Prem)

हां मैं प्रेम करता हूं बेइंतहा प्रेम लेकिन मेरा प्रेम तुम्हारे संसार की उस परिधि में नहीं आता जिसे तुम…

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